लड़कपन की यादें-9

(Ladakpan Ki Yaden-9)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

मैं स्खलित होकर उसके ऊपर ही लेट गया था और हम कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। जब वासना का ज्वार थोड़ा शांत हुआ तो पता चला कि मेरा वीर्य उसकी योनि में ही छूट गया है।

वो तुरंत उठकर टॉयलेट की ओर भागी और अपनी योनि को अच्छी तरह से धो कर आई और सुबक-सुबक कर रोने लगी तो जैसे-तैसे हम दोनों ने उसे चुप कराया, पर सच में तीनों बहुत डर गये थे कि कहीं अनन्या प्रेग्नेंट नहीं हो जाए।

उन दिनों प्रेग्नेन्सी टेस्ट के लिए आज जैसे आसान किट भी अपलब्ध नहीं थे जिनमें स्त्री-मूत्र की एक बूँद डालने से प्रेग्नेन्सी टेस्ट हो जाता है इसलिए हम तीनों की हालत ख़राब थी कि अब क्या होगा।

तीनों अपने-अपने कमरे में चले गये पर सारा मज़ा काफूर हो गया था, तीनों भविष्य के बारे में सोच-सोच के परेशान हो रहे थे कि जिस खेल को आसानी से चुपचाप खेल रहे थे उसका अब सबको पता चलने वाला था।

अब आगे-

जैसे-तैसे एक दिन निकला… हम तीनों एक दूसरे से कटे-कटे रहने लगे थे। हालांकि तीनों तब भी दोपहर में घंटों मेरे कमरे में बैठकर आगे क्या करना है, उसके बारे में चर्चा करते रहे पर कुछ खास हल नहीं निकला।

यह दिन भी बहुत तनाव भरा निकला पर अगले दिन सुबह-सुबह ही अनन्या और सोनी दौड़ती हुई मेरे कमरे में आई और मुझे खुशखबरी सुनाई कि अनन्या को पीरियडज़ आ गए हैं, तब हम तीनों की जान में जान आई कि थैंक गॉड… आज तो आपने हमें बचा लिया।

खैर… अब सब समस्या का निवारण हो गया था और अब हम तीनों आपस में काफी खुल गये थे इसलिए फिर से नई सीडी देखने की योजना बनाने लगे क्योंकि पोर्टेबल टीवी और सीडी प्लेयर फिर से डैडी के कमरे में चला गया था।

किस्मत से उसी दिन दोपहर बाद दोनों बुआ और मम्मी शॉपिंग करने निकलीं तो उन्होंने सोनी और अनन्या को भी अपने साथ चलने को कहा पर दोनों कुछ बहाना बनाकर मना कर दिया।

अब हम तीनों घर में अकेले थे इसलिए आज हमने डैडी के रूम में ही सीडी देखना तय किया और सबसे पहले घर का मुख्य द्वार अन्दर से लॉक किया और डैडी के कमरे में जाकर एसी ओन किया और डैडी की अलमारी से कई मस्त इंग्लिश मूवीज की सीडीज निकाली।

हर सीडी की मूवी मैं देख चुका था इसलिए मैंने उनमें से सबसे अच्छी सीडी निकाली और जल्दी से चला कर बिस्तर पर आकर बैठ गया।

दोनों बैड पर ही बैठी थी लेकिन आज डर से कुछ दूरी बनाये हुए थी।

हालांकि मुझे पता था कि जल्दी ही यह दूरी खुद मिट जायेगी।

मूवी शुरू हुई… स्टोरी कुछ खास नहीं थी और बहुत जल्दी सैक्स शुरू हो गया।

उसमें भी दो लड़कियों के साथ एक लड़का था पर दोनों कहानियों में ये फर्क था कि वहाँ वो लड़कियाँ उस लड़के को सैक्स करने के लिए उकसा रही थी और यहाँ ये दोनों लड़कियाँ सैक्स करने से डर रही थी।

उनको उकसाने के लिए मैंने अपना लिंग बाहर निकल लिया और उनके सामने ही हस्तमैथुन करने लगा।

जल्दी ही मेरा लिंग स्खलित भी हो गया तो मैं उठ कर टॉयलेट में गया और लिंग को धो कर आया तो देखा कि सुनीता सोनी भी अपने अंतःवस्त्रों में हाथ डाल कर अपनी क्षुधा शांत करने की नाकाम कोशिश कर रही थी।

मैंने धीरे से उसे कहा- मेरे पास कंडोम है… आज कोई गड़बड़ नहीं होगी..!

सोनी ने अनन्या की ओर देखा तो अनु ने कहा- मेरी तरफ क्यों देख रही हो… मैं तो वैसे भी पीरियड में हूँ… पर बी केयरफुल… हम्म..!
सोनी जैसे अनु की अनुमति के इंतज़ार में ही थी इसलिए तुरंत उठ कर कपड़े उतारने लगी।

मैं भी तुरंत उठा अपनी पीछे की पॉकेट से कंडोम का पैकेट निकाल कर बिस्तर पर रखा और अपनी पैंट, टी-शर्ट निकाल कर सोनी पर टूट पड़ा।

सोनी केवल पैंटी में बैड पर लेटी थी इसलिए मैं उसके उरोजों को चूसने लगा।

कुछ देर चूसने के बाद मैं धीरे-धीरे उसकी नाभि पर जीभ लगा कर चाटने लगा तो उसकी सिसकारियाँ निकलने लगीं।

मैंने धीरे से नीचे की ओर बढ़ते हुए उसकी पैंटी पर अपना मुख रखा और ऊपर से ही उसे चूमने लगा।

कुछ ही सैकेंड में उसकी योनि में से यौवन-रस बहने लगा और उसकी पेंटी भी हल्की गीली हो गई।

तो मैं धीरे से उँगलियों से उसकी पेंटी को खोलने लगा।

उसने तुरंत अपने नितम्ब उठा कर पेंटी को खोलने में सहमति प्रदान की, मैंने पेंटी को खींच कर उतार फेंका फिर धीरे से उसकी टांगों को चौड़ी कर के उसकी उभरी हुई योनि के खड़े गुलाबी भगोष्ठ को अपनी उंगली से हल्का सा फैलाया और अपनी जीभ उस पर टिका कर उसे चूसने लगा।

उसने अपने हाथों से चादर को भींच लिया था और फिर एक हाथ मेरे सिर पर फिराने लगी।

अब उसकी योनि चूसना मुझे भी अच्छा लगने लगा था इसलिए उसकी योनि में जीभ डाल कर चूसने लगा।

वैसे भी रति-क्रीड़ा में अपने साथी को आनन्द देना ही सही रूप में रति-क्रीड़ा का आनन्द उठाना है।
कुछ मिनटों बाद मैं बैड पर लेट गया और उसे 69 पोजीशन में आने को कहा तो वो उठकर मेरे ऊपर आई और घुटनों को मेरी छाती के पास रख कर अपनी योनि को मेरे मुख के पास सेट कर घोड़ी बन कर बैठ गई।

मैं चाहता था कि वो मेरे लिंग को हाथ में पकड़े व मुँह में लेकर चूसे पर उसे कहने में संकोच कर रहा था और वैसे भी मैं कुछ ही देर पहले स्खलित हुआ था इसलिए लिंग पुनः पूरी तरह से उत्थित नहीं हो पाया था।

आखिर अपने संकोच को छोड़कर मैंने उसे अपने लिंग को हाथ में पकड़ कर हिलाने का आग्रह किया तो उसने मेरे लिंग को हाथ में पकड़ लिया और उसके खोल को ऊपर नीचे करने लगी।

उसके हाथ में लेते ही मेरा लिंग पुनः उत्थित होकर कठोर हो गया जिससे वो ऐसे खेलने लगी जैसे कोई बालक अपने पसंदीदा खिलौने से खेलता है।

अनु भी उत्सुकतावश उठकर हम दोनों के पास आई और मेरे लिंग को मुट्ठी में भर कर ऊपर नीचे करने लगी।

उन दोनों के हाथों का स्पर्श सच में बहुत आनन्ददायक था।

मैंने अनु को कहा- अनु… प्लीज इसको मुँह में लो… तुमको भी बहुत अच्छा लगेगा… मम्मा भी डैडी का हमेशा मुँह में लेती हैं। मैं इसको अभी क्लीन करके ही आया हूँ… प्लीज… लो ना..!

अनु ने सोनी की ओर देखा, मुस्कुराते हुए मेरे लिंग के अग्रभाग को पहले जीभ से चाटा और फिर अपने होठों में भर कर चूसने लगी।

पहली बार में उसे उबकाई सी आ गई पर कुछ ही क्षणों में वो किसी अनुभवी खिलाड़ी की भांति मेरे लिंग को अपने मुँह में अन्दर-बाहर करने लगी।

उन पलों का स्वर्ग का वो अहसास आज भी मेरे मन में ताज़ा है।

आनन्द के सागर में गोते लगाता मैं उसी समय स्खलित हो जाता पर अभी कुछ ही देर पहले हस्तमैथुन कर चरमोत्कर्ष पाया था इसलिए अपने आप मेरा स्टेमिना बढ़ गया था।

कभी भी अधिक देर तक सैक्स के मैदान में अपने साथी के सामने टिका रहना हो अथवा एक से अधिक साथियों को संतुष्ट करना हो तो पहले दौर के कुछ पहले हस्तमैथुन कर लेने से अगला दौर काफ़ी लम्बा हो जाता है और शारीरिक थकान भी नहीं रहती।

खैर… पुनः कहानी पर आता हूँ!

सोनी अनु को लिंग चूसते बड़ी उत्सुकता से देख रही थी, साथ ही वो खुद भी मादक सिसकारियाँ निकाल रही थी क्योंकि 69 पोजीशन में उसकी योनि में मेरी जीभ छेदन कर रही थी।

कुछ मिनटों के बाद मैंने उसके कूल्हे पर चपत लगाकर उठने का इशारा किया और उसे नीचे लिटाकर उसके नितम्बों के नीचे एक तकिया लगा दिया।

मैं घुटनों के बल बैठ गया और पास पड़ा कामसूत्र का पैकेट खोलकर कंडोम को अपने लिंग पर चढ़ा लिया।

मुझे आज भी याद है कि कामसूत्र नाम का कण्डोम बाज़ार में नया आया था और पुराने फ़िल्म अभिनेता कबीर बेदी और प्रोतिमा बेदी की पुत्री पूजा बेदी ने इस कण्डोम के विज्ञापन में पूर्ण नग्न दृश्य दिये थे।

किसी अनुभवहीन के लिए लिंग पर कंडोम चढ़ाना बहुत मुश्किल काम होता है पर मैं पहले कई बार कंडोम पहन कर हस्तमैथुन कर चुका था इसलिए मुझे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।

अनु और सोनी दोनों उत्सुकतावश मुझे यह करते देख रही थीं।

कंडोम चढ़ाकर मैंने सोनी की टांगों के बीच अपनी पोजीशन ली, अपनी तर्जनी उंगली को उसकी योनि में घुसाकर गीलापन चैक किया।

कामातुर सोनि की योनि पर्याप्त गीली थी इसलिए मैंने अपने लिंग को उसकी भगनासा पर सेट किया और धीरे से लिंग को उसकी योनि में प्रवेश कराया जिसे उसने आनन्द और दर्द मिश्रित सीत्कार के साथ भीतर ले लिया।

मैंने अपने दोनों हाथ उसकी छाती के दोनों ओर बिस्तर पर रखे और पुश-अप्स (एक प्रकार की कसरत) करने के अंदाज़ में अपने लिंग को उसकी योनि के अन्दर-बाहर करने लगा।

कहानी जारी रहेगी।

इस कहानी के लेखन और विशेषकर संपादन में अन्तर्वासना के ही एक लेखक ‘प्रीत आर्य’ ने मेरी बहुत मदद की इसके लिए मैं उनका हृदय से आभारी हूँ।
प्रीत आर्य जी की कहानियाँ आप यहाँ पढ़ सकते हैं!

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आपके कई email मुझे प्राप्त हो रहे हैं और मैं हमेशा प्रयास करता हूँ कि उनका उत्तर भी समय पर दूँ परन्तु यदि किसी कारणवश उत्तर में देरी हो तो क्षमा करें।

मैं कोई दलाल या सैक्स एजेंट नहीं अतः किसी प्रकार का जुगाड़ करने के विषय में न कहें।

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