रैगिंग ने रंडी बना दिया-43

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अब तक की इस सेक्सी स्टोरी में आपने पढ़ा कि मोना ने पूरी रात सुधीर से अपनी चुदाई करवाई और दूसरी तरफ सुमन के पापा और मम्मी में उसके रवैये को लेकर बात चल रही थी।
अब आगे..

हेमा की बात गुलशन जी को समझ आ रही थी।

गुलशन- शायद तुम ठीक कह रही हो.. अब वो बड़ी हो गई है और कॉलेज में जैसा देखेगी वैसे ही वो भी करना चाहेगी। अभी तो वो सब बातें हम बता देती है.. मगर हम उसके साथ सख्ती करेंगे तो शायद वो हमसे झूठ भी बोलने लगे।
हेमा- हाँ यही तो.. अब वो जैसे करे, हम उसका साथ देंगे ताकि उसको लगे हम उसको कितना प्यार करते हैं। अगर हमारी सख्ती से वो तंग आ गई तो किसी के बहकावे में आकर अपनी बुआ की तरह भाग जाएगी.. फिर हम क्या करेंगे? एक ही बेटी है हमारी!
गुलशन- नहीं नहीं.. मेरी बेटी ऐसा कुछ नहीं करेगी, ये लो ये पैसे रखो.. जब सुमन कॉलेज से घर आए तो तुम उसे नए कपड़े दिला लाना.. जो उसे पसंद आए।
हेमा- आप ये पैसे अपने पास ही रखो.. शाम को आप खुद उसे साथ ले जाना ताकि उसका गुस्सा उतर जाए और आप पर उसको भरोसा हो जाए कि उसके पापा उसका भला चाहते हैं और डर की वजह से रात को उसे मना किया था.. समझे!

गुलशन जी को बात समझ आ गई, वो अपनी दुकान चले गए और उधर सुमन भी टीना के घर पहुँच गई।

टीना- अरे आओ आओ सुमन.. क्या हाल है तुम्हारे.. क्या लोगी.. चाय या कॉफी?
सुमन- नहीं दीदी कुछ नहीं लूँगी.. आंटी की तबीयत अब कैसी है?
टीना- हाँ अब ठीक है.. दो दिन उन्हीं के पास रही यार.. आज दोबारा चेकअप के लिए जाना है तो आज भी मैं कॉलेज नहीं आ पाऊँगी.. रात को संजय और बाकी सब भी मिलने आए थे।
सुमन- मैं भी आना चाहती थी मगर पापा ने कहा कि सुबह चली जाना।

टीना- और बता कैसा चल रहा है.. उस दिन के बाद कुछ किया या नहीं?
सुमन- नहीं दीदी मौका ही नहीं मिला। अब अकेले करने का मन नहीं करता।
टीना- ओये होये.. तो मुझे बोल देती मैं तेरी मदद करने मॉंटी को भेज देती।
सुमन- क्या दीदी आप भी ना सुबह सुबह ये सब लेकर बैठ गईं। मैं तो वैसे ही पापा की वजह से परेशान हूँ।
टीना- क्यों क्या हुआ? तेरे पापा ने कुछ कहा क्या तुझे?

सुमन ने रात की बात बताई और अपने पापा के विचार भी बताए जिसे सुनकर टीना सोचने लग गई, फिर उसे एक ख्याल आया।
टीना- यार तू बुरा मत मानना.. मगर तेरे पापा के चिड़चिड़े होने का एक कारण हो सकता है।
सुमन- क्या कारण हो सकता है दीदी और उसमें बुरा क्या मानना?
टीना- मुझे लगता है तेरे पापा की सेक्स लाइफ डिस्टर्ब है.. इसी लिए वो तेरे साथ ऐसे बिहेव करते होंगे।
सुमन- छी: दीदी आप भी कैसी बात करती हो..? पापा के बारे में ऐसी बातें सुनना मुझे पसंद नहीं हैं।
टीना- ओये कौन सी दुनिया में जी रही है.. वो तेरे पापा बाद में बने पहले एक मर्द हैं ओके.. और अपनी वाइफ के साथ कौन आदमी सेक्स नहीं करता.. बता मुझे!
सुमन- मुझे पता है दीदी.. सब करते हैं मगर पापा के बारे में ये बात ना करो तो अच्छा है प्लीज़..
टीना- अरे यार मैं तेरी प्राब्लम सॉल्व करने की कोशिश कर रही हूँ और तू है कि मेरे को ही सुना रही है।

टीना ने ये बात गुस्से में कही, फिर अपने काम में लग गई।

सुमन- सॉरी दीदी आपको बुरा लगा तो.. प्लीज़ सुनो ना दीदी.. सुन तो लो..!
टीना- नहीं सुनना कुछ.. तू कॉलेज जा तुझे देर हो रही होगी।
सुमन- अरे आपको नाराज़ छोड़कर कैसे चली जाऊं.. प्लीज़ सॉरी ना अच्छा आप बताओ मैं आपकी सब बात सुन लूँगी।
टीना- क्यों सुन कर मुझ पर अहसान करेगी क्या? तू जा यहाँ से अब!

सुमन ने टीना को पीछे से पकड़ लिया और उसके गालों पे किस करते हुए उससे रिक्वेस्ट करने लगी तो टीना को हँसी आ गई।
टीना- हा हा हा छोड़ मुझे.. पागल है तू एकदम ऐसे पकड़ी हो जैसे तू मेरी फ्रेंड नहीं बीएफ है और मुझे सेक्स के लिए मना रही है।
सुमन- हा हा हा मेरे पास लंड होता तो आपके नीचे से घुसा देती अभी हा हा हा..
टीना- अच्छा बच्चू.. हमारी बिल्ली हमसे मियाऊं.. मेरी ही चुत मारने के चक्कर में है।
सुमन- अरे मैंने तो ऐसे ही कह दिया.. आप बताओ क्या बात बता रही थीं?

टीना- अरे मैं ये बता रही थी कि एक उम्र के बाद औरत में सेक्स कम हो जाता है.. कुछ के बच्चे बड़े हो जाते हैं तो वो सेक्स करना पसंद नहीं करती हैं। मगर आदमी का सेक्स कभी खत्म नहीं होता.. उसको रोज नहीं तो हफ्ते में एक बार चुत चाहिए ही चाहिए। अब अगर उसको ना मिले तो वो चिड़चिड़ा हो जाता है और अपने ही नियम कायदे चलाने लगता है। तेरे पापा के साथ भी शायद यही हो रहा होगा.. इसी लिए वो इतने गुस्से वाले हैं।
सुमन- ओह गॉड ऐसा भी होता है सॉरी दीदी, मुझे पता नहीं था। मैंने ऐसे ही आपको बोलने को मना किया, मगर पापा के साथ ये हो रहा है.. ये कैसे पता लगेगा?
टीना- बहुत आसान है, पहले तू मेरे कुछ सवालों के जवाब दे.. मैं इसका हल निकाल दूँगी।
सुमन- ठीक है दीदी आप पूछो.. जो पूछना है।

टीना- अच्छा तो ये बता.. तू कब से अलग कमरे में सोती है, मतलब कितने साल से?
सुमन- यही कोई 5 साल हो गए होंगे।
टीना- गुड यानि तेरी उम्र 14 साल थी तब तक तू अपने मॉम-डैड के साथ ही सोती थी।
सुमन- हाँ दीदी उनके साथ ही सोती थी।
टीना- अच्छा ये बताओ सब एक बेड पर सोते थे.. या तुम्हें अलग सुलाते थे?
सुमन- जब मैं बहुत छोटी थी.. तब एक साथ सोते थे.. फिर मेरे लिए एक चारपाई ले आए, जो बेड के पास ही थी, मैं उस पर सोती थी।
टीना- अच्छा ये बता.. कभी ऐसा हुआ है कि रात को तेरी आँख खुली हो और तूने उन्हें सेक्स करते देखा हो?
सुमन- नहीं दीदी ऐसा कभी नहीं हुआ। मैंने उन्हें कभी नहीं देखा और वैसे भी पापा कमरे में बिल्कुल अंधेरा करके सोते हैं तो देखने का सवाल ही नहीं होता।

टीना- ओके समझ गई.. मगर तू याद कर इतने सालों में कभी तो तेरी आँख खुली होगी.. तूने देखा तो नहीं मगर कुछ सुना तो होगा, कोई बात या अजीब सी आवाज़?
सुमन- हाँ दीदी याद आया.. ऐसे तो कई बार हुआ। मुझे माँ की आवाज़ सुनाई देती थी.. जैसे उनको कोई तकलीफ़ हो रही ही और वो दर्द से कराह रही हों। ओह गॉड यानि वो सेक्स की आवाजें थीं शिट अब समझ आया मुझे।
टीना- क्या समझ आया.. तू क्या समझी थी?
सुमन- मैं समझी थी कि माँ को कोई तकलीफ़ होगी या उनका पेट दुख रहा होगा। एक-दो बार मैंने पूछा भी था मगर माँ ने ‘कुछ नहीं.. तू सो जा..’ कह कर मुझे सुला दिया।

टीना- यही बात है तेरी वजह से वो लोग खुलकर सेक्स नहीं कर पाते थे और धीरे-धीरे तेरी मॉम के अन्दर सेक्स की फीलींग्स कम होने लगी और अब शायद वो करती ही नहीं होंगी.. इसी लिए तेरे पापा चिड़चिड़े हो गए हैं।
सुमन- उफ़ दीदी.. मेरी वजह से मेरे मम्मी-पापा की लाइफ बर्बाद हो गई। अब मैं क्या करूँ.. कैसे मेरी माँ को समझाऊं? आप ही कोई आइडिया बताओ.. ऐसे तो दिन पे दिन पापा और गुस्सा होते रहेंगे।
टीना- इसका इलाज सिर्फ़ तेरे ही हाथ में है।
सुमन- वो कैसे दीदी.. मैं समझी नहीं?
टीना- देख सुमन अब तू बड़ी हो गई है और अच्छा बुरा सब समझती है। आज तेरे पापा आएं तो उनको एक अच्छी सी हग करना और उनसे मीठी-मीठी बातें करना और दूसरी बात आज से तुझे उनकी जासूसी भी करनी होगी।
सुमन- पापा से प्यार से पेश तो आ जाऊंगी मगर जासूसी कैसी करनी होगी?
टीना- तुझे सुनकर बुरा लगेगा.. मगर ये जानना बहुत ज़रूरी है। उन दोनों के बीच सम्बन्ध कैसे हैं आज से तू रोज रात उनके कमरे में कान लगा कर सुनेगी। वो क्या बातें करते हैं, उनके बीच सेक्स होता है या नहीं, एक दिन नहीं.. दो दिन नहीं.. कभी तो करते होंगे। बस ये पता लगा, फिर इसका हल भी मिल ही जाएगा।

सुमन- दीदी, अपने माँ-बाप के सेक्स को देखना क्या सही होगा?
टीना- पागल तुझे देखना नहीं है बस पता लगाना है कि वो करते हैं या नहीं, उनकी बातें सुननी है, देखना नहीं है। जब वो शुरू हो जाएं तो अपने कमरे में जाकर सो जाना।
सुमन- ओके दीदी.. आज से यही ट्राइ करूँगी बस आई होप सब अच्छा हो।
टीना- टेंशन मत ले.. सब अच्छा ही होगा। चल अब तू निकल तुझे देर हो जाएगी और संजय से कह देना कि मुझे शाम को मिले.. मेरे फ़ोन में प्राब्लम है तो कॉल नहीं कर पाऊंगी।

सुमन ‘ओके..’ बोलकर वहां से कॉलेज के लिए निकल गई।

उधर फ्लॉरा को पता नहीं रात को क्या हुआ था.. वो छोटी सी एक नाइटी पहन कर सोई थी, ना अन्दर ब्रा थी.. ना पेंटी और वो बेसुध सोई पड़ी थी।

जॉय- गुड मॉर्निंग डार्लिंग.. क्या बात है आज तो बड़ी खिली-खिली लग रही हो।
ममता- बस बस ज़्यादा तारीफ मत करो.. रात को पेट नहीं भरा क्या जो सुबह-सुबह मस्के लगा रहे हो।
जॉय- अरे डार्लिंग इतने दिनों बाद तो तुमने ‘हाँ’ की थी। अब बेचारा पप्पू इतने से कहाँ खुश होने वाला था.. कहो तो आज बाहर ना जाऊं.. एक राउंड और लगा लें!
ममता- थोड़ी शर्म करो.. जवान बेटी के बाप हो गए हो, अब तो ये आशिकी छोड़ दो।
जॉय- अरे यार.. ये क्या बात हुई बेटी जवान हो गई है मगर मैं तो बूढ़ा नहीं हुआ ना.. अब हफ्ते में एक बार भी ना करूँ क्या?
ममता- चुप भी करो.. फ्लॉरा सुन लेगी जाओ बाहर, मैं नाश्ता लगा देती हूँ।
जॉय- अरे ये फ्लॉरा आज उठी नहीं क्या.. कहाँ है मेरी जान आज उसका कॉलेज नहीं है क्या?
ममता- पता नहीं क्यों नहीं उठी.. मैं तो किचन में बिज़ी थी, ध्यान ही नहीं दिया। जाओ अब आप ही उठाओ अपनी लाड़ली को!

जॉय ने कमरे को नॉक करना चाहा तो वो खुल गया। जॉय ने सोचा रात को बंद करना भूल गई होगी।
जॉय- ये लड़की भी ना एकदम पागल है.. इसने रात को डोर भी खुला ही रखा। बिल्कुल मेरे ऊपर गई है.. एकदम लापरवाह है, अब अन्दर जाकर ही उठाता हूँ।

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कहानी जारी है।

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