सम्भोग से आत्मदर्शन-7

(Sambhog Se Aatmdarshan- Part 7)

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नमस्कार दोस्तो, कैसे हैं..! आप सब यूं ही प्रतिक्रिया देते रहिए इससे हम लेखकों का हौसला बढ़ता है।

इस सेक्स स्टोरी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि छोटी के मानसिक इलाज के लिए मैंने छोटी और उसकी माँ के सामने तनु के साथ सेक्स की शुरुआत कर दी थी.
आंटी की हालत मेरे लिंग को देखकर खराब होना स्वाभाविक था, आंटी की आँखों में एक चमक थी, वे अपने एक पैर के ऊपर दूसरे पैर को रख कर खुद की वासना संभालने की नाकाम कोशिश कर रही थी।

मैंने 69 की अवस्था में तनु की योनि चाटनी शुरू की और तनु ने मेरे लिंग पर अपने करतब दिखाने शुरू किये, मैं तनु की योनि प्रदेश का कोना कोना अपने कोमल जीभ से तलाश रहा था, उसका कामरस जैसे ही मेरे जीभ में आता, मैं उसे गटक जाता था, मैंने उसकी योनि के अंदर बाहर हर तरफ बड़ी नजाकत के साथ जीभ फेरना जारी रखा, हमारी कामुक ध्वनियाँ माहौल को और भी ज्यादा गर्म कर रही थी।

तनु ने मेरे लिंग के सुपारे को पहले चाटा और लंड में ऊपर से नीचे तक जीभ फिराई और फिर धीरे-धीरे लिंग मुंह के अंदर करते-करते मुंह में पूरा अंदर कर लिया, पर लंड बड़ा था इसलिए उसके मुंह के आखरी छोर में टकरा कर भी लंड आधा ही जा सका था.

तनु ने जब मेरे अंडकोष भी सहलाने शुरू किये तो मैं अपनी बेचैनी पर काबू ना रख सका और तनु के मुंह को ही चोदने लगा, तनु की जीभ बाहर आ गई और वो गूं-गूं करने लगी।
और मैंने उसकी योनि भी बेरहमी से चाटनी काटनी शुरू कर दी। अब छोटी के अंदर का डर विरोध में बदल गया और वो अपनी माँ को झिटक कर हमारे पास आ गई और मुझे नोचने लगी, मारने लगी, मुझे भगाने का हटाने का प्रयास करने लगी।

वो तो गनीमत है कि उसकी माँ उसके नाखून समय पर काट देती थी नहीं तो वो मुझे नाखूनों से ही खरोंच कर मार डालती।
उसकी माँ अकेले उसे नहीं संभाल पा रही थी, तो हम भी उठे और तनु ने उसे अपनी बांहों में लेकर शांत कराने की कोशिश की और कहा- छोटी ये सब मुझे अच्छा लग रहा है, संदीप मुझे मेरी मर्जी से चोद रहा है।
और ऐसा कहते हुए तनु उसके स्तन सहलाने लगी और कहने लगी- तुम्हें भी अच्छा लग रहा है ना, तुम फिकर मत करो बस देखती रहो कि हम क्या करते हैं।

तब तक मैंने आंटी से कहा कि आप छोटी को थोड़ा सहलाइए ताकि उसके अंदर की मरी हुई स्त्री जाग सके।
उसकी माँ ने पहले मुंह बनाया फिर हाँ में सर हिलाया।

और मैंने तनु से कहा- अब तुम खुद मेरे ऊपर चढ़ के चुदाई करो ताकि छोटी को लगे कि तुम ये सब अपनी मर्जी से कर रही हो।
ऐसे भी तनु पुरानी खिलाड़ी थी, उसके लिए ये सब कौन सी नई बात थी।

अब मैं लेट गया और तनु ने मेरा लिंग एक बार फिर अपने मुंह में ले लिया, कुछ देर में ही बहुत अच्छे से चूसने के बाद मुझ पर चढ़ कर मेरा लिंग अपनी योनि में घिसने लगी, मेरा फनफनाता लंड, बड़ा सा गुलाबी सुपारा अब और भी विकराल नजर आने लगा और तनु मेरे विकराल लंड पर मजे से बैठ गई।

वो अनुभवी थी, चूत खुली हुई थी और छोटी को सिर्फ आनन्द ही दिखाना था दर्द के लिए कोई स्थान ही ना था इसलिए तनु थोड़े बहुत दर्द को अपने अंदर ही समेट गई होगी। नहीं तो कोई और होता या हालात अलग होते तो मेरा लंड इतनी आसानी और खामोशी से ले पाना संभव नहीं है।
अब मेरा फनफनाता हुआ लंड गीली मजेदार चूत की गहराइयों में समाता चला गया, और तभी हम चारों के मुंह से एक साथ ‘आहह उउउ आऊचचच…’ की आवाज आई।

तनु ऊपर चढ़कर चोद रही थी, मैं नीचे लेटकर चुद रहा था, इसलिए हमारा ऐसा आवाज करना लाजमी था, पर आंटी ने हमारी चुदाई को देखकर अपनी साड़ी के नीचे से हाथ डाल कर अपनी योनि में ऊंगली डाल ली इसलिए वो सिसकार उठी, और एक हाथ उसने छोटी के स्तन पर रखे थे, और उत्ततेजना में जोर से दबा दिया इसलिए छोटी भी चीख पड़ी। अब कामुक ध्वनियों के बीच चुदाई का खेल शुरू हो गया था।

तनु की चूत तो कमाल की थी ही, और वो मंझी हुई खिलाड़ी भी थी इसलिए आनन्द का कोई ठिकाना ना रहा। और तनु खुद इस चुदाई के खेल को ड्राईव कर रही थी इसलिए अब छोटी भी शांत थी और आंटी की आँखें भी बंद हो गई थी, अब वो अपनी उंगलियों से चरम सुख तलाश कर रही थी।

तनु और मैं दोनों ही काफी देर से चुदाई में लगे थे, छोटी की वजह से हमने एक ही आसन में चुदाई की क्योंकि हम छोटी को बताना चाहते थे कि तनु अपनी मर्जी से चुदवा रही है।
बस उसी आसन में कभी मैं नीचे से धक्के देता तो कभी तनु खुद उछलती.

और फिर एक समय आया जब हमारी गति तेज होती गई- आहहह उहहह ओहहह और तेजज करो… आहह… ऐसी आवाजें आती रही, लंड चूत किसी इंजन पिस्टन की तरह काम करने लगे। चुदाई की गति और सांसें दोनों तेज और तेज होती ही चली गई। तनु का स्खलन हो गया और नीचे से ही आठ दस बड़े झटकों के बाद मेरा भी स्खलन हो गया।

मैंने देखा तो आंटी आँखें बंद किये हुए चरम सुख की तलाश कर रही थी, सिसकारियाँ उनके मुंह से स्पष्ट और तेज आने लगी थी, मेरा लंड वीर्य त्यागने के पश्चात भी अकड़ा हुआ था। इसलिए मैंने खड़े होकर उनके मुंह में वीर्य से सना लंड लगा दिया।
आंटी मदहोश थी इसलिए उन्होंने बिना परहेज किये लंड मुंह में ले लिया, वो पूर्व प्रशिक्षित थी वो एक अलग ही अंदाज से लंड चूसने लगी और अपने हाथों की गति अपनी चूत में बढ़ाने लगी।

मेरा लंड चुदाई के लिए फिर तैयार होने लगा। तभी मेरा आधे से ज्यादा लंड सुमित्रा देवी (आंटी) ने अपने मुंह में भर लिया और वहीं ठहर गई, शायद उनका भी स्खलन हो गया था।

मैंने उन्हें छेड़ते हुए कहा- चलो, अब एक बार आपके साथ भी हो जाये।
तो उन्होंने मुंह से लंड निकाला और भाग कर दूसरे कमरे में जाकर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

इधर तनु ने छोटी को अपने सीने से लगा रखा था और सम्भोग, पीड़ा, आनन्द शरीर और व्यवहार का ज्ञान देना प्रारंभ कर दिया था- देख छोटी, तू अब बड़ी हो गई है, अभी जो तुमने देखा ये पर्दे के पीछे का सच है, हर औरत के अंदर पुरुषों की तुलना में तीन गुना ज्यादा सेक्स या कामुकता होती है। तुम्हारे साथ गलत व्यवहार हुआ था, गलत समय में हुआ था, जबरदस्ती हुई थी, और वो भी तब जब तुम इन बातों से अनजान थी, लोग अनजान थे, सील भी नहीं टूटी थी, इसलिए तुम्हें पीड़ा हुई, वास्तव में सेक्स हम तन से नहीं मन से करते हैं, जब मन तैयार होता है तो सेक्स का आनन्द आता है। और मन तैयार ना हो तो वही सेक्स पीड़ादायक हो जाता है।
तुम्हारे साथ क्या हुआ कैसे हुआ, हम नहीं जानते पर तुमने बलात्कार का दंश सहा है। किसी सेक्स अनुभवी का जब बलात्कार होता है तो वह भी पीड़ादायक होने के बावजूद सह लेने वाला होता है। पर किसी अक्षतयौवना का बलात्कार असहनीय होता है शायद इसीलिए तुम्हारा भी मानसिक संतुलन बिगड़ा है।

तनु की इन बातों के वक्त हम नंगे ही थे छोटी अपने कपड़ों में थी, मेरा लंड आंटी के चूसने से फिर खड़ा हुआ ही था, पर पहली चुदाई के बाद थोड़ा सा नर्म था।
तनु ने मुझे और पास बुलाया और छोटी का हाथ पकड़ कर मेरे लिंग पर रखा और उसे छूने दबाने को कहा, छोटी मना कर रही थी, फिर भी तनु ने अपने हाथों से पकड़ कर उससे वो करवाया फिर कहा- अब बता छोटी, इसमें चोट लगने वाला कुछ है क्या?
फिर अपनी योनि में छोटी का हाथ रखवा के कहा- ये देख, मुझे चोट नहीं लगी है ना, बल्कि मुझे तो बहुत ज्यादा आनन्द आया है, इतना आनन्द कि जिसे बता पाना भी संभव नहीं है। और ऐसे भी लिंग चूत चुदाई की बातें सबके सामने, या किसी भी वक्त नहीं की जाती, तू भी मत किया कर।

छोटी विक्षिप्त थी इसलिए उसका ये सब इतनी आसानी से समझ पाना मुश्किल था।
मैंने तनु से कहा- तनु, उसके दिमाग में ज्यादा जोर देना अच्छा नहीं है, वो धीरे धीरे समझ जायेगी अब इसे आराम करने दो।
उसी वक्त आंटी वापस आई तो तनु ने उनसे छोटी को ले जाने को कहा।

मेरा और चुदाई करने का मन था, मैं तनु से चिपकने लगा, तो तनु ने कहा- अब तो हम ये सब करते रहेंगे, आज देर भी हो रही है, और हमारी चुदाई का उपयोग छोटी के इलाज के लिए होना चाहिए। एक ही दिन में ज्यादा अच्छा नहीं है।
मैंने भी उसकी बात उचित जानकर खुद में कंट्रोल किया, फिर कपड़े पहन कर बाहर आकर बैठ गये।

आंटी जी शर्म से मुंह छुपा रही थी और तनु भी अपनी माँ से सही तरीके से नजर नहीं मिला रही थी।
मैंने दोनों को कहा- देखिए, आप लोगों का लजाना जायज है, पर अब इस लाज शर्म को हटाना होगा, मुझे आज छोटी के अंदर थोड़ा सुधार नजर आ रहा है। हमें उसे ये उपचार कम से कम हफ्ते में एक बार देना ही होगा, किसी हफ्ते संभव हो तो हम दो बार भी उसे उपचार देकर अपने मजे ले सकते हैं। और इस बीच आप लोगों को छोटी की मालिश करनी होगी, रोज सुबह सर से पांव तक तेल से उसकी मालिश करके गुनगुने पानी में नहलाने से उसके मन मस्तिष्क में सुधार होगा और तन का पूर्ण विकास होगा, जिससे उसको अंदर से मजबूत और स्वस्थ होने का अहसास होगा, जो की उसकी समस्या का उत्तम उपचार होगा।

अब तनु और आंटी ने हाँ में सर हिलाया।
फिर तनु ने कहा- मेरा रोज आना संभव नहीं है, कभी कभी माँ और छोटी से मिलने मेरे पति देव ही आ जाते हैं। पर अच्छी बात है कि वो लगभग दरवाजे से ही औपचारिकता करके लौट जाते हैं। इसलिए मुझे ये बता दो कि सेक्स वाला उपचार कब कब करना है, बाकि मालिश का काम माँ और तुमको मिल बाँट कर करना होगा।

मैंने उसकी बातों को समझ कर कहा- ठीक है, आज बुधवार है अब हम सोमवार या मंगलवार को ये उपचार करेंगे, ये दिन ऐसे हैं जब हम आसानी से समय दे सकेंगे।
सबकी सहमति हुई और हम आंटी और छोटी को छोड़ आये।

उस वक का आनन्द मैं भूले से भी नहीं भूल पा रहा था और सोच रहा था कि आंटी का क्या हाल हुआ होगा। वो बिचारी तो बिन पानी मछली की तरह तड़प गई होगी।

मैं दूसरे दिन जल्दी ही उनके पास चला गया, अब वो मुझे दूसरे नजरिए से देख रही थी। छोटी भी इतने दिनों में मुझे पहचानने लगी थी।

आंटी ने छोटी के मालिश वाले तेल और साबुन के साथ कुछ और घरेलू सामानों की लिस्ट मुझे थमा दी साथ में पैसे भी पकड़ा दिये और कहा- जब समय मिले और यहाँ आना हो तब ये सब लेते आना, और कल थोड़ा और जल्दी आना, मैं छोटी की मालिश शायद अकेले ना कर पाऊं, या कर भी लूं तो कम से कम एक दो दिन मालिश की विधि बता देना।

मैंने पैसे और सामान की लिस्ट जेब में रखी और हाँ में सर हिलाते हुए कहा- एक बात पूछूं आपसे?
उन्होंने कहा- नहीं, मत पूछो!
मैंने कहा- पूछने तो दो!
उन्होंने कहा- तुम पूछोगे तो मैं जवाब नहीं दे पाऊंगी, तुम्हारा वो बहुत अच्छा है, मैं वासना में बहक गई थी उसके लिए माफी चाहती हूँ। और अब पाँच दिन का इंतजार करना है मुझे उस अनोखे पल के लिए। मैंने सारी बातें कह दी, अब और कुछ ना पूछना।

मैंने कहा- मैं क्या पूछना चाहता था आपको कैसे पता?
उन्होंने कहा- ऐसे सवालों के जवाब मैं बहुर सालों पहले से पढ़ने की उम्र से दे रही हूँ, खुद का अनुभव और सहेलियों की बातें, परिवारिक चर्चायें, और फिर खूबसूरत महिला बहुत कुछ अपने छेड़छाड़ से भी सीख जाती है। और असल बात तो ये है कि ये सारे सवाल बेतुके होते हैं मतलब कि इसका जवाब दोनों ही जानते हैं फिर भी पुरुष किसी स्त्री से ऐसे सवाल उसके मन में कामोत्तेजना लाने के लिए करता है।
मैंने ‘हम्म…’ कहा और सवाल कर ही दिया- आपको भी साथ आकर चुदाई करने का मन नहीं किया क्या?

उन्होंने कहा- मैंने मना किया ना तुम्हें कुछ पूछने से, और सेक्स तो मैंने जिन्दगी में बहुत किया है, पर लाईव सेक्स देखने और कांमेंट्री का आनन्द पहली बार मिला है। उसके लिए धन्यवाद और अब तुम जाओ, मैं अब कोई बात नहीं कर पाऊंगी।

मैं वहाँ से मुस्कुरा के लौट आया, दुकान आकर मैंने वह सामान वाली लिस्ट देखी, उसमें एक जगह पर रेजर और बाल साफ करने वाली क्रीम लिखी हुई थी, उसे पढ़ते ही मेरा मन खुशी से झूम उठा, मुझे लगा कि आंटी अब चुदाई के लिए तैयार है और वो अपने शरीर को पूरी तरह साफ करने के लिए क्रीम और रेजर दोनों मंगवा रही हैं तो!

मैं सारे सामान लेकर दूसरे दिन वहाँ जल्दी पहुँच गया, मैंने थैले से रेजर और क्रीम निकाल कर कामुक इशारा किया और कहा- किसके लिए तैयारी करने वाली हो?
उन्होंने अपनी वासना को छिपाते हुए कहा- तुम्हें तो और कुछ सूझता ही नहीं है, मैं किसी के लिए तैयारी नहीं करने वाली, मैं ऐसे भी हर पंद्रह दिन में खुद को साफ कर लेती हूँ। इस बार रेजर और क्रीम दोनों खत्म हो गये हैं, और छोटी की मालिश से पहले उसकी सफाई जरूरी है इसलिए ये सब मंगवाया है। और मेरे सपने देखना छोड़ दो, जैसे तैसे मैं उमर काट लूंगी इस उम्र में राह भटकने का मेरा कोई इरादा नहीं। अब चलो, मालिश करने में छोटी को लाने पकड़ने में मेरी मदद करो।

वासना भरी कहानी जारी रहेगी.
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