जीजा ने मुझे रंडी बना दिया-1

(Jija Ne Mujhe Randi Bana Diya- Part 1)

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मेरा नाम बंध्या है. मैं उस वक्त जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी. घर के माहौल के कारण और अपने नेचुरल स्वभाव से मैं बहुत रोमैंटिक लड़की हूं।

मेरी फिगर का साइज है 32-26-36. मैं गांव में रहती हूं और मेरे गांव का नाम तपा है. अपने जीवन की इस सच्चाई को मैं किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहती थी. मगर जब से मैंने अन्तर्वासना पर कहानियां भेजने की शुरूआत की है तब से ही मेरा मन करता है कि मैं अपने जीवन की हर घटना अपने पाठकों को बताऊं.

इस घटना के पीछे एक सोची समझी प्लानिंग थी. यह प्लानिंग मैंने उसी दिन शुरू कर दी थी जिस दिन मुझे पता चला था कि मेरे घर पड़ोस वाले घर में शादी होने वाली है. दरअसल मेरे पड़ोस में शुक्ला जी का परिवार रहता था.

शुक्ला अंकल की बेटी शिल्पा को मैं दीदी कह कर बुलाती थी. शिल्पा दीदी का घर मेरे घर से कुछ ही दूरी पर है. अब आप ये सोच रहे होंगे कि शिल्पा दीदी की शादी से मुझे क्या फायदा होने वाला था. दरअसल शिल्पा दीदी की शादी जिस गांव में हो रही थी वो मेरे बॉयफ्रेंड आशीष का गांव था.

शिल्पा दीदी मुझसे उम्र में चार साल बड़ी थी. उनकी छोटी बहन मेरे साथ ही पढ़ती थी. जिस दिन से उसकी बहन ने मुझे बताया था कि उसकी बहन की शादी उसी गांव में हो रही है उसी दिन से मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था. मैंने तुरंत आशीष को भी फोन पर ये बात बता दी थी कि उसके गांव में ही मेरे पड़ोस की दीदी शिल्पा की शादी हो रही है.

जब आशीष को यह बात पता लगी तो उसने भी अपने गांव में इस शादी के बारे में पता किया. फिर उसने मुझे बताया कि मैं सही कह रही हूं. उसके गांव के त्रिपाठी परिवार के यहां शिल्पा दीदी बहू बन कर जाने वाली थी.

आशीष ने बताया कि जिस त्रिपाठी परिवार में शिल्पा दीदी बहू बनकर जा रही थी उनका आशीष के घर में भी निमंत्रण और आना जाना था. शिल्पा दीदी के होने वाले पति आशीष के भैया लगते थे. आशीष बोला कि इस तरह तो मैं अब तुम्हारा जीजा हो गया हूं. हमारे बीच में जीजा साली का रिश्ता हो गया है.

हम दोनों ये बात सुन कर हंस पड़े. फिर आशीष बोला कि बंध्या तुम ये तो जानती ही होगी कि साली आधी घरवाली भी होती है. मैंने उसकी बात पर कह दिया कि आधी की क्या बात है, पूरी ही बना लो.
वो बोला- ठीक है, तो फिर तुम पूरी घरवाली बनने के लिए बात आगे बढ़ाओ. मैं भी अपने घर में इस बारे में बात छेड़ता हूं.
मैंने कहा- ठीक है, मैं भी अपने घर में बात करूंगी.

मैं अपने घर में केवल अपनी मां से इस तरह की बात कर सकती थी. मगर मां के मूड का कुछ भरोसा नहीं था. मैं एक ऐसे मौके की तलाश में थी जब मेरी मां का मूड अच्छा हो.
एक दिन मैंने देखा कि मां बहुत खुश दिखाई दे रही थी. मैंने सोचा कि आज मौका अच्छा है. मैं आज मां से अपनी शादी के बारे में कुछ बात कर लूं तो सही रहेगा.

मौका देख कर मैं अपनी मां के पास जाकर बैठ गई.
मैंने कहा- मां, मैं आपसे कुछ मांगना चाह रही हूं.
मां बोली- हां बोल बंध्या, इसमें इतना घबराने की क्या बात है. तेरी खुशी के लिए कुछ भी दे दूंगी मैं. हां पैसे वैसे तो ज्यादा हैं नहीं लेकिन इसके अलावा तू जो कुछ कहेगी मैं मान लूंगी.

मैं अपने दोस्तों को बता देना चाहती हूं कि मेरी मां पैसे को बहुत बड़ा मानती थी. वह पैसे के लिए कुछ भी कर सकती थी.
मैंने मां से कहा- मां मुझे पैसे की जरूरत नहीं है, मगर जो मैं मांगने जा रही हूं उसके सामने मेरे लिए पैसा कुछ भी नहीं है.
मां बोली- तो खुल कर बता बेटी, क्या चाहिए तुझे.
मैंने कहा- मां मैं आशीष को पसंद करती हूं. उससे शादी करना चाहती हूं.

आशीष के बारे में मां को बताते हुए मैंने याद दिलाया- मां, आशीष वही कोटेदार की बहन का बेटा है. सागर में मेरे साथ में ही पढ़ा है. बहुत अच्छा लड़का है. नौकरी भी करने लगा है. मुझे बहुत खुश रखेगा वो.
मां बोली- तू उसी की बात कर रही है ना वो जिसके साथ तुमने सोनम चाची पकड़ी थी, उसी का भान्जा है न वो?
मैंने हां में मुंडी हिली दी.

मां मुझ पर गुस्सा होते हुए बोली- छी, तुझे शर्म नहीं आती? इतनी बेशर्म हो गई है तू. इतनी छोटी उम्र में तुझे अभी से मर्दों की जरूरत पड़ने लगी है. अभी तू पूरी 21 की भी नहीं हुई है. कैसी बेशर्म लड़की पैदा कर दी मैंने.
मेरी मां खुद को और मुझे कोसते हुए मुझे अपनी भाषा में गाली देने लगी.

वो बोली- तुझसे बड़ी तेरी बहनें हैं. उनकी शादी हो चुकी है. उन्होंने तो कभी मुझसे इस तरह की बेशर्मी की बात नहीं की. जिस लड़के की तू बात कर रही है उससे तो तेरी शादी कभी नहीं हो सकती. वो हमसे नीच जाति का है. हमारे यहां से उनके घर पर कोई लड़की जा ही नहीं सकती. वो तो पैसे के बहुत लालची हैं.

मां बोली- भले ही वो लड़का नौकरी कर रहा है. कमा भी अच्छा रहा होगा. लेकिन दहेज में कम से कम 10 या 15 लाख तो रूपये तो जरूर मांगेंगे. मेरे पास तेरी शादी में देने के लिए इतने पैसे नहीं हैं. इसलिए बेहतर यही होगा कि तू उससे शादी का विचार अपने दिमाग से निकाल दे. चाहे धरती इधर से उधर क्यों न हो जाये लेकिन तेरी शादी उस लड़के से नहीं हो सकती.

इतना कहने पर भी मां नहीं रूकी और बोली- साली छिनाल, तू उस घर में शादी करने के बारे में सोच भी कैसे सकती है. तुझे ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी है मर्दों. अगर तेरे अंदर इतनी ही गर्मी हो रही है तो मैं तुझे किसी कोठे पर बिठा देती हूं. तेरी सारी गर्मी निकल जायेगी.

मैं मां की बात सुनते हुए सुबकने लगी. मां मुझे गालियां देती रही और बुरा-भला कहती रही. उसके बाद मैं रोती हुई उठ कर अपने कमरे में भाग गई. रात के समय जब मां खाना बना रही थी तो मैंने आशीष को फोन किया. कई बार उसको फोन किया लेकिन उसने मेरा फोन पिक नहीं किया.

अगले दिन मैंने फिर से उसको फोन किया. मगर उसने मेरा फोन नहीं उठाया. ऐसे ही कई दिनों तक मैं उसको फोन करती रही लेकिन उसने मेरे फोन का कोई जवाब नहीं दिया. फिर मैंने मेरे बड़े पापा की बेटी के पास फोन किया. उसकी शादी हो चुकी थी. उसने आशीष से फोन करने के लिए कहा तो उसने बात की.

मैं बोली- इतने दिन से तुमको फोन लगा कर मैं परेशान हो रही हूं. तुमने मेरे फोन का जवाब नहीं दिया.
वो बोला- बंध्या, हमारी शादी नहीं हो सकती.
मैंने पूछा- क्यों नहीं हो सकती?
वो बोला- मैंने मां से तुम्हारी और मेरी शादी के बारे में बात की थी लेकिन उसने साफ मना कर दिया.

मगर बात क्या हुई कुछ बताओ मुझे, मैंने आशीष से कहा.
वो बोला- मां कह रही थी कि पहली बात तो वो लोग दस लाख रूपये हमें दे नहीं पायेंगे.
मैं बोली- हां, हम तो गरीब से परिवार से हैं. हमारे पास इतने पैसे नहीं है.

फिर उसने कहा- बात केवल पैसे की नहीं है.
मैंने पूछा- फिर क्या बात है?
वो बोला- रहने दो, तुम सुनोगी तो तुम्हें अच्छा नहीं लगेगा.
मैं बोली- नहीं, मुझे जानना है कि क्या बात है?

वो बोला- मेरी मां कह रही थी कि बंध्या का परिवार पूरे गांव में बदनाम है. उसके पिता और भाई तो घर पर नहीं रहते हैं और उसकी मां के पास बहुत से मर्दों का आना-जाना लगा रहता है.
मैंने कहा- ये सब झूठ है. ऐसी कोई बात नहीं है.

आशीष ने कहा- लेकिन तुम्हारे पिता तो मुंबई में काम करते हैं और तुम्हारा भाई भी घर पर नहीं रहता है. ऐसे में जब घर में केवल औरतें हों और उनके मर्दों की गैरमौजूदगी में पराये लोग घर में आते हों तो फिर सब लोग ऐसा ही सोचेंगे.

मैं बोली- कोई कुछ भी सोचे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा तुमने सुना है. हां, मेरे पापा और भाई घर पर नहीं रहते हैं. उनके न रहने पर मां के पास उनके जान-पहचान वाले लोग आते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मेरी मां और मैं कोई गलत काम करते हैं.

वो बोला- मैं तो मान लूंगा लेकिन पूरे गांव के लोग तुम्हारे बारे में यही बात करते हैं. मां कह रही थी कि वो बंध्या बहुत चालू लड़की है. वो तुम्हें अपने रूप के जाल में फंसा रही है. उसकी बड़ी बहन की शादी तो जैसे तैसे कर दी है उसकी मां ने लेकिन अब वो तुम पर हाथ साफ करने की कोशिश कर रही है.

मैं बोली- ये सब गलत है. मैं तुमसे प्यार करती हूं आशीष.
वो बोला- अगर प्यार करती हो तो सच बताओ कि क्या बात है.
इतना सुन कर मैं चुप हो गई.
वो बोला- बताओ बंध्या क्या बात है. अगर तुम मुझसे प्यार करती हो तो मुझे सच बताओ.

आशीष के प्यार में पड़ कर मैं कह उठी- अगर तुम्हें सच पता चल गया तो तुम मुझे छोड़ दोगे.
वो बोला- नहीं छोड़ूंगा. मगर मुझे सच बताओ क्या बात है.

मैं बोली- जो तुमने तुम्हारी मां से सुना है उसमें आधी सच्चाई है और आधी सिर्फ बनावटी बातें हैं. हां मेरे पिता जी शादी के बाद से ही मुंबई में काम करते हैं और भाई भी घर पर नहीं रहता है. मेरी मां के बारे में मैंने भी कुछ ऐसा ही सुना है जैसा तुमने सुना है लेकिन तुम ही बताओ कि मेरी मां की भी कुछ जरूरतें हैं. अगर वो किसी जानने वाले के साथ अपनी प्यास बुझा लेती है तो इसमें क्या गलत है. मेरे पिताजी तो साल में एक बार ही घर आते हैं.

आशीष बोला- मतलब तुम्हारी मां बहुत बिगड़ी हुई है. मेरी मां ने ठीक ही कहा था कि तुम्हारी मां ने घर में रंडीखाना खोला हुआ है. गांव के सारे मर्द वहीं पर आते हैं. तुम्हें इसके बारे में कुछ नहीं पता बंध्या लेकिन सच्चाई यही है.

वो बोला- अब तुम ही बताओ. घर में जब जैन्टस लोग नहीं रहते हैं और गांव के मर्द तुम्हारे घर में आते हैं तो बाकी लोग इस बात का क्या मतलब निकालेंगे. मेरी मां ने साफ मना कर दिया कि उस घर में मेरी शादी नहीं हो सकती है.
मैं बोली- लेकिन मैंने तुम्हें सच बता दिया है. मुझे केवल यही पता था. तुमने क्या सुना है और लोग हमारे बारे में क्या बात कर रहे हैं मुझे उससे कोई लेना देना नहीं है.

आशीष बोला- अगर तुम सच कह रही हो तो मैं वादा करता हूं कि अगर तुम कोठे पर भी बैठी होगी तो मैं तु्म्हें अपना लूंगा. तुमसे शादी कर लूंगा.
मैं बोली- हां यही सच है. मेरे पापा शुरू से ही मुंबई में जाने लगे थे. उसके बाद से ही मेरी मां के जानने वाले घर में आते रहते हैं लेकिन वो सब मेरी मां के साथ रंगरेलियां मनाते हैं मुझे इसके बारे में कोई खबर नहीं है.

कहानी अगले भाग में जारी है. आपको कहानी के बारे में कुछ कहना है तो नीचे दी गई मेल आईडी पर मेल करें.
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