कामुकता की इन्तेहा-10

(Kamukta Ki Inteha- Part 10)

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खतरनाक चुदाई के बाद रात डेढ़ बजे के करीब ढिल्लों मुझे मेरे कमरे में छोड़ गया। मैं रूम में आते ही लोई उतार कर नंगी ही कंबल में घुस गई और कई घंटों की हुई ज़बरदस्त सर्विसिंग के बारे में सोचती होई सुबह 7 बजे का अलार्म लगाकर सो गई।

अगले दिन सुबह 9 से 12 बजे तक पेपर था। मैंने सुबह उठकर ढिल्लों को अब फोन न करने के लिए कह दिया था। पहले भी जब भी उससे कांटेक्ट करना होता था तो मैं ही करती थी।
ढिल्लों ने मुझे आज तक फोन करके किसी तरह की परेशानी से बचाये रखा था और इसका इनाम मैंने उसे पिछली रात अपने आठों द्वार खोल कर चुद कर दिया।

तो दोस्तो, पेपर मेरा ठीक हो गया था क्योंकि मैंने पहले से ठीक ठाक तैयारी कर रखी थी।

लगभग दोपहर साढ़े बाहर बजे मेरा पति कार पर मुझे लेने आ पहुंचा और मेरी तरफ देख कर कुछ हैरान होकर पूछा- एक दिन में ही तुम्हारी आंखों के नीचे इतने काले धब्बे क्यों बन गए हैं और ये सूजी हुईं क्यों हैं?
मैंने बड़े आत्मविश्वास से झूठ बोला- जनाब, रात भर पढ़ती रही, सोई तो बिल्कुल नहीं, पेपर की … पता कितनी फिकर थी।
इतने में मेरी सहेली भी पेपर देकर आ गयी।

क्योंकि उसे भी सुबह उठकर मैंने रात की सारी बात बता कर समझा दिया था कि पति को क्या कहना है तो वो भी आते ही बोली- जीजू, दीदी तो रात भर पढ़ती रही, मैंने बहुत कहा लेकिन ये सोई नहीं!
तभी वो मेरी तरफ देखकर बोली- क्यों दीदी, पेपर कैसा हुआ?
मैंने आंख मार कर उसे ‘मस्त’ कहा और अपने पति से चलने के लिए बोली।

दरअसल पिछली रात मेरी ठुकाई बहुत ही वहशियाना तरीके से हुई थी, सुबह भी मैं बड़ी मुश्किल से उठी थी और अब मैं सोना चाहती थी। कार में बैठकर मैं अपने पति से हल्की फुल्की बातें करने लगी और इसी दौरान मुझे ज़बरदस्त नींद आ गयी और मैं कार में ही सो गई।
2 घण्टों का सफर कैसे बीत गया मुझे पता ही नहीं चला।

घर आकर मैं अच्छी तरह से नहाई और फिर बैडरूम में जाकर सो गई। शाम को उठी और घर में थोड़ा बहुत काम किया। अंधेरा होते ही मेरा पति काम से लौट आया और खाना खाने के बाद अब सोने आ गए।

आपको तो मैंने बताया था ही था कि मेरा पति लगभग रोज़ मेरी टिका के मारता है। आज भी उसका मूड था और दारू भी पीकर आया था। लेकिन मेरा हाल तो आप समझ ही सकते हैं कि क्या होगा। तो जनाब होने लगी कशमकश … वो मुझसे लिपटता जा रहा था और मैं थी कि उसके काबू में नहीं आ रही थी।

दरसअल मेरा भर 72 किलो है और मेरे पति का भार 65 है और इसके इलावा मैं उससे 3 साल बड़ी भी थी, इसीलिए मैं उससे काफी तगड़ी थी। हमारा मेल ऐसे था जैसे वो एक गधा हो और मैं एक ऊंची वज़नदार नुक़री घोड़ी।
मैंने उसे गधा इसलिए कहा है कि उसका लौड़ा भी कोई कम नहीं था, 6-7 इंच का तो था ही। और दूसरा ये कि एक वही था जिसके नीचे मैं पिछले 2 साल टिकी रही थी वर्ना ये किसी आम मर्द की बात नहीं थी। दरअसल वो था जिस्म का कुछ हल्का और मुझसे कमज़ोर लेकिन पक्का अफीमची और वैली होने के कारण मारता वो मेरी टिका के ही था। ज़्यादा नशा करने की वजह से उसके स्पर्म कम हो गए थे जिसकी वजह से अभी तक मुझे बच्चा नहीं हुआ था लेकिन रात ढिल्लों ने हर बार मेरी बच्चेदानी तक अपना लौड़ा डाल कर ही वीर्य अंदर गिराया था और मेरी डेट आयी को भी अभी 3-4 दिन ही गुज़रे थे तो मुझे यकीन था कि बच्चा तो उसने ठहरा ही दिया होगा।

खैर मुझे अपनी सास से बहुत सारी बुरी भली बातें सुननी पड़ती थी इसीलिए मैंने 72 घंटे वाली कोई गोली नहीं खाई।

मैं रात की बहुत थकी हुई थी और मेरा पति जिसका घर का नाम ‘काला’ है, दारू से टुन्न था इसीलिए मैं उसका मुकाबला ज़्यादा देर तक नहीं कर सकी और इसी दौरान उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल कर अपनी 2 उंगलियां मेरी फुद्दी में घुसेड़ दीं। अब मेरी फुद्दी पूरी तृप्त होने के कारण बिल्कुल सूखी हुई पड़ी थी जिसकी वजह से मुझे बहुत दर्द हुआ और मैंने अपनी पति को एक गाली निकाली और ज़ोर लगाकर उसकी उंगलियां बाहर निकाल दीं।

दरअसल मेरी सूखी फुद्दी में उसकी दो उंगलियां “घड़प्प” के जैसे अंदर चली गईं थी जिससे मेरे पति ने हैरान होकर पूछा- भेनचो, ये आज इतनी खुली क्यों लग रही है आज तेरी?
थी तो मैं धड़ल्लेदार घोड़ी, इसीलिए मैंने उससे अपनी ज़ोरदार रोबीली आवाज़ में कहा- भेनचो, रोज़ दारू पीकर आ जाता है, साले नशा कुछ कम कर लिया कर, वही फुद्दी है, तुझे ही नशा ज़्यादा चढ़ गया है।
मेरी इस रोबीली आवाज़ को सुनकर वो अक्सर चुप हो जाया करता है और इस बार भी वो खामोश हो गया। इतना रोब तो मैंने शुरू से रखा था। खैर मेरा पैंतरा काम कर गया और वो चुपचाप मेरी फटकार सुनकर दूसरी तरफ मुँह करके सो गया।
यह देखकर मेरी जान में जान आयी और मैं भी रब्ब का शुक्र मना कर सो गई।

अगले दिन फिर मैं उठकर सारा दिन आम कामकाज करती रही और खाना खाकर मैं और मेरा पति फिर उसी बेड पर आ गए। आज फिर मेरे वैली पति ने बहुत ज़्यादा पी रखी थी और वो थोड़े गुस्से में भी था।
आधा-पौना घंटा तो वो चुपचाप लेटा रहा और मुझे कि आज फिर मैं बच गयी।

दरसअल ढिल्लों ने एक रात में ही मेरी कई रातों की प्यास बुझा दी थी.

लेकिन इसके बाद उसके दिमाग में पता नहीं क्या आयी के आव देखा न ताव। सलवार का नाड़ा खोल कर और मेरी पैंटी एकदम निकाल के फेंक दीं और धर लीं मेरी भारी टाँगें अपने कंधे पे। दरअसल ये सब इतनी जल्दी हुआ कि मुझे संभलने का मौका ही नहीं मिला क्योंकि मैं तो गहरी नींद में थी। मेरा पति मुझे 2 सालों तक चोदने के बाद भी ये नहीं जानता था कि कहां घुसाना या शायद उसे ये अच्छा लगता था इसीलिए उसने हर बार की तरह मुझे खुद घुसाने के लिए कहा।

मैंने अपने पति से मिन्नत की कि आज मेरा मूड नहीं है और मैंने उसका लण्ड नहीं पकड़ा। मुझे दो-तीन मोटी मोटी गालियां निकाल कर उसने खुद ही अपने लण्ड को सीधा करके ऐसे ही गुस्से में एक घस्सा दे मारा।
लंड सीधा मेरी सूखी फुद्दी के अंदर जाकर जड़ तक घुस गया और जो आवाज़ आयी उससे मैं और मेरा पति दोनों हैरान हो गए ‘घड़ापपपप…’

मेरी फुद्दी पूरी तरह सूखी होने के कारण भी मुझे बहुत ही कम दर्द हुआ। मैंने जान बूझ कर दर्द होने का नाटक किया।
तभी मेरे पति ने मुझसे पूछा- भेनचो, ये फुद्दी आज इतनी खुली क्यों लग रही है, क्या बात है?
मैंने बहाना बना कर कहा- मुझे तो नहीं लग रहा … शायद 3-4 दिन पहले आयी डेट की वजह से है.

इसके बाद मेरे पति ने मुझसे कोई बात न की और मेरी सूखी फुद्दी में ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा। असल में ढिल्लों ने मेरी हल्की सी खुली हुई फुद्दी को अब गुफा जैसा फुद्दा बना दिया था। हालत यह हो गयी कि 5-7 मिनट की ज़ोरदार चुदाई में बाद मैं गर्म न हुई क्योंकि ढिल्लों के आधे साइज का लंड मुझे मेरी फुद्दी में महसूस नहीं हो रहा था। अब मुझे पता चल चुका था कि अब मैं ढिल्लों के बजाए और किसी के काम की नहीं रही थी।

फिर भी अपने पति को धरवास देने के लिए मैं नीचे से हिलने लगी और जान बूझ कर ‘आह … आह …’ करती रही। 10-15 मिनट की चुदाई में मैं गर्म तो गयी लेकिन मुझे बिल्कुल भी मज़ा नहीं आ रहा था।
मेरा पति पूरे ज़ोर से मुझे पेल रहा था और तभी वो बोला- साला आज पता ही नहीं चल रहा, तेरी घुस्सी(चूत) मुझे आज बहुत खुली लग रही है।

यह सुन कर मैंने उसे मज़ा देने के लिए अपनी टाँगें पूरी तरह भींच लीं ताकि लंड रगड़ कर फुद्दी में जाये। मेरी इस हरकत से मेरे पति को थोड़ा मज़ा आने लगा और वो मुझे ‘आह … आह …’ करके पेलता रहा और कुछ देर बाद हांफते हुए झड़ने लगा।
इस समय मैं पूरी गर्म थी और मेरा काम भी नहीं हुआ।

अब आप खुद समझ सकते हैं कि मेरा क्या हाल हुआ होगा। मेरी दरियायी प्यास को अब सिर्फ कोई ढिल्लों जैसा मोटा और लंबा जैसा ही बुझा सकता था।

खैर अगले पेपर में अभी 5 दिन बाकी थे और मैं रोज़ अपने पति से चुदती रही। मेरी मारता तो दारू पीकर वो रोज़ टिका के था लेकिन उसका लंड अब मेरी प्यास नहीं बुझा पा रहा था। मैं बहुत हिल हिल कर उससे चुदी और 2-3 बार झड़ी भी, लेकिन उसके लंड की मार मेरी फुद्दी की आधी गहरायी तक ही थी। अब मुझे ढिल्लों से अगली मीटिंग की उडीक(प्रतीक्षा) थी।

मैंने अपने पति को और अपनी सहेली से पूरी सेटिंग करके औ अपनी किसी सहेली की शादी में जाने के लिए उसे पेपर से 2 पहले यूनिवर्सिटी जाने के लिए मना लिया था। इसके अलावा मैंने ढिल्लों से वादा पूरा करते हुए लाल रंग के ज़बरदस्त लहंगा चोली का प्रबंध भी कर लिया था।

मैंने जान बूझ कर थोड़ा छोटा लहंगा चोली आर्डर किया था। लहंगा और चोली में लगभग 15-16 इंच का फासला था क्योंकि चोली ऊपर से लहँगा नीचे से बेहद लो कट था। चोली ऐसी थी कि मेरे बड़े बड़े मम्मों में पूरी तरह फंसती थी जिससे उनका आकार पूरी तरह से नुमाया हो जाता था। लहँगा मैं नाभि के बहुत नीचे तक पहनने वाली थी ताकि मेरा हल्का सा बाहर को निकला हुआ पेट ज़्यादा से ज़्यादा दिखे। लहँगे चोली के साथ पहनने वाली चुनरी भी मैंने बहुत झीनी ली थी ताकि अंदर के नजारे में कोई बाधा न आये।

इसके अलावा मैंने एक दिन बाज़ार जाकर बेहद ऊंची एड़ी की सैंडल ले ली थी और ऊपर से नीचे तक अपने जिस्म की दो बार वैक्सिंग करवा ली थी जिसमें फुद्दी और गांड भी शामिल थी। मेरे सर और आंखों के अलावा अब मेरे जिस्म पर बाल नाम की कोई चीज़ मौजूद नहीं थी।

अब मुझे बेसब्री से अगले दिन का इंतज़ार था कि कब मेरा फुद्दू पति मुझे अपनी सहेली के पास छोड़ कर आये।

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धन्यवाद.
कहानी जारी रहेगी.
आपकी चुदक्कड़ घोड़ी रूपिंदर कौर
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