सेक्स में सनक या पागलपन -2

(Sex Me Sanak Ya Pagalpan- Part 2)

दोस्तो, इस विषय पर आपने मेरा हालिया लेख
सेक्स में सनक या पागलपन-1
पढ़ा.. और इस पर अपने कमेंट्स किए.. मुझे मेल भी किए.. एक पाठिका निष्ठा शर्मा के कमेंट्स का मैं यहाँ जिक्र करना चाहूँगा.. जो लिखती है।

‘कुछ मर्द.. गर्ल्स को खिलौना समझते हैं.. उन्हें गर्ल्स की भावनाओं से कोई मतलब नहीं होता है.. लेकिन उनकी इन हरकतों से गर्ल्स अन्दर तक टूट जाती हैं।’
उन्होंने बिल्कुल सही लिखा है..

ऐसा ही एक मेल आनन्दो का है जो लिखते हैं..
‘अरुण तुम एक अच्छा प्रयास कर रहे इस पोर्टल पर.. धन्यवाद हृदय से.. सेक्स, काम, प्रेम, शारीरिक भूख.. इन सब भावों की समझ ही काम और सेक्स के अंतर में है। इसकी कोई क्लास स्कूल या समाज व्यवस्था नहीं है। इन्टरनेट पर केवल पोर्न और सेक्स ही काम है.. और ये सब पुरुष प्रधान सिस्टम की देन है। इस पोर्टल और इन्टरनेट से हम एक स्वस्थ आनन्द के काम को पा पाएँ.. इसकी कामना है।’

मेरे इस लेख से कुछ ऐसी लड़कियाँ डर गई होंगी.. जिनकी अभी शादी नहीं हुई है.. लेकिन दोस्तो, ऐसी कोई बात नहीं है और मैं उन लड़कियों को भी आश्वस्त करना चाहूँगा कि अपने पार्टनर की ऐसी किसी भी घिनौनी.. और अप्राकृतिक मांग को.. जो आपको पसंद न हो.. और आपके लिए कष्टदायी हो.. उसका पुरज़ोर विरोध करना ही चाहिए.. क्योंकि आपके सहने से ये मांग और ज्यादा बढ़ती ही जाएगी।

तब भी कुछ जोड़ों के बीच में कुछ सेक्सी सनक ऐसी होती है.. जो सेक्स रिलेशन में कुछ नयापन या उत्तेज़ना बढ़ाने के लिए भी की जाती है.. और यह एक तरह का लव-गेम होता है जो सुनने में सनक या पागलपन ही होता है.. लेकिन जिसमें दोनों ही बहुत ही उत्तेजक.. वासना और कामुकता का आनन्द लेते हैं।

बहरहाल आज मैं सेक्स में सनक या पागलपन का एक दूसरा पहलू लिख रहा हूँ।

मेरा यह लेख खासतौर से लड़कियों के लिए ही है.. जो कि अपने पार्टनर की अजीबोगरीब मांगों से कैसे निपट सकती हैं.. और चाहें तो उसे मज़ेदार भी बना सकती हैं।

इसे भी अन्तर्वासना की एक विवाहित पाठिका ने मुझे लिख भेजा है.. जिसे मैं अपने शब्दों में आपको बता रहा हूँ।

वो लिखती हैं कि उसकी शादी के बाद से ही उसके पति की एक हरकत उसे बहुत अजीब लगा करती थी। एक तो वो बैडरूम में उसके पहनने के लिए बहुत ही ज्यादा छोटे और पारदर्शी अंतःवस्त्र पसंद करते थे.. जो कि उसके नग्न शरीर को छुपाने के बजाए दिखाता ज्यादा था।
दूसरी उनमें एक आदत थी.. जो कि मेरा लेख पढ़ कर उन्हें लगा कि ये भी एक सनक ही है। वो ये कि वो मुझे ऐसे ही महीन अन्तःवस्त्रों में कमरे से बाहर घर के काम के लिए भी भेज़ते थे, जैसे कि चाय बनाना.. मेन गेट से अखबार उठा कर लाना..

ये सब तो मैं जैसे-तैसे करती रही.. लेकिन एक रविवार को हमारी काम वाली बाई नहीं आई.. और शनिवार रात घर में दोस्तों के परिवार के साथ एक पार्टी थी तो घर काफी गन्दा भी हो रहा था।

मैं रोज़ की तरह से एक झीनी नाइटी में ही थी.. चाय से निवृत हो कर मैं घर की डस्टिंग और सफाई के लिए उठी.. तो ये अचानक मेरे पास आए.. और बोले- जानू.. घर की डस्टिंग और सफाई.. जो तुम आज करोगी उस के बदले में तुम्हें क्या गिफ्ट चाहिए.. बताओ?

मैंने सोचा.. क्या बात है आज तो बड़ी मेहरबानी है।
क्योंकि ये सब तो मुझे वैसे भी करना ही था.. लेकिन मैं उनके दिमाग में बसे हुए कामुक विचार से अनभिज्ञ थी।

मैंने कहा- मुझे एक डिज़ाइनर सूट चाहिए..
वो बोले- ओके डन..
उनके एकदम सहमत होने से मैं भी चौंकी, मैं बोली- क्या बात है आज ये सब मेहरबानी क्यों??

वो मुझे बाँहों में जकड़ते हुए दीवार तक ले गए और मेरे दोनों हाथ ऊपर किए और फिर.. उन्होंने मेरी झीनी नाइटी निकाल कर दूर फेंक दी.. अब मैं पूरी नंगी हो गई थी।

वो मुझे मेरे चेहरे.. गर्दन.. कंधे और अनावृत उभारों को बेतहाशा चूमने लगे.. चूसने लगे और बोले- मैडम डस्टिंग और सफाई तुम्हें ऐसे ही करनी होगी..
मैं चौंकी!
तभी अपना एक हाथ मेरी चूत पर फिराते हुए बोले- ऐसे बिल्कुल ऐसे..

मैं अचानक से उनका यह रूप देख कर अचकचा सी गई, मैं बोली- नहीं.. यह क्या मज़ाक है?
उन्होंने ज़ोर से मेरे दोनों वक्ष पकड़ लिए.. बोले- मज़ाक नहीं.. ऐसे ही करना होगा..
वो ज़िद्दी थे.. यह मैं जानती थी.. लेकिन ये कैसी ज़िद..!

वो नहीं माने.. बोले- आज सब कुछ ऐसे ही करना होगा.. सूट के बजाए चाहे गोल्डन ईयर रिंग्स ले लेना.. लेकिन आज तुम इस घर की नंगी नौकरानी हो.. ओके!

फिर मुझे डस्टिंग ब्रश पकड़ाते हुए मेरे नंगे चूतड़ों पर दो ज़ोरदार चांटे लगाए और कहा- अब शुरू हो जाओ काम पर..
मेरे लिए अब मना करने की कोई गुंजाइश नहीं बची थी, मैंने भी अपने मन में अचानक कुछ ठाना और कहा- ओके.. लेकिन मेरी भी एक शर्त है?
वो ख़ुशी से चहकते हुए बोले- मुझे सब मंज़ूर है..

मेरे ‘हाँ’ भरते ही वो उत्तेज़ना से भर गए थे।
मैंने कहा- एक तो ये कि मैं जब तक झाड़ू-पोंछा लगाऊँगी.. तुम्हें भी पूरा नंगा ही रहना होगा और दूसरी बात ये कि इस दौरान तुम मुझे छुओगे भी नहीं..
वो झुंझला के बोले- ये क्या शर्त है?

मैंने भी जवाब पकड़ा दिया- तुम अपना कुछ भी पागलपन या सनक मुझ पर थोपो.. मेरी एक शर्त माननी ही पड़ेगी.. मंज़ूर हो तो बोलो..
कह कर मैं अपनी नाइटी उठाने लगी।

वो दौड़ कर आए और मुझे पकड़ कर बोले- ठीक है.. मुझे मंज़ूर है।
मैं मुस्कुरा दी।
वो झुंझला कर बोले- लेकिन यदि मैंने तुम्हें छू लिया तो क्या होगा?

मैंने शरारत से आँख मारते हुए कहा- फिर बाकी का सारा झाड़ू पोंछा तुम्हें ही लगाना होगा.. समझे जनाब..!
वो काम-वासना से सुलग रहे थे.. तुरंत मेरी ये शर्त मान गए, फिर मेरे साहब भी पूरे नंगे हो गए.. अपनी इस फेंटेसी से वो किस कदर उत्तेजित थे.. ये उनके कड़क और पूरी तरह से तने हुए लंड से ज़ाहिर हो रहा था।

मैंने अब एकदम से काम वाली बाई की तरह से अपने बालों को टॉप नॉट में बाँध लिया.. और अपने चूतड़ मटकाते हुए काम पर लग गई..
वो बहुत ही उत्तेजक निगाहों से मेरे मादक मदमस्त नग्न जिस्म को निहारते हुए और अपने लंड को सहलाते हुए मेरे पीछे पीछे घूम रहे थे।

अब मैंने भी उन्हें उकसाने की.. और उनकी इस सनक का माकूल जवाब देने की ठान ली थी।
इसलिए मैं डस्टिंग ऐसे कर रही थी कि सारी धूल मिट्टी मेरे नंगे जिस्म के मेरे उभारों पर गिर रही थी, मैं लापरवाह बनी हुई थी, ऊँची जगहों पर डस्टर मारते हुए मेरी रोंएदार बगलें उन्हें दिख रही थीं.. और उछलने से मेरे दूध भी उछाल मार रहे थे।

उनका मन मेरे उछाल मार रहे मम्मों को लपकने का हुआ.. वो पास आए.. लेकिन मैंने उन्हें डस्टर से दूर धकेल दिया।
मैं जानबूझ कर ऐसी हरकतें कर रही थी.. जो उनको सुलगा रही थी।

ऊपर की डस्टिंग होने के बाद मैं फर्श की झाड़ू लगाने लगी। वो भी पंजों के बल बैठ कर.. इस तरह से कि मेरे मम्मों मेरे ही घुटनों से बुरी तरह से कुचले जा रहे थे.. दब रहे थे। ये नजारा देखा कर उनका लंड सहलाना अब तेज़ हो गया था।

मैं मुस्कुरा उठी।

अब मैं एक अपने दोनों घुटने और पंजों के बल होकर झाड़ू लगाने लगी.. एक कुतिया के जैसे हो कर..
इस अवस्था में मेरे दोनों मम्मे गाय के थन की तरह से लटक कर झूलने और हिलने लगे.. और गांड एक मदमत घोड़े की तरह से उभर गई।

ये सब देख कर उनकी आहें निकलने लगीं.. वो मुझे पकड़ने को आमादा हो रहे थे।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

अब मैंने अपना फाइनल दांव खेला और पलंग के नीचे अन्दर तक झाड़ू मारने का प्रयास किया। वो बॉक्स वाला पलंग था.. तो मुझे ये सब करने में अपना चेहरा और वक्ष फर्श पर टिकाने पड़ गए और मेरी गोल-मटोल मांसल गांड.. एकदम से ऊँची हो कर ऊपर आसमान की तरफ हो गई।

मैंने महसूस किया कि मेरे चूतड़ों के गोले दो फांकों में विभक्त हो गए और गांड का छेद भी खुल गया था।
मैं जानबूझ कर आगे से और ज्यादा झुकी और गांड और ऊँची की.. ताकि उन्हें चूत के दीदार भी हो जाएं।

मेरी यह सेक्सी अदा कामयाब रही.. उन्होंने मेरी कमर में हाथ डाल कर ज़ोर से मेरी गांड को भींच लिया। उनका गरम फौलादी लंड मेरी चूत पर मुझे महसूस हो रहा था.. और मेरी नंगी पीठ पर उनके चुम्बनों की बरसात हो चुकी थी।

उन्होंने अपनी शर्त तोड़ दी थी.. इस लिए मैंने भी मुस्कुरा कर अपने हाथ से झाड़ू छोड़ दी।
और.. फिर वो रुके नहीं.. मेरी गांड के छेद से लेकर चूत तक.. सब चाट-चाट कर गीला-गीला कर दिया।

फिर मेरे लिए सेक्सी-सेक्सी बातें बोलते हुए उन्होंने वहीं फर्श पर मेरी उसी कामुक स्थिति में अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया.. जो आज मुझे आज अपेक्षाकृत ज्यादा कड़क लगा और फिर मेरे मम्मों को अपने हाथों से थाम के मुझे कुत्ते-कुतिया वाली पोज़िशन में चोदना शुरू कर दिया।

मैंने अपनी चालाकी से पूरी स्थिति को अपने पक्ष में कर लिया.. फिर उस दिन शर्त हार कर उन्होंने ही नंग-धड़ंग होकर घर की बाकी की सफाई की और मैंने आराम किया।

तो दोस्तो, यह होती है.. मर्दों से निपटने की कला..

कुछ और सेक्सी सनक के बारे में आगे लिखूँगा.. अन्तर्वासना के पाठक पाठिकाओं से मेरा निवेदन है कि वो अपने-अपने पार्टनर की अच्छी या बुरी सेक्स सनक के बारे में मुझे मेल करें.. या वाट्सएप्स करें, मुझे मेल करके मेरा वाट्सएप्स नंबर जान सकते हैं।

आपका अरुण
[email protected]

इस लेख का अगला भाग : सेक्स में सनक या पागलपन-3

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