कमसिन स्कूल गर्ल की व्याकुल चूत-8

(Kamsin School Girl Ki Vyakul Chut- Part 8)

This story is part of a series:

अंकल जी से सम्बन्ध बनाने के बाद मेरा चित्त काफी हद तक शांत हो गया था, मेरा मन पढ़ाई में लगने लगा और मैं इंटरमीडिएट भी फर्स्ट डिविजन में पास हो गई.

इन्टर पास करने के बाद मेरी इच्छा ग्रेजुएशन करने की और उसके बाद कम्पटीशन की तैयारी कर बैंक जॉब या अन्य कोई जॉब हासिल करने की थी. पर मेरे ऊपर जब वज्रपात सा हुआ जब मेरे पापा ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देकर मुझे आगे पढ़ाने से इन्कार कर दिया और कहा- हम छोटे लोग हैं तूने इन्टर तक पढ़ लिया, वो बहुत है तेरी शादी के हिसाब से.
मैं रोने के अलावा और कर भी क्या सकती थी तो मैंने रो रो कर बुरा हाल कर लिया.

मुझे पापा की मजबूरी भी समझ आती थी; चपरासी की नौकरी में उन्हें तनख्वाह मिलती ही कितनी सी थी, ऊपर से पांच छः लोगों का परिवार, उन्हें खुद दारू पीने की लत थी और मेरी बड़ी
बहन की शादी का कर्जा भी अभी चुकाया नहीं गया था.
मैं अपने दुर्भाग्य पर आंसू बहाती रहती थी और मैंने अंकल जी के पास जाना भी बंद कर दिया था क्योंकि मेरी सारी इच्छाएं मर सी गयीं थीं.

एक दिन की बात है, मेरी मम्मी अपने मायके गयीं थीं और मैं सुबह सवेरे अपने घर के बाहर झाड़ू लगा रही थी कि अंकल जी सुबह की सैर के लिए निकले. उन्होंने मुझे देखा तो अपने पीछे
पीछे आने का इशारा किया लेकिन मैंने इन्कार में सिर हिला दिया.
फिर अंकल जी मेरे पास ही आ गए और धीमे से मुझसे बोले- सोनम बेटा, तुझे मेरी कसम है अगर तू नहीं आई तो!

अंकल जी की कसम के आगे मैं मान गयी और सोचा कि चलो आखिरी बार मिल लेती हूं; फिर आगे से कभी भी नहीं मिलूंगी चाहे कुछ भी हो. तो मैंने भी अंकल जी से कह दिया- आप जाइए, मैं आती हूं.

बाहर की झाड़ू लगा कर मैं अंकल जी से मिलने चल दी और उसी सुनसान जगह पर जा पहुंची जहां हम पहले भी कई बार मिल चुके थे. अंकल जी वहीं पेड़ की ओट में खड़े मेरा इंतज़ार करते मिले; मैं उनके पास जाकर सिर झुका कर खड़ी हो गयी.

“सोनम बेटा क्या बात है आजकल तू मिलती ही नहीं और तेरा चेहरा इतना उतरा हुआ क्यों है; क्या हुआ है तुझे?” उन्होंने मुझसे प्यार से पूछा.
“कुछ नहीं अंकल जी, ऐसी कोई बात नहीं!” मैंने बात टालने के लिए कह दिया.
“देख बेटा झूठ मत बोल, तुझे मेरे सिर की कसम है अगर तूने मुझसे कुछ भी छिपाया तो!” अंकल जी बोले और मेरा हाथ पकड़ कर अपने सिर पर रख लिया.

मैं पहले ही मानसिक रूप से कमजोर हो चुकी थी तो मैंने अंकल जी की बात मान ली और उन्हें अपनी सारी व्यथा कथा कह सुनाई कि क्यों मेरी आगे की पढ़ाई बंद कर दी गयी है और मेरा भविष्य अन्धकारमय हो गया है.
अंकल जी ने मेरी पूरी बात गंभीरता से सुनी

“बस इतनी सी बात पर तू खुद को सजा दे रही है? सोनम बेटा अब तू मेरी बात ध्यान से सुन और समझ!” अंकल जी बोले.
“बेटा, पहली बात तो ये कि जो मैं कहने जा रहा हूं उसे सुनकर तुम ये कभी नहीं सोचना कि मैं तुम्हारे साथ सेक्स सम्बन्ध बनाए रखने के लिए ऐसा कह रहा हूं. ठीक है न?” वे बोले
“जी अंकल जी!” मैंने संक्षिप्त सा जवाब दिया.

“देखो बेटा, ज़माना बहुत बदल चुका है अब वो पहले वाली बात नहीं रही कि लड़की को थोड़ा बहुत पढ़ा कर उसकी शादी कर देते थे और वो ससुराल में अपनी ज़िन्दगी घर के भीतर बच्चे पैदा करने, उन्हें बड़े करने और गृहस्थी के कामों में गुजार देती थी; अब जमाने के हिसाब से तुझे आगे पढ़ना और कोई अच्छा जॉब करना बहुत जरूरी है ताकि तू हमेशा आत्मनिर्भर बनी रहे.” अंकल जी बोले.
“जी अंकल जी मैं जानती हूं ये सब. पर मेरी मजबूरी मैंने आपको बता दी है.” मैंने कहा.

“मैं वही बात आगे बता रहा हूं तू सुन तो सही. देखो बेटा, तुम्हें जिस कॉलेज में एडमिशन लेना हो ले लो; तुम्हारी पढ़ाई का सारा खर्चा मैं दूंगा; तुम ग्रेजुएशन कर लो फिर कोई कोचिंग करके किसी जॉब की तैयारी कर लेना, तू इंटेलीजेंट है और मुझे विश्वास है कि तू अपना करियर बना लेगी.” अंकल जी ने मुझे समझाया.

“नहीं अंकल जी, मैं आपसे पैसे नहीं ले सकती. रहने दीजिये ये बातें!” मैंने कहा.
“बेटा, मैं तेरे स्वाभिमान की कद्र करता हूं पर तू भावनाओं में बह कर नहीं यथार्थ के धरातल पर सोच. तेरा पूरा जीवन तेरे सामने पड़ा है अभी और मैं तुझे अपने पैसे उधार दे रहा हूं जब तेरी जॉब लग जाये तो बाद में वापिस कर देना, सिम्पल है न!”

“और मैं घर पर क्या जवाब दूंगी कि मेरे पास पढ़ाई के पैसे कहां से आ रहे हैं?” मैंने सवाल किया.
“अरे बेटा, तेरी कोई पक्की सहेली होगी न तू उससे बात कर ले और वो तेरे घर पर बता देगी कि वो तुझे पढ़ाई के लिए उधार दे रही है और बाद में ले लेगी.” अंकल जी बोले.

अंकल जी की बात मेरी समझ में आ रही थी. मैं डॉली को इस बात के लिए राजी कर सकती थी कि वो मेरे पापा से मिल उन्हें समझा कर इस बात के लिए मना ले कि मेरी पढ़ाई का सारा खर्चा वो मुझे उधार देगी. मुझे इस बात से विश्वास था कि मेरे पापा भी मान जायेंगे.
“ठीक है अंकल जी मैं किसी सहेली से बात करूंगी इस बारे में!” मैंने अनिश्चितता से कहा.
“दैटस गुड बेटा; एक बात और है कि अब से हमारे बीच कोई सेक्स सम्बन्ध नहीं होगा. मैं तेरे बैंक अकाउंट में पैसे जमा करता रहूंगा.” अंकल जी बोले.
“ठीक है अंकल जी, थैंकयू!” मैंने कहा.

मेरे भीतर अब आशा का संचार होने लगा था. इसके बाद मैं घर लौट आई.

मैंने उसी दिन डॉली से बात की तो वो तुरंत मान गयी और शाम को वो मेरे पापा से मिल कर उसने उन्हें मना लिया; डॉली पैसे वाले पिता की संतान थी तो अविश्वास की कोई बात ही नहीं थी. डॉली ने मेरे पापा से यह वादा भी लिया कि इस बात का जिक्र वे कभी किसी से नहीं करेंगे ताकि उसके घर पर किसी को कुछ पता न चले. इस तरह बात बन गयी और मेरे सुनहरे भविष्य का रास्ता साफ हो गया.

इसके बाद कहने को कुछ ख़ास नहीं है, इन्टर पास करने के बाद अंकल जी की सहायता से मैंने कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया साथ ही मैं पूरी मेहनत से कम्पटीशन की तैयारी करती रही. जब एक प्रतिष्ठित बैंक में प्रोबश्नरी ऑफिसर की वेकेंसी निकली तो मैंने अप्लाई कर दिया और मेरा रिटन एग्जाम बहुत ही अच्छा गया और मुझे विश्वास हो गया कि मैं इंटरव्यू के लिए भी सेलेक्ट हो जाऊँगी.
मेरी किस्मत मेरा साथ दे रही थी तो मुझे इंटरव्यू के लिए भी कॉल लैटर आ गया. इंटरव्यू दूसरे शहर में था तो मैं डॉली के साथ वहां चली गयी और सबकुछ ठीक से निपट गया और कुछ दिनों बाद रिजल्ट आया तो मुझे प्रोबेशनरी अधिकारी की जॉब मिल गयी थी.

अगले दिन जब अंकल जी मोर्निंग वाक पर आये तो मैंने ये सुखद सूचना उन्हें दी तो वे भी बहुत खुश हुए और मुझे ढेरों शुभकामनाएं दीं.

इस तरह अंकल जी के सहयोग से मेरा जीवन सुखमय हो गया. हां, इन्टर पास करने से लेकर जॉब पाने तक अंकल जी मुझसे एक बार भी नहीं मिले; मैंने जितने पैसे उनसे मांगती वो मेरे अकाउंट में जमा कर देते थे बस. अंकल जी अपनी दूसरी बात पर भी खरे उतरे और उन्होंने कभी भी मुझसे सेक्स के लिए नहीं कहा. इससे मेरे मन में उनके प्रति आदर सम्मान और ज्यादा बढ़ गया.

फिर वो दिन भी आया कि मेरी पोस्टिंग हो गयी और मुझे दूर शहर की एक ब्रांच में ज्वाइन करने के लिए कहा गया.
जोइनिंग लैटर पाकर मेरी आँखों में ख़ुशी के आंसू भर आये और मैंने अगले दिन तुरंत अंकल जी को सुबह इस बारे में बताया और उनसे जिद की कि वो मुझे साथ लेकर ज्वाइन करवाने के लिए जायेंगे.
शुरू में उन्होंने ना नुकुर की पर मैं जिद पर अड़ गयी और उन्हें अपनी कसम दे दी तो वो सहमत हो गए.

इस तरह हम लोगों ने जाने का प्रोग्राम बना लिया और यह तय हुआ कि वो मुझे नियत दिन स्टेशन पर मिलेंगे, आरक्षण भी उन्होंने ही करवाया था.
मैंने अपने मम्मी पापा का आशीर्वाद लिया और स्टेशन को निकल ली. रात की ट्रेन थी, अगले दिन मुझे ज्वाइन करना था तो वहां पहुँच कर हम स्टेशन पर ही वेटिंग रूम में फ्रेश हो कर तैयार हुए और हम ठीक दस बजे ब्रांच जा पहुंचे.

वहां आवश्यक फोर्मलिटीस के बाद मैंने ज्वाइन कर लिया और मेरी नौकरी शुरू हो गयी. शाम को छुट्टी होने के बाद मेरे रहने की समस्या थी तो उस दिन तो हम लोग एक होटल में रुक गए. होटल के रूम में पहुँच कर मैं अंकल जी से लिपट गयी और उन्हें चूमने लगी. अंकल जी ने खुद को छुड़ाने की बहुत कोशिश की पर उनसे लिपटती रही.

“अंकल जी, तीन साल से प्यासी हूं मैं. फक मी नाउ … सारी रात प्यार करो मुझे!” मैंने कहा और उनका लण्ड पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी.
पहले तो वो मुझसे नहीं नहीं करते रहे जब उनका लण्ड खड़ा हो गया तो वे चुप हो गए; फिर मैंने उनका लण्ड पैंट से बाहर निकाला और गप्प से मुंह में भर लिया.

अंकल जी ने मेरे लिए इतना कुछ किया था अतः मुझे उन पर बहुत प्यार आ रहा था तो अब मैं उन्हें अपना भरपूर प्यार देना चाहती थी. मैं उनके लण्ड को पूरी तन्मयता के साथ चाटने चूसने लगी, अंकल जी चुपचाप बुत बने खड़े रहे. पांच सात मिनट बाद उनका लण्ड मेरे मुंह में फूलने लगा तो मैं समझ गयी कि क्या होने वाला है; लण्ड से रस का फव्वारा छूट कर मेरे मुंह में भर गया जिसे मैं निगल गयी.

उस समय शाम के साढ़े सात ही बजे थे और मैंने जल्दबाजी में ये सब कर दिया था. इसके बाद हम लोग नहाए और नीचे रेस्टोरेंट में जाकर खाना खाया और फिर थोड़ा टहल कर रूम में वापिस आये तो मैं चुदने के लिए मरी जा रही थी. तो मैं लाज शर्म परे रख कर नंगी हो गयी और बेड पर लेट कर अपनी चूत अपने हाथों से खूब अच्छी तरह से पसार दी और अंकल जी को पास आने का इशारा किया.

उस दिन मेरी चूत पर बड़ी बड़ी झांटें उगी हुईं थीं क्योंकि पिछले काफी लम्बे समय से मैंने चूत को शेव करना भूल सी गयी थी, उस तरफ ध्यान ही नहीं जाता था.
फिर अंकल जी ने मेरी चूत का वो बाजा बजाया कि मेरी पोर पोर दुःख गयी और उस रात तीन बार चुद कर मैं तृप्त हो गयी और उनसे लिपट कर नंगी ही सो गयी.

अगले दिन मुझे एक सहकर्मी की मदद से बढ़िया फर्निश्ड मकान मिल गया, मकान का किराया बहुत ज्यादा था पर मुझे क्या वो तो बैंक को पे करना था तो मैं वहां शिफ्ट हो गयी. अंकल जी को मैंने दो दिन और अपने साथ रोक कर रखा और चुदती रही.

तो मित्रो, मेरी यह कहानी … आपको कैसी लगी इस बारे में जरूर कमेंट्स दीजियेगा और नीचे लिखे मेल एड्रेस पर भी मेल कीजियेगा, आप लोगों के सन्देश मुझ तक पहुंच जायेंगे.
धन्यवाद.
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