गबरू भाई का एरिया

मुम्बई के एक एरिया में एक भाई रहता था, उस एरिया के सभी लोग उसे गबरू भाई कह कर बुलाते थे, उसक इलाके में उसी की हुकूमत चलती थी। उस एरिया में जो भी लफड़ा होता था, पुलिस से पहले उसे गबरू भाई की अदालत में ले जाया जाता था।

एक बार गबरू भाई के पार बलात्कार का लफ़ड़ा आया, फ़त्तू, जिसने यह कारनामा किया था, उसको पकड़ कर गबरू भाई के पास ले जाया गया तो गबरू भाई ने पहले तो बहुत शान्ति से बात की!

गबरू- क्या रे? तेरे को मालूम नहीं यह अपुन का एरिया है?

फ़त्तू- हाँ, मालूम है ना भाई !

गबरू- फिर कैसे हिम्मत की, ऐसा गन्दा करने की अपुन के एरिया में?

फ़त्तू- अब क्या बोलूं भाई, किस्मत ख़राब थी !

गबरू- चल मेरे को सब कुछ सच-सच बता, क्या और कैसे हुआ?

फ़त्तू- अभी क्या न भाई, इधर नुक्कड़ पर अपुन पान खाने को आया !

गबरू- फिर?

फ़त्तू- अपुन खड़ें होके पान खरेला था, और उतने में सामने वाली बिल्डिंग पर अपुन की नज़र गई!

गबरू- आगे बोल !

फ़त्तू- उधर तीसरे माले पे एक चिकनी खड़ी थी !

गबरू- फिर क्या हुआ?

फ़त्तू- अपुन को ऐसा लगा कि उसने अपुन को आने का इशारा किया !

गबरू- फिर तूने क्या किया?

फ़त्तू- अपुन सोचा कि कुछ काम होएंगा उसको, तो अपुन बिल्डिंग के नीचे चला गया !

गबरू- फिर?

फ़त्तू- उसने इशारे से अपुन को ऊपर बुलाया, अपुन सीढ़ी चढ़ते हुए यही सोचरेला था, “गबरू भाई का एरिया है, लफड़ा नहीं करने का!”

गबरू- चल फटाफट आगे बोल !

फ़त्तू- अपुन ने उसको जाके बोला, क्या काम है; काईको इशारा किया अपुन को?

गबरू- फिर?

फ़त्तू- फिर क्या भाई, अपुन को उसने घर के अंदर खींच लिया!

गबरू उत्साहित होकर- फिर?

फ़त्तू- अपुन घर में तो चला गया लेकिन यही सोच रहा था कि, “गबरू भाई का एरिया है, साला लफड़ा नहीं करने का!”

गबरू- चल आगे बोल!

फ़त्तू- उसने अपुन का हाथ पकड़ लिया !

गबरू- अच्छा फिर?

फ़त्तू- सच्ची बोलता है गबरू भाई, हाथ पकड़ते ही, अपुन फिर सोचा, “गबरू भाई का एरिया है, साला कोई लफड़ा नहीं करने रे !”

गबरू- फिर क्या हुआ?

फ़त्तू- फिर क्या था, उसने बोला- ए चिकने मेरी प्यास बुझा दे!

गबरू और अधिक उत्साह से- फिर तू क्या बोला?

फ़त्तू- फिर क्या बोलता भाई, उसने अपना दुपट्टा नीचे गिरा दिया!

गबरू- तो फिर क्या हुआ?

फ़त्तू- अपुन के दिमाग का दही हो गया, क्या गोल गुम्बद थे साली के, लेकिन भाई फिर भी, पुन सोचा “गबरू भाई का एरिया है लफड़ा नहीं करने का !”

गबरू- फिर तूने क्या किया?

फ़त्तू- अपुन बोला एक-दो किस करेगा और चला जायेगा, ज्यादा बोली तो बॉडी काम करेंगा लेकिन अपुन का इंजन नहीं खोलने का, आखिर “गबरू भाई का एरिया है, लफड़ा नहीं करने का!”

गबरू- तो फिर?

फ़त्तू- उसने अपुन को खींच लिया, सच्ची बोलता है भाई, ऐसी कातिल जवानी अपुन, अपनी लाइफ में नहीं देखा!

गबरू अति-उत्साहित होते हुए- हाँ, वो तो है, तू आगे बोल!

फ़त्तू- फिर क्या था, अपुन ने किस्स किया, गोल गुम्बद भी दबाया, लेकिन ईमान से बोलता हैं भाई, यही सोच रहा था “गबरू भाई का एरिया है, लफड़ा नहीं करने का!”

गबरू- आगे बोल?

फ़त्तू- फिर उसने अपनी कमीज़ उतार दी!

गबरू- फिर?

फ़त्तू- फिर सलवार, लेकिन अपुन के दिल में एक ही ख्याल आ रहा था, ” गबरू भाई का एरिया है, लफड़ा नहीं करने का!”

गबरू- आगे-आगे!

फ़त्तू- फिर ब्लाउज और पेंटी साली ने सब उतार दी!

गबरू- सही में?

फ़त्तू- फिर मेरी पैंट खींच ली!

गबरू- अच्छा!

फ़त्तू- फिर मेरी कच्छे में हाथ डाल दिया!

गबरू- ओह!

फ़त्तू- फिर उसने मेरा कच्छा उतार दिया और मेरे शरीर पर हाथ फेरने लगी, बस फिर क्या था, मैं भी गर्म होने लगा पर भाई फिर भी मैंने सोचा “गबरू भाई का एरिया है, लफड़ा नहीं करने का!”

गबरू- गुस्से में, आगे आगे बोल साले!

फ़त्तू- फिर उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया, लेकिन भाई कसम से, फिर भी मैं यही सोच रहा था, “गबरू भाई का एरिया है!”

गबरू गुस्से व उत्तेजना में फ़त्तू की बात काटते हुए- अबे, भोंसड़ी के, माँ चुदाने गया तेरा गबरू भाई !

फ़त्तू- यहीच-यहीच, भाई अपुन ने भी यहीच सोचा और साली की गेम बजा डाली !

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