कमसिन जवानी की चुदाई के वो पन्द्रह दिन-4

(Kamsin Jawani Ki Chudai Ke Vo Pandrah Din- Part 4)

This story is part of a series:

अब तक आपने पढ़ा कि कार एक ढाबे पर रुकी थी, सब लोग नीचे उतर गए थे. कार में मुझे नंगी करके मेरे ऊपर दूसरे वाले ठाकुर अंकल चढ़ने की तैयारी में थे. उन्होंने मुझसे ये पूछा कि अभी इन दोनों ने क्या मेरी चूत में अपना माल छोड़ा था, जिस पर मैंने मना कर दिया.
अब आगे …

मैंने जैसे ही इतना कहा, तो उन्होंने अपना मुँह मेरी चूत में रख दिया और टांगों को और फैला दिया. फिर ऊपर करके उठाया तो सबसे पहले उन्होंने कहा- वन्द्या, तेरी तो गांड बहुत जबरदस्त है. लगता है तेरी चूत से ज्यादा गांड को पहले चोद दूँ.
यह कह कर राजा अंकल ने अपनी पूरी जीभ मेरी गांड में डाल दी और चलाने लगे. गांड चाटने लगे. मुझे गांड में बहुत जोर जोर से गुदगुदी होने लगी.

जब वो मेरी गांड को तेजी से चाटने लगे, तो मुझसे रहा नहीं जा रहा था. मैं बोली कि अंकल इस तरह नहीं करो, मैं पागल हो जाऊंगी और तब तक कोई ना कोई आ जाएगा. आप जल्दी से कुछ कर लीजिए. फिर गांड में किसी दिन आराम से करिएगा.
तब अंकल बोले- ठीक है … पर तू गलती से भी मुझे अंकल मत बोलना … मुझे गन्दी गालियां दे … तू तड़ाक बोल, वो मुझे ज्यादा मस्त लगता है. मैं तेरा अंकल नहीं हूं समझी.
मैंने कहा- जी ठाकुर राजा.

राजा ने मेरी चूत में दो उंगली डाल दीं. मेरी प्यासी चूत में उनकी दोनों उंगलियां सट से चली गईं.
तो ठाकुर बोले- तेरी चूत तो लगती ही नहीं कि एक कमसिन लड़की की है … बहुत आग लगी है तेरी चूत में … इसमें तेरे को मेरा ही लंड चाहिए या मेरे जैसा ही कोई मूसल लंड फिट आएगा. तू बिल्कुल आग है.

यह कहते हुए जैसे ही उन्होंने उंगली चूत में अन्दर बाहर करी, मुझे बहुत जोर से चूत में अन्दर कुछ होने लगा. मैंने उनके बाल पकड़कर अपनी तरफ उन्हें खींचा.
तो वो बोले- क्या चाहती है वन्द्या?
मैं बोली- कुछ नहीं जल्दी कुछ करिए … मैं बहुत प्यासी हूं.

वो मूंछों वाले दादा साहेब बोले- जल्दी ही कर रहा हूं … नहीं तो तू तो ऐसी गर्म आइटम है, ऐसी माल है कि पहले तो तेरे एक एक अंगों को पहले चाटता, उसे प्यार करता और एक एक अंग को सहलाता, उनसे दो चार घंटे खेलता, तब जाकर तुझे चोदता, पर अभी समय बिल्कुल नहीं है. इसलिए तू चिंता मत कर, तेरी प्यास मैं मिटा दूंगा. मुझे जगत ने बताया है कि अभी कुछ दिन पहले 5-6 लोगों ने भी चार-पांच घंटे में तेरी आग नहीं बुझा पाए थे. वैसे मेरे से मस्त और बड़े लंड वाले मेरे मित्र हैं, उनके लिए लड़कियां तरसती हैं. ऐसे लोगों की बांहों में उनकी टांगों के नीचे होगी, तुझे ऐसे मस्त लोगों से मिलवाऊंगा कि तू कायल हो जाएगी उन मर्दों के लंड की … अभी सब मैं बहुत जल्दी में कर रहा हूं, नहीं तो तुझे चोदने से पहले एक बोतल दारू पीता, फिर तुझे हाथ लगाता. वैसे उससे ज्यादा नशा तुझमें है वन्द्या रानी!

इस तरह कह कर वह मेरी नाभि को चूमने लगे और फिर मेरे दूधों के लिए बोले- अभी तेरे चूचे थोड़े कमजोर हैं.
राजा जी ने दोनों हाथ से मेरे दूधों को कस लिया और दबाने लगे, चूसने लगे.

फिर वे मेरे ऊपर आ गए, पर पूरा चढ़े नहीं. वे मेरे होंठों को भी चूमने लगे. कार में अभी किसी ने मेरे होंठों में पहले किस नहीं किया था. ठाकुर अब मेरे होंठों को चूसने लगे … मैं तो पहले से बहुत जोश में थी. मैं अपनी बांहों में उनको पकड़कर अंकल से लिपट गयी और अपना मुँह खोल कर उनके होंठों को चूसने लगी. मैंने उन्हें कस के पकड़ लिया.

तब उन्होंने पूछा- कैसा स्वाद लगा तुझे वन्द्या?
मैं बोली- बहुत मस्त लग रहा है राजा जी … क्या कमाल है कि अभी 5 मिनट पहले मैं आपको जानती नहीं थी और पांच छह मिनट में आपके कितने करीब आ गई हूँ.
वो बोले- तू है ही बहुत गजब की आइटम.

वह मेरी जीभ को चूसने लगे और बोले- वन्द्या तेरी नाक बहुत सेक्सी है, बहुत गजब की बनावट है तेरी नाक की. मैंने आज तक ऐसी खूबसूरत नाक नहीं देखी.

वे मेरी नाक को करीब दो-तीन मिनट चूसते रहे. अपने गालों में मेरी नाक को रगड़वाते रहे.

अब ठाकुर मेरे ऊपर चढ़ गए और वजन नहीं रखते हुए मुझ पर छा गए. उनका लंड मेरी चूत में छू गया, जिससे मैं बिल्कुल अजीब सा महसूस करने लगी.

ठाकुर बोले- तू तो फुल रंडी है. ये लोग बता रहे थे कि तेरी मां भी बहुत बड़ी वाली रंडी रह चुकी है, पर अभी उसमें मुझे कुछ दम नहीं दिखा. अपनी जवानी में रही होगी. तूने अभी देखा किस तरह से अभी राज तेरी मम्मी से आगे वाली सीट में चिपके हुए उसके दूध दबा रहा था और अन्दर टांगों में हाथ डाले था.
मैं बोली- क्या सच में? मैंने कुछ नहीं देखा … ना मुझे कुछ समझ आया, शायद इसलिए कि मैं अपने में ही मस्त हो गई थी.
ठाकुर बोले- अरे राज तेरी मम्मी की चूचियां मसल रहा था.
तो मैं बोली- अच्छा … वैसे ऐसा नहीं हो सकता.
वह बोले- अरे मेरी जगह आकर बैठ कर देख लेना, किस तरह से चल रहा था उनका प्रोग्राम.
तो मैं बोली- कोई नहीं जाने दो, अभी आएंगे तो जरूर देखूंगी.
ठाकुर बोले कि वन्द्या मेरा लंड चलेगा न … अगर मैं अभी पूरा डाल दूं?
मैं बोली- आपको जो भी करना है राजा जी … जल्दी से कर लीजिए.

उन्होंने मेरी टांगों को ऊपर किया और बोले- चल वन्द्या … जल्दी जल्दी से जितनी हो सके, तेरी चुदाई कर लूं. तेरी मम्मी लोग आने ही वाले होंगे … टाईम कम है.

अंकल ने मेरी चुत के मुहाने पर अपना लंड रखा तो मेरे अन्दर चूत में बहुत ही बौखलाहट होने लगी. मेरी चूत पर उनका लंड बिल्कुल नहीं समा रहा था, बहुत मोटा था.
मैं बोली- अंकल, थोड़ा आराम से घुसाना.
वह बोले- फिर अंकल बोली?
मैं बोली- नहीं … राजा जी थोड़ा आराम से करना … मुझे दर्द ना हो.
वे बोले- बिल्कुल नहीं होगा … तू बस लेटी रह.

उन्होंने कमर तरफ हाथ लगाया और मेरी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया. वह दादा साहेब ठाकुर ने अपने लंड का जोर से झटका मेरी चूत में मारा, तो मैं चीख उठी … चिल्ला उठी.

पर पोजिशन इतनी सही थी और चूत में बहुत चिकनाहट भी थी, जिससे उनका इतना मोटा लंड बिल्कुल चीरता हुआ मेरी चूत में घुस गया. मैं जोर से चिल्लाने लगी, पर कार बंद थी … इसलिए आवाज बाहर नहीं निकली … न किसी को सुनाई दी. वरना कोई न कोई मदद करने आ जाता.

मैं बोली- आह मर गई … बचाओ … मैं मर गई … आह मम्मी आ जाओ … मुझे इस राक्षस से बचा लो … आह बहुत दर्द हो रहा है … आह मम्मी … मम्मी हेल्प मी … बचा लो मम्मी, मैं मर जाऊंगी … बहुत दर्द हो रहा है.
मैं इस तरह चिल्लाती रही, लेकिन वो सांड की तरह का गेंडा ठाकुर एक पल के लिए नहीं रूका.

दर्द से तड़प कर मैं बोली- मुझे नहीं करना मार डालेगा क्या छोड़ दे कुत्ते … मादरचोद मत कर … मैं मर जाऊंगी.
मैं बहुत जोर जोर से चिल्लाने लगी, पर वह एक नहीं माने और अपना पूरा लंड अन्दर करते गए. मैं तड़प रही थी, पर कुछ नहीं कर सकती थी. मैं जोर-जोर से चिल्ला रही थी. मुझे लगा कि अब लंड पर कभी नहीं बैठूंगी.

मैं झूठ नहीं बोलूंगी. कुछ ही देर में मेरे अन्दर कुछ गर्मी सी आने लगी. राजा अंकल ने मेरी चूत के चीथड़े उड़ाना शुरू कर दिए.
मेरी चूत जल्दी ही पिघल गई और मैं मजा लेने लगी. राजा ठाकुर ने भी मसलते हुए चोदना चालू कर दिया था. वे धकापेल मुझे चोदे जा रहे थे. मैं उनके लंड की चुदाई से बेसुध हो गई थी.
तभी राजा अंकल ने कहा- मुझे अभी बिना झड़े ही निकलना होगा. वे सब लोग आने का इशारा कर रहे हैं.

इतने में मुझे छत्तू अंकल कार के बाहर दिख गए. सभी के आने का इशारा हो गया था. अगले कुछ मिनट में ही हम दोनों अपने कपड़े आदि ठीक करके बैठ गए. मुझे अधूरी चुदाई से बहुत गुस्सा आ रहा था. लेकिन क्या करती. मैं बिना पेंटी के ही कार में बैठ गई थी.

इस बार मैं उस जगह बैठ गई थी, जिधर से मुझे अपनी मम्मी की हरकतें दिखने वाली थीं.

कुछ ही देर में सब लोग कार में बैठ गए और हम सब चल पड़े.

कुछ ही देर में आगे की सीट पर खेल शुरू हो गया. मैं राज अंकल को देख रही थी. मुझे साफ समझ आ रहा था कि वह मम्मी के दूधों को दबा रहे हैं. मैं देख कर बिल्कुल आश्चर्यचकित हो गई, तब मैंने राजा जी की सारी बातों को मान लिया कि मम्मी सच में ऐसी थीं, जैसा वह लोग बोल रहे हैं.

गाड़ी जैसे जैसे तेज चलने लगी, राज अंकल मम्मी को जोर जोर से कस के पकड़े हुए उनके दूधों को दबाने लगे थे. यह देखकर मेरा और मन करने लगा. मुझसे अब मेरी हालत सम्भाली नहीं जा रही थी. मेरे साथ आज हुआ भी ऐसा ही था कि जगत अंकल, छत्तू अंकल और ठाकुर ने शुरूआत तो की मेरे साथ चुदाई की, पर तीनों ने बस थोड़ा थोड़ा करके मुझे छोड़ दिया. वैसे भी कुछ भी कोई कर ले, पर लड़की की अधूरी चुदाई नहीं करना चाहिए, क्योंकि लड़की की अधूरी चुदाई होने पर वो पानी बिना मछली की तरह चुदवाने को तड़पती और फड़फड़ाती रहती है.

मुझे लग रहा था कि अब तो सामने चाहें मम्मी बैठी रहें या कोई और रहे, मैं अभी वह मूछों वाले ठाकुर का लंड निकालकर यहीं अपनी चूत में डलवा लूं और उन दोनों को भी बोल कर पहले जम के चुदाई करवा लूं. मेरा दिमाग पूरा सुन्न पड़ा था, पर अब उधर बैठने की वजह से मुझे कोई कुछ नहीं कर रहा था. मैं बिल्कुल पागल हुई जा रही थी.

किसी लड़की को आधा अधूरा चोद कर नहीं छोड़ देने का दर्द मैं पहली बार आज महसूस कर रही थी.

फिर तीस मिनट बाद गाड़ी मानिकपुर शहर के अन्दर पंहुच गई.
जगत अंकल बोले- राज, अब इधर ध्यान दे … और बता पहले कहां चलना है?
मम्मी बोलीं- राज जीजा, सबसे पहले दुकान में ही चलो, पहले खरीददारी कर लेते हैं … फिर ही कुछ और सोचना या और कहीं चलना … नहीं तो दुकान बंद हो जाएगी.

यह बात सुनकर वह मूछों वाले ठाकुर साहब बोले- बात सच है, गाड़ी किसी अच्छे स्टोर या मॉल की तरफ ले लो, जहां अच्छी वैरायटी के कपड़े मिल जाएं.

फिर उन्होंने ही कोई एक मॉल का नाम लिया कि वो छोटा जरूर है, पर लेडीज के हिसाब से वहां पर अच्छी वैरायटी मिल जाती है.

राज अंकल मम्मी से बोले- पहले कहां चलूं? साड़ी की दुकान पर चलें या इस वन्द्या के लिए जहां कपड़े मिलें, वहां चलें?
तो मम्मी बोलीं- जहां साड़ी भी मिल जाए और लड़कियों का भी हो, वहीं चलो.

राज अंकल ने ड्राइवर से गाड़ी एक जगह मॉल के आगे खड़ी करवा दी और बोले- उतरिए सब लोग.

हम लोग सब उतर के अन्दर गए. एक बहुत बढ़िया बड़ा सा लेडीज गर्ल्स स्टोर मिला. उसी में राज अंकल हमें अन्दर ले गए. बाकी लोग वहीं बाहर रूक गए.

वह जो मूछों वाले ठाकुर थे, उन्होंने राज अंकल को बोला था कि ये लोग जो भी, जितना भी खरीदें, तुम खरीदने देना … पैसों की चिंता मत करना. हम लोग बाहर ही घूम रहे हैं, बिल बनवा कर मुझे बता देना और पैसे ले जाना.

यह कहकर उन्होंने हम सभी अन्दर भेज दिया. मुझे अभी भी लंड के सिवा कुछ नहीं सूझ रहा था, क्योंकि मैंने अभी जस्ट आधी अधूरी चुदाई करवाई थी. मेरी चुत के अन्दर बिल्कुल हलचल और मदहोशी छाई थी. ना मुझे कपड़े अच्छे लग रहे थे, ना मेरा दिमाग कपड़ों में जा रहा था.

मम्मी जाकर साड़ियों को खुलवा कर देखने लगीं और लहंगों की वैरायटी को भी देखने लगीं.

मैं वहीं एक जगह बैठ गई. मैं दस मिनट बैठी रही, फिर उठ गई तो स्टोर के दो-तीन नौकर वहां थे, वे सब मुझे देखने लगे.

तभी मैंने एक करीब 30 वर्ष का नौकर जवान सा ठीक ठाक लड़का देखा, उससे मैं बोली- भैया पानी मिलेगा?
तो वह बोला- हां बिल्कुल मिलेगा.

मैं उठी और थोड़ा मम्मी से दूर बैठ गई. दस मिनट वहां भी बैठी रही. फिर जैसे उठी तो वहां जहां बैठी थी, वहां कुछ चिपचिपा सा लग गया. तो मेरे खड़े होते ही वह दुकान वाला नौकर, जो मेरे लिए पानी लाया था … वो चिपचिपा जो लगा था, उसे देख कर उसने अपने एक साथी को दिखाया. वो दोनों हंसने लगे.

मैं अब जहां खड़ी हुई थी, वहां पर भी मेरी टांगों के नीचे से 5-6 बूंद मेरी चूत का रस गिर गया.

मुझे भी लगा कि चूत रस बह कर गिर रहा है. मैं बहुत संकोच करने लगी.

इतने में वहां दुकान के दो नौकर मेरे पास आकर बोले- मैडम आपको कोई प्रॉब्लम है क्या?
मैं उनकी तरफ देखने लगी, पर अभी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मैं बोली- मैं समझी नहीं?

तो उनमें से एक जो करीब 40 साल का रहा होगा, वह बहुत हट्टा कट्टा भी दिख रहा था, वह बोला कि मैडम देखिए आप जहां बैठी थीं, वहां आपके नीचे से कुछ चिपचिपा सा निकला है, यहां नीचे फर्श में भी गिर रहा है.

मैं हटी और देखा तो सच में वहां चार-पांच बूंद पड़ी थीं. मैं समझ गई तो मैं थोड़ा शरमा गई. लेकिन बोली- हां, थोड़ा दिक्कत है.

तब वो दोनों शॉप के नौकर में से एक नीचे झुका और जो मेरी चूत की बूंदें गिरी थीं, उन्हें हाथ से उठाकर अपने उंगलियों में लेकर देखने लगा. फिर उसने मेरी चूत के रस को अपनी नाक के पास ले जाकर सूंघा और मुस्काने लगा. वे दोनों आपस में फुसफुसाए. मैं उनके पास ही खड़ी थी, तो मुझे सुनाई दिया.

वे आपस में बोल रहे थे कि ये मैडम की चूत का रस है … वो भी वो वाला जो चुदाई के बाद निकलता है.

एक ने कहा- मुझे तो लगता है कि लंड का रस होगा, जो मैडम के अन्दर गया होगा … और अब निकल रहा है. पर ये तो पक्का है कि मैडम अभी अभी चुदाई करके आई हैं.

मुझे लगा कि ये लोग समझ गए हैं कि अभी मेरे साथ क्या हुआ है. वो दोनों दुकान में काम करने वाले मुझसे बोले कि मैडम आपको आराम करना हो या बैठना हो तो बैठ सकती हैं.

उनमें जो नई उम्र का लड़का था, वो फिर से मुझसे बोला कि मैडम आपकी पीछे स्कर्ट पूरी खराब हो रही है, थोड़ा सा देख लीजिए … चेंज करना हो तो कर लीजिए … अच्छा रहेगा. लोग देखेंगे तो गलत समझेंगे. मैंने स्कर्ट में पीछे हाथ लगाया तो सच मेरी स्कर्ट गीली सी लगी और चिपचिपा रही थी. मैं समझ गई कि मेरी चूत के रस से यह काफी गीली हो चुकी है.
मैं बोली- मैं कैसे चेंज करूं … मेरे पास कोई दूसरी ड्रेस नहीं है. जब तक अभी मम्मी लेंगी नहीं, तब तक कैसे होगा?

मैं उन दोनों से अब बात करने लगी. मैंने उनसे कहा कि सच है, ऐसे में मैं कहीं जाऊंगी तो अच्छा नहीं लगेगा. आप लोग बताइए … मेरी हेल्प करिए, मुझे चेंज करवा दीजिए.

तब वह बोले- मैडम जी आप जो कहो, वैसी ड्रेस ला देंगे और आप पहन लेना.
मैं बोली- पहले खरीदूंगी, तब तो पहनूंगी?
वह दुकान वाले बोले- उसकी चिंता मत करिए. मैडम क्या हम आपका नाम जान सकते हैं.
मैं बोली- हां … वन्द्या नाम है मेरा … मैं अभी मौसी के यहां उनकी बेटी की शादी में आई हूं … कनका गांव है, वैसे सतना जिले की हूं.
तो वह बोले- अभी कुछ पूछूं, बुरा ना माने तो?
मैं बोली- हां बोलिए … मैं नहीं मानूंगी बुरा.
वह बोले- आपकी ड्रेस जो अभी बदलेंगी, उसका पैसा हम नहीं लेंगे. आप अपनी पसंद का कोई भी ड्रेस ले लो, स्कर्ट या नीचे पहनने का, जो भी आपको अच्छा लगे. पर मैडम नीचे कुछ पैड वगैरह लगा लिया करिएगा.
मैं बोली- थैंक्यू … पर अभी मैं थोड़ा ड्रेस बदलना चाहती हूं.

अब वह दोनों मुझसे खुलने लगे और बोले- मैडम हम दोनों आपकी हेल्प करेंगे … नंबर भी ले जाइएगा, कभी आगे भी काम आ सकता है.

वो दोनों अब मेरे सीने और वहीं टांगों के बीच की तरफ देखने लगे. मैं समझ गई कि ये भी मुझे लाइन मार रहे हैं. मैं बोली- थैंक्यू भैया, पर अभी मेरी हेल्प करिए … कहीं चेंजिंग रूम में ले चलिए. कोई एक नीचे पहनने के लिए स्कर्ट दिला दीजिए.
वह बोले- और भी कुछ चाहिए तो बता दीजिए?
मैंने पहले थोड़ा संकोच किया, फिर बोली- आप गलत नहीं समझो तो बोल दूं.
वह बोले- बिल्कुल गलत नहीं समझेंगे … आप खुल कर सब बोलिए. आप हमें अपना ही समझिए, जो भी बात है, हम दोनों को बोल दीजिए. हम आपकी पूरी हेल्प करेंगे.
मैं धीरे से बोली कि मैं पेंटी नहीं पहने हूं … वह भी मुझे चाहिए.

जैसे ही मैंने यह बोला तो उन दोनों की हिम्मत बढ़ गई और बोले- मैडम कुछ बुरा न मानना … और गाली ना दो, तो आपको कुछ बोलें. हम आपको सब दे देंगे. पर आपसे कुछ पूछ लें?
मैं बोली- हां पूछिए … मैं बुरा नहीं मानूंगी, ना कुछ गाली दूंगी.
उन दोनों ने एक साथ ही कहा कि मैडम अभी अभी थोड़े पहले आपने कुछ करवाया है क्या?
मैं समझी नहीं, तो उनमें से जो एजेड था, वो थोड़ा मेरे पास आया और बोला- मैडम, आपने अभी सेक्स किया है क्या?
मैंने आंखें नीचे कर लीं और हां में मुंडी को हिला दिया.

तब वह दूसरा वाला बोला- समझा नहीं मैडम … आप नहीं बताना चाहती हो तो कोई बात नहीं.
मैं बोली- हां अभी थोड़ी देर पहले मेरे साथ कुछ वैसा ही हुआ है.
तब दोनों बोले- ओहहह इसीलिए रस बहा है … कोई बात नहीं, इस एज में ऐसा होता है, चलता है.
एक बोला- चलिए मैडम अन्दर आपको ले चलें.

वे मुझे अन्दर लेकर गए. अब वह मुझे जहां चेंजिंग रूम था, उधर खड़ा कर दिया. फिर एक गया तो 2-3 टॉप स्कर्ट उठा लाया और दूसरा गया तो 3 पेंटी का एक पैंटी सैट ले आया.
वो पेंटी खोल कर मुझे दिखाने लगा, फिर बोला- मैडम अगर आपको ना पसंद आए हों, तो दूसरी ला दूँ. ये वाली कैसी लगी हैं. वैसे ये पैंटी आपको बहुत सूट करेंगी … जॉकी की हैं … ब्रांडेड हैं बहुत अच्छी हैं.

मैं जरा मुस्कुरा दी तो मेरे बिना पूछे ही दोनों अपना अपना नाम बताने लगे. एक ने अपना नाम सतीश बताया और दूसरे ने हिमांशु बताया.
सतीश की आयु लगभग 40 और हिमांशु 30 साल के लगभग का रहा होगा. उनमें से सतीश ज्यादा बोल्ड था. वह बोला- मैडम हम यह सब आपको फ्री में दे देंगे … आप बुरा नहीं माने तो एक थोड़ी सी गुस्ताखी वाली बात कर दूं?
मैं बोली- हां बोलिए क्या कहना चाहते हैं? मैं बुरा नहीं मानूंगी, आप दोनों मेरी हेल्प कर रहे हैं.
तो वह बोला- हमें और कुछ नहीं चाहिए मैडम … हम दोनों तो सिर्फ आपको एक एक पेंटी खुद अपने हाथ से पहनाना चाहते हैं.

दोनों ने यह कहते हुए हाथ जोड़ लिए. मैंने उनकी तरफ देखा, फिर कुछ नहीं समझ नहीं आया कि मैं क्या कहूं. पर मैंने हां कह दिया, मैं बोली- ठीक है.
वो बोले- आपकी तबीयत खराब है आपको ऐसा बोल कर आराम के लिए बोल आइए. हम वहां खड़े होंगे, फिर आपको चेंजिंग रूम में नहीं बगल से आराम करने कि लिए छोटा सा रेस्ट रूम है, वहां ले चलेंगे. वहां आराम से चेंज करवा देंगे, आपकी उस टपकने वाली जगह पर पेंटी पहना देंगे. आपको टॉप भी दिला देंगे.

मुझे नीचे चूत में आग लगी पड़ी थी. मुझे समझ आ गया कि ये दोनों मुझे चोदने की प्लानिंग कर रहे हैं.
मैंने भी हामी भर दी.

कहानी जारी है.
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