जवान कॉलेज गर्ल की सेक्सी हिंदी स्टोरी

(Jawan College Girl Ki Sexy Hindi Story)

हैलो फ्रेंड्स, मैं मनीष अबोहर से हूँ. मैं अन्तर्वासना सेक्सी हिंदी स्टोरी का बहुत पुराना पाठक हूँ. मैंने सोचा आज आप सबके साथ अपनी कहानी को भी साझा करूँ.

मैं एक दिखने में स्मार्ट लड़का हूँ. मेरी हाइट 5′ 9″ है. मेरे बगल से निकालने वाली लड़की या भाभी मुझे मुड़ कर ना देखे, ऐसा बहुत कम होता है. मेरे लंड का साइज़ 7″ है.

ये बात उस समय की है, जब मैं बी. कॉम. के फाइनल ईयर में था. वैसे तो मुझे कॉलेज में बहुत सी लड़कियां लाइन देती थीं.. पर मुझे तो इंटरेस्ट मीषा में था.. जिसने अभी अभी फर्स्ट ईयर में दाखिला लिया था. उसके पीछे पूरा कॉलेज दीवाना था. हो भी क्यों ना.. वो बहुत ही सुंदर हुस्न की मल्लिका थी. उसका 34-28-36 का फिगर, जो मुझे बाद में पता चला, इतना दिलकश था जो अच्छे अच्छों का मन विचलित कर दे. उसका दूध जैसा गोरा रंग बरबस निगाहों को अपनी तरफ खींच लेता था. जब वो कमर मटका कर चलती थी तो सभी लड़कों की नज़र उसकी थिरकती गांड पर ही होती थी. वो ज्यादातर लूज टीशर्ट और टाइट जीन्स पहन कर आती थी. जिसे देख कर सभी लड़कों के पेंट में तंबू बन जाते थे. मैंने जब से उसे देखा था बस ठान लिया था कि ये तो मेरे नीचे ही लेटेगी. जबकि वो किसी को भी भाव नहीं देती थी.

मैं अपनी क्लास में अच्छे होशियार स्टूडेंट में से एक था.. तो क्लास और कॉलेज में बहुत फेमस था. उस समय कॉलेज में सीजनल एग्जाम स्टार्ट हो रहे थे. मैं ज्यादा से ज्यादा समय क्लास में ही लगाता था.

एक दिन क्लास खत्म होने के बाद मैं अपनी डेस्क पर ही बैठ कर अपना काम निपटा रहा था. क्लास में मैं अकेला ही बैठा था. इतने में बाहर से किसी के अन्दर आने की आहट हुई. तब मैंने नज़रें उठा कर देखा तो मीषा मेरी तरफ आ रही थी लेकिन मैंने उसको जानबूझ कर अनदेखा किया और अपने काम में लग गया.

इतने एक मीठी सी आवाज़ आई- एक्सक्यूज मी!
मैंने सर उठा कर उसकी तरफ देखा. वो हल्की सी मुस्कुराहट के साथ मेरे सामने खड़ी थी.
मैंने उस प्यार से बोला- जी कहिए?
वो बोली- क्या आपका ही नाम मनीष है?
मैं- हां, बोलो.
मीषा- हैलो आई एम मीषा, फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट हूँ.

मैं- ओके.. देन?
मीषा- असल में मुझे सीजनल एग्जाम के लिए फर्स्ट ईयर के नोट्स चाहिए थे. मुझे रिचा दी ने बताया कि वो आपके पास मिल सकते हैं.

रिचा के बारे में आपको बता दूं कि वो मेरी क्लासमेट है.. रिचा बड़ी गर्म लड़की है, कामुकता उसमें कूट कूट कर भरी पड़ी है. और वो अक्सर मुझसे अपनी प्यास बुझवाने के लिए मुझे बुला लेती है. और जब मेरा दिल करे मैं उसे बुला कर उसकी चुत चुदाई कर लेता हूँ. बड़ी मस्त हो कर वो अपनी चूत देती है.

मीषा के बारे में मैंने उससे भी कहा था कि मैं मीषा को चोदना चाहता हूँ. तो उसने कहा था कि वो कोशिश करेगी.

मैं- एक्च्युयली नोट्स तो मेरे पास हैं, पर मैं मंडे को तुम्हें दे पाऊंगा, क्योंकि मुझे रूम पर नोट्स ढूँढने पड़ेंगे.. और आज सैटरडे है.
मीषा थोड़ा मायूस होकर बोली- पर मंडे को तो मेरे एग्जाम स्टार्ट हो रहे हैं. क्या आप उस से पहले मुझे नोट्स नहीं दे सकते?

इतने में उसके हाथ से बुक्स छूट कर नीचे गिर गईं और वो उसे उठाने के लिए नीचे झुकी जिससे मुझे उसके बड़े बड़े दोनों मम्मों के दीदार हो गए. मैं एकटक उन्हें देखे जा रहा था. उसने मुझे इस तरह ताड़ते हुए देख लिया था. धीरे धीरे मेरा लंड कड़क हो गया.

फिर वो बुक्स उठा कर सीधी खड़ी हो गई और बोली- अगर आप आज शाम को नोट्स दे सकें तो मुझे उनसे बहुत हेल्प मिलेगी.
पर मैं तो उसके मम्मों में ही खोया था.
उसने मुझे हाथ पर टच किया और मुझे सपनों की दुनिया से बाहर निकाला. उसके टच से मेरी पूरी बॉडी में करंट सा दौड़ गया.

वो मादक से स्वर में बोली- कहां खो गए??
मैंने खुद को संभालते हुए कहा- कहीं नहीं.
वो फिर से बोली- अगर आप आज शाम को नोट्स दे सकें.. तो मुझे उनसे बहुत हेल्प मिलेगी.
मैंने कहा- ओके.. पर शाम को नोट्स ड़े दूँगा… लेकिन तुम मुझे मिलोगी कहां?

उसने कहा- क्या आप वतन विहार में रहते हो? मैंने आपको अक्सर शाम को वहां देखा है.
मैंने हां में सर हिलाया और बोला- हाँ मैं वहीं रहता हूँ.
उसने कहा- आप आज शाम वहीं के पार्क में मुझे नोट्स दे देना.

शाम को 6 बजे का टाइम फिक्स हुआ और वो हल्की सी स्माइल देकर चली गई.

मैंने रूम में पहुँच कर अपनी माल रिचा को फोन किया और पूछा कि उसने मेरे बारे में मीषा ने क्या क्या बात की?
तो उसने बताया कि मीषा मुझ पर फ़िदा हो गई है और जल्द ही मेरा काम बन जाएगा.

अब मुझसे शाम का इंतजार नहीं हो रहा था. मैंने फ़टाफ़ट से नोट्स ढूंढे और मैं शाम 5.30 पर ही पार्क के गेट पर जाकर खड़ा हो गया. ठीक 5.55 पर वो मुझे आती दिखाई दी.. और दूर से मुझे देख कर हाथ हिला कर हाय बोला.

फिर हम दोनों पार्क की बेंच पर बैठ कर बात करने लगे. बातों बातों में अंधेरा होने लगा.
उसने नोट्स देखे और बोला- इसमें परसों वाले एग्जाम के नोट्स तो है ही नहीं. अब क्या करूँ?
मैंने कहा- शायद मैं वो रूम पे ही भूल आया हूँ, तुम मेरे साथ मेरे रूम में चलो, तुम्हें दे दूँगा. यहीं बगल वाली गली में ही मेरा रूम है.

वो मेरे साथ चलने को तैयार हो गई. मैंने रूम पर आकर उसको अन्दर आने को कहा, तो वो अन्दर भी आ गई.
मैंने कहा- मीषा तुम बैठो, मैं नोट्स निकाल कर देता हूँ.

वो बैठ कर मेरी बुक्स को ओर टेबल पर पड़े सामान को देखने लगी. मैं उसे नोट्स लाकर देने लगा तो देखा कि वो मेरी बुक्स के बीच में पड़ी एडल्ट पिक्स वाली बुक को ध्यान से देख रही थी. मैं छुपी निगाहों से पीछे हट कर खड़े होकर उसे देखने लगा.
धीरे धीरे वो गरम होने लगी और ‘आ आह..’ की मादक आवाजें उसके मुँह से निकलने लगीं. एक हाथ से वो अपने 34 साइज़ के चूचे दबाने लगी.

मेरी तो जैसे लॉटरी ही लग गई थी.. जिस लड़की को मैं चोदना चाहता था, वो बिना किसी मेहनत के लिए चुदने के लिए तैयार थी.

धीरे धीरे वो मदहोश होने लगी और चेयर पर बैठ कर एक हाथ से चूचे ओर एक हाथ से अपनी चूत मसलने लगी. वो इतनी बेसुध हो गई थी, जैसे वो भूल गई हो कि वो अपने नहीं मेरे रूम में है.

मैं भी मौके का फायदा उठाते हुए धीरे से पीछे जाकर उसके मम्मों को दबाने लगा. उसने भी इस बात का विरोध नहीं किया. मैंने पीछे से ही उसके कान की लौ पर प्यार से किस किया, तो वो मचल गई और खड़ी होकर मुझे गले लगा लिया.
मैंने भी उसे अपनी बांहों में भर लिया, वो कुछ नहीं बोली.

मैं उठा कर उसे अपने बेड पे ले गया और बिस्तर पर लिटा कर उसके ऊपर लेट कर मुँह में अपनी जीभ डाल दी और किस करने लगा. वो तो जैसे जन्मों की भूखी निकली, उसने मेरी जीभ को चूसना शुरू कर दिया. मैं समझ रहा था कि मैं इसे पटा रहा हूँ, पर शायद वो मुझे पटाने की सोच रही थी.

करीब 15 मिनट तक हमारी वाइल्ड किसिंग चली. धीरे धीरे हमने एक दूसरे के बदन से कपड़े उतारने शुरू किए और कुछ ही पल में हमारे बदन पर एक भी कपड़ा नहीं बचा था.

उसका गोरा दूध जैसा बदन देख कर मुझमें एक पागलपन सा आया और मैंने उसके सारे बदन को चूमना स्टार्ट किया. मैं दोनों हाथों से उसके मम्मों को मसल रहा था. धीरे धीरे उसकी गरदन से होते हुए मम्मों की घाटी पर आकर उसकी चूचियों को चूसने लगा, फिर और नीचे जाकर उसकी नाभि में जीभ घुसा दी और फिर मैं उसकी फुद्दी तक पहुँच गया. उसकी चूत के आसपास ट्रिम किये हुए बाल थे जो सेक्सी लग रहे थे.

जैसे ही मैं उसकी फुद्दी चूमने लगा, वो सिहर उठी और सीत्कार भरने लगी- आ अया.. ह्म्म्म्म म आह.. लव यू..
मैंने भी पोजीशन चेंज करके लंड उसके मुँह में पेल दिया.

उसके मुँह में लंड लेते ही मैं तो जन्नत में था. आज तक किसी भी लड़की या भाभी ने ऐसे मेरा लंड नहीं चूसा था, जैसा मीषा ने आज लिया था. मैं मीषा की चूत के होंठों को अपनी उँगलियों से खोल कर उसमें जीभ घुसा कर चटाने लगा, जल्द ही मीषा की चूत ने नमकीन पानी छोड़ दिया.. पर मेरा अभी बाकी था.

मैंने अब उसकी चूत में उंगली करनी और दूसरे हाथ से उसके मम्मे को दबाना जारी रखा. मेरा अंगूठा उसकी भगनासा पर रगड़ रहा था. वो फिर से गरम होने लगी. वो तड़पने लगी- मनीष, अब अपना लंड डाल भी दो मेरी चूत में.. वरना मैं मर जाऊंगी.

मैंने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख कर उसकी चूत पर लंड की टोपी को सैट किया और उसकी कमर के नीचे तकिया लगा दिया. फिर उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों से लिपलॉक कर लिया. ताकि आवाज़ ना निकले.

अब मैंने धीरे से धक्का लगाया, लंड का अगला हिस्सा अन्दर चला गया और मीषा तड़पने लगी. वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी.. पर मैंने अपनी मजबूत पकड़ उस पर बना रखी थी. धीरे धीरे वो शांत होने लगी, तो मैंने एक और जोरदार धक्का लगा दिया. मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर घुस गया और वो दर्द से तिलमिलाने लगी. मैं उसका दर्द कम करने के लिए उसके मम्मों को मसलने लगा. फिर अगले ही धक्के के साथ मैंने पूरा लंड घुसा दिया. उसकी आँखों से आंसू निकल आए. मैंने रुक कर उसे सहलाना शुरू कर दिया.

मुझे नहीं पता कि वो अभी तक सील पैक थी या नहीं, उसके दर्द से लग रहा था कि जैसे पहली बार चुद रही हो लेकिन उसकी चूत से कोई खून नहीं निकला था और उसकी हरकतें भी चुदी चुदाई लड़कियों जैसी ही थी.

कुछ देर बाद जब उसने अपनी गांड हिलानी शुरू की, तो मैंने भी धक्के लगाने स्टार्ट कर दिए. करीब 20 मिनट तक उसकी जबरदस्त चुदाई की.
‘फॅक फॅक..’ की आवाजों से कमरा गूँज रहा था. वो भी गांड उठा उठा कर जोरों से चुद रही थी.

फिर 20 मिनट बाद मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने उससे कहा- मैं छूटने वाला हूँ.
उसने कहा- मनीष, अपना माल मेरे मुँह में ही छोड़ना, मैं टेस्ट करना चाहती हूँ.

मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर उसके मुंह में दे दिया और उसके मुँह में वीर्य छोड़ दिया. तब तक वो भी झड़ चुकी थी.

फिर हम दोनों कुछ देर चिपक कर लेटे रहे और जब वो जाने के लिए कहने लगी तो मैंने उसे कपड़े पहनने में मदद की, उसकी ब्रा का हुक बंद किया.
मैंने भी कपडे पहने और उसे उसके घर के मोड़ तक छोड़ कर आया क्योंकि उससे ठीक से चला नहीं जा रहा था.

आज इस बात को 2 साल हो गए हैं. मीषा आज भी मुझसे हर हफ्ते, दो हफ्ते बाद चुदती रहती है. उसे चुदाई की जैसे लत है, जब कहो, तब वो चुदने को तैयार रहती है बिल्कुल वैसे ही जैसे रिचा!

आपको मेरी सेक्सी हिंदी स्टोरी कैसी लगी प्लीज़ मुझे मेल कीजिएगा.
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