मेहमानघर-1

लेखक : नितेश शुक्ला

हमारे पिताजी गाँव के मुखिया थे। परिवार में मैं, माताज़ी केसर बा और मुझ से दो साल छोटी पूर्वी, इतने थे।

गाँव बीच बड़ा मकान है, जहाँ हम रहते थे।

इसके अलावा गाँव से बाहर दूसरा मेहमान घर था जहाँ हमारे मेहमान रहते थे। अस्सी बीघा ज़मीन की किसानी थी हमारी।

यह घटना घटी तब मैं 20 साल का था और नया नया मेडिकल कॉलेज में भरती हुआ था। उस वक़्त मेरे लिए चुदाई अनजानी चीज़ नहीं थी क्यूंकि तब तक मैं मज़दूरों की तीन लड़कियों को चोद चुका था।

कालेज से जब पहला वेकेशन मिला तब मैं घर आया। उस वक़्त हमारे घर कुछ मेहमान भी आए हुए थे, माताज़ी की चाची साकार बा, उनकी लड़की सुलोचना और उनकी बड़ी बहन शांता बा। माताज़ी के चाचा मेरे नाना से 15 साल छोटे थे और साकार बा उनकी तीसरी पत्नी थी इसी लिए वो माताज़ी से उमर में छोटी थी। सुलू मौसी उनकी सबसे छोटी लड़की होने से पूर्वी के बराबर थी, 18 साल की। माता जी के चाचा कई साल पहले मर चुके थे लेकिन साकार बा इंदौर के नज़दीक एक छोटे शहर में अच्छा सा बिजनेस चलाती थी और काफ़ी मालदार थी।

सुलू मौसी को मैंने बचपन से देखा था लेकिन जवान सुलू की बात ही और थी, पाँच फ़ीट चार इंच लंबा पतला और गोरा बदन, हेमा मालिनी जैसा चहेरा और काले काले लंबे बाल थे उसके। सीने पर गोल गोल स्तन थे जो इतने बड़े नहीं थे लेकिन छुप भी नहीं सकते थे, वो जब चलती थी तब स्तन और चौड़े नितंब थिरक जाते थे, किसी नामर्द का लंड भी खड़ा कर दे ऐसा उसका बदन था।

मैंने तो पहले ही दिन बाथरूम में जाकर उसके नाम हस्त मैथुन कर लिया था और उसे चोदने का विचार कर लिया था।

सुलू मौसी और पूर्वी हिल मिल गई थी और सारा दिन खुसर-पुसर बातें किया करती थी।

एक बार सुलू मुझे गौर से देख रही थी कि मैंने उसे पकड़ लिया।

नज़र चुरा के वो मुस्कुराने लगी। फिर जब हमारी नज़रें मिली तो वो शरमा गई, मेरे दिल में आशा जगी कि कभी ना कभी यह दाल गलने वाली है। एक बार सीने से दुपट्टा गिरा कर नीचे झुक कर उसने मुझे अपने स्तनों की झाँकी करवाई, मैंने पैंट के अंदर खड़ा हुआ मेरा लंड दिखाया। बनावटी ग़ुस्सा किए उसने मुँह फेर लिया, उसके होंठों पर की मुस्कान मुझसे छुप ना सकी।

एक दिन मौक़ा देख कर मैंने पूर्वी को पकड़ा और पूछा- तुम दोनों आपस में क्या खुसर पुसर बातें करती रहती हो?

मुँह पर उंगली रख कर चुप रहने का इशारा करते हुए पूर्वी बोली- भैया, आप सुनेंगे तो ताज्जुब रह जाओगे, ग़ुस्से ना हों तो !

मैं- ऐसी भी क्या बात है?

पूर्वी- वो उसकी बात करती है।

मैं- वो क्या? साफ़ साफ़ बता वरना मैं माताज़ी से बोल दूँगा।

पूर्वी- ना ना भैया, ऐसा मत करना, पिताजी ऐसी बातें सुन लेंगे तो मुझे मार डालेंगे।

मैं- ऐसा तूने क्या किया है जो इतना डरती हो?

पूर्वी- कसम खाओ मेरे सर पे हाथ रख के, किसी से नहीं बोलेंगे आप !

मैंने कसम खाई।

वो बोली- भैया, सारा दिन वो चु… चु…

पूर्वी आगे बोल ना सकी, शर्म से उसका चहेरा लाल हो गया।

मैंने कहा- …चुदाई की बातें करती है?

पूर्वी- हाँ हाँ, बस यही !

मैं- इसमें डरने की क्या बात है? तू तो जानती है कि चुदाई क्या है और कैसे की जाती है और दूसरे, तू अक्सर अपनी उंगलियों से भोस के साथ खिलवाड़ करती है, यह मैं जानता हूँ ! है ना?

पूर्वी ने अपना चेहरा ढक लिया और बोली- आप भी क्या भैया? वैसे मैं भी जानती हूँ कि आप स्नान के वक़्त आपके… के… वो जो है ना आपका? … जो लंबा और मोटा हो जाता है…?

मैं- बस कर, मैं समझ गया ! क्या कहती है सुलू मौसी?

पूर्वी- कहती है कि उसे हमेशा चु… वो करवाने को दिल बना रहता है हमेशा उसकी … की … जो दो पाँव के बीच है ना, वो गीली गीली रहती है और उसकी पेंटी बिगड़ी रहती है कभी कभी वो रबड़ का बनाया ल … छीः छीः मैं नहीं बोल सकती !

मैं- रबड़ का लंड इस्तेमाल करती है, यही ना? इसको डिलडो कहते हैं।

पूर्वी- भैया ! आपने देखा है ये डी… डिलडो?

मैं- मुझे क्या ज़रूरत डिलडो देखने की? मेरे पास तो इनसे अच्छा असली है तूने देख भी लिया है, है ना?

पूर्वी फिर शरमाई और बोली- भैया, कैसी बातें करते हैं आप? हाँ, वाकई आप का वो …

मैं- वो वो नहीं, साफ़ साफ़ बोल, लंड ! बोल ल…न्ड !

शर्म से सिमट ती हुई पूर्वी बोली- छी, छी… भैया, कँवारी लड़की ऐसा नहीं बोलती। वाकई आपका वो बहुत अच्छा है, मेरी भाभी बड़ी ख़ुशनसीब होगी।

मैं- एक बात बता, सुलू ने तेरे साथ कुछ किया है?

तब पूर्वी ने बताया कि एक बार उन दोनों ने समलैंगिक संभोग किया था। सुलू ने अपनी भोस पर डिलडो इस्तेमाल किया था लेकिन पूर्वी ने मना कर दिया था।

पूर्वी ने यह भी बताया कि सुलू मेरी ख़ूब तारीफ़ कर रही थी। पूर्वी की राय थी कि सुलू मौसी मुझसे चुदवाने के लिए तैयार थी।

यह हुई ना बात?

मैं ख़ुश हो गया और बोला- पूर्वी, तू उसे बता देना कि वो भी मुझे ख़ूब पसंद है और मैं उसे चोदना चाहता हूँ।

शरारती हंसते हुए वो बोली- मैं क्यूं बताऊँ? मुझे क्या फ़ायदा?

मैं- फ़ायदा? चल, तू जो मांगेगी, वो दूँगा।

पूर्वी- अच्छा? जो चाहे सो माँगूँ?

मैं- माँग के देख तो सही।

पूर्वी- अच्छा तो मांगती हूँ, आप और मौसी जब वो करें तब…

मैं- फिर वो वो बोली? मांगना हो तो साफ़ बोलना पड़ेगा।

पूर्वी- हाँ, आप और मौसी जब चुदाई करें, तब मैं भी वहाँ रहूँगी, देखूंगी !

मैं- तू क्या करेगी वहाँ रह कर?

पूर्वी- मुझे देखना है कि मेरे भैया का तगड़ा… तगड़ा… वो… वो… लंड मौसी की चूत में आते जाते कैसे चोदता है।

मैं- और देखते देखते तुझे भी चुदवाने का दिल हो गया तो?

पूर्वी- तो आपका दूसरा वरदान इस्तेमाल करूँगी।

मैं- दूसरा वरदान? कौन सा?

दूसरे ही दिन शाम का खाना खाकर हम सब मेहमानघर गये।

पूर्वी ने कहा- फ़िल्म किसको देखनी है?

सबने हाँ कहा। रात के दस बजे पूर्वी ने वीडियो कैसेट लगाई और ब्लैक एंड व्हाइट इंग्लिश फ़िल्म शुरू हुई। हम तीन जवानों को योजना का पता था इसी लिए कुछ नहीं बोले लेकिन थोड़ी ही देर में साकार बा और शांता बा थक गई।

साकार बा ने कहा कि वो बोर हो रही है और सो जाना चाहती है।

हमने कहा कि हमें फ़िल्म देखनी है।

नतीजा यह आया कि वो दोनों बुज़र्ग गाँव वाले घर को चली गई हम तीनों को अकेला छोड़ के !

बस हमें और क्या चाहिए था?

आख़िर सुलू बोली- मुझे भी नींद आ रही है, मैं चलती हूँ।

मैं- मौसी, अपने भांजे के साथ नहीं बैठोगी थोड़ी देर?

पूर्वी- हाँ, मौसी, भांजा बेचारा कब से तरस रहा है और भांजे का वो भी !

शर्माते हुए सुलू बोली- तू भी क्या, पूर्वी?

पूर्वी- सच कहती हूँ, वो देखो क्या है जिसने भैया का पैंट को तंबू बना रखा है?

वाकई मेरा लंड सुलू को चोदने के ख्याल से ही तन गया था।

मौसी कुछ बोली नहीं, शरम से उसका चहेरा गुलाबी हो गया.. अच्छी मुस्कान के साथ वो दाँत बीच उंगली काटने लगी, मैं उठ कर उसके पास चला गया, पजामे में झूलता मेरा लंड देख वो ज़्यादा शरमाई।

जाकर मैं उसकी बगल में बैठ गया। उसके कंधे पर हाथ रख कर मैंने कान में पूछा- मौसी, मुझे चोदने दोगी ना?

उसने अपना चहेरा ढक दिया और बोले बिना सिर हिला कर हाँ कहा। मैंने सुलू के कान पर चुंबन किया तो उसके रोएँ खड़े हो गये, सिमट कर वो मेरे पहलू में आ गई, कान पर से मेरा मुँह उसके गाल पर उतर आया।

गाल पर किस करते हुए मैंने उसे मेरी ओर घुमाया और आगोश में ले लिया। उसने अपने हाथों की चौकड़ी बना कर सीने से लगा रखी थी। मैंने होंठों से उसके होंठ छू लिए !

कितने कोमल और मीठे थे उसके होंठ !

पहले मैंने होंठ छुए, दबाए नहीं, जीभ निकाल कर मैंने उसके होंठ पर फिराई तो उसने मुँह हटा लेने की कोशिश की, शायद वो पहली

बार फ़्रेंच किस कर रही थी। ज़ोर लगा कर मैंने उसका सर पकड़ा और चुम्मी जारी रखी। हजारों कहानियाँ हैं अन्तर्वासना पर !

थोड़ी ना नुकर के बाद जब उसे मजा आने लगा तब उसने मुझे खूब चूमा चाटी करने दी। उसका नीचे वाला होंठ मेरे मुँह में लेकर मैंने चूसा, जीभ उसके मुँह में डाल कर मैंने चारों ओर घुमाई।

उसने ज़ोरों से अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए मेरी जीभ से उसकी जीभ खेलने लगी।

किस चालू रखते हुए मैंने उसके हाथ पकड़ कर मेरी गर्दन से लिपटाये। ऐसा करने से उसके स्तन मेरे सीने से लग गये। मैंने जब आलिंगन किया तब उसके भारी स्तन मेरे सीने से दब कर सपाट हो गये। थोड़ा सा अलग होकर मैंने ओढ़नी का पल्लू हटा दिया और चोली में क़ैद उसके स्तनों पर हाथ फ़िराया। उसने मेरी कलाई पकड़ ली लेकिन हाथ हटाया नहीं। उसके गोल गोल कठोर स्तन मैंने सहलाए और धीरे से दबाए। पतले कपड़े से बनी टाइट चोली के आर-पार कड़े चुचूक मेरी उंगलियों ने ढूँढ लिए। छोटे से चुचूक पर मैंने उंगली फिराई, तब वो ज़्यादा तन गई। कई देर तक मैं दोनों उरोजों और चुचूकों के साथ खेलता रहा।

सुलू मौसी उत्तेजित होती चली गई।

मेरा हाथ अब चोली के हूक्स पर गया, एक के बाद एक कर के मैंने सब हूक खोल दिए। जब चोली खुल गई तब पता चला कि उसने ब्रा पहनी नहीं थी।

ज़रूरत ही कहाँ थी?

उसके नंगे स्तन मेरी हथेलियों में क़ैद हो गये, उसकी साँस की रफ़्तार बढ़ने लगी।

मैंने ज़्यादा लड़कियाँ चोदी नहीं थी, लेकिन जितनी चोदी थी उनमें से किसी के स्तन सुलू के स्तन जैसे सुंदर नहीं थे। उसके स्तन बड़े-बड़े, गोल, भारी और कठोर थे, मेरी हथेलियों में समाते नहीं थे। चिकनी चमड़ी के नीचे ख़ून की नीली नसें दिखाई दे रही थी। दो इंच के एरोला गुलाबी-भूरे रंग के थे।

एरिओला के बीच किशमिश के दाने जैसे कोमल चुचूक थे जो उस वक़्त उत्तेजना से कड़े हो गए थे।

उंगलिओं से मैंने एरिओला टटोली और निप्पल को चुटकी में लेकर मसला। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।

अनजाने में मुझ से ज़रा ज़ोर से स्तन दब गया तो सुलू के मुँह से आह निकल पड़ी। मैंने स्तन छोड़ दिया।

पूर्वी सब देख रही थी…

कहानी जारी रहेगी।

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