नारी की व्यथा

दोस्तो.. आप सबको सेक्स स्टोरी की इस मस्त साईट अन्तर्वासना पर मेरा बहुत प्यार।

कुछ लोग मुझे चालू लड़की समझ कर बहुत गंदे-गंदे कमेंट्स करते हैं, मैं उन लोगों से कहना चाहती हूँ कि प्लीज मुझ पर ऐसे कमेंट करने से तो अच्छा है कि वो मुझे मेल ही ना करें।

दोस्तो, क्या आज हमारे समाज में सिर्फ़ पैसा और सेक्स ही रह गया है..? हमारे जीवन में अब रिश्तों का कोई महत्व नहीं रहा?

आज मैं आपके सामने ऐसी ही एक फ्रेंड के बारे में बता रही हूँ, जो मुझे अन्तर्वासना से मिली है, मुझे उम्मीद है कि उसकी सच्ची घटना पढ़ कर आपको भी दिल रो पड़ेगा। उसकी तरफ से मैंने बस इस कहानी को शब्दों में पिरोया है।

मैं रिद्धिमा 22 साल की लड़की हूँ। मैं आपको अपने घर के बारे में बता दूँ, मेरे घर में मेरे माता-पिता और मेरा 18 साल का भाई और मुझे मिला कर 4 ही लोग रहते थे। हम मध्यमवर्गीय परिवार से सम्बन्ध रखते हैं। मेरे पिता जी शहर के एक स्कूल में बस चलाते थे और माँ घर में दर्ज़ी का काम करती थीं।

हमें स्कूल में ही एक छोटा सा 2 रूम का फ्लैट टाइप मिला हुआ था। माता-पिता ने हम दोनों भाई-बहन को बहुत लाड़-प्यार से बड़ा किया था। जिस स्कूल में पिता जी ड्राइवर थे, मैं और मेरा भाई उसी स्कूल में ही पढ़ते थे।

बात तब की है जब मैं जवान हो चुकी थी। एक दिन हम सभी अपनी नानी के घर घूमने गए। मेरी नानी हमारे पुश्तैनी गाँव से 50-60 किलोमीटर दूर के गाँव में रहती थीं। नानी के परिवार में दो मामा, एक मामी और नानी ही रहती थीं। मेरे बड़े मामा की शादी हो गई थी, वो अपनी पत्नी के साथ अलग रहते थे क्योंकि वो खेती करते थे और उन्होंने गाँव के बाहर खेतों में ही अपना छोटा से घर बना रखा था।

जब हम नानी के घर गए, तब नानी ने बहुत प्यार से हमारा स्वागत किया और हमें बहुत प्यार किया। मेरे छोटे मामा ये देख कर मुझे बहुत गहरी नजर दे देख रहे थे। पहले तो मुझे बहुत अजीब लगा लेकिन मैंने इस बात को नजरअंदाज कर दिया।

शाम को छोटे मामा (रवि) हम सभी को खेतों में घुमाने ले गए। इसके बाद वे हमें बड़े मामा के घर ले गए। वहाँ मामी और नानी माँ के साथ बातें होने लगीं और फिर पिता जी बड़े मामा के साथ चले गए।

रवि मामा ने घर में बोला कि मैं रिद्धिमा और अजय को घुमाने ले जा रहा हूँ।

लेकिन हम दोनों का उनके साथ जाने का मन नहीं था तब भी वो हमें चलने के लिए ज़िद करने लगे। मैं जाना तो चाहती थी, पर पता नहीं क्यों मामा के देखने का तरीका मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था.. इसलिए मैं मना करने लगी।

परन्तु मामा की ज़िद की आगे मुझे झुकना पड़ा और हम तीनों खेतों में चले गए। वहाँ जाकर पहले तो हम दोनों बहुत मस्ती की.. पर मैंने महसूस किया कि मामा मुझे किसी ना किसी बात को लेकर छू रहे थे. यह मुझे बहुत अजीब लग रहा था, परन्तु मैंने इसका विरोध नहीं किया।
मुझे भी थोड़ा मजा सा रहा था.. तब भी मैं बार-बार उनका हाथ जरूर हटा देती थी।

थोड़ी देर बाद मेरे मामा ने कहा- चलो अभी हम लोग लुका-छिपी का खेल खेलते हैं।

मामा ने मेरे भाई को पटा कर खेल शुरू कर दिया। खेल में पहले बारी मामा की आई। मामा ने दूर खड़े होकर अपने आँखों में हाथ रख लिया और हम दोनों छिप गए। भाई ने आवाज दे दी तो मामा आकर हमें ढूँढने लगे।

एक बार मुझे लगा कि शायद मामा ने मुझे खोज लिया.. परन्तु उन्होंने कुछ नहीं बताया और बाद में भाई को ढूँढ कर चिल्ला दिया और इस तरह भाई की बारी आ गई।

अब भाई दूर खड़ा हो गया और उसने अपनी आँखों पर हाथ रख लिए। मामा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खेतों में बने एक झोपड़े में ले गए और मेरे पीछे खड़े हो गए। मैंने वहाँ से बहुत छूटने की कोशिश की.. परन्तु मामा ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया और मेरे नाज़ुक शरीर के अंगों को छूने लगे।

मुझे मजा तो आया पर गुस्सा भी आया और मैं वहाँ से चली आई.. खेल खत्म हो गया और हम सब वापस आने लगे।

रास्ते में मामा ने मुझे रोका और बोला- अगर तूने घर पर किसी को कुछ बताया तो मैं तुम्हारी ही शिकायत कर दूँगा कि तुमने पहले मुझे छुआ था और ये भी ध्यान रखना कि मैं तुम्हारे भाई को खेलते-खेलते कहीं गिरा दूँगा।

मैं अन्दर से मुस्कुरा रही थी.. पर मैं चुपचाप रही। उस रात को बड़े मामा के घर ही रुकना हुआ और रवि मामा वापिस अपने घर यानि गाँव में चले गए।

अब मैंने बड़ी राहत की साँस ली। रात को पिता जी और बड़े मामा शराब पी कर सो गए। इधर मैं और भाई कब सो गए, पता ही नहीं चला। शायद उस दिन थकान की वजह से गहरी नींद आ गई थी।

रात को मुझे पानी की प्यास लगी मैंने उठ कर पानी पीने चली गई। वापिस आई तो मैं लेटी थी पर मेरे दिमाग में मामा की हरकतें घूम रही थीं, जिस वजह से मुझे नींद नहीं आ रही थी।

कुछ देर बाद शायद माँ ने मुझे जागते हुए देखा तो उन्होंने पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं.. बस ऐसे ही थोड़ा जी घबरा रहा था।
तो माँ ने कहा- आ मेरे पास लेट जा।

मैं उनके पास लेट गई और इससे पहले कि मैं माँ से मामा की बात बताती और मामला आगे बढ़ता, कब सुबह हो गई.. मुझे पता ही नहीं चला।

सुबह घर जाने मैंने देखा मामा माँ और पिता जी से कुछ बातें कर रहा था। उसकी बात माँ ने मुझे बताई कि तेरी नानी की तबीयत कुछ ठीक नहीं रहती और मामा को घर के काम में बहुत परेशानी होती है, इसलिए तुम और मैं कुछ दिनों के लिए नानी के पास रहेंगे और तुम्हारे पिता जी और भाई को वापिस जाना है।

मैंने वापस जाने के लिए बहुत जिद की, परन्तु माँ ने मेरी एक ना सुनी।

इस तरह हम दोनों बड़े मामा के घर से छोटे मामा के घर की तरफ़ चल दिए।

मैं मामा और माँ जा रहे थे.. तब मैंने मामा की आँखों में अजीब सी चमक देखी। मामा पूरे रास्ते मुझे ही घूरते रहे।

हम सब घर पहुँच गए और नानी का हाल-चाल पूछने लगे। उस दिन उनकी तबीयत कुछ ठीक थी और नानी ने हमारे लिए चाय बनाकर हमें दी।

अब मामा मुझे चाय देने या कोई ना कोई बहाना बना कर मुझे छूने की कोशिश कर रहे थे। चाय पीने के बाद मामा बोले- तुम थक गई होगी.. अन्दर जा कर आराम कर लो।

माँ ने भी मामा की हाँ में हाँ मिला दी और मुझसे बोला- मैं तेरी नानी के पास की रुक जाती हूँ, तू अन्दर जाकर सो जा।

मैं क्या कर सकती थी, उनकी बात मान कर मैं अन्दर चली गई। अन्दर कमरे में जाकर मैं लेट गई, पर रास्ते में मामा के बारे में सोच-सोच कर मुझे नींद नहीं आ रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने नहाने की सोची और उठ कर बाथरूम में घुस गई। अब मैं मामा की छेड़ने की हरकतों से गरम होकर अपनी चूत को रगड़ रही थी और दूध दबा रही थी।

जब मैं नहा कर बाहर आई तो देखा कि मामा मेरे कमरे में हैं.. उन्हें देखते ही मैं डर गई।

अभी मामा मुझे घूर रहे थे.. मुझे गुस्सा आ रहा था। मैंने मामा को कमरे से जाने के लिए बोला.. परंतु मामा कोई बहाना करके मेरे पास आए और मुझे किस करने लगे।

मैंने मामा को धमकाते हुए बोला- मैं माँ को सब कुछ बता दूँगी।

उसके बाद मामा ने मुझे धक्का दे कर नीचे गिरा दिया और अपनी जेब से मोबाइल निकाल कर मुझे दिखाने लगे।

उनके मोबाइल में मैं अपनी नहाते समय की वीडियो देख कर बहुत परेशान हो गई।

मामा ने बोला- अगर तूने अपनी माँ को कुछ भी बताया तो ये मैं तुम्हारे पिता जी को दिखा दूँगा।

मैं डर गई और इसी बात का फायदा उठा कर मामा मुझे बिस्तर में गिरा कर मेरे पास लेट गए।

मामा ने बोला- तेरी माँ और नानी पड़ोस में गए हैं, तेरे शोर मचाने से भी कुछ नहीं होगा।

उसके बाद वो मेरे कपड़े उतारने लगे और मुझे पूरी नंगी कर दिया। मैं चुपचाप कसमसा रही थी, पर कुछ कर नहीं रही थी।

इसके बाद मामा खुद भी नंगे हो गए और मेरे ऊपर चढ़ गए। उम्म्ह… अहह… हय… याह… उन्होंने मेरा कौमार्य भंग कर दिया। मैं भी दर्द से तड़फती हुई अपनी सील तुड़वाती रही।

मुझे दर्द तो हुआ था पर मजा भी आया था।

उसके बाद मामा को जब भी मौका मिलता, वो मेरी चुदाई कर देते। मुझे उनकी चुदाई से मजा तो आता था पर तब भी मैं खुद से चुदने की नहीं कहती थी।

हम लोग जितने दिन भी वहाँ रहे, मामा ने मेरे साथ चुदाई का खेल खेला। जब मैं वहाँ से माँ के साथ वापस आ रही थी, तब रास्ते में मैंने माँ को दबी जुबान से मामा की बुराई की, तो माँ मुझे ही गालियां देने लगीं।

मुझे कुछ हैरानी तो हुई पर बाद में मुझे मालूम चल गया था कि माँ मामा से आर्थिक मदद लेती थीं।

वो बोलीं- तेरे मामा ने मुझे तेरी शादी करने की बात की है कि अब तू बड़ी हो गई है।

उसके बाद मामा जब भी हमारे घर आते तब भी माँ उन्हें घर पर मेरे साथ छोड़ कर बाहर चली जातीं और मामा मुझे हचक कर चोदने में लग जाते।

कुछ दिनों बाद तो मामा मुझे माँ के सामने ही मेरे दूध दबा कर मुझसे मजाक करने लगे।

फिर मामा ने मेरी शादी एक थुलथुल किस्म के लाला से करा दी.. जो मुझसे उम्र में बहुत बड़ा है। बस वो पैसे वाला था।

शादी की पहली ही रात मुझे पता चला कि मामा ने लाला से मुझे चोदने की तय करके मेरी शादी उससे कर दी है। क्योंकि मामा ने लाला को दारु पिला कर उसके सामने ही मुझे हचक कर चोदा।

कुछ दिन बाद मामा की शादी हो चुकी थी, परन्तु फिर भी वो कभी-कभी मुझसे मिलने आते हैं.. और मेरी चुदाई करते हैं। मुझे मजा तो आता है क्योंकि मेरा पति मुझे चोद नहीं पाता है।

मैं समाज के डर से आज भी उनका विरोध नहीं कर पाती हूँ।

पति के न चोद पाने के कारण मैं अपनी चुत की आग बुझाने के लिए घर के नौकरों से भी चुद जाती हूँ।

इस तरह मेरी लाइफ एक वेश्या की तरह हो गई है.. ऐसी जिंदगी का क्या फायदा.. जिसने रिश्तों और विश्वास को ही ख़त्म कर दिया हो।

दोस्तों कुछ लोगों को यह कहानी पसंद नहीं आएगी.. क्योंकि इसमें कोई मिर्च मसाला नहीं है.. परन्तु मैं कहना चाहती हूँ कि इस कहानी को आप लोग जरूर पढ़ें और एक नारी की मनोदशा को समझें।

धन्यवाद।
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