पड़ोसन आन्टी की गरम चूत की चुदाई

(Padosan Aunty Ki Garam Chut Ki Chudai)

नमस्कार मेरे प्यारे साथियो, मैं बहुत लम्बे समय से अन्तर्वासना का पाठक हूँ. आज मैं अपने सच्चे अनुभव को लिख रहा हूँ. यह मेरी पहली कहानी है, कोई गलती हो तो क्षमा करना. इस कहानी को पढ़कर आप अपने लौड़ों को हिलाने और चूत में उंगली करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे, ये मेरा दावा है.

मैं जयपुर में रहता हूँ और सरकारी नौकरी के लिए कम्पटीशन की तैयारी कर रहा हूँ. मैं 24 वर्ष का 5.9 फीट लम्बा गोरा, गबरू जवान हूँ. रोज व्यायाम और स्विमिंग करने से मेरा शरीर हट्टा-कट्टा और मजबूत हो गया है. मेरे लिंग की लम्बाई 6 इंच तथा मोटाई 3.5 इंच है, जो किसी भी औरत की चूत की आग को बुझाने में सक्षम है.

मुझे शुरू से ही आंटियों और भाभियों में दिलचस्पी रही है. मुझे चूत चाट चाटकर उसका पानी निकालना बहुत ज्यादा पसंद है.

यह बात आज से 3 साल पहले की है जब मैं छुट्टियों में अपने घर गया हुआ था.

मेरे पड़ोस में एक आंटी रहती हैं, जो 37 साल की गोरी चिट्टी 5.8 इंच लम्बी हैं. उनकी शक्ल बहुत ही सुन्दर है, तीखे नयन नक्श, पतली कमर और फूले हुए बाहर को निकले नितम्बों को देखकर जी मचल जाता था. सच में उनकी इतनी कामुक देह है कि देख कर किसी मुर्दे का लंड भी खड़ा हो जाए. आंटी के 2 लड़के हैं, एक 14 वर्ष का दूसरा 8 वर्ष का है. मतलब इतनी उम्र होने के बावजूद भी उनका फिगर देखकर मेरे मुँह में पानी आ जाता है. आंटी के पति विदेश में नौकरी करते हैं, जो साल में एक डेढ़ महीने के लिए ही घर आ पाते हैं.

ये नवरात्रि की बात है, हमारे मोहल्ले में नवरात्रि में गरबे का आयोजन हो रहा था तो सभी लोग सज धजकर आ रहे थे. आंटी शुरू से ही मुझमें दिलचस्पी लेती थीं. उनकी कामुक निगाहों को देख कर मुझे समझ तो आ गया था कि आंटी मुझसे चुदना चाहती हैं. पर मैंने कभी उनके बारे में अब तक कुछ भी गलत नहीं सोचा था.
लेकिन इस बार मैं पक्का सोचकर ही आया था कि आंटी को किसी भी हालत में चोदना ही है.

उनके कमरे की खिड़की दरवाजे और मेरे घर की छत में बहुत ही कम दूरी है. जयपुर से आने के दूसरे दिन रात 8 बजे मैं अपनी छत पर टहल रहा था कि मुझे उनकी खिड़की में कुछ हलचल दिखी. मैंने ध्यान से देखा तो वो तुरंत नहा कर निकली थीं और अपने बाल सुखा रही थीं. इतने में उन्होंने अपना गाउन खोला और सिर्फ ब्रा पेंटी में आ गईं.

उनके इस रूप को देखकर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया. चूंकि मेरी छत पर अँधेरा था, तो मुझे पकड़े जाने का कोई डर नहीं था. फिर आंटी ने अपनी ब्रा पेंटी उतारी और खुद को कांच में निहारकर फिर दूसरी पहन ली. इसके बाद वो तैयार होकर मोहल्ले में चली गईं.

आज मुझे अपनी किस्मत पर भरोसा नहीं हो रहा था कि मैंने आंटी को लगभग नंगी देखा था. आंटी को नंगी देख कर मैं खुद पर नियंत्रण नहीं कर सका और वहीं छत पर ही मुठ मार कर शांत हो गया.

बीस मिनट बाद मैं भी तैयार होकर गरबा में चला गया. आज आंटी मुझे बहुत ज्यादा हॉट लग रही थीं. रह रहकर उनका नंगा बदन मेरी आंखों के सामने आ रहा था.

गरबा में आंटी मेरे साथ ही खेल रही थीं. मुझे उनकी आंखों में बड़ा प्यार नजर आ रहा था. तकरीबन एक घंटे गरबा खेलने के बाद अचानक उनकी आंखों में मुझे एक इशारा सा दिखा. मैं समझ तो नहीं पाया, पर इसी बीच उन्होंने मुझसे कहा कि मैं जरा घर जा रही हूँ.
यह कह कर वो अपने घर की तरफ जाने लगीं, तो मैं भी उनके पीछे चलने लगा. शायद आंटी का इशारा मुझे घर ले जाने का था.

हालांकि अभी कुछ भी साफ़ नहीं था. आंटी मुझसे बात करते हुए घर की तरफ आने लगीं. उनके घर के नजदीक आने पर मैंने आंटी से कहा कि मुझे पानी पिला दो, बड़ी प्यास लगी है.
उन्होंने मुझे हंस कर कहा कि चल तेरी प्यास बुझा देती हूँ.
यह कहते हुए आंटी ने मुझे अन्दर आने को कहा.

मैं उनकी प्यास बुझाने वाली बात से कुछ समझ तो गया था लेकिन अब भी मुझे उनकी चाहत को समझना था. मैं आंटी के पीछे पीछे चला गया. वो घड़े के पास जाकर पानी लेने लगीं, मैं भी उनके पीछे आ गया था. मटके में से पानी भरते समय मैंने अपने लंड को आंटी की गांड पर स्पर्श किया, तो वो भी अपनी जगह से हिली नहीं और वैसे ही खड़ी रहीं.

जबकि मुझे यह उम्मीद थी कि आंटी शायद मुझसे दूर होने को कहेंगी. लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो मुझे आंटी का ये ग्रीन सिग्नल लगा. अगले ही पल मैंने और जोर से अपनी कमर आंटी की गांड से चिपका दी. वो भी चूतड़ हिला कर मेरी कामवासना की गर्माहट का मज़ा ले रही थीं.

फिर वो अपनी जगह से हटी और मुझे पानी देते हुए बोलीं- बड़ा प्यासा लग रहा है.
मैं भी सूखे होंठों पर जीभ फेर कर उनकी तरफ देखा और हामी भर दी. आंटी ने गिलास आगे बढ़ाया तो मैंने आंटी की उंगलियों को छूते हुए पानी का गिलास ले लिया. उनकी उंगलियों का स्पर्श मुझको आग लगा गया था.

पानी पीते हुए मैं आंटी की आंखों में आंखें डालकर देखने लगा. आंटी मेरे बिल्कुल करीब थीं. समझो उनके मम्मे मेरी छाती से दो इंच की दूरी पर थे. उनकी आंखें भी प्यासी सी लग रही थीं. उन्होंने जैसे ही अपने होंठों पर अपनी जीभ फेरी, मुझे समझ आ गया कि आंटी चुदासी हैं.

मैंने हिम्मत करके आंटी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए तो वो भी मेरा साथ देने लगीं. दो मिनट की चुम्मा चाटी के बाद वो बोलीं- तूने समझने में इतना टाइम लगा दिया, मैं तो कब से तुझमें समाना चाहती थी.

चूंकि उस समय आंटी के सास ससुर और बच्चे डांडिया में थे तो हमें किसी का डर नहीं था. मैं आंटी को उठाकर बेडरूम में ले गया. उनको बेड पर लिटाकर मैं उनके रसीले होंठों को चूसने लगा.

कुछ देर के चुम्बन के बाद मैंने आंटी की साड़ी खोल दी और उनके मम्मे ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा. वो कामुक सिसकारियां लेने लगीं. मैंने उनका ब्लाउज और ब्रा खोलकर फर्श पर फ़ेंक दी और उनके काले काले अंगूरों जैसे कड़क निप्पलों पर जीभ फेरने लगा.
इससे वो एकदम से तड़पने लगीं.

मैं आंटी के एक बोबे को दबाता और दूसरे को चूसता रहा. उनके निप्पलों को दांतों से खींचता रहा. पांच मिनट तक आंटी के रसीले बोबों से खेलने के बाद मैंने उनके पेट को चूमते हुए उनकी नाभि में जीभ लगा दी और अन्दर डालकर नाभि चूसने लगा.
वो एकदम से गनगना उठीं और मेरे सर के बाल खींचने लगीं.

फिर मैंने उनका पेटीकोट उतारकर उनकी पेंटी पर से ही चूत को चूमा, तो वो एकदम से चुदासी हो उठीं. फिर आंटी की पिंडलियों, नरम नरम जांघों को चूसते चाटते हुए मैंने उनकी पेंटी उतार दी. गोरी गुलाबी मस्त पॉव रोटी की तरह फूली हुई चूत गीली होकर रस बहा रही थी. मैं उनके पैरों के बीच आ गया और उनकी चूत के दाने को जीभ से सहलाने लगा.
उन्होंने सीत्कार भरते हुए कहा- आह.. ऐसा तो मेरे पति ने आज तक नहीं किया.

उनके क्लिटोरिस को चूसते हुए मैंने 2 उंगलियां आंटी की चूत में अन्दर बाहर करनी शुरू कर दीं.
वो ‘आह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… श्हहह.. ओहह..’ जैसी गरम गरम आहें भरने लगीं. मैं लगातार आंटी की चूत चाटता रहा.

कुछ समय बाद वो अकड़ने लगीं और झटके खाने लगीं. मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली हैं. इसलिए मैं और तेजी से उनकी चूत के गुलाबी छेद में अपनी जीभ डालने लगा. कुछ ही देर में आंटी एकदम चीखती हुई झड़ गईं और मैंने उनके नमकीन अमृत रस को पूरा पी लिया.

फिर आंटी दो मिनट बाद संयत हुईं और उन्होंने मेरे कपड़े उतारकर मुझे चित लिटा दिया. मैं भी टांगें खोल कर अंडरवियर में फूला हुआ लंड दिखाता हुआ उनको कामुकता से देखने लगा. आंटी अपनी चूत खोल कर मेरे ऊपर बैठ गईं और मेरे सीने पर काटने और चूसने लगीं.

उन्होंने बड़ी स्टाइल से मेरा अंडरवियर अपने दांतों में दबाया और नीचे खींचने लगीं. अंडरवियर उतरते ही मेरा लंड फनफना उठा. मेरे मोटे लंड को देखकर उनकी आंखों में चमक आ गयी. वो बोलीं- मेरे पति का तो पतला सा ही है.

वो मेरे लंड के सुपारे पर जीभ फेरने लगीं. मैं आनन्द के सागर में गोते लगा रहा था. आंटी मेरे लंड को नर्म होंठों और जीभ से चूसने में लगी हुई थीं. उनकी लंड चाटने की कला से मैं तो जैसे पागल ही हो गया.

दो ही मिनट में मुझे लगा कि मैं झड़ जाऊंगा, तो मैंने उनके मुँह से अपना लंड बाहर निकाल लिया.
अगले ही पल आंटी ने उठ कर अपना पर्स टटोला और उसमें से डॉटेड कॉन्डोम निकाल कर मेरे लंड पर पहना दिया.

आंटी मुझे देख कर मस्त हो गई थीं. उनकी आंखें मानो कह रही थीं कि आज मैं पूरी तैयारी से चुदाई के लिए आया था.

मैं उनके पैरों के बीच आकर उनकी चूत पर अपने मोटे लंड के सुपाड़े को रगड़ा, तो वो सिहर उठीं. मैंने उनकी आँखों में देखते हुए आठ दस बार लंड के सुपारे को चूत की फांकों में ऊपर से नीचे तक फेरा. वो तमतमा उठी थीं और मुझसे लंड चूत के अन्दर डालने को कहने लगीं.

मेरे लिए भी रुकना मुश्किल था, तो मैंने सुपारे को आंटी की चूत के छेद पर लगाकर एक जोरदार धक्का दे मारा.
यह अचानक से हुआ अटैक था और चिकनी चूत के कारण एक बार में ही मेरा लंड आंटी की चूत में लगभग आधा उतर गया. आंटी के मुँह से चीख निकल पड़ी- आह … मर गई रे … एकदम से पेल दिया!
मैंने उनकी आह का मजा लिया और उनके स्तनों को मसलने लगा साथ ही आंटी के होंठ भी चूसने लगा.

कुछ देर बाद आंटी भी नीचे से अपनी गांड हिलाने लगीं, तो मैंने उन्हें चोदना शुरू कर दिया. वो ‘आह … उह्ह्ह्ह … चोदो मुझे … स्सह्ह्ह जोर से …’ कहने लगीं. मैंने अपनी चोदने की रफ्तार तेज कर दी.
बस 6-7 मिनट की धकापेल रगड़ाई के बाद आंटी ने मुझे कसकर पकड़ लिया और वो झटके लेते हुए गरमागरम पानी छोड़ने लगीं.

दो मिनट रुकने के बाद मैंने फिर से चुदाई शुरू कर दी. अब उनकी चूत एकदम रसीले हो गई थी. लंड सटासट अन्दर बाहर होने लगा था. फिर मैंने भी चरम पर आने का महसूस किया और उनसे कहा- आह … आंटी मैं भी छूटने वाला हूँ.

चूंकि कंडोम लगा ही था, तो उन्होंने मुझे अपनी चूत को वीर्य से सराबोर करने की अनुमति दे दी. बस 15-20 तेज धक्कों के बाद मैंने अपना लावा उनकी प्यारी सी चूत में ही छोड़ दिया जो कंडोम में ही रह गया.

कुछ देर हम यूँ ही लिपटकर पड़े रहे. फिर हम दोनों कपड़े पहनकर वापस से तैयार होकर डांडिया में चले गए.

उसके बाद हमें जब भी मौका मिलता, हम अपने लंड और चूत का मिलन करवा लेते. मैंने उन्हें लगभग सब आसनों में चोदा.

आंटी की गांड मारने की कहानी अगली बार लिखूंगा. मेरी पहली आपबीती में कोई गलती हुई हो, तो माफ़ करना दोस्तो!
प्यारी भाभियों आंटियों कमसिन लड़कियों मुझे मेल करके जरूर बताना कि आपको मेरी चुदाई की कहानी कैसी लगी. मेरी मेल आईडी है.
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