सुहागरात: मेरे पहले मिलन की रात

(Suhagrat: Mere Pahle Milan Ki Raat)

मित्रो… मेरा नाम राहुल है और मैं उत्तरप्रदेश का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 27 साल है, हाइट 5 फुट 8 इंच है.

यह कहानी मेरी सुहागरात की है. मैंने अन्तर्वासना पर आप सबकी कहानी पढ़ी तो मुझे अपनी कहानी लिखने का मन हुआ, जो मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ.
मेरी शादी मैरिज लव कम अरेंज मैरिज है.

मैं अपनी वाइफ के बारे में बता दूँ, उसका नाम सानू है और उसकी हाइट 5 फुट 6 इंच है. उसका फिगर 34-28-34 का है.. रंग एकदम गोरा है और वो दिखने में एकदम सेक्सी माल लगती है. उसे पाकर मैं बहुत खुश था.. मेरा 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा लंड एकदम कड़क हो गया था. सुहागरात को रात 11 बजे जब मैं अपने रूम में पहुँचा तो वो बेड पर मेरा इन्तजार कर रही थी.

वैसे तो मैं पहले भी बहुत बार चुदाई कर चुका हूँ.. वो सब बाद में लिखूँगा.

उसके साथ कुछ देर तक प्यार की बातें करने का बाद सबसे पहले मैंने उसके माथे पर किस किया, जो हमारा पहला किस था. मेरे किस करते ही वो सिहर उठी और मेरे हाथ को उसने कस कर पकड़ लिया. मैंने धीरे धीरे उसे किस करना शुरू किया और उसके हाथ को सहलाना शुरू किया. वो शर्मा रही थी और सिहर रही थी.

दस मिनट तक उसके हाथ को सहलाने के बाद मैंने धीरे से उसके गले को अपने होंठों से सहलाना शुरू किया और गाल पर किस किया. गाल पर किस करते ही उसने मुझे गले से लगा लिया. इसी बीच मैंने उसकी गर्दन पर किस तेज किया और उसके बालों में हाथ फिराना चालू कर दिया.

अब मेरी दुल्हन भी धीरे धीरे गरम होने लगी थी और उसके मुँह से ‘आआअहह..’ निकल रही थी. कुछ देर ऐसे ही करने के बाद मैंने धीरे से उसकी जांघ को सहलाना शुरू किया, तो वो काँप उठी और मुझे किस करने लगी. अब उसके गाल और नेक पर किस करते करते मैंने उसे लिप किस करना शुरू किया.

वो अब तक गरम हो गई थी और मेरा साथ निभा रही थी. ये हम दोनों का पहला लिप किस था. इसी बीच मैंने उस के कपड़े उतारने शुरू किए और उसके सलवार सूट के दोनों हिस्सों को उतार दिया. वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी. वो इस वक्त बहुत शर्मा रही थी और अपने आप को अपने हाथों से ढकने का प्रयास कर रही थी. मैंने उससे अलग हो कर अपने कपड़े भी उतार दिए थे और मैं सिर्फ़ अंडरवियर में आ गया था. अंडरवियर में से मेरा 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा लंड खड़ा उसे सलामी दे रहा था.

मैंने उसके हाथों को उसके मम्मों से हटाया और उसके होंठों पर अपने होंठ टिका कर लिप-किस करना शुरू कर दिया, साथ ही एक हाथ से उसके मम्मों को भी सहलाना शुरू कर दिया.

जैसे मैंने उसके मम्मों को हाथ लगाया, वो फिर से सिहर उठी और मुझसे जोर से गले से लग गई. उसने खुद को समर्पित कर दिया था और मैंने भी उसे अपनी नंगी छाती से चिपका लिया हम दोनों के तन की गर्मी ने एक दूसरे को प्यार का अहसास करना शुरू कर दिया था.

दस मिनट तक मैं उसे किस करता रहा और इसी बीच मैंने धीरे से उसकी ब्रा खोल दी. अब वो सिर्फ़ पेंटी में रह गई थी, उस 34 इंच के टाइट चूचे क़यामत लग रहे थे.. आह.. मैं बता नहीं सकता.. इस वक्त मुझे वो क्या मस्त माल जैसा आइटम लग रही थी.

अब उसे मैंने बेड पर चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर चूमने लगा. मैं उसे ऊपर से नीचे तक किस करने लगा और चाटने लगा. वो भी इतनी गरम हो गई थी कि जैसे ही मेरे होंठ उसकी चुत को चूमते, वो अकड़ जाती. उसके सारे बदन पर किस करने के बाद मैंने उसे गले से लगा लिया. वो जोर जोर से मेरी कमर पर नाख़ून चुभो रही थी और गर्दन पर किस कर रही थी. इधर मेरा लंड मेरा अंडरवियर फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो रहा था.

मैंने उसे बेड पर उल्टा लेटने को कहा और धीरे से उसकी कमर को सहलाना शुरू किया. मैंने उसके ऊपर हो कर उसके हाथों को पूरा टाइट करके पकड़ा हुआ था क्योंकि मेरे किस करते ही वो पलट कर सीधा होने की कोशिश कर रही थी. उसकी कमर को किस करने के बहाने मैंने अपना लंड उसकी गांड पर टिका दिया और उसे कमर के ऊपर किस करता रहा. इस वक्त मैं एक हाथ से साइड से उसके मम्मों को भी सहलाए जा रहा था.

कुछ मिनट उसे पूरी तरह से चाटने और किस करने के बाद, मैंने उसकी पेंटी को छुआ तो पेंटी गीली हो रही थी. मैंने पेंटी के ऊपर से ही उसकी चुत को सहलाना शुरू किया तो वो पलट कर सीधी हो गई और उसने मुझे गले से लगा लिया.

मैंने देर ना करते हुए उसे सहलाना चालू रखा और उसकी पेंटी के अन्दर हाथ डाल दिया. जैसे ही मेरे हाथ ने उसकी गरम चुत को छुआ, उसने मेरा हाथ पकड़ना चाहा, पर मैंने उसका हाथ हटा दिया.

अब वो पूरी चुदासी हो चुकी थी और जोर जोर से ‘आआअहह.. आआआहह..’ कर रही थी. उसकी सीत्कारों की आवाज़ कमरे में गूँज रही थीं. इधर मेरे लंड का हाल भी बुरा हो रहा था, लेकिन मैं बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं करना चाहता था. मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और अपने अंडरवियर के अन्दर अपने लंड पर रख दिया. लंड को छूते ही उसने अपना हाथ तेज़ी से बाहर निकाल लिया. इतने में मैंने उसकी पेंटी उतार दी और उसे पूरा नंगा कर दिया.

मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखा और उसकी चुत में उंगली कर दी. जैसे ही उंगली थोड़ी सी अन्दर गई, वो ‘आआआ.. अहह..’ करके कराह उठी और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया. मैंने उसे लिप किस किया और उसे हाथ से अपना लंड पकड़ने को कहा.

उसके लंड पकड़ने के बाद मैंने फिर से उंगली अपनी दुल्हन की चुत में डाली, इस बार उसने हाथ तो नहीं निकाला, पर आंखें बंद लीं.. ओर ‘आआह.. अहहुऊहह.. हुवह..’ करने लगी.

मैं धीरे धीरे उंगली अन्दर करता गया, आधी उंगली उसकी चुत के अन्दर चली गई थी. वो मेरे लंड को जोर से दबाने लगी.. और उंगली अन्दर ना डालने को कहने लगी. लेकिन ये भी था कि वो पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और ये सही टाइम था लंड अन्दर डालने का.

मैंने उसे बेड पर सीधा चित लिटाया. एक तकिया उसके सर के नीचे और एक उसकी गांड के नीचे लगा दिया. मैंने उसका सर बेड के ऊपर लगा दिया था और मैं उसकी टांगों के बीच बैठा था. मेरा 7 इंच लंबा ओर 2 इंच मोटा लंड अब मेरी जान की चुत में जाने के लिए तैयार था. मेरी जान ने बेड की चादर को पकड़ा हुआ था. मैंने अपना लंड उसकी चुत पर रखा और उस पर रगड़ना शुरू कर दिया.. जिससे वो और ज्यादा गरम हो सके और मुझे चुदाई में कोई परेशानी ना हो.

इधर वो गरम हो कर पागल हुए जा रही थी और जोर जोर से ‘आआ.. आहह उहह ऊऊहह..’ की आवाज कर रही थी.

उसे बातों में लगा कर जैसे ही मैंने थोड़ा से दबाव लगा कर लंड अन्दर डाला, तो लंड का टोपा अन्दर चला गया, पर वो चीख उठी “आआआ.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… उईईई.. मर गई..’
वो अपने सर को इधर उधर करने लगी.

थोड़ी देर मैं ऐसे ही रुका रहा और उसके सर को सहलाया.. उसे प्यार किया और तसल्ली दी.
फिर कुछ देर बाद धीरे से थोड़ा सा लंड और अन्दर किया, तो वो फिर से दर्द से ‘आआअहह उहह ओहूऊ.. करने लगी और मुझे पीछे को धकेलने लगी.

वो दर्द से तड़फ कर कहने लगी- आह. बहुत दर्द हो रहा है.. प्लीज़ बाहर निकाल लो.. दर्द हो रहा है!
पर मैं उसकी बात नहीं सुनना चाहता था. दो मिनट ऐसे ही रहने के बाद मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए तो उसे कुछ आराम मिला. पर वो ‘आआ.. आआहह आह उऊहह.. करती ही रही. वो दर्द से बेचैन होकर बेड की चादर की भी खींच रही थी.

कुछ दो मिनट तक धक्के लगने के बाद ही वो झड़ गई और उसका शरीर अकड़ गया, वो उठते हुए मुझसे लिपट कर ‘आआ.. उहह..’ कर रही थी और कह रही थी- बस रहने दो बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने उसे फिर से लिटाया, प्यार से सहलाया और थोड़ा जोर से एक धक्का दे मारा जो कि चुत के पानी की वजह से अन्दर तक चला गया. वो चीख उठी ‘आ.. यईई मर गई, छोड़ दो मुझे..’

इतने मैं मैंने एक और तेज धक्का लगाया और पूरा लंड उसकी चुत में पेल दिया. वो दर्द से तड़फ रही थी और छूटने का प्रयास कर रही थी. मैं उसके ऊपर लेट गया और उसे प्यार से किस करने लगा.

पर वो कहां मानने वाली थी, वो तो बस ‘आह.. आहह..’ कर रही थी और मुझको पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी.. जो कि मेरे जैसे बेकाबू सांड के लिए बेकार थी.

कुछ मिनट ऐसे ही रहने के बाद मैंने फिर से धक्के लगाने शुरू किए तो धीरे धीरे उसको भी मजा मिला और अब वो भी ‘आआहह उउउहह ऊओ आआईय..’ की आवाजें निकाल कर मेरा साथ देने लगी थी.

हमारी चुदाई की ‘आआहहाअ आआहह उऊहह ऊओह…’ की कामुक आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं और ठप ठप को आवाजों से चुदाई का और भी मजा आ रहा था.

इसके बाद 10-15 मिनट तक धक्के लगाने के बाद मैं झड़ा, इतनी देर में वो दो बार झड़ चुकी थी. मैं देर से इसलिए झड़ा क्योंकि एक बार में उसकी चुत में लंड डालने से पहले ही झड़ चुका था.

झड़ने के बाद मैं उसके ऊपर ऐसे ही लेटा रहा. फिर दस मिनट तक लेटे रहने के बाद मैंने उसे उठाया और उसकी चुत और अपना लंड दोनों को साफ किया, उसकी चुत कुछ फूली हुई नज़र आ रही थी. मैंने उसे उसकी चुत दिखाई तो वो कुछ नहीं बोली.

मैंने उससे कहा कि जिस चुत में उंगली नहीं जा रही थी, उसमें इतना बड़ा लंड चला गया.
यह सुन कर वो शर्मा गई और मेरे गले से लिपट गई.

हम दोनों एक दूसरे की बांहों में लिपट कर अपनी गरम साँसों को एक दूसरे से साझा करने लगे. इस वक्त संसार का वो सुख मिल रहा था, जो सिर्फ एक पति पत्नी को ही मिलता है.
मैंने पहले भी लड़की चोदी थी, लेकिन यकीन मानिए इस रिश्ते को शायद इस असीम शान्ति के लिए ही पवित्र रिश्ता कहा जाता है.

कुछ देर बात करने के बाद मैंने उसे फिर से सहलाना शुरू किया और उस रात हम दोनों ने 3 बार चुदाई की.

तीनों बार मैंने उसकी चुत को ही चोदा, मेरा मन तो था उसकी गांड मारने का, लेकिन मैंने पहली ही रात ऐसा करना सही नहीं समझा क्योंकि अब हम दोनों को साथ में रहना था और उसकी गांड तो मैं बाद में कभी भी मार लूँगा.

मेरी सुहागरात की इस हिंदी सेक्स स्टोरी पर आपके विचारों का स्वागत है.
[email protected]