इन्सेस्ट सेक्स कहानी: घर की लाड़ली-11

(Incest Sex Kahani: Ghar Ki Ladli- Part 11)

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माँ-बेटों की चुदाई की तैयारी

अभी तक इस इन्सेस्ट सेक्स कहानी में आपने पढ़ा कि कैसे एक जवान लड़की ने पहले अपने दो भाइयों को पटा कर अपनी चूत चुदवायी, उसके बाद अपनी माँ को उकसा कर उसके साथ लेस्बियन सेक्स किया.
अब आगे:

अब दोनों माँ बेटी थोड़ा आराम करने के मूड से बिस्तर पर लेट गयी और एक दूसरे को बड़े प्यार से देखने लगी. अभी भी दोनों का एक एक पैर एक दूसरे में गुंथा हुआ था और हाथ एक दूसरी की चूचियों को धीरे-धीरे सहला रहे थे.
थोड़ी देर आराम करने के बाद जब दोनों की सांसें थोड़ी धीमी हुई तो मयूरी ने बातचीत शुरू की- माँ!
शीतल- हाँ?
मयूरी- थैंक्स माँ… मुझे बहुत मजा आया… आपके साथ ये करके!
शीतल- मुझे भी बहुत मजा आया बेटा… किसी लड़की या औरत के साथ मेरा भी ये सेक्स का पहले अनुभव था… पर तुम बहुत कमाल की हो… पता है, तुम जिस भी आदमी को पत्नी के रूप में मिलोगी, तुम्हारा ये शरीर पाकर वो आदमी धन्य हो जायेगा.

मयूरी- थैंक्स माँ… पर पता नहीं वो दिन कब आएगा जब मुझे कोई आदमी अपने लंड से चोदेगा… आप तो बहुत भाग्यशाली हो माँ जो आपको पापा का लंड रोज़ मिलता है… मैंने आप दोनों को चुदाई करते हुए कई बार देखा है.
शीतल (आश्चर्य से)- क्या…? सच में?
मयूरी- हाँ माँ… कई बार तो पापा आपकी गांड भी मारते है… और आप बड़े मजे से अपनी गांड में उनका लंड लेकर उछल-उछल कर चुदवाती हो… सब देखा है मैंने…

शीतल (हँसते हुए)- तो तेरा मन उस समय क्या करने का होता है?
मयूरी- मेरा तो मन करता है कि मैं झट से जाकर पापा का लंड अपने मुँह में लेकर पहले तो जोर-जोर से चूस लूँ… फिर अपनी चूत में डालकर खूब चुदुँ.
शीतल (हैरानी से)- मतलब तुझे अपने बाप से के लंड से चुदने का मन करता है?
मयूरी- मेरा तो मन किसी भी मर्द के लंड से चुदने का करता है माँ… फिर चाहे वो कोई भी हो अपना बाप या कोई और मर्द… और वैसे भी, दुनिया के हर लड़की का पहला प्यार उसका बाप होता है… जैसे दुनिया के हर लड़के का पहला प्यार उसकी माँ होती है.
शीतल- हे भगवन… ये तू क्या कह रही है?
मयूरी- सच तो कह रही हूँ माँ…
शीतल- अच्छा? तुझे कैसे पता?

मयूरी- मैंने आपके दोनों बेटों को आपस में बात करते सुना है.
शीतल (उत्सुकता से)- क्या सुना है?
मयूरी- रहने दो… आप यकीन नहीं करोगी!
शीतल- अरे तुम बोलो तो… मैं पक्का यकीन करुँगी.
मयूरी- दोनों भाई आपको एक साथ चोदना चाहते हैं.
शीतल- क्या?
मयूरी- हाँ… जैसे मैंने आपको पापा से चुदते हुए देखा है वैसे उन दोनों ने भी कई बार देखा है और उन्होंने आपको पापा से गांड मरवाते हुए भी देखा है.
शीतल- अच्छा?

मयूरी- हाँ… और इसीलिए दोनों आपको एक साथ चोदना चाहते हैं… एक आपकी गांड में और एक आपकी चूत में लंड डालकर आपको चोदना चाहते हैं.
शीतल- क्या बात कर रही है?
मयूरी- और नहीं तो क्या? और तो और… वो दोनों… खैर छोड़ो.
शीतल- अरे और क्या?
मयूरी- छोड़ो न…
शीतल (उत्सुकता से)- अरे बता ना… और क्या?
मयूरी- दोनों आपकी पैंटी और ब्रा को हाथ में लेकर अक्सर मुठ मारा करते है… वो भी एक साथ!

शीतल- क्या… तू सच कह रही है?
मयूरी- और नहीं तो क्या? आपके दोनों बेटे आपके सब से बड़े आशिक़ हैं.
शीतल- मुझे यकीन नहीं होता… मुझे तो आजतक ऐसा नहीं लगा?
मयूरी- मैंने तो पहले ही कहा था कि आप यकीन नहीं करोगी.

शीतल- अरे वो बात नहीं है… पर उन दोनों ने तेरे सामने मेरे बारे में ऐसी बातें की?
मयूरी- हाँ… जब मैं सो जाती हूँ तो वो ऐसी बातें करते है… पर कई बार मैं सो रही होती हूँ और उनको ग़लतफहमी हो जाती है कि मैं सो चुकी हूँ और वो अपनी सीक्रेट बातें करने लगते हैं… मैं तो बस चुपचाप सुनकर मजे लेती हूँ… इसमें उनकी कोई गलती थोड़ी है… आप हो ही इतनी खूबसूरत… एकदम मॉल जैसी… आप तीन जवान बच्चों की माँ हो पर लगती हो पच्चीस साल की लड़की जैसी.
शीतल- अच्छा…
मयूरी- अच्छा माँ?
शीतल- हाँ?
मयूरी- एक बात पूछूं?
शीतल- हाँ पूछो.
मयूरी- आप बुरा तो नहीं मानोगी?
शीतल- अरे… तेरे साथ नंगी पड़ी हूँ… अभी तेरी चूत चाटी है… किस बात से डर रही है? बता न… कुछ बुरा नहीं मानूंगी.

मयूरी- आप इतने साल से पापा से चुद रही हो? आपका किसी और मर्द के साथ कोई चुदाई वाला रिश्ता रहा है क्या?
शीतल- मतलब?
मयूरी- मतलब क्या अपने किसी और आदमी का लंड अपने चूत में लिया है कभी?
शीतल- नहीं… कभी किसी और मर्द से तो नहीं चुदवाया… पर…
मयूरी- पर क्या माँ?

शीतल- तुम्हें बता देती हूँ… कभी कभी मन करता है कि किसी और लंड का स्वाद लिया जाये… मतलब किसी और को जी भर के चूमूँ, उसे प्यार करूँ, उसका लंड चूसूँ! उससे अपनी चूत चटवा कर खूब मजे लूँ… फिर बहुत देर तक अलग अलग अवस्था में चुदवा कर मजे लूँ… ऐसा नहीं है कि तेरे पापा ठीक से नहीं चोदते… वो अब भी किसी बांके जवान लड़के की तरह मस्त चोदू आदमी हैं. और मुझे हर बार संतुष्ट भी करते हैं. पर एक ही लंड से चुदवाकर थोड़ी बोर हो गई हूँ बस… पर इस उम्र में अगर किसी और मर्द के साथ ऐसा करती हूँ तो बदनामी का बहुत ज्यादा डर रहता है. और साथ साथ में अब परिवार की इज्जत की भी बात होती है.
मयूरी- हुम्म्म… मैं समझ सकती हूँ.

फिर थोड़ी देर तक कमरे में बिल्कुल सन्नाटा सा छाया रहा, दोनों औरतें कुछ सोचने लगी कि अचानक मयूरी को जैसे कुछ आईडिया सूझा
मयूरी- माँ… एक आईडिया है…
शीतल- कैसा आईडिया?
मयूरी- आईडिया ऐसा है कि आप अगर चाहो तो आपको नया लंड भी मिलेगा और किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा.
शीतल मुस्कुराते हुए- अच्छा? बता चल… क्या आईडिया आया है तेरे दिमाग में?
मयूरी- देखो… आपकी बात सही है… अगर आप घर के बाहर किसी भी मर्द से चक्कर चलाते हो तो बदनामी तो होगी.
शीतल- बिल्कुल सही… यही मैंने भी कहा… तो इसमें आईडिया कहाँ है?
मयूरी- अरे पूरी बात तो सुनो?
शीतल- अच्छा बताओ…

मयूरी- पर अगर आपको घर में लंड मिल जाये तो बहार किसी को क्या पता चलेगा?
शीतल- मतलब?
मयूरी- माँ… आप बहुत भोली हो… देखो… अगर आपको विक्रम भैया और रजत में कोई या दोनों चोदते हैं तो?
शीतल- तू पागल है क्या? वो मेरे अपने बेटे हैं… उनको अपने कोख से पैदा किया है मैंने… अपने इन चूचियों से दूध पिलाकर बड़ा किया है मैंने…
मयूरी- माँ… आप एक बार पूरी बात तो सुनो… मैं मानती हूँ ये सारी बात … पर इन सब चीज़ों से क्या फर्क पड़ता है… ये सब तो दुनिया को दिखाने वाली बात होती है बस… और आपने उन दोनों को इसी चूत से पैदा किया है… अब उन दोनों को इसी चूत को मजे देकर सेवा करने की बारी है… इन चूचियों का दूध पीकर बड़े हुए हैं दोनों… बड़े होकर फिर से अगर इन चूचियों से अगर दूध पिएंगे तो क्या नया हो जायेगा.
शीतल थोड़ा हकलाते हुए- त… तू… तुम…

शीतल के ऐसे हकलाने से मयूरी को अपनी बातों का प्रभाव दिखना शुरू हो गया, उसको यकीन होने लगा कि माँ अब अपने बेटों से चुदने को तैयार हो रही है, बस थोड़ा और जोर देने की जरूरत है. उसने अपनी एक उंगली अपनी माँ के चूत में डाली… जिससे उसकी हवस की आग तो थोड़ी और हवा लगे और वो भड़के.

मयूरी- माँ… बात को समझो… वो दोनों भी आपको चोदना चाहते हैं… घर की बात घर में रहेगी बस… पापा तो दिन भर बाहर रहते हैं… किसी को कुछ पता नहीं चलेगा कभी… और अगर पापा को पता चल भी गया किसी तरह से तो वो क्या कर सकते हैं… किसी को बाहर बता तो सकते नहीं… वैसे उनको कभी पता ही नहीं चलेगा… कुछ नहीं होगा माँ!
शीतल- नहीं मयूरी… तेरे पापा को अगर पता चल गया तो गज़ब हो जायेगा.
मयूरी- माँ… अगर उनको पता चल गया तो मैं वादा करती हूँ… कि मैं उनको समझा दूंगी.

शीतल- कैसे… तू कैसे उनको समझा पायेगी बेटा कि उनकी पत्नी अपने खुद के दो बेटों से एक साथ चुदती है?
मयूरी मुस्कुराते हुए- माँ… मैं आपको कम लगती हूँ क्या? मैं जवान हूँ और खूबसूरत हूँ… पापा चाहे जो भी हों… हैं तो एक मर्द ही न… अपनी चूचियां जब उनके आँखों के सामने खोल दूंगी ना तो जीभ बाहर निकलकर कुत्ते की तरह मेरी हर बात मानेंगे… अगर अपनी पैंटी खोलकर अपनी जांघें उनकी नाक के करीब रख दूँ ना… तो जो कहूं वो करेंगे… पापा हैं तो क्या… हैं तो एक मर्द ही न…
शीतल मुस्कुराती हुई- मतलब तू अपने पापा को अपनी चूचियों और चूत से मना लेगी?
मयूरी- हाँ… बिल्कुल!

शीतल- तो एक काम कर… तू अपने पापा को पटाने की कोशिश कर और मैं अपने बेटों को…
मयूरी- क्या बात कर रही हो माँ… मतलब आप अपने पति को मेरे हवाले कर रही हो? आपको जलन नहीं हो रही?
शीतल- जलन कैसी… तू कितने दिन तक मेरे पति को चोद पायेगी… दो या तीन साल… फिर तो तेरी शादी हो जाएगी… तू जाएगी अपने पति के घर… और मेरा पति फिर से सिर्फ मेरा… और बदले में मुझे दो-दो नए लंड मिलेंगे… जीवन भर के लिए.
मयूरी- बात तो एकदम पते की है माँ… क्या सोच है आपकी…

और दोनों नंगी माँ-बेटी जोर से खिलखिला कर हंसने लगी.

फिर शीतल ने अपना अगला सवाल किया- अच्छा एक बात बता?
मयूरी- हाँ.. माँ?
शीतल- मुझे अपने बेटों को पटाने के लिए, उनका लंड अपनी चूत में डलवाने के लिए करना क्या होगा?
मयूरी- आपको कुछ नहीं करना माँ… वो दोनों तो पटे-पटाये हुए हैं… वो दोनों तो पहले से ही आपके लिए पागल हैं… आपको बस उनको अपने इस कामुक शरीर से आमंत्रण देना है कि वो आएं और इसका भोग करें.
शीतल- और ये कैसे होगा?
मयूरी- आप ना बस उनको अपनी इन प्यारी-प्यारी चूचियों के दर्शन कराओ, अपनी इस गांड के दर्शन कराओ और अपने शरीर को उनके शरीर से सटाओ और उनको अहसास कराओ कि आप भी अपना ये शरीर उनके हवाले करना चाहती हैं… और आप तो माँ हैं… आपके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं है… माँ का प्यार दिखने के बहाने महबूबा बन जाओ बस…

और दोनों फिर खिलखिलाकर हंस पड़ी.

अगले एक घंटे में दोनों ने फिर से एक दूसरी के साथ कई बार लेस्बियन सेक्स किया और फिर कपड़े पहन कर तैयार हो गयी क्योंकि विक्रम के घर आने का वक्त हो चला था.

इन्सेस्ट सेक्स की कहानी जारी रहेगी.
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