कमसिन जवानी की चुदाई के वो पन्द्रह दिन-16

(Kamsin Jawani Ki Chudai Ke Vo Pandrah Din- Part 16)

This story is part of a series:

अब तक आपने पढ़ा था कि पुनीत अपने दो नीग्रो साथियों के साथ मुझे चोदे जा रहा था. वो मेरी गांड में अपना लंड पेलते हुए मैक से कह रहा था कि इसकी चूत में जम के लंड पेलो.. इसको रगड़ साली को.. माँ की लौड़ी बहुत मजा दे रही है.
अब आगे:

इतना सुनते ही मैक मेरी चूत में और ताकत से लंड डालने लगा. मुझे कुछ भी अब होश नहीं बचा था, मैंने सोची आज तो ये साला कल्लू हब्शी मुझे पागल ही कर देगा.

कुछ ही झटकों के बाद मैं अचानक से अकड़ने लगी. मेरे अन्दर ना जाने चूत में कैसी उबाल सी उठी कि मुझे कुछ भी समझ नहीं आया. मैं मैक से कस के लिपट गई और उसे अपने नाखूनों से नोंचने लगी, काटने लगी. मैं अपनी कमर उसके लंड की तरफ बढ़ाने लगी.

मैं अति उत्तेजना में मैक को गाली देते हुए बोली- साले कुत्ते भड़वे.. भैन के लौड़े.. और अन्दर डाल अपना लौड़ा मादरचोद.. और जोर से चोद मुझे.. आह.. मैं मरी जा रही हूं.. आज यह मुझे क्या हो गया.. आह फाड़ दे साले मादरचोद मेरी चूत की धज्जियां उड़ा दे.. तेजी से चोद मुझे.. मैं तेरी ही डार्लिंग वन्द्या हूं.. आह मेरी बहुत गर्म और प्यासी सेक्सी चूत को फाड़ दे भोसड़ी के.. और तेज चोद..

तभी मेरे पीछे पुनीत ने मेरे बाल पकड़ लिए और जोर से मेरे कूल्हों पर थप्पड़ मारते हुए बोला- साली गंडमरी रंडी.. ले मैं तुझे चोदता हूं.. कुतिया तू बहुत चुदासी है न.. ले मेरा लौड़ा लील..

पुनीत ने कस कस के मेरी गांड में फुल स्पीड से लंड डालने लगा. वो पूरी ताकत से 3 से 5 मिनट तक मेरी गांड को जम कर चोदता रहा.

फिर वो हांफते हुए बोलने लगा- आह.. कुतिया मेरा लंड रस निकल रहा है वन्द्या मादरचोद.. तू बहुत गर्म है भैन की लौड़ी.. ले मैं पहली बार इतनी जल्दी मेरा लंड लावा उगलने को तैयार हो गया वन्द्या.. आह तू बहुत बड़ी रांड है. तेरी गरम गांड में लंड डाल कर चुदाई करने से आज पहली बार मैं इतनी जल्दी झड़ने को हो गया हूँ.. आह.. मुझे समझ नहीं आता है कि कैसे तेरी गांड को देर तक रगड़ूं.. आह ले.. रस ले.

फिर पुनीत बहुत जोर से अपना लंड मेरी गर्म गांड में चलाने लगा. वो भी कस कस के ठोकर लगा रहा था. मैं भी पागल हुई जा रही थी. अब मेरी चूत बिल्कुल भी चुदाई की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी. मैं कुछ नहीं समझ पाई अब कैसे बर्दाश्त करूं. मैं मैक का मुँह अपने होंठों से, दांतों से काटने लगी. मुझसे अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा था, पता नहीं कैसे मेरी चूत बिल्कुल जलने सी लगी थी और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था, ना ही मैं होश में थी.

मैंने इसी मदहोशी में पुनीत को बोला- चोद कुत्ते साले और मेरी गांड में डाल.. पता नहीं मुझे क्या हो रहा है.. मेरी चूत बहुत ज्यादा जल रही है.. इस कल्लू सांड मैक को बोल.. फाड़ दे मेरी प्यासी चूत को!
पुनीत ने उसे बोला भी- मैक फक हार्ड.. वन्द्या इज वेरी हंगरी!

तब मैक ने पूरी मेरी टांगों को फैला दिया और मेरी चूत में स्पीड से जड़ तक लौड़ा दबा दबा कर डालने लगा. मुझे अपनी चूत की गर्माहट से लग ही रहा था कि खेल खत्म होने को है. अचानक मेरी चूत से गरम गरम चूत का रस निकलने लगा मेरी चूत ने बहुत तेजी से पिचकारी मार दी.

पूरे एक घंटे की चुदाई के बाद अब जाके मैं संतुष्ट हुई थी. मेरी चूत बह चली थी. इसी समय मैक भी अकड़ने लगा और तेजी से हांफने लगा. मैक अब मेरे ऊपर पूरा चढ़ गया और उसके लंड से तेजी से बहुत गरम गरम लावा पिचकारी की तरह मेरी चूत में भरने लगा.
मैक चिल्लाते हुए बोला- आह.. शी इज वेरी हॉट.. माई जॉब हैज डन.

इस तरह से उसने लंड रस मेरी चूत में भरते हुए मुझे अपनी बांहों में कस के भर लिया और धक्के मार मार कर अपने लंड का लावा मेरी चूत में भरने लगा. मैं भी मैक से चिपक गई, वह भी मुझसे चिपक गया. हम दोनों ही एक दूसरे में समा गए. इधर पीछे पुनीत भी रगड़ के मेरी पीठ पकड़ कर मेरी गांड के अन्दर तेजी से लंड चलाने लगा और तीन चार मिनट बाद ही वो भी छूटने को हो गया.

वो भी आहें भरते हुए बोला- आह.. ले साली कुतिया.. मेरा भी काम हो गया.

पुनीत भी अपने लंड का गरम गरम लावा मेरी गांड में छोड़ने लगा. पुनीत मेरी गांड से बहुत जोर से चिपक गया और हांफते हांफते गांड में अपने लंड से धक्के भी मारते जा रहा था.

पुनीत के लंड से निकले गरम गरम रस से मेरी गांड भर गई थी. आज तक जितनी बार मैं चुदी, उसमें से इस चुदाई से मुझे फुल सेटिस्फेक्शन मिला, इसलिए मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मैं ऐसे हो गई जैसे बिल्कुल पागल हूं.. और इन पलों का बहुत मस्ती से आनन्द और मजे लेने लगी.

अब दोनों हांफते हुए मुझसे लिपट कर मेरे ऊपर चढ़ से गए. आगे की तरफ मैक चढ़ा था और पीछे की ओर पुनीत चढ़ गया था. मैं दो ब्रेड के बीच में सैंडविच सी फंसी थी. वे दोनों हांफते हांफते ही ढीले पड़ कर मुझसे लिपटे पड़े रहे और करीब 3 मिनट तक दोनों मदहोश सांड की तरह मुझसे चिपके रहे.

फिर पुनीत पहले उठ गया और उसने अपना लंड मेरी गांड से निकाल कर किसी कपड़े से साफ कर अपने कपड़े पहन लिए. मैक के लंड से अभी भी रस निकल रहा था. उसने उठ कर अपना लंड मेरे मुँह तरफ लाकर बोला- वन्द्या, ओपन योर माउथ.
मैंने अपना मुँह खोल दिया तो मैक ने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया और उसे जैसे ही घुसाया, तो उसके लंड से बाकी बचा गरम गरम रस मेरे मुँह में भरने लगा.

मुझे बहुत अजीब लगा, पर मैं उसके लंड रस को चाटने लगी. मैं उसका लंड रस गटक भी गई, अजीब सी खुशबू थी और टेस्ट नमकीन सा थोड़ा अलग ही लगा. मैं उसके रस को चाटती रही. वह मेरे मुँह में लंड अपना डाले डाले अन्दर बाहर करता गया.
करीब 3 मिनट तक उसने लंड चलाते हुए अपने लंड का रस मेरे मुँह में निकाल दिया. फिर मैक का लंड मेरे मुँह में ही सिकुड़ कर छोटा हो गया. तब उसने अपना लंड निकाला और मेरे होंठों को बहुत जोर से किस किया. मेरे दूधों को भी जोर से दबाते हुए मैक उठ खड़ा हुआ.

वो बोला- यू आर वेरी हॉट एंड सेक्सी डार्लिंग वन्द्या.. यू आर द बेस्ट.
ऐसा बोलते हुए उठ कर उसने अपने रुमाल से अपना लंड पौंछा और अपने कपड़े पहन लिए.

गैब्रियल पहले ही अपने कपड़े पहन चुका था, पर मुझे उठने का होश नहीं था. मैं अब पूरी सेटिस्फाइड होकर मस्त पड़ी थी. मुझे थकान भी बहुत लग रही थी.

पुनीत बोला- यार वन्द्या तुम ऐसा करो कि थोड़ा फ्रेश हो लो, इधर बगल में बाथरूम है.. वहां जाकर खुद को साफ कर लो और फिर बाहर आ जाना.

मैंने सोचा कि अन्दर जाकर सब धो लूं पूरा जिस्म गंदा था. मैं उठने को जैसे ही हुई कि मुझे बहुत दर्द हुआ. जैसे ही मैं बेड से नीचे उठी, मेरे पूरे बदन में आगे पीछे बहुत ज्यादा तकलीफ लगी.

मैंने बेड में देखा तो मेरी चुत का और गांड का बहुत सारा खून निकला पड़ा था. मैं घबरा गई, पर उधर फिर नहीं देखा बस कैसे भी लंगड़ाते हुए सीधे बाथरूम में चली गई. अन्दर जाकर ठीक से अपना मुँह और पेट कमर चूत पीछे गांड सब जगह पानी डाल कर अच्छे से धोई. पर पानी पड़ने से पीछे गांड और चूत में झनझनाहट हो रही थी. दोनों तरफ से छेद छिल गए थे. मुझसे ठीक से चलते नहीं बन रहा था. मैंने अपने कपड़े पहने, वैसे ही लहंगा और चोली चुनरी सब डाली, कंघी की.

फिर मैंने अंकित को आवाज लगाई, वो सब लोग बाहर जा चुके थे. तब अंकित अन्दर आया और आके बोला- क्या है?
मैं बोली- यार मुझे बहुत तकलीफ हो रही है और मुझसे चलते नहीं बन रहा है, मेरी इस हालत से किसी को कुछ पता ना चल जाए. अगर पता चला तो बहुत गड़बड़ हो जाएगी.
अंकित बोला- यार यहां तू थोड़ी और रुक जा.. अभी मुझे भी चोदना है, फिर चलना.
मैंने उसको मना किया कि अभी कुछ नहीं.. मेरा बिल्कुल मूड नहीं है.. अब सब बाद में कर लेना.
अंकित मायूसी से बोला- यार मान जा.
मैं बोली- नहीं अंकित बहुत दर्द है और तू समझ.. मैं तो हूं ही तेरे लिए.
अंकित मेरे पास आया और जोर से मेरे बूब्स को दबा कर मुझे लिपटा कर बोला- यार, तू धोखा दे रही है.
मैं बोली- प्लीज.. आज मेरा काम हो गया है, मान जा.

मैंने अंकित से बड़ी रिक्वेस्ट की, तब मुश्किल से वो माना और हम दोनों वहां से निकल आए. बाहर पुनीत ने मुझे एक गोल्ड की चैन दी, सच में बहुत अच्छी थी.
उसने बोला- यह मेरी तरफ से गिफ्ट है.. उसने मेरे हाथ में कुछ पैसे भी रखे.
मैं बोली- मैं यह नहीं लेती, मैं ऐसी वैसी नहीं हूं.
तो उसने बोला- यह तुम्हारी शॉपिंग और पॉकेट मनी के लिए है. प्लीज इसे रख लो.
बाद में जब मैंने उस लिफ़ाफ़े में देखा तो फाइव थाउजेंड रूपए थे.
मैंने रुपए रख लिए.

उन लोगों ने मुझे अपनी गाड़ी से उसी शादी के पंडाल के पास पहुंचा दिया. मुझे इधर तक छोड़ने के लिए सिर्फ ड्राइवर आया था.
मैं और अंकित, गाड़ी से उतरे.
मैं अंकित से बोली- अब मुझसे चलते नहीं बन रहा है.. मैं इस हालत में नहीं जाऊंगी.. मुझे प्लीज वहां अन्दर तक घर में पहुंचा दो.

अंकित मेरे साथ अन्दर तक गया. उसने मुझे एक कमरे में पहुंचा दिया. जहां बेड लगा था, वहां जाकर मैं कपड़े चेंज करके अंकित को बोली कि मम्मी को जाकर बोल देना कि मेरी तबीयत खराब है, मैं नहीं आऊंगी.
मैं लेट गई.. मुझे बहुत दर्द हो रहा था. मैं सो गई.

दूसरे दिन मम्मी ने सुबह उठाया. वो बोलीं- सोनू, तुझे क्या हो जाता है, जिसके लिए हम यहां आए थे, तू वहीं नहीं रही.
मैं बोली- अब क्या करती मम्मी.. मेरी तबीयत आज ही बहुत खराब हो गई.. मैं उधर बिजली जाने की वजह से चलते समय फिसल कर गिर गई थी, तो चोट भी लग गई.. मुझसे चलते नहीं बन रहा है.
मम्मी बोली- कोई बात नहीं सोनू.. आराम कर.. तू पहले ठीक हो जा.

मुझसे तीन दिन तक कैसे भी चलते नहीं बन रहा था.. बहुत दर्द हुआ. दर्द तो करीब दस दिन तक बना रहा, पर शुरू के 3 दिन तो मैं बिल्कुल भी नहीं उठ पा रही थी.
फिर चौथे दिन हम लोगों की मौसी के यहां से वापसी की तैयारी होने लगी.

मौसी मम्मी से बोलीं- जल्दी फिर से आना.. तुम दोनों आईं, तो मेरा काम संभल गया और शादी अच्छे से हो गई.
हम दोनों ने मौसी से विदा ली.

मम्मी और मैं वहां से ट्रेन में बैठ कर अपने गांव अपने घर आ गए. घर पहुंचने पर भी मुझे दर्द हो ही रहा था. ठीक होने मुझे करीब 7-8 दिन लगे. फिर धीरे धीरे मेरा दर्द ठीक हो गया.
अब मेरी सहेलियां और भाभियां, जो भी मुझे देखती थीं तो मेरे लिए बोलतीं- वन्द्या, तेरी मौसी ने ऐसा क्या खिलाया कि 20 दिन में ही तेरी रंगत बदल गई, तेरे जिस्म में चमक आ गई है.. तू भर गई है.

मेरी जो क्लोज सहेलियां थीं, उन्होंने मुझसे कहा- सच बता वन्द्या, मौसी के यहां तूने बहुत ऐश की क्या … कोई ब्वॉयफ्रेंड बना लिया और उसे सब कुछ करने की इजाजत दे दी, क्योंकि तेरे दूधों के साइज बड़े हो गए हैं और पीछे गांड में भी बहुत उठान आ गया, जो अलग ही दिख रहा है. तूने इन 20 दिनों में बिल्कुल अलग ही फिगर और लुक पा लिया है. इतना जल्दी चेंज तो शादी के बाद ही आता है.

मैं उनकी बातों को सुनकर बस मुस्कुरा देती और बोलती कि ऐसा कुछ नहीं है.
लेकिन मैंने खुद भी महसूस किया कि मेरे फिगर में चेंज आ गया है. मेरी जो 32 साइज की ब्रा थी, वह पहले मुझे ढीली होती थी.. अब वह मुझे टाइट होने लगी. मेरा चेहरा भी चमक रहा था.

मैं इतनी छोटी उम्र में यह जान गई कि लड़की शादी के बाद जब पहली बार ससुराल से आती है, तो उसमें क्यों चमक आ जाती है और उसके फिगर में बदलाव क्यों आ जाता है.

मुझे घर आए करीब 10 दिन घर में हो चुके थे. जब मुझे अकेले में टाइम मिलता या रात में लेटती थी, तो एकदम से मौसी के यहां जो हुआ, उन पलों की शुरू से अंत तक के सीन याद आते और फिर अपने आप ही मेरी चूत गीली हो जाती. मैं अपने हाथों से उसे दबाने लगती.

यहां से मेरी लाइफ पूरी तरह से बदलने लगी. मेरा किताबों से पढ़ाई से ध्यान अब पूरी तरह हट गया था. मैं पढ़ने जाती, तो टीचर या लड़के और खासतौर से बड़ी उम्र के आदमी मुझे देखते, उनकी प्यासी नजरें मुझे अलग ही दिखने लगती थीं. मेरा अब सिर्फ हर वक्त यही मन करने लगा कि मुझे कोई भी मर्द मिले और मेरे जिस्म को अपने बाजुओं से मसल दे. मेरी बहुत चुदाई करे.

ऐसा कई बार होने लगा था, पहले ऐसे कभी नहीं हुआ करता था. इसके बाद मैं बहुत बिगड़ती गई. मेरे जीवन में जो अब मौसी के यहां से आने के बाद दिन आए, उसको अगर आपको एक एक करके बताऊंगी तो आप आश्चर्य करेंगे.

एक बात जरूर लिखना चाहूंगी कि मेरे साथ जिस तरह से घटनाएं हुईं और कुछ वारदातों को छोड़ दें, तो ज्यादातर चीजें मेरी ही सहमति और मर्जी से हुई हैं. वैसे भी गांव में आसपास के एरिया में मम्मी के कारण मेरा घर बदनाम था. लोग उसी नजरिए से मुझे भी देखते थे और अब मैं वैसे हो भी गई.

सभी मेरे क्लोज रिलेटिव्स और आस पास के जो भी मुझे देखता, तो वो भूखी नजरों से मुझे घूरता रहता. हर मर्द मुझे खा जाने की निगाहों से देखने लगा था. कोई भी मर्द मुझे पाया तो शायद ही कुछ ही ऐसे मर्द मेरे जीवन में आए हैं, जिन्होंने मुझे अकेले पाकर भी मुझे सेक्स के लिए नहीं बोला.

अब तो मैं दिखने भी वैसी ही लगी हूं कि किसी भी मर्द में खुद को कंट्रोल करने की हिम्मत शायद ही रह जाती हो. बस उनका सोच यही रहता था कि ये अगर अकेले में जाए, तो पकड़ कर मुझे पेल दें.

मैं भी अब ये जान गई हूं कि मेरे लिए हर एक मर्द की सिर्फ यही चाहत होगी, उसका यही अरमान होगा कि एक बार मुझे पा ले और मेरे साथ एक रात गुजार ले. हर कोई मेरा पति बनना चाहेगा और मेरा जिस्म मेरा हुस्न भोगना चाहेगा.. चाहे जिस रूप में हो.

यही मैंने होते हुए भी देखा और ऐसा ही अब हो भी रहा है. आज मैंने यह सच्चाई आपके सामने लिखने की हिम्मत की है. मेरे द्वारा लिखा हुआ एक शब्द भी झूठ नहीं है. पूरे मन से दिल से अपनी मम्मी की सौगंध खाकर कहती हूं, गॉड की कसम खाकर कहती हूं कि एक शब्द भी झूठ नहीं लिखा है. सब कुछ वैसा का वैसा ही लिखा है, जैसा मेरे साथ हुआ है.. जिस तरह से मैंने उन पलों को जिया है.

आपको मेरा ये सच कैसा लगा, मुझे मेरी मेल आईडी पर जरूर बताएं, आपकी राय और आपके द्वारा, जो मेरा मनोबल बढ़ाया जाता है, उससे अपनी सच्चाई लिखने की हिम्मत मुझमें और बढ़ती जाती है. आपके स्नेह और प्यार की मैं हमेशा से आभारी हूं.
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