होली के बाद की रंगोली-07

(Holi Ke Baad Behan Ke Sath Rangoli- Part 7)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अब तक आपने पढ़ा कि रूपा ने सचिन से अपनी नजदीकियां कुछ ज्यादा ही बढ़ा ली थीं। उधर सोनाली और पंकज ने भी उसको पूरी छूट दे दी थी। सचिन रूपा को अपने सारे राज़ बता चुका था और उसके साथ थोड़ी मस्ती भी हो गई थी। लेकिन अब वो सोने के लिए रूपा के कमरे में जा रहा था.
अब आगे…

भाभी के भाई का भोग
आखिर सचिन ने सब सोचना बंद करके सीधे बात करने की ठान ली। एक बात तो सच है कि शराब पीने के बाद दिमाग भले ही कम काम करे, लेकिन शायद इसी वजह से इंसान में हिम्मत बहुत आ जाती है क्योंकि दिमाग फिर बार-बार रोक-टोक नहीं करता।
सचिन सीधे रूपा के रूम में गया और उसके बाजू में धड़ाम से जा कर लेट गया।

रूपा- क्या हुआ? एक ही पेग में चढ़ गई?
सचिन- पता नहीं यार, पहली बार पी है तो समझना मुश्किल है कि चढ़ी या नहीं लेकिन इतना पक्का है कि तुम अभी तक दो तो दिखाई नहीं दे रही हो।
रूपा- हुम्म्म… मतलब ज़्यादा नहीं चढ़ी है।
सचिन- अब यार कितनी चढ़ी है वो तो पता नहीं लेकिन अभी इतना दिमाग काम नहीं कर रहा कि तुमको सेक्स के लिए पटा पाऊं। सुबह से जो भी तुम इशारे कर रही हो उनसे ये तो समझ आ गया है कि करना तुम भी चाहती हो लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों सही से मूड नहीं बन पा रहा।
रूपा- तुम्हारा मलतब जैसा मूड फिल्म देखते समय बना था वैसा?
सचिन- हुम्म्म!

इतना कह कर रूपा सचिन के पास आ गई और उस से चिपक कर लेट गई। दरअसल सचिन को नशे की वजह से इतनी हिम्मत तो मिल गई थी कि उसने सबकुछ साफ़ साफ़ बेझिझक कह दिया लेकिन उसी नशे की वजह से उसका सारा शरीर ही धीमा हो चुका था और वो कोई उत्तेजना महसूस नहीं कर पा रहा था। रूपा को चोदना चाहता तो था, और रूपा ने मना भी नहीं किया था लेकिन चोदने के लिए लंड भी तो खड़ा होना ज़रूरी था।

वैसे तो लंड को भी हिला के रगड़ के खड़ा किया जा सकता था। जैसे अलाउद्दीन के चिराग को रगड़ने से जिन्न निकल आता है वैसे ही लंड भी खड़ा किया जा सकता है, लेकिन फिर जिन्न को काम क्या दोगे? खम्बे पर चढ़ने और उतरने का? चुदाई की सबसे बड़ी समस्या जो लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर जाते हैं, वो यही है। लंड को उत्तेजित करना कोई बड़ी बात नहीं है, उस से ज़्यादा ज़रूरी है दिमाग़ को उत्तेजित करना।

कामशास्त्र का इतना ज्ञान सचिन को तो नहीं था, लेकिन फिर भी उसकी सोच यही थी और वो समझ नहीं पा रहा था कि कमी किस बात की है? खुशकिस्मती से रूपा को इतना अनुभव हो गया था की वो समझ गई। उसने मामले को सही लाइन पर लाने के लिए विषय बदला।

रूपा- अच्छा ये बताओ कि दोपहर को जो तुम अपनी दीदी और अपनी कहानी सुना रहे थे वो आगे क्यों नहीं बढ़ी। तब भी ऐसा ही कुछ हुआ था क्या? सही मूड नहीं बन पाया?
सचिन- नहीं यार, तब तो सारा टाइम मूड बना रहता था लेकिन हिम्मत नहीं हुई?
रूपा- किस बात के डर से हिम्मत नहीं हुई? कहीं दीदी मम्मी को न बता दे?
सचिन- वो तो बाद की बात है। पहली बात तो यही है न की अगर दीदी को बुरा लग जाता, तो जो हमारा लुका-छिपी में खेल चल रहा था वो भी खत्म हो जाता। असली डर तो ये था।

रूपा- अच्छा मान लो अगर तुमको भरोसा हो जाए कि दीदी को बुरा नहीं लगेगा तो क्या तुम उनको चोद दोगे?
सचिन- क्या बात है यार, तुम तो एकदम सीधे सीधे बोल देती हो।
रूपा- यार, सीधे बोलने से ही तो मूड बनता है न।

इतना कह कर रूपा ने सचिन का लंड पकड़ कर हल्का सा दबा दिया। वो केवल ये देखना चाहती थी कि सचिन कितना उत्तेजित हुआ है। अभी तक सचिन का लंड थोड़ा बड़ा तो हो ही गया था लेकिन रूपा के छूने से थोड़ा कड़क भी हो गया।

रूपा- बताओ न?
सचिन- अब यार… अब तो उनकी शादी हो गई है न और वो भी तुम्हारे भाई से तो अब मैं क्या बोलूं?
रूपा- अरे यार मुझसे क्या शर्माना, मैं कौन सी दूध की धुली हूँ?
सचिन- अरे हाँ! दोपहर को तुमने बताया था। मुझसे तो सारी कहानी पूछ ली थी लेकिन खुद की कहानी नहीं बताई थी। अब तो पहले तुम बताओ।

रूपा- क्या बताऊँ यार, बता तो दिया था कि मैं भैया को नहाते हुए देखती थी। लेकिन तुम्हारे जैसा कुछ नहीं हुआ था हमारे बीच। मुझे कभी नहीं लगा कि उन्होंने कभी मुझे देखा हो।
सचिन- हाँ लेकिन तुम्हारा कभी मन नहीं हुआ आगे कुछ करने का?
रूपा- होता तो था… भैया के लंड के बारे में सोच सोच के अपनी चूत में उंगली कर लिया करती थी।

रूपा के मुँह से ऐसी बात सुन कर सचिन की आँखों में थोड़ी चमक आई और उसके लंड ने भी अंगड़ाई ली। उसने रूपा को अपनी बाँहों में ले कर कहा।

सचिन- मतलब अगर तुमको मौका मिलता तो तुम अपने भाई से चुदवा लेतीं?
रूपा- मौका मिले, तो मैं तो अब भी चुदवा सकती हूँ। और तुम?
सचिन- अब तक तो कभी हिम्मत नहीं हुई थी लेकिन अब अगर मौका मिला तो चोद दूंगा।

इतना कह कर सचिन पूरी तरह उत्तेजित हो गया और उसने अपने होंठ रूपा के होंठों से लगा दिए। सचिन का ये पहला मुख-चुम्बन (फ्रेंच किस) था। मन से तो वो पहले ही उत्तेजित हो चुका था लेकिन रूपा के होंठों का स्पर्श जितना कोमल था उतना ही कठोर अब उसका लिंग हो गया था। रूपा अनुभवी थी, उसने धीरे से अपनी जीभ सचिन के होंठों के बीच सरका दी। सचिन को एक बिजली का झटका सा लगा और उसने रूपा का एक स्तन अपने हाथों से पकड़ लिया।

एक और दोनों की जीभें एक दूसरे से लिपटने को बेचैन हो रहीं थीं तो दूसरी और दोनों शरीर भी एक दूसरे के और करीब आ जाना चाहते थे। दोनों के बीच से वस्त्र जैसे अपने आप ही सरक कर अलग होते चले गए। सचिन का एक हाथ रूपा के एक नग्न स्तन को मसल रहा था तो दूसरा उसे आलिंगन में लिए उसके नितम्बों पर फिसल रहा था। रूपा ने दोनों हाथों से सचिन को अपने बाहुपाश में जकड़ा हुआ था।

रूपा एक हाथ से सचिन के सर को पीछे से सहारा दे कर चुम्बन में व्यस्त थी। दूसरा हाथ सचिन के नितम्बों के साथ खेल रहा था। कभी कभी उन्हें दबा कर रूपा अपनी नर्म जाँघों को सचिन के कठोर लिंग से गुदगुदा भी रही थी।

चुम्बन इतना चुम्बकीय था कि दोनों को कुछ समय से ठीक से सांस लेने का मौका भी नहीं मिल पाया था। एक क्षण के लिए जब दोनों सांस लेने के लिए अलग हुए तो दोनों ने अपने सीने के ऊपरी हिस्से में सिमटे टी-शर्ट निकाल फेंके। अब दो पूर्णतः नग्न शरीर एक दूसरे में समा जाने के लिए फिर से मचलने लगे। कभी सचिन ऊपर तो कभी रूपा। इस बार जब रूपा ऊपर आई तो उसने सचिन के लिंग को अपनी उंगलियों से अपनी योनि का रास्ता दिखा दिया।

सचिन तो जैसे स्वर्ग की सैर पर निकल गया हो। उसने कभी सपने में भी ऐसा अनुभव नहीं किया था। हमेशा हाथ की कड़क मुट्ठी में हिलने वाला उसका लिंग आज रूपा की कोमल और चिकनी, रसीली योनि में फिसल रहा था। जल्दी ही वो इस नए अहसास की अनुभूति में डूब कर रूपा की चूत में हिचकोले खाने लगा। कभी वो रूपा के दोनों स्तनों को अपने हाथों में भर कर सहलाता तो कभी एक हाथ की उंगलियाँ उसके नितम्बों को सहलातीं और दूसरे से वो रूपा का एक स्तन पकड़ कर उसका रास पीता।

न तो नंगे जिस्मों की मस्ती रुकी और न चुदाई का इंजिन रुका। आज दिन में ही हस्तमैथुन कर लेने के कारण और शायद नशे की खुमारी की वजह से भी वो काफी देर तक रूपा को चोदता रहा और फिर उसकी चूत में ही झड़ गया। रूपा भी झड़ गई थी लेकिन एक बार से उसका क्या होना था। उसने तुरंत पोजीशन बदली और अब सचिन के चुम्बन के लिए रूपा के दूसरे होंठ उसके सामने थे। सचिन ने पहली बार इतनी पास से किसी लड़की की चूत को देखा था इसलिए वो उस पर टूट पड़ा।

दोनों अब भी एक दूसरे से वैसे ही नंगे लिपटे थे बस फर्क ये था कि अब वो दोनों एक दूसरे के होठों को नहीं बल्कि एक दूसरे के गुप्तांगों को चूम रहे थे। सचिन ने आज न केवल किसी लड़की की चूत को चूमा था बल्कि पहली बार उसने अपने ही वीर्य का स्वाद भी चखा था। इन सब के साथ रूपा ने इस निपुणता से सचिन के लंड को चूसा दो मिनट में वो वापस फौलाद का लंड बन गया और एक बार फिर सचिन के इंजिन का पिस्टन फुल स्पीड पर चल पड़ा।

अभी तक तो रूपा बस एक बार ही झड़ी थी लेकिन इस बाद तो उसके झड़ने की कोई गिनती ही नहीं थी। सचिन उसे चोदता रहा और वो झड़ती रही। एक के बाद एक जैसे झड़ने की झड़ी लगी हो। इतना मज़ा तो उसे उसके भाई के साथ भी कभी नहीं आया था। आखिर जब सचिन झड़ा तो उसने अपनी कमर उत्तेजना में ऊपर उठा दी और रूपा उसके ऊपर निढाल पड़ी रही। सचिन का लंड उसकी चूत में फव्वारे पर फव्वारे छोड़ रहा था और रूपा की चूत उसके लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई स्ट्रॉ से जूस चूसता है।

इन सब में कब सारी रात निकल गई थी पता ही नहीं चला। लेकिन जब दोनों की सांस में सांस आई तो सचिन ने कहा।

सचिन- आई लव यू रूपा!
रूपा- आई लव यू टू सचिन!

और दोनों वैसे ही नींद के आगोश में खो गए। सुबह जब सचिन की आँख खुली तो उसने पाया कि रूपा अब भी उसके ऊपर ही थी और उसका लंड अब भी उसकी चूत के मुँह से चिपका पड़ा था। सचिन के हिलने से रूपा की नींद भी खुल गई।

सचिन ने कहा- मुझसे शादी करोगी?
रूपा- हाँ, तुम नहीं पूछते तो शायद मैं ही पूछ लेती।
सचिन- मैं वादा करता हूँ फिर कभी दीदी के बारे में ऐसा वैसा नहीं सोचूंगा।
रूपा- हुम्म्म! तुमने ऐसा क्यों कहा?
सचिन- अब अगर हम शादी करेंगे तो तुमको शायद अच्छा न लगे कि मैं किसी और के बारे में ये सब सोचूं, इसलिए।

रूपा- हाँ, लेकिन याद करो कि ये हमारी रात भर की धमाकेदार चुदाई शुरू कैसे हुई थी? जब हम दोनों ने एक दूसरे से ये कहा था कि हम अपने भाई-बहन के साथ चुदाई करने के लिए तैयार हैं। और सच कहूँ तो इसी चुदाई ने हमें इतना करीब ला दिया कि रात को हमको प्यार हुआ और सुबह हम शादी के सपने देख रहे हैं। ऐसे में अगर इन सब की जड़ में जो है तुम उसे ही हटा दोगे तो क्या हमारी शादी टिक पाएगी?

सचिन- हम्म, बात तो तुम बिलकुल सही कह रही हो। बल्कि सच कहूं तो तुम्हारी इसी समझदारी की वजह से मेरा मन और भी करता है कि तुमको अपना जीवनसाथी बना लूँ।
रूपा- समझा तो तुमने भी था न मुझे। वरना कोई लड़की किसी और लड़के से चुदाने की बात करे उतने से ही लड़के उसे रंडी समझने लगते हैं। तुमने तो मुझे तब गले लगाया जब मैंने अपने भाई से चुदवाने की बात की थी।

सचिन- सच कहूं तो उस बात ने मुझे बहुत उत्तेजित कर दिया था। देखो मेरा तो फिर खड़ा हो गया।
रूपा- अभी तो मेरी चूत का रस सब सूख कर जम गया है। अभी और तो कुछ नहीं कर सकती… लाओ तुमको चूस कर मलाई खा लूँ। मेरा नाश्ता भी हो जाएगा।

इतना कह कर रूपा सचिन का लंड चूसने लगी। सचिन कहने लगा- मतलब ये हुआ कि अगर हमको इसी तरह प्यार से रहना है तो हमको एक दूसरे को अपनी इच्छाएँ पूरी करने में मदद करनी चाहिए। तो क्या तुम ये चाहती हो कि तुम सच में अपने भाई से चुदवाओ और मैं तुम्हारी इसमें मदद करूँ। और ऐसे ही तुम भी मेरी मदद करोगी मुझे दीदी को चोदने में?

सचिन का लंड चूसते हुए ही रूपा ने ‘हुम्म्म’ कह कर हामी भरी। उसके ‘हुम्म्म’ कहने से जो कम्पन्न हुआ और उसकी बात का जो मतलब निकला उसकी कल्पना मात्र से सचिन का छूट गया और रूपा उसे पी गई। फिर रूपा अपना टी-शर्ट पहन कर बाहर चली गई और सचिन भविष्य के सपनों में खो गया।

दोस्तो, आपको यह कुंवारे लड़के के पहले सेक्स और भाई-बहन के साथ चुदाई के सपनों की कहानी कैसी लगी आप मुझे ज़रूर बताइयेगा।

आपका क्षत्रपति
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