काशीरा-लैला -5

(Quashira Laila-5)

This story is part of a series:

चुम्मा तोड़ कर मैंने पूछा “कैसी लगी मेरी गांड चचाजी? आप को सुख दिया या नहीं इसने?”

“तू तो मेरा जानेमन है, इमरान, मेरा प्यारा है… मां कसम… क्या लुत्फ़ आया तेरी गांड मारने में… मैं निहाल हो गया मेरे बच्चे !” चचाजी जोर जोर से सांस लेते हुए बोले। मेरा लंड भी कस कर तन्ना गया था।

“अब इसका क्या करें?” काशीरा ने मेरा मचलता लंड पकड़कर कहा।

चाची बोलीं- मैं तो अभी चूस लूँ पर ये काम इनका है, क्योंजी, आपके भतीजे ने आप को इतना सुख दिया, उसका लंड नहीं चूसोगे?

“अभी चूस देता हूँ मेरी जान, मैं तो खुद कहने वाला था।” चचाजी बोले।

“बाद में चूस लेना चचाजी, अब आपकी और आपके भतीजे की प्यार मुहब्बत शुरू हो ही गई है तो ऐसा करते हैं कि अब मैं चाची को अपने कमरे में ले जाती हूँ, देखती हूँ कि आखिर इनकी बुर कितना पानी छोड़ती है दो घंटे में। और आप और इमरान मिल कर घंटे दो घंटे भर मस्ती कर लो।” काशीरा बोली।

चाची को बात जंच गई, वे उठकर काशीरा के साथ चल दीं, मुड़ कर बोलीं- जरा अच्छे से प्यार करना मेरे बच्चे से, नहीं तो बस खुद चढ़े रहोगे और उसको कुछ नहीं करने दोगे !

“नहीं नहीं भाग्यवान, मैं इमरान का पूरा ध्यान रखूँगा।” मेरे लंड को चूमते हुए चचा बोले।

चाची और काशीरा जाने के बाद चचा मुझसे चिपट कर मेरे चुम्मे लेने लगे- यार इमरान, तू तो छुपा रुस्तम निकला, क्या गांड पाई है तूने, मां कसम, मैंने कई गांडें मारी हैं पर तेरे जैसी कोई नहीं थी।

मैंने भी चचाजी का लंड पकड़कर कहा- चचा, आप को सच बताऊँ, मैंने भी गांड मराई है, ज्यादा नहीं, दो तीन बार, जब मैं अपने दोस्तों के साथ होता हूँ तो काशीरा बहक जाती है, जब वो दोस्त की बीवी के साथ इश्क करती है, तो मुझे बोलती है कि तुम लोग भी ऐसे ही मस्ती करके दिखाओ। अधिकतर हम लंड चूस कर काम चला लते हैं पर कभी कभी काशीरा मचल जाती है, बोलती है कि चलो एक दूसरे की गांड मारो, तब करना पड़ता है। बाद में मुझे मजा आने लगा पर फ़िर भी मैं नहीं मरवाता था, काशीरा हठ करे तो ही मरवाता था। पर आपका लंड देखा तब से गांड बहुत मचल रही थी, आज सुकून मिला !

“फ़िकर मत कर राजा, आज इतनी मारूंगा तेरी कि तेरी गांड को पूरा खुश कर दूंगा !” कहकर चचा मेरी जीभ चूसने लगे। चूमाचाटी से उनका फ़िर से खड़ा होने लगा। मेरे लंड को पकड़कर बोले “यार बहुत रसीला लगता है, चूसने का मन होता है।”

“चूस लीजिये चचाजी, आपका ही है पर.. आप.. याने बुरा मत मानें तो.. मैं आपकी गांड मारूं? बहुत जम के खड़ा है, आप अगली बार चूस लेना।”

“मार ले मेरे बच्चे मार ले पर तुझे मजा आयेगा? तू काशीरा जैसी मस्त मुलायम गांडें मारता है तो मेरी तो जरा कड़क लगेगी तुझे।”

“तभी तो मारनी है चचाजी, आपके चूतड़ क्या कसे हुए हैं, कसरत से एकदम सख्त हो गये हैं, बहुत मन होता है मेरा !”

“तो मार ले मेरी जान, पर झड़ना नहीं, मुझे स्वाद लेना है तेरी मलाई का !” कहकर चचाजी लेट गये। मैंने उनकी गांड को सहलाया, वाकई सख्त और मांस पेशियों से भरी हुई थी। मैंने मसला और दबाया और फ़िर जीभ से चाटा। चचाजी कमर हिलाने लगे- अरे मेरे राजा… मजा आ गया रे.. तेरी जीभ तो जादू करती है जादू.. चाट ना !

मैं जीभ रगड़ रगड़कर चचाजी की गांड चाटने लगा। फ़िर जीभ की नोक लगा कर उनके छेद को गुदगुदाया। चचाजी मस्ती से ऊपर नीचे होने लगा। मैंने मक्खन उंगली में लिया और चाचा की गांड में घुसेड़ दी। गांद एकदम टाइट थी।

“चचाजी, यह तो टाइट है बहुत.. एक बात पूछूं चचाजी… आपने मराई है क्या कभी?” मैंने पूछा।

“नहीं बेटे, आज पहली बार है, वैसे गांड मारी है एक दो लौंडों की… तेरी चाची जब मैके गई थी तब गांव के एक लौंडे को पकड़ लिया था.. किसी औरत को पकड़ता तो तमाशा हो जाता.. बड़े प्यार से मरवाता था वो छोकरा… पर साला बाद में गांव छोड़ के शहर चला गया पढ़ने.. उसके बाद नहीं मारी, तेरी चाची ही मरवाने को मान गई… मैके जाना भी बंद कर दिया… तू मार ना.. तेरी जीभ ने बहुत मस्त किया है मेरी गांड को… अब चोद डाल !”

मैंने चचाजी की गांड में और मक्खन लगाया और फ़िर अपना लंड डाल दिया। लंड का सुपारा जाते ही चचाजी- हाँ इमरान… डाल बेटे… पूरा डाल दे !” करने लगे।

चचाजी का गांड मस्त टाइट थी, शायद सच में पहली बार मरा रहे थे। पर मूड में थे इसलिये अपनी गांड ढीली कर करके उन्होंने पूरा ले लिया।

“आ जा बेटे, चढ़ जा मुझ पे, ..आ और पास आ !” चचाजी बोले। मैं चचाजी पर सो गया और अपने पैर और हाथ उनके बदन के इर्द गिर्द लपेट कर उनकी गांड मारने लगा।

“आह… बहुत अच्छे मेरे बेटे.. मजा आ रहा है रे.. साले गांडू छोकरे क्यों मराते हैं.. अब समझ में आ रहा है.. झड़ तो नहीं रहा है ना?”

“अभी नहीं चचाजी… अभी तो मस्त खड़ा है.. आप की गांड बहुत टाइट है चचाजी.. कस के प्यार से पकड़े हुए है मेरा लौड़ा.. अरे ये क्या.. कर रहे हैं… चचाजी.. मैं.. मैं झड़ जाऊँगा…” मैं मस्ती से चिल्लाया। अब चचाजी अपनी गांड सिकोड़ सिकोड़ कर मेरे लंड को गाय के थन जैसे दुह रहे थे।

चचाजी हंस कर बोले- हो गया काम तमाम? बेटे, चल निकाल ले जल्दी दे, झड़ मत अंदर !

मैंने पक्क से अपना खड़ा लंड बाहर खींच लिया। चचाजी ने मुझको नीचे लिटाया और लंड को चाटने लगे- वाह देख कैसा रसीला लग रहा है, ला अब दे दे अपनी मलाई मुझको !

चचाजी ने सुपाड़ा मुँह में ले लिया और चूसने लगे।

“अह चचाजी… चूसिये चचाजी… ओह ओह”

अब चचाजी लंड को मुठ्ठी में पकड़कर मेरी मुठ्ठ मार रहे थे, साथ ही सुपारा चूसते जाते।

मैं झड़ गया। चचाजी ने मेरा पूरा वार्य जीभ पर भर लिया और फ़िर मुँह बंद करके चख चख कर निगल गये। उनका लंड अब तक फिर से खड़ा हो गया था।

चचाजी के साथ मेरी चुदाई घंटा भर और चली। इस बार वे घंटे भर तक मेरी मारते रहे। मन भर के हर आसन में उन्होंने मेरी मारी। आधे घंटे तो मुझे दीवाल से सटा कर खड़े खड़े मारते रहे, बहुत मूड में थे। मुझसे गांड फ़िर से नहीं मराई उन्होंने, मेरा लंड चूस डाला, मेरे वीर्य पर लट्टू हो गये थे।

उसके बाद हम जो सोये वो सीधे रात को उठे। रात को काशीरा ने सब के लिये बदाम का हलुआ बनाया। खास कर चचाजी के लिये “चचाजी, खाओ और लंड खड़ा करो फ़िर से। आज रात भर आप से चुदवाऊँगी !”

चचाजी बोले- काशीरा रानी, आज रात बस मैं और तुम ! ऐसा चोदूंगा कि कल उठ नहीं पाओगी !

“चचाजी, वो शर्त याद है ना? मैं कहूँगी वो करना पड़ेगा, आखिर आज आप को कोरी कोरी गांड दिलवाई मैंने आपके भतीजे की !”

“हाँ हाँ बहू रानी, तेरे जैसे सुंदर छिनाल चुदैल रंडी की बात नहीं मानूँगा तो किसे की मानूँगा !”

हम सब नहाने गये। काशीरा ने नहाते वक्त मेरी गांड में बर्फ़ भर दिया और क्रीम लगा दी- इससे राहत मिलेगी, गांड भी फ़िर से टाइट हो जायेगी। इमरान राजा, बहुत मजा आया मुझको, तुम्हारी गांड इतनी अच्छी है कि मैं कब से सोच रही थी कि इसको चोदने लायक लंड मिलना चाहिये वो मिल गया। तुमको मजा आया?

“हाँ रानी, बहुत मजा आया, सब तुम्हारी वजह से, तुम न कहतीं तो शायद मैं खुद नहीं मरवाता। चचाजी का लंड वाकई मतवाला है, मैं भी आशिक हो गया उनका। चाची के साथ कैसी रही तुम्हारी चुदाई?”

“एकदम मस्त, सच में बुर है या शहद का घड़ा, घंटे भर में कटोरी भर रस पिलाया मुझको चाची ने। और सुनो, मेरी चूची से चुदवाया उहोंने” काशीरा शोखी से बोली।

“क्या बात करती हो?”

“हाँ, मेरी चूची को अपने भोसड़े में ले लिया, इतना बड़ा छेद है उनका, आधी चूची अंदर ले ली, बड़ी रसिया हैं चाची। आज रात को तुम मजा ले लेना, कल तो वे जा रहे हैं।”

“तुम रात भर सच में चुदवाओगी चचाजी से?” मैंने पूछा तो बोली- और क्या, और तरसा तरसा कर चुदवाऊँगी, झड़ जाते हैं तो फिर आधा घंटा लगता है लंड उठने में। मुझे तो हर पल चुदना है, देखो आज रात क्या दुर्गत करती हूँ, झड़ने नहीं दूंगी उस चोदू आदमी को, तरसा तरसा कर चुदवाऊँगी। तुम्हारे साथ काफ़ी झड़ चुके दोपहर को, अब रात में हिसाब लूंगी।

उस रात मैंने चाची के साथ काफ़ी मजे किये। अधिकतर उनकी चूत चूसी, क्योंकि वाकई उनकी बुर के पाने का स्वाद लाजवाब है। गांड भी मारी पर सिर्फ़ एक बार। दोपहर को चचाजी के साथ की चुदाई में लंड दो बार झड़ चुका था।

काशीरा ने शायद चचा जी को इतना निचोड़ा कि सुबह उनसे उठा भी नहीं जा रहा था। बड़ी मुश्किल से उठकर तैयार हुए। ट्रेन से जाते वक्त काशीरा को खूब आशिर्वाद दे कर गये।

काशीरा ने जाते वक्त उनकी चेन लौटा कर कहा- चचाजान, ये लीजिये, मैंने तो मजाक में रख ली थी।

चचाजी ने वापस काशीरा को दे दी- पर मैंने सच में दी थी बहू। अब रख ले और तुम दोनों अब हमारे यहाँ आना, अब हम साल भर को बेटी के यहाँ जा रहे हैं अमेरिका, वापस आयेंगे तब बेटे, तुम दोनों आना हमारे यहाँ ! मजा करेंगे, अब तो तुम दोनों के बिना हमको नहीं सुहायेगा। और बेटी तेरा वो इमरत जो तूने कल पिलाया, एकदम मजा आ गया !”

चाची भी बोलीं- यह बहू तो एकदम रति देवी है बेटे, तुझे भी बहुत सुख देगी और हम को भी !

ट्रेन जाने के बाद मैंने पूछा- चचाजी से चुदवाया रात भर या उनको बुर चुसवाई जो इमरत की बात कर रहे थे। मैं तो सोच रहा था कि तू उनसे चुदवायेगी !”

“और क्या? पहले एक घंटा चुसवाई, वो ही जिद कर रहे थे कि चखने दे बेटी तेरी गोरी गोरी बुर का स्वाद, फ़िर चुदवाया। पर वो उस इमरत की बात नहीं कर रहे थे !”

“तो?” मैंने पूछा।

“मैंने उनको अपना मूत पिलाया !” काशीरा मेरे कान में बोली।

मैं उसकी ओर देखने लगा।

“पहले खूब चूत चुसवाई और उनके लंड से खेलती रही, पर चोदने नहीं दिया। जब रिरियाने लगे तो बोली कि मेरा मूत पियो तो चुदवाऊँगी।” कहकर काशीरा बड़ी शोखी से मेरी ओर देखने लगी।

मैं बोला- कैसी चालू चीज है तू काशीरा ! चचाजी को ऐसा बोली? तुम क्या करोगी चुदाई की हवस में, कुछ नहीं कहा जाता। क्या बोले वो?

“वो एकदम से राजी हो गये। मैंने तो मस्ती में कहा था कि देखें कितने फ़िदा हैं मुझपे पर जब उन्होंने तुरंत हाँ कह दी तो मैं बाथरूम में ले गई। दो घूंट पिला कर मैं तो रुक गई, पर उनको इतना अच्छा लगा कि पूरा पी गये। उसके बाद रात भर में चार बार पिया, तड़के तो वहीं बिस्तर में मुँह खोल कर लेट गये और मुझे बोले कि मूत दे मेरे मुँह में, फ़िर चोद डाला। पर इमरान, मेरा मूत पीकर उनका ऐसा खड़ा होता था कि फ़िर घोड़े जैसे चोदते थे। बहुत मजा आया मेरे राजा, चूत की प्यास एकदम कम हो गई !”

फ़िर काशीरा बोली “पर जो मजा दिया चचाजी ने, लगता है जल्दी ही ये आग फ़िर से जाग उठेगी। हाऽय राजा, बहुत मजा आता है ऐसे गरम मर्दों से चुदवाने में !”

“चचाजी तो अब नहीं हैं साल भर, चल मैं अपने यार दोस्तों को बुलवा लेता हूँ अगले हफ़्ते, तब तक तू आराम कर ले !”

“इमरान, वो तुम्हारे मौसाजी हैं ना, अहसान मौसाजी नाम है शायद?”

“हाँ ! उनका क्या?”

“मेरे खयाल से अगले महने उनके यहाँ गाँव में चलें तो?” काशीरा मेरी ओर देखकर बोली।

“अरे पर तूने उनको कब देखा? वो तो शादी में भी नहीं आये थे।”

“चाचीजी कुछ बोल रही थीं, ठीक से कुछ बताया नहीं पर जाते जाते मुझे कहके गईं कि बेटी अब मैं और तेरे चचाजी तो नहीं हैं साल भर, नहीं तो तुझे पूरा ठंडा कर देते तू हमारे गांव आती तो। फिर दो मिनट के बाद बोलीं कि इमरान से कहो कि अहसान मौसा के यहाँ ले चलो। बस और कुछ नहीं बोलीं, हंस दीं।” काशीरा बोली।

“ठीक है मेरी जान, अगले महीने वहाँ चलेंगे।”

समाप्त

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