रैगिंग ने रंडी बना दिया-44

(Ragging Ne Randi Bana Diya- Part 44)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अब तक की इस सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि रात को फ्लॉरा अधनंगी हालत में दरवाजा खोल कर ही सो गई थी और उसके पापा जॉय उसे जगाने के लिए उसके कमरे में जा रहे थे।
अब आगे..

जॉय बड़बड़ाता हुआ सीधा कमरे में चला गया और वहाँ का नजारा देख कर उसके होश उड़ गए। फ्लॉरा बेसुध पीठ के बल सोई हुई थी.. उसकी नाइटी पेट तक उठी हुई थी और उसकी फूली हुई चुत साफ-साफ नज़र आ रही थी। जॉय ने जल्दी से नज़र हटाई और पास पड़ी चादर फ्लॉरा पर डाल दी। फिर उसके पास बैठ कर उसके बालों को सहलाने लगा।

जॉय- फ्लॉरा उठो माय स्वीट बेबी क्या तुम्हें आज कॉलेज नहीं जाना?
फ्लॉरा- उउउह क्या पापा.. कितना अच्छा सपना आ रहा था.. आपने जगा दिया।
जॉय- उठ जाओ बेटी.. नहीं तो तुम्हारी मॉम आ गई तो सुबह सुबह शुरू हो जाएगी।

फ्लॉरा- ओके पापा उठती हूँ मगर आप अन्दर कैसे आए डोर तो बंद था?
जॉय- तेरा सर बंद था.. तुझे होश भी है डोर खुला हुआ था और तू भी ऐसे अधनंगी सोई हुई थी। बेटा मैंने कितनी बार कहा है अगर ऐसे सोना है तो डोर लॉक करके सोया कर। ये तो आज मैं आ गया.. तेरी मॉम आ जाती तो घर में भूकंप आ जाता।
फ्लॉरा- सॉरी पापा.. शायद मैं रात को बंद करना भूल गई होऊंगी और आपको पता है ना सोते टाइम मुझे ज़्यादा कपड़े पसंद नहीं।
जॉय- अरे तो मत पहना कर.. थोड़े क्यों पूरे निकाल कर सोया कर.. मगर डोर बंद करके सोया कर, समझी.. वरना तेरे साथ साथ मुझे भी सुनना पड़ेगा।

दोस्तो, आप टेंशन में आ गए ना.. ये क्या चल रहा है। एक बाप अपनी बेटी से कैसे खुल कर नंगी सोने को बोल रहा है। ना ना ज़्यादा सोचो मत.. ये पहली बार नहीं हुआ जॉय ने फ्लॉरा को बहुत बार ऐसी हालत में देखा है। कई बार तो पूरी नंगी भी देखा है। अब कैसे और क्यों ये आपको बाद में पता लगेगा। अभी पीछे जाने का टाइम नहीं है.. आगे बढ़ो और कहानी को एंजाय करो।

फ्लॉरा- ओके पापा कान पकड़ कर सॉरी.. अब आप जाओ मैं अभी फ्रेश होकर आती हूँ।
जॉय वापस बाहर चला गया और फ्लॉरा वॉशरूम चली गई और 15 मिनट में रेडी होकर नाश्ते के लिए आ गई।

अब यहाँ कुछ नहीं बचा तो सीधे कॉलेज चलते हैं वहाँ शायद कुछ मिल जाए।

साहिल और वीरू बैठे बात कर रहे थे तभी वहाँ संजय भी आ गया।

साहिल- अरे यार, कहाँ तू आजकल गायब रहता है.. शाम को भी नहीं मिलता और कॉलेज भी देरी से आता है।
संजय- अरे कुछ खास नहीं, पापा ने काम में उलझा रखा है यार!
सुमन- गुड मॉर्निंग फ्रेंड्स.. क्या हो रहा है.. सब ठीक है।
संजय- अरे आओ सुमन.. सब ठीक है तुम सुनाओ और टीना आज भी नहीं आई क्या?
सुमन- नहीं वो कल आएगी.. आज आंटी का चेकअप है और हाँ टीना का फ़ोन भी खराब है तो शाम को आपको मिलने बुलाया है।
संजय- ओके तुमने बताया.. ठीक किया वरना मैं तो फ़ोन ही ट्राइ करता रहता। और सब मज़े में है ना.. फ्लॉरा कहाँ है दिखी नहीं?

फ्लॉरा- हैलो एवेरी बॉडी आई एम हियर.. क्या बातें हो रही हैं सब मिलकर मेरी कोई बुराई तो नहीं कर रहे ना!
वीरू- अरे, तुम्हारे अन्दर बुराई वाली बात ही कहाँ है, जो करेंगे.. आओ आओ..

सब मिलकर हँसी-मजाक करने लगे। फ्लॉरा ने टीना का पूछा.. तो संजय ने बता दिया.. तब वो भी शाम को उससे मिलने के लिए बोली।

संजय- ठीक है हम साथ में चलेगे.. तुम मेरे घर आ जाना.. फिर वहाँ से हम दोनों साथ जाएँगे।
वीरू- टीना के घर ही लेकर जाना इसको.. कहीं और मत ले जाना हा हा हा हा..
संजय- चुप कर साले कुत्ते.. तू हर बार उल्टी बात करता है।
सुमन- अरे आप अब झगड़ो मत, और चलो टाइम हो गया है।

यहाँ भी ऐसा कुछ नहीं हुआ जो बताऊं तो जाने दो। गोपाल घर आ गया होगा उसी के पास देख आते हैं शायद कोई काम की बात मिले।

मोना तो पूरी रात की चुदाई से थकी हुई थी तो मस्त सो रही थी। जब गोपाल आया तो उसे जगाया और पूछा कि क्या हुआ।

मोना- कुछ नहीं.. आज तबीयत ठीक नहीं है थोड़ी थकान सी है।
गोपाल- अच्छा ये बात है.. कहो तो चुदाई करके तुम्हारी सारी थकान उतार दूँ!
मोना- नहीं गोपाल.. नहाकर फ्रेश हो जाऊंगी.. आप चेंज करो, मैं अभी फ्रेश हो जाती हूँ।
गोपाल- जान ये कमरे का हाल ऐसे क्यों है? चादर नीचे पड़ी है सब अस्त-व्यस्त सा है.. ऐसा लगता है जैसे रात यहाँ कुछ हुआ हो?

मोना ने इस बात पर गौर ही नहीं किया उसे सब ठीक करना चाहिए था मगर वो भूल गई.. अब उसकी बत्ती जली।

मोना- ये तो रोज ही ऐसे होता है फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि रोज मैं तुम्हारे आने के पहले ठीक करती हूँ और आज मैं उठी नहीं।
गोपाल- अच्छा वो तो ठीक है.. मगर रात को तुम ऐसे कैसे सोती हो जो कमरे का ये हाल हो जाता है?
मोना- तुम कहना क्या चाहते हो रात को कोई और यहाँ आता है क्या.. जो ये सब करके जाता है हाँ बोलो?

मोना ने थोड़ा गुस्सा होकर ये बात कही तो गोपाल चुप हो गया।

मोना को पता था उसने रात ग़लती की है मगर अब वो गुस्सा नहीं करेगी तो गोपाल उस पर चढ़ाई कर लेगा तो बस उसने बड़बड़ा करना शुरू कर दिया।

गोपाल- अरे जान सॉरी ना.. मेरा ये मतलब नहीं था.. तुम ग़लत समझी हो।
मोना- अच्छा तो क्या मतलब था वो भी बता दो.. पहले ही मुझे रंडी बोल चुके हो आज साबित भी कर दो।
गोपाल- अरे सॉरी यार.. अब प्लीज़ चुप हो जाओ, पुरानी बातें मत दोहराओ कान पकडूँ क्या.. अब रात का थका-हारा आया हूँ यार.. अपने पति पे कुछ तो रहम करो।
मोना- ऐसे तुम समझने वाले भी नहीं थे। एक तो मैं बीमार हूँ और तुम उल्टा बोलोगे तो गुस्सा तो आएगा ही ना.. चलो अब बैठो, मैं चाय बना कर लाती हूँ।
गोपाल- अरे मेरी जान तुम नहा लो. आज तुम्हारे लिए चाय मैं बनाता हूँ।

मोना की समझ के बाहर बात थी कि गोपाल उस पर इतना मेहरबान कैसे हो गया और उसने इतना गुस्सा किया मगर गोपाल कुछ नहीं बोला। इसकी कुछ तो वजह है.. बस वो इसी सोच में बाथरूम चली गई।

जब मोना फ्रेश हो गई तो दोनों बैठे आराम से चाय की चुस्की ले रहे थे।

गोपाल- जान तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है तो आज खाना बाहर से मंगवा लेंगे।
मोना- अरे नहीं ऐसा भी नहीं है.. मैं बना लूँगी। बस ये घर की साफ-सफ़ाई में दिक्कत होती है।
गोपाल- एक बात कहूँ.. हम कोई कामवाली रख लेते हैं, इससे तुम्हें भी थोड़ा आराम मिल जाएगा और रात को तुम अकेली होती हो तो मुझे तुम्हारे लिए बहुत टेंशन होती है। वो साथ होगी तो ठीक रहेगा।
मोना- अच्छा आइडिया है.. मगर आज आपको मेरे अकेले सोने से टेंशन हुई.. इतने दिन कहाँ थे?
गोपाल- अरे काफ़ी दिनों से सोच रहा था.. बस बोल नहीं पाया।

मोना- अच्छा मगर यहाँ कामवाली मिलना आसान है क्या?
गोपाल- आसान तो नहीं है मगर ढूँढ लेंगे.. कोई बड़ी बात भी नहीं है।
मोना- आप देखोगे या ये भी मुझे करना होगा?
गोपाल- अरे नहीं नहीं.. मैं ढूँढ लूँगा, तुम टेंशन मत लो। मेरे सेंटर में एक दोस्त है.. उसने अभी कुछ दिन पहले ही कामवाली रखी है.. उसी से पूछ लूँगा।

मोना- वो तो ठीक है.. मगर कोई बूढ़ी मत लाना चिड़चिड़ करेगी और हाँ कोई खूबसूरत जवान लड़की भी नहीं होनी चाहिए.. क्या पता उसकी नियत तुम पे बिगड़ जाए।
गोपाल- हा हा हा… मुझसे मेरी बीवी तो चोदी नहीं जाती.. उसको क्या खाक चोदूँगा। तुम शक कर रही हो ना अब बूढ़ी नहीं, जवान नहीं.. तो क्या बच्ची लाऊं हा हा हा..
मोना- हाँ बच्ची ढूँढो, मगर दूध पीती नहीं.. यही कोई 18 की ले आओ.. उसको ये सबका पता भी नहीं होगा तो तुम सेफ रहोगे।

मोना की बात सुनकर गोपाल के शरीर में एक करंट सा लगा.. कच्ची कली का नाम सुनते ही उसका लंड पेंट में तन गया, जिसे मोना ने भी महसूस किया। यानि सुधीर की बात एकदम सही थी कि गोपाल की ये कमज़ोरी है।

गोपाल- लेकिन ऐसी लड़की कहाँ मिलेगी और वो काम कर पाएगी क्या?
मोना- लो कर लो बात.. क्यों नहीं मिलेगी और मैं कौन सा उससे सारा काम करवाऊंगी.. बस साफ सफ़ाई ही करवानी है।

थोड़ी देर दोनों बातें करते रहे, फिर मोना ने कहा- तुम सो जाओ.. थके हुए हो.. बाक़ी बातें लंच के टाइम कर लेंगे।

गोपाल सो गया और मोना अपने काम में लग गई दोपहर को भी यहाँ कुछ खास नहीं हुआ बस वही कामवाली को लेकर बातें हुईं।

मगर दूसरी तरफ सुमन की जिंदगी में आज नया मोड़ ज़रूर आएगा.. तो चलो वहीं का नजारा देख लेते हैं।

सुमन जब घर वापस आई तो रोज की तरह नॉर्मल रही। उसने चेंज किया फिर उसकी माँ ने लंच लगा दिया.. और अभी खाना वो शुरू करती कि तभी गुलशन जी आ गए, जिसे देख दोनों माँ बेटी चौंक गई क्योंकि दोपहर में उनका आना होता ही नहीं था। वो सुबह निकलते तो सीधे रात को ही आते.. मगर आज कैसे आ गए।

हेमा- अरे आप.. इस टाइम, सब ठीक तो है ना?
गुलशन- अरे सब ठीक है, आज मेरी बेटी ने मुझसे बात नहीं की तो मेरा दिन अच्छा नहीं गुजरा.. इसलिए सोचा पहले उससे मिल आऊं तो बाकी का दिन अच्छा गुजर जाए।

सुमन भी सुबह की बात को लेकर शरमिंदा थी और टीना की सिखाई बात भी उसको याद थी। वो एकदम से उठी और भाग कर गुलशन जी से लिपटते हुए एकदम ज़ोर से उनसे चिपक गई। उसके कड़क चूचे गुलशन जी साफ महसूस कर रहे थे। उन्होंने मौके की नजाकत को समझते हुए सुमन को अपने से अलग किया तो देखा उसकी आँखों में आँसू थे।

गुलशन- अरे अरे क्या हुआ.. तुम तो बच्चों की तरह रोने लगीं.. नहीं नहीं चुप हो जाओ बस।
सुमन- सॉरी पापा, मैंने आपको दुखी किया प्लीज़ आप मुझे माफ़ कर दो।
गुलशन- अरे नहीं, तुमने कुछ नहीं किया मैंने ही तुम्हें गुस्से ज़्यादा कह दिया था।

थोड़ी देर दोनों बाप और बेटी का ये प्यार चलता रहा.. फिर दोनों ने साथ में लंच किया और जब गुलशन जी ने सुमन को अपने साथ चलने को कहा.. तो वो कुछ कन्फ्यूज हो गई।

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कहानी जारी है।

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