मामी की मस्त फुद्दी चुदाई

(Mami ki Mast Fuddi Chudai)

प्रेषक : चार्ल्स झेवियर

मेरे प्यारे दोस्तो, आप सबको मेरी नमस्ते। आप सब अच्छी तरह से जानते हैं कि जब इंसान को सम्भोग करने की जरूरत जान पड़ती है और वो उस पर काबू ना कर सके तो बड़ी मुसीबत हो जाती है, फिर चाहे वो आदमी हो या औरत।

मैं ठहरा एक जवान लड़का, मस्त चूत देखते ही पैन्ट तो तम्बू की तरह तन जाती है।

मैं एक छात्र हूँ और लड़कियों से भी मेरी अच्छी बनती है, पर जिस सुन्दरी की मैं चर्चा करने जा रहा हूँ, वो तो आज की हिरोइन कटरीना कैफ के टक्कर की है। यौवन ऐसा कि कभी घटता ही नहीं। एक बार सजी-संवरी देख लो तो देखते ही पागल हो जाओ।

मैं अपनी पढ़ाई के दौरान अपने मामा के यहाँ रहता था। दोनों मामाओं की शादी हो चुकी थीं और उनकी सुन्दर पत्नियाँ थीं, पर बड़ी वाली मामी तो लाजवाब थीं, जिसकी मैं बात कर रहा हूँ।

शुरू मैं तो दिल को बड़ा मनाया पर दिल कहाँ मानता है, और मैं जुट गया उसकी चूत मारने की चाहत लेकर। कभी उसकी टांग भी दिख जाती तो भी मुझे बाथरूम में जाकर मुट्ठी मारनी पड़ती थीं।

वैसे उसकी और मेरी अक्सर लम्बी बातें होती थीं। पर मैं यह नहीं जानता था कि वो मेरे बारे में क्या सोचती थीं। पर वो मुझे बिल्कुल सीधा और शरीफ भी समझती थीं।

एक दिन की बात है कि मामी नहा रही थीं और मुझसे साबुन मांग रही थीं, तो साबुन देते वक़्त मेरा पैर फिसल गया और मैं सीधा बाथरूम में पहुँच गया।

बस अब मैं क्या बताऊँ, जो देखा, मेरा तो पैन्ट में छूटने को हो गया। उसका गोरा बदन, सुडौल चूचियों और गुलाबी चूत छोटे-छोटे बालों के साथ, लगता था कि चूत के बाल क्रीम से साफ़ कर रखे थे।

उस वक़्त तो मैं वहाँ से चला आया क्यूंकि घर पर और लोग भी थे। मामा देर से रात को घर आते थे तो मैं कभी-कभी मामी से उसके कमरे में बैठ कर बात कर लिया था।

उस रात मैंने मामी से पूछा- आज आपको बुरा तो नहीं लगा, क्यूंकि मैंने गलती से आपको नंगी नहाते हुए देख लिया।

तो उन्होंने कहा- नहीं !

पर वे थोड़ी सी शरमा गईं। अब मैं समझ गया था कि वो मेरे बारे में क्या सोचती थीं।

अगले दिन मामा को किसी काम से बाहर जाना था और वापिस आने में कम से कम तीन दिन लग जाते।

उस रात मैंने मामी से कहा- अब आपके ये 2-3 दिन कैसे कटेंगे?

तो वो बोलीं- हाँ बात तो ठीक है, पर क्या करें।

मैंने उनको कैरम बोर्ड खेलने के लिए मना लिया। खेलते-खेलते एक गोटी उनकी साड़ी में जा घुसी, तो मैंने भी झट से साड़ी में हाथ डालना चाहा पर वो शरमा गईं और गोटी खुद निकाल दी।

उनने जब गोटी साड़ी के अन्दर से निकाली तो मुझे उसकी पैन्टी दिख गई थी। मैं उनकी पैन्टी देख कर गनगना गया था।

खेलने के बाद में मुझे गद्दे के नीचे एक कंडोम का पैकेट मिला तो मैंने जानबूझ कर पूछा- मामी, यह क्या है?

तो मामी बोली- कुछ नहीं है, वहीं रख दो।

मैंने कहा- मामी इसकी टीवी में एड भी आती है, बताओ न यह क्या है?

मामी ने कहा- तुम तो ऐसे पूछ रहे हो जैसे कुछ पता ही नहीं।

मैंने ‘ना’ में जवाब दिया, पर मामी ने कह दिया- रहने दो, यह बड़ों के काम की चीज है।

काफी जिद के बाद मामी ने टीवी पर एक चैनल ढूँढा, जिस पर सेक्स सीन चल रहा था और उसकी तरफ इशारा कर दिया।

मैं बोला- इसमें यह चीज तो कहीं दिख ही नहीं रही?

मामी चुप हो गईं। मैं मामी के पास दूसरी बार रात 11 बजे फिर गया और सेक्स सीन वाली हरकतें करने लगा।

तो मामी बोली- यह क्या कर रहे हो?

और इस दौरान मेरा लंड भी खड़ा हो गया।

मैंने पूछा- मामी लड़कियों के भी ऐसा ही लंड होता है?

उन्होंने होंठ दबा कर कहा- नहीं।

मैं बोला- तो आप दिखाओ ना कि कैसा होता है? और यह खड़ा क्यों हो जाता है?

उन्होंने मना कर दिया।

मैं बोला- आपने ना मुझे कल यह बताया कि यह कंडोम किस काम आती है, ना अपना लंड दिखाती हो।

इस पर वो जरा खुल कर बोलीं- लड़कियों के लंड नहीं चूत होती है।

मैं अपने लंड को सहलाते हुए बोला- चूत कैसी होती है।

यह सब सुन कर और मुझे लंड सहलाते देख कर मामी का मन भी सेक्स के लिए उतावला हो गया।

उसने दरवाजे बंद करके कहा- लो देख लो, कैसी होती है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

तो मैंने धीरे से साड़ी उठाई और पैन्टी उतारी और तसल्ली से चूत का मुआयना करने लगा।

इस पर वो बोली- ऐसे क्या देख रहे हो?

मैं बोला- बड़ी सुन्दर चूत है। मेरा तो मन कर रहा कि इसे जी भर चाट लूँ।

उन्होंने मना नहीं किया और मैंने उसकी गोरी, मखमली और मीठी चूत लगभग बीस मिनट तक चूसी और वो मेरे मुँह में ही झड़ गईं।

उसका झड़ा हुआ पानी भी मुझे बड़ा स्वादिष्ट लगा। अब वो सेक्स के लिए उतावली हो चुकी थी और बिना पूछे ही मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरा पूरा लंड मुँह में ले गई और चूसती रही।

पहली बार ऐसा चूसने और चुसवाने का मज़ा आया था। मेरा वीर्य भी उसके होंठों पर छूट गया और उसने चाट लिया।

उसकी इन हरकतों से तो वो सेक्स में एक्सपर्ट और उतावली लग रही थी।

मैं बोला- मामी अब क्या करूँ? मेरा लंड तो गुदगुदी के मारे मारा जा रहा है।

तो उसने मुझे सब समझाया कि कैसे लंड चूत में डालूँ और आगे-पीछे करूँ, वैसे तो मैं धुरंधर था, बस नाटक कर रहा था।

अब मैं शुरू हो गया। मेरा लंड काफी मोटा था और शायद मामा जी का इतना नहीं था, इसलिए उसकी चूत इतनी अधिक फैली हुई नहीं थी।

इस वजह से जब मैं चूत मारने लगा तो वो जोर से चिल्लाई और मैंने फट से उसका मुँह दबा लिया और बोला- क्या हुआ?

वो सिसकारियाँ भरती हुई बोली- इतनी सी उम्र और इतना बड़ा लंड, कैसे?

मैंने कहा- बस ऐसे ही !

नीचे देखा तो चूत में से खून आ रहा था। मैंने अपने रुमाल से खून साफ़ किये और जुट गया काम में।

मैंने उनकी 5-7 मिनट तक चुदाई की और वो सिसकारियाँ भरती रही, “आह… आह… आह… ऊह…ई… आई… आह…”

अब उसकी और मेरी साँसें फूल गई थीं और मैंने अपना वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया और उसकी चूत का पानी भी बाहर आ चुका था। थक कर हम बेड पर बेसुध हो कर पड़े रहे और एक-डेढ़ घंटे तक आराम किया, और फिर एक बार जुट गये।

पहली बार तो मैं 5-6 मिनट में ही झड़ गया पर अब जाकर हमको तसल्ली हुई। थोड़ी देर उसके नंगे बदन की गर्मी लेने, चूचे दबाने के बाद और होंठ चूसने के बाद मैं कमरे से चला गया ताकि घर वालों को शक ना हो।

अगले दिन जब वो अकेली कपड़े धो रही थीं तो मैंने उसकी साड़ी में हाथ देकर उंगली उसकी चूत में दे दी।

इस पर वो बोली- एक रात में ही इतना बिगड़ गये और अब तक प्यास नहीं बुझी? पता है अब तक चूत दर्द कर रही है।

मैं बोला- लाओ, अभी चाट कर ठीक किये देता हूँ।

वो बोली- रहने दो कोई देख लेगा।

मैंने बाथरूम बंद कर उसकी चूत चाटी और उसकी चूत का पानी पिया, और उसने भी मेरा लौड़ा चूसा।

बाद में मैंने उसे जब उसकी चूत के खून से सना रुमाल दिखाया तो वो बोली- सच में तुम्हारे लंड में तो दम है।

मैं बोला तो फिर आज रात को भी कुश्ती हो जाए, नहीं कल तो मामा आ जायेंगे।

और उस रात भी मैंने उसकी चूत और सोंदर्य के जोबन को जी भर के मजा लिया और एक सवाल भी किया कि उसे मेरा लौड़ा पसंद आया या मामा का?

तो उसका जवाब था- जब तक किसी और का नहीं ले लो, यह पता थोड़े ही चलता है कि कौन अच्छा है? वो तो अब तुमसे चुदने के बाद पता चला कि लंड इतना सुखदायी भी होता है।”

उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता मैं उसकी जी तोड़ कर मारता।

दोस्तों याद रखना चूत और सांप जहाँ भी दिख जाए मार देने चाहिए।

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