होली के बाद की रंगोली-6

(Holi Ke Baad Behan Ke Sath Rangoli- Part 6)

This story is part of a series:

अब तक आपने पढ़ा कि सचिन को हालातों के चलते रूपा के साथ सोना पड़ा था और रात को नींद में जब रूपा उसके काफी नज़दीक आ गई तो उसने उसे छू लिया था। अगले दिन सुबह नहाते वक़्त रूपा पेशाब करने आई तो सचिन ने उसे नंगी देखा और उसे लगा कि शायद रूपा ने उसे आँख भी मारी थी। इस सब से वो बहुत उत्तेजित हो गया था और उसने नहाने से पहले मुठ मार ली।
अब आगे…

मुठ मारने के बाद नहा-धो कर जब सचिन टब से बाहर आया तो उसने देखा कि रूपा की पैंटी अभी भी सिंक वाले प्लेटफॉर्म पर ही पड़ी थी। उसने उठा कर उसे सूंघा… वाह! क्या खुशबू थी जवानी की। उसने उसे अपनी चड्डी में डाल लिया ताकि बाद में भी उसकी खुशबू ले सके। बाथरूम से बाहर आया तो सोनाली ने कहा कि जल्दी से तैयार हो जाओ और खाना खा लो।

सचिन अपने (रूपा के) कमरे में गया और वो रूपा की पैंटी उसने अपने सूटकेस में छिपा कर रख दी। फिर टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहन कर वो बाहर आ गया। रूपा पहले ही डाइनिंग टेबल पर बैठी थी और सोनाली खाना लगा रही थी। तभी सोनाली के हाथों से कुछ चम्मचें नीचे गिर गईं।
सोनाली उठाने के लिए झुक ही रही थी कि सचिन ने कहा- रहने दो दीदी आप खाना लगाओ मैं उठा देता हूँ।

जैसे ही वो टेबल के नीचे गया रूपा ने अपने पैर चौड़े कर दिए और उनको एड़ी ऊपर नीचे करके हिलने लगी जिससे अनायास ही सचिन का ध्यान उसकी तरफ चला गया। जो उसने देखा उससे एक बार फिर उसकी धड़कनों ने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और लंड वापस नींद से जाग गया। वही एकदम चिकनी चूत… मेरी आँखों के सामने थी जो उसने थोड़ी देर पहले दूर से देखी थी, वो फूली हुई चूत ठीक उसके सामने थी।

सचिन मन भर कर उसे देखना चाहता था लेकिन तभी रूपा ने कहा- क्या हुआ सचिन, चम्मच नहीं मिल रहे क्या?
बाहर निकलते हुए सचिन- नहीं चम्मच तो मिल गए थे, लेकिन कुछ और भी मिल गया था, वही देख रहा था।
इतना कह कर सचिन ने भी धीरे से आँख मार दी।

सोनाली ने कहा कि वो उनके लिए गरमा-गर्म फुल्के बना कर ला रही है इसलिए वो बाद में खाना खा लेगी। सचिन और रूपा ने खाना शुरू किया और मौका देख कर सचिन ने धीमी आवाज़ में बात आगे बढ़ने की कोशिश की- तुम रात को कमरे में वापस क्यों आ गईं थीं? क्या हुआ था बैडरूम में?
रूपा- बताया तो था कि भैया से रहा नहीं गया तो वो और भाभी लगे हुए थे। मेरी नींद डिस्टर्ब हो रही थी तो मैं अपने रूम में आ गई।

सचिन- लगे हुए थे मतलब?
उसने आश्चर्य से पूछा.
रूपा- अब यार हस्बैंड-वाइफ बैडरूम में और किस काम में लगे हो सकते हैं? सेक्स कर रहे थे और क्या?
सचिन- क्या बात कर रही हो यार! तुम्हारे भैया तुम्हारे सामने ही?
रूपा- अरे बताया था न, यहाँ हम ज़्यादा लिहाज़ नहीं पालते।

सचिन- हाँ लेकिन फिर भी… कुछ पहना था या नहीं?
रूपा- कोई कपड़े पहन कर सेक्स करता है क्या?
सचिन- मतलब तुमने दीदी-जीजाजी को नंगे सेक्स करते हुए देखा है?
रूपा- हाँ यार, तभी तो मैं अपने रूम में आ गई थी न।

सचिन- लेकिन तुम्हारे आने से तो उनको पता चल गया होगा न कि तुमने उन्हें देख लिया है?
रूपा- हाँ तो… मैं तो उनको बोल कर आई कि आप लोग एन्जॉय करो, मैं अपने रूम में जा रही हूँ।
सचिन- सही है यार! तुम्हारी फॅमिली तो कुछ ज़्यादा ही ओपन है।
रूपा- अब यार सब तुम्हारी वजह से हुआ। कल तुम मेरे रूम में सोने से इतना न शर्माते तो ये सब होता ही नहीं न।

तभी सोनाली रोटियां देने आ गई और कुछ देर तक चुप्पी रही फिर जब सोनाली वापस किचन में गई तो रूपा ने थोड़े शैतानी अंदाज़ में धीरे से कहा- वैसे ये पहली बार नहीं था, जब मैंने भैया को नंगा देखा था। पहले भी कई बार मैं उनको नहाते हुए देख चुकी हूँ।
रूपा ने आँख मारते हुए कहा।
सचिन- क्या बात कर रही हो! कैसे?
रूपा- एक पर्दा ही है यार। थोड़ा सा सरका कर चुपके चुपके देख लेती थी।

सचिन- लेकिन फिर तो उनको भी दिख जाता होगा न की तुम देख रही हो?
रूपा- पता नहीं, मुझे ऐसा कभी लगा तो नहीं की उनको पता चला हो क्योकि मैं नीचे के कोने से देखती थी जहाँ नज़र काम ही जाती है, लेकिन क्या पता देख भी लिया हो इसीलिए शायद अब उनको मेरे सामने शर्म नहीं आती।

तब तक दोनों का खाना हो चुके थे और सोनाली भी किचन के काम से फुर्सत हो गई थी।
सोनाली- बहुत गर्मी है यार। तुम लोग टीवी देखो मैं तो नहा कर आती हूँ, उसके बाद ही खाना खाऊँगी।

रूपा और सचिन टीवी पर कोई कॉमेडी प्रोग्राम देखने लगे और सोनाली नहाने चली गई। थोड़ी देर बाद सचिन के दिमाग में कुछ ख्याल आया और उसने पेशाब जाने का बहाना बनाया और बाथरूम में आ गया। जैसा कि रूपा ने बताया था, उसने भी नीचे के कोने से परदे को थोड़ा सा हटाकर अंदर देखा तो बहुत दिनों के बाद अपनी बहन का वही हसीन नंगा बदन देख कर सिहर उठा। वो वहीं बैठ कर देखने लगा और उसने अपना लंड भी बाहर निकाल लिया।

उसने अपने लंड को सहलाना शुरू किया ही था कि रूपा की आवाज़ आई- सचिन क्या हुआ! ज़िप में फंस गई क्या? हा हा हा…
सचिन को होश आया कि उसने पेशाब का बहाना बनाया था तो वो ज़्यादा देर नहीं रुक सकता था, उसने जल्दी से अपने शॉर्ट्स ऊपर किये और बाहर आ गया।

रूपा- क्या कर रहे थे?
सचिन- पेशाब करने गया था यार बहुत समय से नहीं की थी इसलिए इतना टाइम लग गया।
रूपा- तुम्हारा ये तो कुछ और ही कह रहा है।
रूपा ने सचिन के शॉर्ट्स में बने तम्बू की तरफ इशारा करते हुए कहा।
सचिन ने तुरंत अपने खड़े लंड को दोनों हाथों से छुपाया और सकपका कर वहीं बैठ गया।

रूपा- टेंशन मत ले यार, ये काम हमने भी किये हैं। अभी ही तो बताया था न तुझे…
रूपा ने माहौल को हल्का करने की कोशिश करते हुए कहा।
सचिन धीरे से- इसीलिए तो सोचा, मैं भी आज़मा के देख लूँ।
और फिर दोनों हंसने लगे।

तब तक सोनाली भी वापस आ गई थी। वो डाइनिंग टेबल पर अपने खाने की तैयारी में लग गई और इधर सोफे पर रूपा और सचिन की खुसुर-फुसुर शुरू हो गई।
रूपा- वैसे जितना तम्बू अभी देखने को मिला उस हिसाब से तुम्हारा हथियार भैया से काम तो नहीं होगा।
सचिन- मुझे क्या पता उनका तो तुमने ही देखा है।
रूपा- तुमने भाभी को आज आज पहली बार देखा है या… इतना कह कर रूपा ने एक शैतानी मुस्कराहट के साथ अपनी भवें उछालते हुए सवाल किया।
सचिन शरमाते हुए- पहले भी देखता था घर पर।
रूपा- क्या बात है दोस्त फिर तो हम एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हुए। और बताओ न कुछ… कैसे देखते थे? उनको कभी पता चला या नहीं? बताओ बताओ…

रूपा ने ये सारा खेल सचिन से ये सारी बातें उगलवाने के लिए ही रचा था। वो ये सब पहले से जानती थी लेकिन प्लान के हिसाब से उसे ये सब सचिन से ही उगलवाना था। सचिन ने अपनी पूरी कहानी बता डाली की कैसे शुरुवात सोनाली ने ही की थी लेकिन बाद में उन दोनों को पता चल गया था कि वो एक दूसरे को नहाते हुए देखते हैं। फिर वो एक दूसरे के लिए नहाते वक़्त सेक्सी हरकतें भी करने लगे थे और मुठ भी मारते थे, लेकिन उससे आगे बढ़ने की कभी हिम्मत नहीं हुई।

इससे पहले की बात आगे बढ़ती, सोनाली अपना खाना ख़त्म करके आ गई और सचिन के दूसरे बाजू में बैठ गई।
सोनाली- चलो तो आज फिर कौन सी फिल्म देखनी है?
रूपा- रंगरसिया कैसी रहेगी?
सोनाली- ओये होये! किसके रंग की रसिया हो रही हो आज? चलो ठीक है, मैंने भी नहीं देखी है, मुझे भी देखनी थी वो।

और ठीक कल की तरह सचिन बीच में बैठा था और रूपा-सोनाली उसके दोनों तरफ। सब कल की ही तरह फिल्म देख रहे थे, लेकिन आज रूपा का हाथ सचिन की जांघ पर रखा था और सचिन भी कन्धों से नीचे रूपा की बाँहें अपनी उंगलियों से सहला रहा था। उधर जैसे वो उसकी बांह सहलाता वैसे ही रूपा की उंगलियाँ सचिन की जांघ पर थिरकती थीं। थोड़ी हिम्मत करके सचिन 1-2 उंगलियों से रूपा के स्तन के बाजू में छूने और कुरेदने लगा। रूपा ने भी अपना हाथ थोड़ा ऊपर कर लिया और वो अब उसके लंड के काफी करीब थी।

तभी फिल्म में वो सीन आया जिसमे हीरो-हीरोइन नंगे एक दूसरे से लिपटे हुए एक दूसरे को रंगों से सरोबार कर रहे थे और नंगे ही काफी तरह की मस्तियाँ कर रहे थे। सचिन का लंड खड़ा तो पहले से ही था लेकिन ये देख कर और कड़क हो गया और उसने रूपा के स्तन को पूरी तरह से पकड़ का भींच दिया और उसे मसलने लगा। रूपा भी उस सीन से काफी उत्तेजित हो चुकी थी, उस पर सचिन की हरकत ने उसे हरी झंडी दिखा दी और उसने भी सचिन का लंड पकड़ कर उसे ज़ोर से दबा दिया।

आम तौर पर लंड को इतनी ज़ोर से दबाने पर किसी भी लड़के की दर्द से चीख निकल सकती थी लेकिन वो इतना कड़क हो चुका था कि सचिन को ज़्यादा फर्क नहीं पड़ा। जब सीन ख़त्म हुआ और सचिन को थोड़ा होश आया तो उसने देखा कि सोनाली फिल्म को नहीं बल्कि इन दोनों को ही देख रही थी और मुस्कुरा रही थी।
सचिन थोड़ा झिझक गया और उठ कर पानी पीने चला गया।

फिल्म ख़त्म होते होते पंकज भी वापस आ चुका था। पंकज बाथरूम में फ्रेश होने गया और रूपा अपने रूम में किसी काम से गई तो सोनाली ने सचिन को पास बुला कर कहा- मैंने सोचा था रूपा के साथ रह कर तुम लड़कियों से बात करना सीख जाओगे लेकिन तुम तो…
सचिन- सॉरी दीदी, अब बस हो गया और वो भी तो साथ दे रही थी न।
सोनाली- अरे मेरा वो मतलब नहीं था, मेरी तरफ से तो पूरी छूट है, जो करना है कर। अगर तू कहेगा तो मैं तो इससे तेरी शादी तक करवा सकती हूँ। जिस काम से तुझे ख़ुशी मिले उससे तो मैं खुश ही होऊँगी न।

तभी पंकज वापस आ गया और डिनर की तैयारी होने लगी। डिनर के बाद पंकज ने कहा- आज तो ड्रिंक करने का मन कर रहा है, चलो सचिन 1-1 पेग हो जाए।
सचिन- नहीं मैं नहीं पीता।
पंकज- अरे! तुम्हारी दीदी तो पीती है, तुम नहीं पीते?
सचिन- दीदी! आपने कब से पीना शुरू कर दिया?
सचिन ने सोनाली को पुकारते हुए कहा।

सोनाली- अरे नहीं, किसी खास मौके पर इनके साथ ही थोड़ी ले लेती हूँ।

दोनों जीजा साले बाहर बालकनी में कुर्सी लगा कर बैठ गए और पंकज ने दो पेग बनाए। रूपा ने नमकीन काजू की एक प्लेट ला कर रख दी और कहा- मैं सोने जा रही हूँ। सचिन, ज़्यादा नखरे करने की जरूरत नहीं है, सीधे मेरे कमरे में आकर सो जाना। भैया आप समझाओ न इसे।

इतना कह कर रूपा तो चली गई, पंकज सचिन से बोला- हाँ यार, देख अब तू बाहर न सोये इसलिए तेरी दीदी ने कल रूपा को अंदर सुला लिया था और उस चक्कर में फिर… अब यार मैं तेरी दीदी के बिना नहीं रह सकता। समझ रहा है न?
सचिन- हाँ, रूपा ने मुझे बताया था।
पंकज- तो भाई तू रूपा के रूम में ही सो जाना। देख तुझे मैंने पहले ही बोल दिया था हमारे यहाँ ये सब लिहाज़ वाली बातें नहीं मानते और फिर रूपा ने खुद तुझे कहा है न आने को।
सचिन- हाँ लेकिन फिर भी वो आपकी बहन है, इसलिए मैं थोड़ा…

अब तक दोनों के पेग लगभग ख़त्म हो चुके थे और थोड़ा सुरूर भी चढ़ गया था।
पंकज- ये बात तो सही है, वो मेरी बहन है। उसकी मर्ज़ी के खिलाफ किसी ने उसको हाथ भी लगाया तो कमीने का हाथ तोड़ दूंगा। पर तू ही बता, अभी मैं तेरी बहन के साथ बैडरूम में क्या करने वाला हूँ, तुझे पता है न। फिर भी तुझे तो बुरा नहीं लगेगा न? तो यार मेरी बहन की मर्ज़ी से कोई कुछ भी करे मैं बुरा क्यों मानूं।

सचिन- तो मतलब आपकी बहन की मर्ज़ी से मैं अभी उसके साथ कुछ कर लूँ, तो आपको कोई फर्क नहीं पड़ेगा?
पंकज- यार तू किसी भी लड़की की मर्ज़ी से उसके साथ कुछ भी कर। जब तक लड़की की मर्ज़ी से है, सब सही है। फिर वो मेरी बहन हो या तेरी।

इतना कह कर पंकज ने बॉटम-अप किया और बैडरूम की तरफ चला गया। सचिन वैसे ही नशे में था। आज उसने पहली बार पी थी। ऊपर से ये आखिरी में जीजाजी जो बोल गए थे वो उसके दिमाग में घूम रहा था और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इस बात का वो क्या मतलब निकाले ‘फिर वो मेरी बहन हो या तेरी!’
तो क्या अगर मैं सोनाली की मर्ज़ी से उसे चोद दूँ तो जीजाजी को इस बात से भी फर्क नहीं पड़ेगा?

यही सब सोचते सोचते वो रूपा के कमरे की ओर चल पड़ा। मन तो उसने पूरा बना लिया था कि आज की रात वो रूपा को चोद ही देगा लेकिन अब जब बात मर्ज़ी की भी है तो ये सोचना भी ज़रूरी है कि उसको चुदाई के लिए कैसे राज़ी करें। एक तो ये पीने का बाद दिमाग वैसे ही धीरे काम कर रहा है।

दोस्तो, आपको यह कुंवारे लड़के के पहले सेक्स अनुभवों की कहानी कैसी लगी आप मुझे ज़रूर बताइयेगा।

आपका क्षत्रपति
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