मेरी सुहागरात की रियल स्टोरी

(Meri Suhagrat Ki Real Story)

हैलो! कैसे हो दोस्तो, मैं सपना एक बार फिर से एक नई कहानी लेकर हाजिर हुई हूँ और आशा करती हूँ कि आपको ये सच्ची घटना भी पसंद आएगी.
जैसा कि आपको पता है कि मैं राजस्थान से हूँ और आप मेरे से वाकिफ हैं तो ज्यादा टाईम न लेते हुए आपको अपनी कहानी बताने की कोशिश कर रही हूं और सोचती हूँ कि आपको मेरी ये कहानी भी पसंद आएगी.

मैं अब तक 5-6 बार चुदाई करवा चुकी थी. मैंने ये चुदाई अपने जीजा के साथ ही करवाई थी और ये सब शादी से पहले ही हो चुकी थी. पहले दिन एक बार ही चुदी थी. फिर दूसरे दिन फिर एक बार और उसके बाद रात में चार बार. हर बार सेक्स का अलग-अलग अनुभव मिला.

हाँ, पर अब तक केवल जीजाजी के साथ ही सेक्स किया था किसी और के साथ नहीं. जीजा के साथ मेरी पिछली चुदाई कहनी थी
जीजा का ढीला लंड साली की गर्म चूत
तीन बार जयपुर में और फिर मेरे जीजाजी जब मेरे गाँव आए थे तब किया था. उसके बाद कई दिनों तक सेक्स नहीं किया लेकिन मेरी सहेली के साथ जरूर लेस्बियन सेक्स किया और उसे भी सेक्स का अनुभव सिखाया.

उसके दो साल बाद मेरी शादी फ़िक्स हो गई. तब मुझे चिंता सताने लगी कि अपने पति को सील के बारे में कैसे बताऊँ. कहीं उसे पता चल गया तो क्या होगा? लड़का किसी से भी सेक्स कर ले फिर भी उसका पता नहीं चलता मगर लड़की एक बार चुदाई करवा ले तो उसका पता चल जाता है. मेरे सामने भी अब यही समस्या थी.

मैंने जीजाजी से बात की तो एक बार तो उन्हें भी समझ में नहीं आया पर फिर वो बोले कि मैं कुछ करता हूं. शादी में जीजाजी आए और बड़ी धूमधाम से शादी हो गई.

हमारे यहां शादी में दुल्हन के साथ कोई एक आदमी जाता है जो कि दुल्हन को दो दिन के बाद वापस लेकर आ जाता है. मेरे साथ जीजाजी गए थे. शाम को मैंने सिर दर्द की शिकायत की तो जीजाजी ने मुझे एक टेबलेट खाने को दी और कहा कि ये खा लो जिससे कि तुम्हें मासिक धर्म शुरू हो जायेगा और इसके साथ ही तुम थोड़ा सा नाटक भी कर लेना. मैंने भी ये सोच कर गोली खा ली कि किसी तरह तो इस चिंता से छुटकारा मिले.

गोली खाने के कुछ समय बाद ही मेरी चूत से गन्दा खून निकलना शुरू हो गया. मैंने वहां पर किसी लड़की को ये बात बताई और उससे कहा कि वो मुझे पैड लाकर दे. उसने मुझे पैड लाकर दे दिया और फिर मैंने पैड लगा लिया. अब मुझे अपनी मुश्किल थोड़ी आसान लगने लगी थी.

मेरे पति की फौज में नौकरी थी और उन्हें नौकरी करते हुए एक साल हो गया था. उनका नाम विक्रम सिंह है और वो शादी के लिए पंद्रह दिन की छुट्टी लेकर आये थे. दस दिन तो शादी से पहले ही निकल गये थे. अब बाकी के पांच दिन और रह गये थे.

रात को करीब 11 बजे वो मेरे कमरे में आये तो मैं पलंग के एक कोने पर बैठी हुई थी.

मैं ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे छुई-मुई का पौधा हूं. अगर कोई मुझे छू लेगा तो मैं एकदम से अपनी पत्तियां बंद कर लूंगी. जबकि मेरी चूत तो पहले ही लंड खा चुकी थी. मगर थोड़ा सा नाटक तो करना पड़ता ही है ताकि पति को ये दिखा सकूं कि मैंने अपने बदन पर किसी मर्द की छाया तक नहीं पड़ने दी है.

अब मेरा मर्द तो जवान लड़का था. उसको तो सेक्स का परमिट मिला हुआ था. वो आकर बेड पर बैठ गया. पहले तो दो मिनट तक कुछ नहीं किया. फिर जब उन्होंने देखा कि कोई शुरूआत हो ही नहीं रही है तो फिर हल्का सा खांसने लगे. मैं फिर भी दुबक कर बैठी रही. एकदम भीगी बिल्ली बनी हुई थी. वैसे तो लंड को चूत में लेने में मुझे कोई परेशानी नहीं थी लेकिन यहां पर बात पति के लंड को चकमा देने की थी. इसलिए यह सब नाटक करना जरूरी था.

जब मैं बिल्कुल नहीं हिली तो वो मेरे पास आ गये. मेरे कंधे पर हाथ रखा. मैंने कुछ नहीं कहा. फिर वो मुझे पीछे बेड पर आने के लिए कहने लगे. मैं फिर भी शरमाती रही. अब मेरे कोमल बदन को छूने के बाद उनके लंड में तूफान तो उठ ही गया था इसलिए वो मुझे अपनी गोद में उठाने लगे. मैंने चेहरा नीचे ही रखा.

फिर उन्होंने मुझे किनारे से उठा कर पीछे बैठा दिया. वो नीचे खड़े होकर अपने कपड़े निकालने लगे. पहले कुर्ता निकाला और फिर पजामा.

उनके कच्छे में उनका लंड तना हुआ था. मैं नीचे नजर किये हुए चुपके से उनको देख रही थी. अभी तक तो मैंने जीजा का बदन और लंड ही देखा था. आज एक नया जवान लड़का सामने नंगा होते हुए देख कर चूत में खुजली होने लगी थी. ऊपर से उनका लंड कच्छे में ऐसे तना हुआ था जैसे कोई मोटा सा केला हो. चूत में पानी आने लगा. लेकिन मैं कुछ करना नहीं चाह रही थी. अभी तो बस ये सोच रही थी कि इनको किसी तरह अपनी चुदी हुई चूत से दूर रखना है.

जब वो मेरे पास आये तो मैं पीछे खिसक गई. वो और पास आये तो मैं और पीछे खिसक गई. वो बेड पर चढ़ गये तो मैं नीचे उतर गई और एक तरफ जाकर खड़ी हो गई.

पतिदेव हैरान थे. मगर फौजी थे इसलिए इतनी जल्दी हार मानने वाले नहीं थे. खड़े हुए लंड के साथ ही मेरी तरफ लपके और मुझे बांहों में भरने लगे. मैंने सोचा कि अगर जुबान नहीं खोली तो ये अपने मूसल लंड से मेरी चूत खोल कर रख देंगे और फिर सारे राज आज ही खुल जायेंगे.

मैंने कहा- आप से कुछ कहना है.
वो बोले- तो कहो. इस तरह से दूर-दूर क्यों जा रही हो.
मैंने कहा- मेरा मासिक धर्म चल रहा है. अभी आज के दिन ये सब रहने दीजिये.
वो बोले- मासिक धर्म से क्या फर्क होता है, अब तो हम पति-पत्नी हैं. अब तो ऐसी कोई रुकावट का डर नहीं होना चाहिए.

कहकर उन्होंने मुझे अपनी बांहों में भर लिया.
मैंने फिर कहा- लेकिन … दो-तीन दिन के बाद कर लीजियेगा.
वो बोले- मुझसे रुका नहीं जा रहा है. अब किस बात का डर है?
इतना कहकर उन्होंने मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया.

वैसे चुदना तो मैं पहले से ही चाह रही थी लेकिन उनके मजबूत हाथों ने जब मेरी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना और मसलना शुरू कर दिया तो मेरे अंदर भी सेक्स की इच्छा तेज होने लगी.

उसके बाद वो मुझे गर्दन पर चूमने लगे. अभी तक तो सब कुछ प्यार से हो रहा था. उनका मोटा लंड मुझे मेरी गांड पर छू रहा था. मैंने अपनी गांड पर उनका मोटा लंड महसूस किया तो मेरी चूत तक उसकी गर्मी पहुंचने लगी. अब तक मेरे पति का जोश भी बढ़ने लगा था. उन्होंने मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और मुझे बेड पर फिर से ले गये.

पहले मेरी ओढ़नी उतारी और फिर कमीज. मेरी ब्रा जैसे ही उनको दिखाई दी उन्होंने मेरे कबूतरों को अपनी उंगलियों में दबोच लिया और मुझे बेड पर लेकर गिर गये. अपने फौलादी हाथों से मेरे चूचों को मसलते हुए मेरे होंठों को काटने लगे.

दो मिनट के अंदर ही उन्होंने मुझे गर्म कर दिया और मैंने सारी लाज शर्म का नाटक छोड़ कर उनका साथ देना शुरू कर दिया. फिर वो मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियों पर चूमने लगे. पहले चूमा और फिर जोर से मसल दिया. फिर उन्होंने मेरी ब्रा को खोल दिया. मेरे चूचे नंगे हो गये. उनके मजबूत हाथों की पकड़ से पहले ही मेरे चूचे लाल हो चुके थे.

वो मेरे चूचों को अपने मुंह में लेकर पीने लगे और मेरे अंदर चुदास भरने लगी. उन्होंने मेरा लहंगा उठा दिया और हाथ अंदर डाल दिया. मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी गीली चूत को मसलने लगे. मैंने उनको अब बांहों में भर लिया और प्यार करने लगी. उनके होंठों के रस को पीने लगी और वो मेरे होंठों को काटने लगे तो कभी गर्दन पर काटने लगे और चूसने लगे.

फिर उन्होंने लहंगा खोला और पैंटी पर झपट पड़े. मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत को चाटने लगे. मुझे डर लग रहा था कि कहीं भेद न खुल जाये कि मैं पहले से ही चुदी हुई हूं. लेकिन साथ ही मजा भी बहुत आ रहा था.

उसके बाद उन्होंने मेरी पैंटी को उतार दिया और मेरी चूत को मसलने लगे. अब उनका लंड मेरे जिस्म के साथ टच हो रहा था. लंड काफी सख्त था और मेरे पैरों की उंगलियों पर टच हो रहा था. अब मेरा मन भी करने लगा था कि उनके लंड को पकड़ लूं लेकिन दुल्हन वाली शर्म अभी भी रोक रही थी.

वैसे भी अभी नहीं दो मिनट के बाद लंड तो मुझे मिलने ही वाला था. इसलिए मैंने खुद को रोक रखा था क्योंकि मेरे पति के अंदर ही इतना सेक्स भरा हुआ था कि सारी इच्छाएं वो ही पूरी करने वाले थे. फिर मेरे इंतजार के पल भी खत्म हो गये.

उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ा और अपने मोटे लंड पर मेरे हाथ को रखवा दिया. मैंने उनके लंड को छुआ तो मजा आ गया. पति का लौड़ा मेरे जीजा के लंड से काफी मोटा और लम्बा था. सच में मेरी चूत की तो किस्मत ही खुल गई थी. मेरा तो सपना था कि मुझे ऐसे ही लंड वाला पति मिले. उन्होंने अपने लंड पर मेरा हाथ रखवा कर मेरे हाथ को उस पर दबाने लगे.

अब तो मेरा खुद ही मन करने लगा था कि उनके लंड को अपने हाथ में लेकर अच्छी तरह से उसको प्यार करूं. फिर उन्होंने अपना कच्छा निकाल दिया और गर्म लंड मेरे हाथ में दे दिया.

अभी भी मैं नाटक करती रही तो उन्होंने मेरे हाथ को अपने हाथ से पकड़ कर अपने लंड पर चलाना शुरू किया और अपने लंड की मुठ मारने लगे. दो मिनट तक मुठ मरवाने के बाद उन्होंने मेरी पैंटी को खींच कर अलग कर दिया और फिर मेरे ऊपर टूट पड़े. मेरे नंगे चूचों को जोर से मसलते हुए भूखे शेर की तरह मेरे जिस्म को यहां-वहां से काटने लगे.

मेरी चूत अब लंड लेने के लिए तड़प उठी थी. अब मैंने लाज शर्म को झाड़ू मारा और लग गई उनके बदन को चूसने में. वो मेरे चूचों को ऐसे पकड़ कर खींचने लगे कि जैसे उखाड़ देंगे. फिर मेरी टांगों को फैला दिया और मेरी चूत की फांकों को खोल कर अपना मूसल लंड मेरी चूत पर रख दिया और पूरा जोर लगा कर धक्का मारा तो मेरी चीख निकल गई. लेकिन उन्होंने मेरे मुंह पर अपनी बड़ी सी हथेली रखते हुए उसको ढक दिया.

बाहर औरतें शादी के गीत गा रही थीं. हमारे यहां रिवाज है कि सुहागरात वाले दिन औरतें गीत गाती हैं. उस समय पूरी रात औरतें रात-जगाती हैं. दूल्हा और दुल्हन अपनी चुदाई के चुदाई के साथ ही औरतें के सुर में अपने लंड और चूत से चुदाई की ताल मिलाते हैं. मेरे पति के फौजी लंड ने भी पच-पच की आवाज के साथ मेरी चूत को बजाना शुरू कर दिया. ऐसे चोद रहे थे जैसे जीवन में कभी दोबारा उनको चूत नहीं मिलेगी.

मेरी चूत पूरी फैल गई थी और मुझे इतना आनंद आ रहा था कि मैं बता नहीं सकती. बाहर औरतों के गीत चल रहे थे और अंदर हमारी चुदाई का राग. मेरे पति ने अपने मोटे लंड से मेरी चूत को ऐसे ठोका कि मैं पांच मिनट में ही झड़ गई.

उनका फौलादी जिस्म बहुत तगड़ा था और वैसा ही उनका लंड था. जीजा और साली की चुदाई तो मैं भूल ही गई थी. मुझे सच में मेरे पति ने बहुत मजा दिया. रात भर उन्होंने चार बार मेरी चूत मारी. मेरी चूत की इतनी ठुकाई की, इतनी ठुकाई की कि अगले दिन सुबह उठी तो मेरे पांव नहीं उठ रहे थे.

मैं जब औरतों के पास पहुंची वो भी मेरा मजाक बनाने लगीं. सुबह मेरी ननद और भाभी ने बताया कि तुम्हारी आवाज तो बाहर तक आ रही थी. सच में विक्रम को तो बिल्कुल फ्रेश माल मिला है.

जब मैं नहा कर बाहर आई तो गांव की औरतों ने मेरा चेहरा देखा जिस पर चूसने और काटने के कई निशान थे. मुझे भी शर्म आ रही थी लेकिन कर भी क्या सकती थी. मर्दों को तो सुहागरात में अपने मन और अपने लंड की शांति के लिए जो भी करना होता है वो सब करते हैं. इस बात से सब औरतें भी वाकिफ होती हैं इसलिए सब मेरी तरफ देख कर मुस्करा रही थीं.

फिर अगले चार दिन मैं ससुराल में रही. मेरे पति ने रात में चुदाई के अलावा और कुछ नहीं किया. वो उन चार रातों में मेरी चुदाई ही करते रहे. मैं तन और मन दोनों से खुश हो गई. चूंकि उनका लंड बहुत मोटा था इसलिए उनको मेरी सील टूटने के बारे में कुछ नहीं पता चला. मैं भी इस बात से खुश थी कि मेरी चिन्ता अब खत्म हो गई है. जीजा की मदद से मैंने अपने फौजी पति को भी बेवकूफ बना दिया था.

ये मेरी सच्ची कहानी है जो कि मेरे पति के साथ वास्तविक सुहागरात थी. आशा करती हूँ कि आपको ये सच्ची कहानी भी पसंद आई होगी.
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