लागी लंड की लगन, मैं चुदी सभी के संग- 53

(Lagi Lund Ki Lagan Mai Chudi Sabhi Ke Sang- Part 53)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

होटल आकर हम ससुर बहू ने जल्दी-जल्दी कुछ खाया और कमरे में पहुंच गये।
मैं निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी।

ससुर जी ने मुझे मोहिनी की कुंवारी गांड का उदघाटन करने देने के लिये शुक्रिया किया।

बस मुझे नींद आ रही थी, हमारे पास कम से कम 6-7 घंटे का समय गाड़ी पकड़ने के लिये था, मैं फ्रेश हो जाना चाह रही थी।
मेरे ससुर जी मेरी बगल में लेटे हुए थे, मैं उनसे चिपक कर लेट गई।

करीब चार घंटे के बाद हम दोनों की नींद खुली, मैं अपने आपको तरोताजा महसूस कर रही थी।
मेरी ओर देखते हुए ससुर जी बोले- क्या तुम मेरी मालिश कर दोगी?

अभी भी हमारे पास दो-तीन घंटे थे, मैं चाहती थी कि घर पहुँचने तक 14-15 घंटे जो मेरे पास थे मैं ससुर जी को और देना चाहती थी। क्योंकि मुझे पता नहीं था कि घर पहुँचने के बाद मैं उनके करीब रह पाऊँगी या नहीं। इसलिये घर पहुँचने से पहले ससुर जी मेरे साथ जो करना चाहें या मुझसे जो करवाना चाहें, मैं तैयार थी।

मैं उठी, ससुर जी के कपड़े उतारने लगी और उनको नंगा कर दिया, उसके बाद मैं भी अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई।
ससुर जी पेट के बल लेट गये और मैंने मालिश की शुरूआत उनके पीठ से करनी शुरू की।

धीरे-धीरे मालिश करते हुए मैं उनके नीचे के हिस्से पर पहुंच गई, मालिश करते हुए मेरी उंगली उनके गांड के अन्दर जाने लगी।
ससुर जी भी अपनी सांसो को तेज करने लगे।
बड़ी टाईट गांड थी उनकी, लेकिन तेल लगाने से उनकी गांड ने मेरी उंगली को जाने का रास्ता देना शुरू कर दिया था और थोड़े प्रयास से मेरी पूरी उंगली उनकी गांड के अन्दर जाने लगी।

थोड़ी देर तक उंगली करने के बाद ससुर जी सीधे हुए, मैं उंगली को सूंघते हुए उसे अपने मुंह से भर ली और फिर ससुर जी के सीने पर चढ़ गई और वही उंगली को उनके मुंह में घुसा दी। ससुर जी ने भी बड़े प्यार से मेरी उंगली को चाटा।

होटल रूम में ससुर ने बहू को चोदा

फिर मैंने उनकी छाती वगैरह की मालिश की, उनके निप्पल और लंड पर तो मेरा हाथ खासा मेहरबान था। मालिश करने के बाद एक बार फिर मैं ससुर जी की छाती पर चढ़ कर बैठ गई और उनके हाथों को पकड़कर अपने मम्मे के ऊपर रख दिया।

ससुर जी के हाथों ने अपना कमाल दिखाना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर अपने मम्मों को दबवाने के बाद मैंने अपनी चूत को उनके मुंह से सटा दिया।
मेरा पानी निकलने वाला था इसलिये चूत को उनके मुंह से सटा दिया ताकि मेरे निकलते हुए पानी का मजा मेरे ससुर जी लें।

जैसे ही उनकी जीभ ने मेरी पुतिया को टच किया, मेरी चूत ने धैर्य छोड़ दिया और बहने लगी।
ससुर जी ने भी बड़े इत्मीनान के साथ मेरे से निकलते हुए रस को चाट-चाट कर साफ किया। उनके थूक से मेरी चूत काफी गीली हो चुकी थी और चुनचुनाहट भी हो रही थी।

मैं वापस लंड की तरफ आई, उनके तने हुए लंड को हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के मुंह से सेट करके हल्के से जोर के साथ लंड को अपने अन्दर ले लिया।

मैं ससुर जी के ऊपर उछल रही थी और ससुर जी मेरे साथ मेरी उछलती हुई चूची को पकड़ पकड़ कर दबाते जा रहे थे।
मेरी स्पीड और बढ़ गई। इधर ससुर जी भी अपने लंड को मेरे अन्दर पूरा घुसेड़ने के लिये जोर लगा रहे थे। सिसकारते हुए ससुर जी बोले- मेरी बहू रानी, मेरा पानी भी छूटने वाला है, अपने अन्दर लोगी या फिर मुंह से इसका मजा लोगी?

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