मेरी बीवी मुझसे नहीं चुदती

(Meri Biwi Mujhse Nahi Chudti)

बहुत छोटी उमर से ही सेक्स का ज्ञान हो गया था मुझे … और अपने लंड को पकड़ कर मूठ मारने की आदत पड़ गई थी, हर लड़की को देख कर मैं उसके नाम की मूठ मारता था. ऐसी कोई हीरोइन नहीं जिसको चोदने के बारे में मैंने नहीं सोचा हो, चुदाई की बातें करना मुझे बहुत पसंद था. होस्टल में रहते हुए मैंने अपनी पढ़ाई पूरी की. मुझे सब टीचर बहुत प्यार करते थे.

जब मैं कॉलेज गया तो बस रात दिन इसी गुना भाग में लगा रहता कि कोई तो मिले जिसे मैं चोद सकूँ. मेरा एक दोस्त मुझे अपने घर लेकर गया क्योंकि दस दिनों की छुट्टी थी तो इस बार उसके घर गया अपने घर नहीं गया.
बहुत ही छोटा सा गाँव था वो पहाड़ों से घिरा हुआ … उस गांव में मेला लगा था दस दिनों का, मैंने खूब मज़े किये.

आखरी दिन था, तब मेरा दोस्त मेले में से दो लड़कियों को पटा कर लाया और बोला- तू किसको चोदेगा?
मैं एकदम से हड़बड़ा गया कि ये लड़कियों के सामने कैसे बोल रहा है. मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे, उसमें से एक को मैंने चुन लिया, दूसरी को दोस्त ने!
कहानी बिल्कुल सच्ची है इसमें सभी नाम बदलकर कहानी लिख रहा हूँ. मेरे दोस्त का नाम राकेश था, जिस लड़की को मैंने चुना, उसका नाम फूलमती था. हम चारों एक तालाब के पास गये. रात को काफ़ी अंधेरा था, मेरी तो गांड फट रही थी क्योंकि मेरा तो पहली बार था.

फूलमती के दूध बहुत मस्त थे, मैं पहली बार किसी लड़की को छू रहा था. मेरा लंड तो अकड़ कर ऐसा हो रहा था कि अब लंड की नसें फट जायेंगी. तालाब तक पहुँचते तक मेरा वीर्य निकल गया था.
मैंने फूलमती से बोला- कपड़े उतार!
तो उसने मना कर दिया, वो बोली- आप ही उतारो!
मैंने उसे तालाब के घाट पर ही नंगी कर दिया और राकेश से पहले ही बोल दिया था कि वो मेरी नज़रों से दूर ही रहे, नहीं तो मुझे शर्म आयगी. तो वो कहीं दूर ही था अपनी सेट्टिंग को लेकर.

पूरी नंगी लड़की को देख कर मेरा तो लंड फटा जा रहा था, मैंने फूलमती से कहा- मुझे चोदना नहीं आता!
तो वो बोली- मुझे तो आता है, तू मेरे उपर आ जा!
मैं उसके उपर आ गया. नया नया था तो सीधे उसकी चूत में लंड डालने की कोशिश करने लग गया, कोई किस नहीं, कोई चूत की चटाई नहीं, ना फूलमती ने लंड चूसा. मैं चूत में लंड डालने की कोशिश कर रहा था पर लंड उसकी चूत में जाने की बजाए इधर उधर फिसल रहा था. उसकी चूत बहुत ही टाइट थी.

लंड को पकड़ कर उसने खुद अपनी चूत में लगाया, पहली बार किसी और ने मेरे लंड को छुआ था, मुझे इसी में मज़ा आ गया. अब उसकी चूत में मेरे लंड ने प्रेवेश करना चालू किया और आधा ही लंड गया था और मेरा वीर्य निकल गया.
वो नाराज़ हो गयी क्योंकि उसकी उत्तेजना चरम पर थी. गुस्से के कारण उसने मुझे अपने से दूर कर दिया उसकी चूत मेरे वीर्य से लबालब भर गयी थी,

मैंने उसे दोबारा चोदने को बोला तो उसने गुस्से के कारण मना कर दिया. मेरा दिल तो भरा नहीं था इस अधूरी चुदाई से, पर वो मना कर रही थी तो मैं कुछ नहीं कर सकता था.

इतने में दो शराबी आ गये. हम दोनों उनकी नज़रों से बच कर भाग गये. मैंने राकेश को खोजा तो वो नहीं मिला. मैं और फूलमती मेले में चले गये. वहां राकेश भी मिल गया, उसने पूछा- कैसा लगा?
मैं अपनी नाकामी छुपाने के लिए बोला- स्वर्ग जैसा आनंद आया. और तुझे कैसा लगा?
तो वो बोला- ये तो मेरा हमेश का काम है, तेरा पहली बार है ना, इसलिय पूछा.
यह बात आई गयी हो गयी.
उस फूलमती की अधूरी चुदाई से मैंने एक सीख ले ली थी कि अपने आप को कैसे कंट्रोल करना है.

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करके मुंबई में मेरी नौकरी लग गई तो मैं घर जाने के बजाए सीधे मुंबई चला गया. वहाँ से पापा ने बुला लिया कि क्या नौकरी करता है, मुझे व्यापार में तेरी मदद की ज़रूरत है. मेरे पास रहेगा तो शादी हो जाएगी.
शादी का नाम सुनकर तो मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. मैं नौकरी छोड़ कर अपने शहर इलाहाबाद आ गया, पापा के साथ व्यापार करने लगा.

पापा मेरे लिए लड़की खोजने लगे, बहुत लड़कियाँ देखी पर किसी को मैं पसंद नहीं आया तो कोई मुझे. क्योंकि मेरी हाइट कम थी पर शरीर शक्तिशाली है.
कैसे भी करके मेरी शादी हो गई, जिस लड़की से शादी हुई वो मुझे पसंद नहीं करती थी. मैं सपनों में खो रहा था कि आज मेरी सुहागरात है, इतने सालों की हसरत पूरी होने वाली है.

जैसे ही मैं अपने बेडरूम में घुसा, उस लड़की ने जो कि मेरी पत्नी है, कहा- मुझे छूना नहीं, मुझे छुओगे तो मैं आत्महत्या कर लूँगी.
मैं बोला- क्या हुआ? ऐसे क्यों बोल रही हो?
सोना मेरी पत्नी ने कहा- मैं किसी और से प्यार करती हूँ.
मुझे तो एकदम से धक्का लगा, मेरा सर चकराने लगा, कुछ देर के लिए तो मैं पागल सा हो गया.

बहुत दुखी होकर मैं सो गया पर नींद नहीं आई. सोना को देखा तो वो सो रही थी, मुझे बेहद गुस्सा आ रहा था, शादी के बाद हम लोग घूमने गये. पूरे बीस दिन घूमे पर मेरी हसरत पूरी नहीं हुई. स्लीपर कोच बस में सफ़र करते हुए एक फिल्म चालू थी ‘हम दिल दे चुके सनम’
उसे देख कर मुझे अपनी कहानी नज़र आने लगी. इतने दिनों में मैंने सोना से उस लड़के के बारे में सब कुछ पूछ लिया था, मैंने सोच लिया कि सोना को उसके पास ही छोड़ आता हूँ.

बस से उतार कर उस लड़के रजत के शहर की टिकेट बनवाया और उसे बताया कि हम उसके प्रेमी के यहाँ जा रहे हैं.
वो बहुत खुश हो गई. मेरा तो दिल जल रहा था.

हम दोनों रवाना हो गये. बस किसी ढाबे पर रुकी और सोना पेशाब करने की लिए रात में सड़क के उस पार गई. मैं देख रहा था, वो वापस आ रही थी उतने में वो सड़क के बीच में थी तब एक ट्रक आ गया, मैंने फिल्मी स्टाइल में उसे बचाया. मेरे पैर की हड्डी टूट गयी. लोग इकट्ठे हो गए, एम्बूलेन्स से हॉस्पिटल ले गये मुझे. कुछ दिन में घर में ही आराम करते हुआ ठीक हो गया.

फिर जब पूरी तरह से ठीक हो गया तो सोना से सेक्स की डिमांड करने लगा. उसने फिर मना कर दिया. तो मैं घर से किसी को कुछ भी बताए बिना अपने भाई के पास दिल्ली चला गया. वहाँ भैया और भाभी ही रहते थे, उनका एक ही रूम था और वो मेरे सोने के बाद सेक्स करते थे. पर मुझे नींद कहाँ आती थी, मैं सब देखता था.

एक दिन भाई दो दिनों के लिए दिल्ली से बाहर गया था तो भाभी ने रात को मेरा लंड पकड़ लिया जब मैं मुठ मार रहा था. भाभी ने सारी बातें पूछ ली मुझसे. मैंने सबकुछ उन्हें बता दिया.
मेरी दुख भरी कहानी सुनकर वो बोली- कोई बात नहीं, तुम आज मेरे साथ कर लो.
मैं घबरा गया, मैंने मना कर दिया, फिर भी वो बहुत ही चुड़क्कड़ स्वभाव की थी, भाभी ने मेरा लंड चूसना चालू कर दिया, मैं नहीं नहीं करता रहा मैं किसी और के साथ सेक्स नहीं करना चाहता था.

मगर भाभी मेरा लंड चूस चूस कर मेरे वीर्य को पी गयी. अब वो मुझे बोलने लगी- मेरी चूत में लंड डाल!
मैं मना करता रहा पर वो नहीं मानी, वो बोली- तेरा लंड तो तेरे भाई से भी तगड़ा है. इसे तो आज मैं अपनी चूत में लेकर ही रहूंगी.

मैं कुछ नहीं कर रहा था, वो अपनी चूत पर तेल लगा कर मेरे लंड पर भी तेल लगाने लगी. मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी पर मैं कुछ नहीं करना चाहता था अपनी भाभी के साथ. पर वो चुदे बिन मानने वाली नहीं थी, वो पूरी नंगी हो गयी थी मुझे भी पूरा नंगा कर दिया था भाभी ने.
अब वो मेरे लंड को अपनी चूत पर फिट कर चुकी थी मेरे ऊपर चढ़कर! मज़ा तो बहुत आ रहा था पर रिश्ते की लाज के कारण मैं शर्मा रहा था.

लाइट जल रही थी, पूरी नंगी भाभी को देख कर मुझमें उत्तेजना भी बहुत आ रही थी, पर जब बिना कुछ किए ही मज़ा आ रहा था तो मैं क्यों कुछ करता. अब मेरा भी मन बदल गया, मेरी नियत में भी खोट आ गई, वो मेरे लंड पर चढ़ कर अपनी चूत में लेने की कोशिश कर रही थी. वो बहुत अनुभवी थी और रोज रोज चुद कर उसकी चूत ढीली हो गई थी. तो मेरा लंड घप्प से उसकी चूत में चला तो गया पर मेरा थोड़ा बड़ा था तो भाभी को थोड़ा दर्द होने लगा.

अब भाभी मेरे होठों को चूसे जा रही थी, मुझे जिंदगी में पहली बार ये सब मज़ा मिल रह था और मैं इस मज़े का कोई भी पल मिस नहीं करना चाहता था. भाभी के स्तन बड़े ही जोरदार थे, मैं उनको चूसना चाहता था पर भाभी मेरे ऊपर थी और मेरे होंठ चूस रही थी इस कारण मैं उसके स्तन चूस नहीं पा रहा था.

वो बोली- दूद्दू चूसना चाहते हो क्या?
मैं बोला- आपको कैसे पता?
वो बोली- साले तेरे जैसे कई देखे हैं, पहले तो मना कर रहा था अब तुझे सब चाहिए.
मैं भी बेशरम होकर बोला- तुझे तो मैं जिस दिन यहाँ आया था उसी दिन से चोदने की फिराक में था पर रिश्तों का लिहाज कर रहा था. अब जब तू खुद चुदना चाहती है तो मैं कैसे छोड़ दूं.

अब उसे मैंने नीचे पटक दिया और करीब 30 मिनट तक धकपेल चुदाई की. भाभी अब तक कई बार झड़ चुकी थी. वो बोली- तेरे भाई तो 5-7 मिनट में ही ढेर हो जाते हैं.
मैंने कॉलेज के जमाने की फूलमती वाली बात बताई तो वो बहुत हंसी और बोली- तू वो ही है?
मैं बोला- क्यों क्या हुआ?
वो बोली- साले कमीने … मैं ही वो फूलमती हूँ!
किस्मत भी कैसे अजीब खेल खेलती है … अब तो मैं अपनी भाभी का दीवाना हो गया, उस रात भाभी को पूरी रात चोदा.

दूसरे दिन भाई नहीं आया तो दूसरे दिन भी पूरी रात हमारा चुदाई का कार्यक्रम चला, इस रात को हमने जो किया जैसे किया वो मैं अगली कहानी में लिखूंगा. और मेरे बीवी की कहानी भी तो अभी बाकी है, आप सभी चोदू और चुड़क्कड़ पाठकों के कॉमेंट का इंतजार करूँगा. मेरी भाभी जैसी चुड़क्कड़ भाभियों के साथ आजकल मैं बहुत चैटिंग करता हूँ. उन लोगों ने ही मुझे मेरी इस कहानी के लिए प्रेरित किया, उन सबको चूत पर चुम्मा देकर सबको धन्यवाद देता हू. आगे की सच्ची कहानी लिखने के लिए प्रोत्साहित करें.

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