पड़ोस वाली भानजी की चुदाई

(Pados Wali Bhanji Ki Chudai)

हाय दोस्तो, मेरा नाम महेश है। वैसे तो मैं पूना से हूँ लेकिन आर्मी में होने की वजह से ऑल इंडिया घूमा हूँ। मेरी लम्बाई 6’2″ है और मैं अभी 33 साल का हूँ।

अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है। यह कहानी दो साल पहले की एक घटना से जुड़ी है। अभी हिसार में मेरी पोस्टिंग है। पूना सिटी मैं मेरा खुद मकान एक चाल में है। सन 2011 के अप्रैल में मैं हिसार से छुट्टी आ रहा था।

हिसार से मुंबई और मुंबई से पूना ट्रेन में सफ़र करने के बाद में अपने घर आ गया। मेरी बीवी बच्चों के स्कूल की छुट्टियों की वजह से गाँव गई थी. घर की एक चाभी मेरे पास रहती है।

मैं घर जाकर फ्रेश हो गया और मन में सोचने लगा कि बाहर जाकर डिनर करता हूँ। इतने में मेरे बाजू वाले घर में रहने वाली लड़की रेखा ने जो 21 साल की है, वो मुझे मामा कहती है, मैं उसे अपनी भानजी मानता हूँ.
उसने मुझे आवाज़ दी और कहा- अरे मामा आप कब आए … देखो ना मेरे बेटे को बहुत बुखार आया है और मेरे पति रिश्तेदारी में शादी में गए हैं।
उसने यह सब एक ही सांस में बोला और रोने लगी।

मैंने उसको समझाया और उसके बेटे को देखा तो वास्तव में उसको 103 डिग्री बुखार था और उसका जिस्म ऐंठने लगा था।
फिर मैंने रेखा से बोला- इसको तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना पड़ेगा।
तब रेखा बोली- इसको बच्चों के डॉक्टर के पास ले चलते हैं।

मैंने अपनी बाइक निकालकर उसको बिठाया. रेखा के लड़के सोनू को अपने आगे बिठाया और रेखा मेरे पीछे बैठ गई।
थोड़ी दूर जाने पर मैंने रेखा को बोला- सोनू को ठीक से पकड़ कर बैठ जा।
तब रेखा बोली- गाड़ी रोको.

मैंने गाड़ी साइड में लेकर रोक दी क्योंकि रात के दस बज रहे थे. इस कारण अधिक भीड़ भी नहीं थी। फिर रेखा ने दोनों साइड पैर करके बैठ गई और दोनों हाथ आगे करके सोनू को पकड़ लिया।

फिर मैं बाइक स्टार्ट करके आगे निकला. रात में हॉस्पिटल हमारे यहाँ से 13-14 किलोमीटर था। सोनू जो अभी मात्र ढाई साल का था, आगे बैठा होने से मैं बाइक धीरे-धीरे चला रहा था। अचानक स्पीडब्रेकर आने से मुझे ब्रेक लगाने पड़े और रेखा जो कि मेरे पीछे बैठकर आगे सोनू को पकड़े हुए थी. वो बिल्कुल मेरे से चिपक गई।
उसने भी कुछ नहीं बोला और हम आगे बढ़ते रहे।

तब तक मेरे मन में उसके प्रति ग़लत भावना नहीं थी। जब वो मुझे चिपक कर बैठी तो उसकी छाती बिल्कुल मेरे पीठ को छू रही थी। ऐसे ही हम हॉस्पिटल पहुँचे. सोनू को डॉक्टर को दिखाकर दवा आदि लेकर दी।

मैंने उसको बोला- रेखा तुमने खाना खाया या नहीं?
तब उसने बोला- नहीं. पर मामा धन्यवाद, आप अगर नहीं होते … तो मैं बहुत परेशान हो जाती।

फिर हम दोनों होटल में जाकर डिनर किया और घर के लिए वापस निकले। तब तक रात के करीब 12.30 बज गए थे।

रेखा वैसे ही दोनों तरफ पैर करके मुझे चिपक कर बैठ कर आगे सोनू को पकड़ लिया। उससे मेरी पीठ पर उसकी छाती चिपक गई थी। इसी अवस्था में हम दोनों घर पहुँचे। उसको घर छोड़ने के बाद में मैंने उसको गुडनाईट बोला तो रेखा मुझसे बोली- मामा, आज आप हमारे घर में ही सो जाओ ताकि कुछ ज़रूरत पड़े तो आपको बता सकूँ।
मैंने भी बात को मान लिया और बोला- ठीक है मैं कपड़े बदल कर आता हूँ।

फिर मैं चेंज करके बरमूडा और टी-शर्ट पहन कर आ गया। हम दोनों के घर एक कमरे और रसोई वाले हैं। मैंने सोनू को उठाया.. उसने अलग से खटिया ना होने बिस्तर को नीचे लगाया।

हम दोनों के बीच में सोनू को लेकर सो गए। रात को करीब 4 बजे मेरे नींद खुल गई। देखा तो सोनू नीचे को हो गया था और मेरे छाती पर रेखा का हाथ था। मेरा हाथ रेखा के छाती पर था। मुझे मज़ा आ रहा था. मैंने वैसे हाथ उसके चूचियों पर रखा तो मुझे झटका सा लगा और मुँह से निकला- वाह … क्या चूचियाँ हैं।

अब तक तो मैंने ग़लत निगाह से रेखा को देखा नहीं था लेकिन अब मुझे कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैं आहिस्ता-आहिस्ता चूचियों पर हाथ फेरने लगा। मुझे नहीं पता था कि रेखा भी जाग रही है या नहीं … पर उसने करवट बदलकर मेरी तरफ पीठ कर ली और थोड़ी पीछे को आ गई।

मेरा हाथ वैसे ही उसके ऊपर था. पीछे से मेरे हाथ आगे सीधे उसके दाहिने चूचे पर आ गया था। मैं वैसे ही सोने का नाटक करता हुआ उसकी चूची पर हाथ फेरता रहा। उससे वो भी गर्म हो रही थी। अब वो सीधी हो गई. मेरा हाथ उसके ऊपर ही रखा हुआ था। मैं थोड़ा डर गया लेकिन मैंने हाथ नहीं हटाया।

थोड़ी देर रुकने के बाद मैं फिर हरकत करने लगा। अब तक तो मेरा बाबूराव 7″ हो गया था और उसकी जाँघों को छू रहा था। फिर उसने करवट बदली और मेरी तरफ चेहरा कर लिया.. जिससे उसका मुँह बिल्कुल मेरे मुँह के पास आ गया। उसकी सांसें और मेरी सांसें एक-दूसरे में उलझने लगीं। मुझे अब उसकी सांसों की गर्मी लेने में और मज़ा आने लगा। फिर मैंने थोड़ा आगे बढ़ कर उसके पैर पर अपने पैर को चढ़ाया और अपना हाथ उसकी पीठ पर डाल दिया। जिससे मेरा बाबूराव उसकी जाँघों के बीच टकराने लगा था।

फिर एक बार उसने हलचल की और अपना हाथ नीचे लेजा कर अपनी योनि खुजलाई जिससे उसका हाथ मेरे बाबूराव को छू गया। मुझे तो जैसे झटका सा लगा. फिर वो अपनी योनि खुजा कर सो गई लेकिन उससे मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने उसको करीब खींचा तो वो भी करीब आ गई।

मैंने अपना एक हाथ थोड़ा नीचे करते हुए उसकी गाण्ड पर रखा और आहिस्ता से उसका एक पैर मेरे पैर पर चढ़ा लिया। अब तक वो भी जाग चुकी थी. उसने भी अपना हाथ मेरे पीठ पर रख कर थोड़ा दबाया. इससे मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया। तो मैं आहिस्ता आहिस्ता उसके गाउन को ऊपर करने लगा. उसने कोई विरोध नहीं किया।

मैं उसका गाउन कमर तक ऊपर करके उसकी गाण्ड पर हाथ फेरने लगा। वो और भी गर्म होकर मुझसे चिपक गई। फिर मैंने उसका हाथ पकड़ कर नीचे मेरे बरमूडे के ऊपर से मेरे 7″ के बाबूराव पर रखा. तब उसने मेरा लौड़ा थोड़ा दबाया।

मुझसे अब बिल्कुल रहा नहीं जा रहा था। मैंने बरमूडा और चड्डी नीचे कर दी और पीछे से उसकी कच्छी में हाथ डालकर उसकी गाण्ड दबाई। तब पहली बार उसके मुँह से ‘उसस्स्स …’ की आवाज़ निकली।
मैंने उसको सीधा करके उसका गाउन और कच्छी निकाल फेंकी। जब मैंने उसके जिस्म को ऊपर से नीचे तक देखा तो मैं देखता ही रह गया।

फिर मैंने ब्रा के ऊपर से उसकी दाहिना चूचा मुँह में पकड़ा और हाथ को उसकी चूत पर फिराने लगा। तब उसने ‘अहह… आई उम्म्ह… अहह… हय… याह… यईईईई…’ की मादक सिसकारी निकाली।

अब वो मेरे लण्ड को आगे-पीछे करने लगी। मैं अपने होंठों से और जीभ से उसके जिस्म को चाटते हुए नीचे आने लगा और जब मैंने उसकी चूत पर मुँह रखा.. तो मुझे लगा कि यहाँ पर कोई भट्टी तप रही है।
फिर हम 69 में होकर एक-दूसरे के अंगों को चाटने और चूसने लगे। ऐसे ही करीब 15-20 मिनट बाद उसने पहली बार बोला- मामा अब बस करो और अपने लण्ड से मुझे चोद दो।

मैंने फिर उसकी गाण्ड उठा कर उसके नीचे तकिया रखा और पहली बार उसके होंठों पर होंठ रखे.. तब उसने हाथ नीचे करके मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत के मुँह पर लगा दिया। मैंने भी आगे-पीछे ना देखते हुए एक जोरदार धक्का मारा, मेरा पूरा का पूरा 7″ का लण्ड उसकी चूत में घुस गया।
उसको थोड़ा दर्द हुआ लेकिन उसने सहन कर लिया।

करीब 15 मिनट तक ताबड़तोड़ धक्के मारने के बाद मेरा माल छूटने वाला था तो मैंने उससे पूछा- कहाँ निकालूं?
उसने बोला- मामा अन्दर ही छोड़ दो.
अब तक वो दो बार छूट चुकी थी।
फिर मैं छूटने के बाद वैसे ही उसके ऊपर लेट गया और हम दोनों को नींद आ गयी.

सुबह जब मेरी नींद खुली, तब मैंने देखा कि मेरे ऊपर चादर है और रेखा सोनू को खिला रही है।
मैं बरमूडा पहन कर रेखा की तरफ ना देखते हुए अपने घर गया।

यह मेरे पहली कहानी है. अगर कोई ग़लती हुई हो तो लण्ड पकड़ कर माफी माँगता हूँ।
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