फ्री सेक्स स्टोरी: सफर में डुबकी

(Free Sex Story: Safar Mein Dubki)

दोस्तो, मैं प्रतीक एक बार फिर आप सभी के बीच लेकर आया हूँ खूबसूरत पलों का एक और अहसास. यह मेरे जीवन की सच्ची घटना है.

बात लगभग 2 साल पुरानी है, अचानक मुझे बिजनेस के सिलसिले में हैदराबाद जाना पड़ गया, प्रोजेक्ट बड़ा था और एक्सपोज़र भी अच्छा था इसलिए मुझे उसी शाम निकलना पड़ा, वो भी स्लीपर बस से. मडगांव कदंबा स्टॉप से मैंने रात 8 बजे की बस पकड़ी जो 2 बाय 1 स्लीपर थी. अंतिम समय में कराई टिकिट की वजह से मुझे शेयरिंग स्लीपर मिला जो बस में पहुँचने से पहले तक मेरे लिए चिंता का विषय था पर शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. नियत समय बस मडगांव से निकल गयी और मेरी स्लीपर पर कोई और नहीं आया.
‘चलो अच्छा ही हुआ.’ यह सोच कर मैं अपने हेडसेट लगा कर लेट गया और अपने मतलब के वीडियो देखने लगा.

बस आधे घंटे बाद पोंडा पहुँची और वहीं से मेरी कहानी की नायिका रश्मि (नाम बाद में पता चला) बस में चढ़ी. कद लगभग 5 फ़ीट 3 इंच, रंग गेहुँआ, बदन गठीला और फेसकट शिल्पा शेट्टी जैसा 99%.
वो आकर मुझे बोली- एक्सक्यूज़ मी, आप मेरी सीट पर हैं, सीट खाली कीजिये.
मैं कुछ बोलता, इससे पहले कंडक्टर आ गया, उसने बोला- मैडम सही कह रही हैं, साइड स्लीपर मैडम का है.
मैंने थोड़ा परेशान होते कहा- और मेरा?
उसने लिस्ट देखी और बोला- सॉरी सर, आपका सीट यहीं है पर अंदर वाली तरफ!

उसकी बात सुनकर मुझे थोड़ी राहत मिली और रश्मि कि चेहरे पर चमक आ गयी और मुझे ‘सफर में डुबकी’ की संभावना का हल्का सा आभास हुआ.
आज तक अन्तर्वासना पर सफर में सेक्स की बहुत कहानी पढ़ी हैं, पर ये सब मेरे साथ कभी होगा, सोचा नहीं था.

कंडक्टर की बात से मुझे भी हंसी आ गयी, मैं स्लीपर से नीचे उतरा और वो ऊपर चढ़ गई, मेरे वापस स्लीपर पर आने से पहले वो बोली- कितनी देर से लेटे हैं आप, पूरी सीट गर्म कर दी.
मैंने सोचा ‘अजीब औरत है, ac बस में भला सीट गर्म कैसे होती है.’ पर मैं बिना कुछ सोचे उसको सॉरी बोलकर स्लीपर पर चढ़ गया और उसके पैर वाली तरफ अपना सिर रखकर लेट गया.

उसने मुझे थैंक यू कहा और बोली- काफी समझदार हो. कहाँ तक जाना है?
मैंने मन ही मन सोचा ‘ज्यादा गहरा नहीं, बस आपकी बच्चादानी तक.’
खैर मैंने कहा- मैं हैदराबाद तक जा रहा हूँ मैम.

मेरे मुँह से मैम सुनकर उसकी हंसी छूट गयी और तपाक से बोली- मैं रश्मि गुप्ता और आप?
मैंने अपना परिचय दिया.
वो बोली- सिर्फ प्रोग्रामिंग ही करते हो या निकलना लगाना भी आता है? आई मीन टू से हार्डवेयर.
मैंने कहा- जी मैं ऑल राउंडर हूँ.

उसके जवाब ने ‘सफर में डुबकी’ वाले मेरे सपने को जैसे पंख लगा दिए, उसने कहा- बच्चा, सिर्फ आल राउंडर होने से काम नहीं चलता, थोड़ा लम्बा भी होना चाहिए.
उसके डायरेक्ट हमले से जैसे माहौल ही बदल गया.

मैं कुछ करता या कहता उससे पहले ही बस रुक गयी और सभी के साथ हम भी डिनर के लिए उतरने लगे, उतरते हुए उसने कहा- वाह बच्चा, किस्मत जोरदार है तुम्हारी, यहाँ तो मेडिकल भी है. और मुझे आंख मार कर बस से उतर गई.

उसके इशारे को समझ कर मैं मेडिकल से 1 प्लेन डॉटेड कोंडोम का पैकेट ले आया ताकि बस में किसी को सुगन्ध न आये.
दोस्तो, मेडिकल वाले कितने प्रॉफेशनल होते है कि दुकान वाले ने यह तक नहीं पूछा या सोचा कि बस में कंडोम की क्या जरूरत.

फिर होटल के बाहर हम बात करने लगे. उसने बताया कि उसका पति एक mnc में काम करता है. शादी को 4 महीने हुए हैं. वो एक खुले विचारों वाली महिला है और शारीरिक जरूरतों को सीरियसली लेती है. पेशे से वो एक इंटीरियर डिज़ाइनर है और काम के सिलसिले में गोवा आयी थी.

फिर हमने काफी ली और उसने मुझे झट से पूछ ही लिया- काम हो गया?
मैंने इशारे में कहा- यस!
तो उसने फिर से पूछा- कौन सा फ्लेवर?
मैंने कहा- काली मिर्ची.
और हम दोनों हँसने लगे.

डिनर के बाद बस ने हॉर्न मार दिया था, सभी बस में बैठने लगे थे, रश्मि टॉयलेट से आ गयी थी, सबसे आखरी में बस में चढ़ी. मैं उसका इंतजार कर रहा था, उसके स्लीपर में जाने के बाद मैं चढ़ा और अब शराफत छोड़ कर मैं उसकी तरफ ही सर कर के लेट गया.

2-3 मिनट में लाइट बंद हो गयी और बस निकल पड़ी हैदराबाद की ओर!
लाइट बंद हुए कुछ सेकंड ही बीते थे कि रश्मि ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और शुरुआत हो गयी ‘सफर में डुबकी’ की.

2 मिनट तक बेतहाशा चूमते हुए मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डालकर उसको चखना शुरू कर दिया. वो बहुत हॉट हो गयी थी, उसने मेरा हाथ पकड़ के अपने बूब्स, जो 32″ के होंगे, के ऊपर पहने पीले रंग के टॉप पर रख दिये.
कुछ ही पल में उसका हाथ मेरे 5.8 इंच के सख्त लंड पर था और मेरा हाथ उसकी चूत के दाने को सहला रहा था.

रश्मि ने मुझे एक स्पेशल फ्रेंच किस की जिसमें उसने अपनी जीभ से मेरी जीभ के नीचे गुदगुदी की और अपना गर्म थूक मेरे मुख में भर दिया. मेरी उंगली ने अपना रास्ता बना लिया था और अब में उसकी चूत में उंगली घुसा कर अंगुली चोदन कर रहा था और वो मेरे लंड को पागल जैसे मसल रही थी- बच्चा, प्लीज आगे बढ़ो, मुझे खाओ ना प्लीज!

मैंने उसके निप्पल को मुख में लेकर चूसना शुरू किया पर उसने रोक दिया और बोला- इनको नहीं प्लीज, मैं फिट रहना चाहती हूँ. चूसने से साइज बढ़ जायेगा.
उसकी बात सुनकर मैंने स्तन चूसना छोड़ कर उसका पूरा टॉप स्तन से ऊपर कर दिया और लेगी घुटनो तक नीचे, उसने अंदर कुछ नहीं पहना था, उसकी चूत पर मुलायम और छोटे बाल भी थे.
उसने मेरा लंड ज़िप में से बाहर निकाल लिया और मेरे कान में कहा- मुझे कंडोम दो और तुम दूसरी तरफ जाओ.
मैंने उसको कंडोम दिया और धीरे से मैं नीचे की तरफ चला गया.

उसने कंडोम लगाने के लिए निकाला ही था कि मैंने उसे रोक दिया और उसको जल्दी से मुँह में लेने का इशारा किया, समझदार को इशारा काफी उसने मेरा मुँह में नहीं लिया, बस हाथ से हिलाने लगी.
और यह क्या… जिसका डर था वही हुआ, मेरा माल छूट गया.
वो हंसी और बोली- कोई बात नहीं बच्चा, मेरा आल राउंडर आउट हो गया.
उसकी बात से मुझे गुस्सा आया पर करता क्या… गलती मेरी ही थी.

खैर कुछ मिनट बाद फिर से जोश आया और अब मैं उसकी चूत को चाटने और अपनी उंगली से चोदने लगा, उसने मेरे लंड को चूस चूस के साफ कर दिया और वो फिर से खड़ा हो गया. उसने अब कॉन्डम लगाया और मुँह में लेकर पागलों जैसी चूसने लगी. मैं भी उसकी चूत के दाने को अपनी जीभ से मसल रहा था. बस में इतना सब फ्री सेक्स करने में न मुझे डर लग रहा था न उसे… क्योंकि सब सो गए थे.

सेक्स का नशा ऐसा चढ़ा था कि हमारी स्पीड बढ़ती ही जा रही थी.
“आह आह… यस बेबी, यू मेड मी फूल वेट इडियट” उसकी मादक आवाज सीधे मेरे कानों मे आ रही थी.
बस की 80-90 की रफ्तार में भी जैसे हम दोनों का वक्त थम सा गया था, उसका सैलाब अपने चरम पर था और किसी भी समय वो मेरे मुंह मे अपना अमृत छोड़ने वाली थी.

अचानक वो कड़क होती सी कांपने लगी और झटके से उसका रज मेरे मुंह में छूट गया, कसैला नारियल के पानी जैसा उसका स्वाद मुझे अजीब सा लगा पर वासना के नशे में वो मेरे लिए सोम रस ही तो था.
मेरे होंठ उसकी योनि रस से सराबोर थे और अब मेरा कंट्रोल भी खत्म होने लगा था. मैंने उसको कहा- कॉन्डम निकालो, मुझे भी मुँह में ही आना है.
और उसने बेस्ट ऑप्शन किया, अगले ही कुछ पलों में मैं भी जन्नत से सीधे बस की स्लीपर में आ गया.

दोस्तो, जब माल निकल जाता है, तब होश आता है और गांड भी फटने लगती है.
मैंने स्लीपर का पर्दा खोल के देखा. थैंक गॉड… सब ठीक था. सब सो रहे थे.

फिर मैं रश्मि के बराबर में जा कर सो गया और फिर से स्पेशल वाली फ्रेंच किस, 10 मिनट के फोरप्ले और छेड़खानी के बाद फिर से रेडी थे ‘सफर में डुबकी’ लगाने को!

मैंने उसको पीछे से पकड़ा उसने अपनी एक टांग उठा कर मुझे निमंत्रण दिया. मैंने अपना लंड रखा ही था कि उसने रोका और बोली- बच्चा, प्लीज रेनकोट पहन कर भीगो ना!
उसकी बात मस्त लगी, मैंने जल्दी से कंडोम लगाया और फिर अपना लंड पीछे से उसकी चूत पर रखा, उसने धीरे से जोर लगाया और घप से मेरा लंड अपने अंदर ले लिया ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ मैंने उसके गर्दन पर किस करना शुरू किया और धीरे धीरे उसको चोदने लगा.

“फक फक मी हार्ड… बच्चा!” वो आँखें बंद करके मुझ से चुद रही थी और धक्कम पेल जारी थी.

उसका बदन फिर से अकड़ा और वो बोली- आखिर तुमने मुझे चोद ही लिया बच्चा आह… आज मेरी चूत फाड़ दी मेरे प्रतीक…ककक.
“धीरे प्लीज रश्मि, हम बस में हैं.” बोल कर मैंने फिर से उसके लिप्स को अपने लिप से लॉक कर दिया और धक्के लगाने लगा.

अब उसकी सेक्स भरी सिसकारियाँ घुटन बन कर निकलने लगी थी और मैं उसकी टाइट चूत में डुबकी लगा रहा था.

और वो फिर से झड़ गयी, निढाल हो गयी, जैसे मछली पानी में निकलने के बाद तड़पती है और फिर पानी में डालने पर शांत हो जाती है, रश्मि भी शांत हो गयी थी, अब उसे मेरे धक्कों से तकलीफ होने लगी थी.

दोस्तो, सेक्स में पार्टनर की खुशी को मैं हमेशा प्राथमिकता देता हूं और मौके की नजाकत को संभाल कर मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया और मुठ मारने लगा.
मेरी इस हरकत से रश्मि ने राहत की सांस ली और आँखों ही आँखों मुझे थैंक यू और अंत तक साथ न देने के लिए सॉरी बोला.

अपना हाथ जगन्नाथ करते हुए मेरा वीर्य भी छूट गया, 30 सेकंड बाद मैंने कॉन्डम निकाला और पैकेट में डाल कर फिर से बैग में रख दिया.

कपड़े सही करने के बाद हम दोनों एक दूसरे के साइड मुँह कर के लेट गए. उसका सिर मेरे हाथ पर था और फिर से हमने वही जोरदार किस की फ्रेंच वाली, और अब सोने की इजाजत मांग के सोने लगे, 3 राउंड के बाद मेरी हालत भी खराब थी. कब नींद आ गई पता ही नहीं चला.

सुबह बस हैदराबाद से 30 किमी पहले ब्रेकफास्ट के लिए रुकी, रश्मि ने मुझे उठाया नहीं, बल्कि कंडक्टर को बोल के मुझे उठवाया.
मुझे समझ आ गया कि किसी को शक न हो इसलिए उसने ऐसा किया.

मेरे नीचे आने के बाद वह उतरी और मैं फिर से सो गया.

थोड़ी देर बाद बस चली होगी और लगभग 11 बजे मुझे फिर से कंडक्टर ने उठाया और बोला- आ गया लास्ट स्टाप, उतरो भाई साहब!
मैं उठा और इधर उधर देखा रश्मि नहीं दिखी, शायद किसी स्टॉप पर वो उतर चुकी थी, मैंने सीट चेक की पर मुझे कुछ कागज या मैसेज नहीं मिला और फाइनली में भी उतर गया. दिल में खूबसूरत याद लेकर पर उसके खो जाने का दर्द उस ‘सफर की डुबकी’ के आनन्द से ज्यादा था.

आशा है आप भी मेरी इस ‘सफर की डुबकी’ में डूबे होंगे!
मेरी फ्री सेक्स स्टोरी पर आपके विचारों का स्वागत है और अगर रश्मि, आप भी यह स्टोरी पढ़ रही हो तो प्लीज मुझे एक बार जरूर मेल करना.
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