चिकने बदन-1

(Chikne Badan- part 1)

हैलो दोस्तो, मैं आपकी पुरानी सहले सीमा शर्मा, लखनऊ से! आज आपको मैं वो बताने जा रही हूँ, जो मेरे साथ पिछले दिनों हुआ।
तो ध्यान से पढ़िये।

मेरी उम्र इस वक्त 45 साल की है और मेरे एक बेटा और एक बेटी है, दोनों पढ़ते हैं। पति का बिजनेस है, पर टूरिंग वाला काम है, इसलिए वो अक्सर महीने में 20-25 दिन घर से बाहर ही रहते हैं। अब जब बच्चे बड़े हो जाएँ, अपना ख्याल खुद रख सकें और आप बच्चों के लालन पालन से फ्री हो जाओ, तो फिर आपका दिल करता है कि आप अपने पति से खुल कर प्यार कर सकें।

अब मैं भी अपने पति को बहुत प्यार करती हूँ मगर जब वो सारे महीने में मेरे पास सिर्फ हफ्ता दस दिन ही रहते हों, तो मेरा तो प्यासी रहना लाजमी है। इसी वजह से मैं पहले तो खुद अपनी प्यास बुझानी चाही, मगर मुझे उसमें कोई मज़ा नहीं आया, तो फिर मेरे पैर फिसल गए, और फिर तो ऐसे फिसले के मुझे खुद याद नहीं आज तक मैं कितने अलग अलग मर्दों से सम्बन्ध बनाए होंगे। अब तो ये हाल के मुझे सिर्फ पसंद आना चाहिए, लड़का हो, लौंडा हो, बुड्ढा या जवान। बस लंड का तगड़ा होना चाहिए। मैंने 18 साल के लड़के से ले कर 69 साल के बंदे तक का भी स्वाद चखा है। पर मुझे सिर्फ दो चार लोग ही संतुष्ट कर पाये, और उन दो चार लोगों से मेरी यारी आज तक है। हम अब भी मिलते हैं, और खूब मज़ा करते हैं।

अब बात करते हैं दूसरी … मेरी एक बड़ी बहन है मंजू; वह 47 साल की है। दीदी के सिर्फ एक बेटा ही है। कद काठी रंग रूप में हम दोनों बहनें समान हैं। हम दोनों को एक दूसरे के कपड़े, ब्रा पेंटी, जूते चप्पल तक बिल्कुल फिट आते हैं। बचपन से ही हम दोनों बहनों का आपस में बहुत प्यार है। हम दोनों बहनें कम और सहेलियां ज़्यादा हैं। एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाती। बचपन में भी हम हमेशा साथ ही रहती थी, इसी लिए हमें कभी किसी सहेली कोई खास ज़रूरत महसूस नहीं हुई। वैसे तो वो मुझसे बड़ी है, मगर हम दोनों एक दूसरे को नाम लेकर और तू कह कर ही बोलती है।

जब मंजू का पहला अफेयर हुआ तो उसने सबसे पहले मुझे बताया, उसका पहला किस, पहला सेक्स, सब मुझे पता है, और मेरा भी सब कुछ, हम दोनों हमेशा रात को सोने से पहले एक दूसरे से अपने दिल की हर बात कहती थी। सारे दिन की कार्यवाही बताती, यहाँ तक कि हगना मूतना भी बता देती। शर्म तो हमारे बीच कभी आ ही नहीं पाई।

जब से हम पैदा हुई हैं, तब से एक दूसरी को नंगी देखा है। एक साथ नहाना तो आम बात है। अभी भी शादी के बाद तक भी हम एक साथ नहा लेती हैं। मगर इतनी ज़्यादा नजदीकी होने के बावजूद हम दोनों बहनों ने कभी लेसबियन सेक्स नहीं किया। हाँ, एक दूसरे के मम्में और चूत, चूतड़, गांड सब छू कर देखें हैं, मगर कभी आपस में कोई गलत काम नहीं किया।

जब हम बहनों ने पहली बार अपनी झांट रेज़र से साफ की थी तो भी हमने एक दूसरी की झांट साफ की थी। मगर फिर हम लेसबियन से दूर रहीं। उसकी एक वजह यह भी रही थी कि कम उम्र में ही हम दोनों को बॉयफ्रेंड मिल गए थे और फिर धीरे धीरे उनके साथ ही हमने सब कुछ कर लिया, तो जब इस छोटी सी उम्र में ही चूत में लंड पिलने लग जाए, तो फिर किसी और तरफ क्यों देखना।

शादी के पहले तक हम दोनों अपने अपने बॉयफ्रेंड से चुदवाती रही, बॉयफ्रेंड बदलते रहे, मगर हमारी चुदाई बंद नहीं हुई। शादी हो गई हम दोनों की मगर दोनों बहनों की किस्मत भी जैसे एक की कलम से लिखी गई हो। मंजू के पति को कुछ समय बाद विदेश में नौकरी का ऑफर आ गया, वो वहाँ चले गए। मंजू अपने बेटे के साथ यहीं रह गई।
अब अकेली औरत क्या करे?

मैं भी अपने पति की अक्सर बाहर रहने की वजह से परेशान थी, तो एक बार हमने इस बारे में बात की तो नतीजा यह आया सामने कि अगर पति नहीं तो प्रेमी सही। बस फिर हम दोनों बहनों ने सोच लिया कि अपनी प्यास बुझाने के अपने इंतजाम करने होंगे। अब औरत अगर देखने में गोरी चिट्टी, सुंदर चेहरे वाली हो, भरपूर जिस्म की हो तो उसने तो हल्की सी लाइन ही देनी है, मर्द को। मर्द तो पके आम की तरह उसकी झोली में आ गिरते हैं।

यही हम दोनों बहनों ने किया और कुछ ही दिन बाद दोनों ने एक दूसरी को अपनी रिपोर्ट दे दी।

मैंने अपने ही एक पड़ोसी लड़के को पटाया तो सीमा ने अपने मोहल्ले में एक दुकानदार से सेटिंग कर ली। हम बहनों की किस्मत अच्छी थी कि दोनों को मर्द शानदार मिले। इधर वो लड़का अगर मेरी आग को ठंडा कर रहा था तो उधर सीमा भी अपने यार से संतुष्ट थी।

वक्त बीतता रहा। हम दोनों बहनों ने वक्त के साथ साथ अपने यार भी बदले। अभी मेरे साथ हमारे ही पड़ोसी हैं, उनके साथ फुल सेटिंग चल रही है, वैसे तो उसकी उम्र 40 साल के आस पास है, मगर है बड़ा तगड़ा मर्द, और उसका लंड भी शानदार है। मैं बहुत खुश हूँ उससे।

उधर मैंने अपनी बहन मंजू को बताया कि मेरे बेटे का दोस्त कनिष्क मुझपर बड़ी लाइन मार रहा था तो मैंने उसको चुग्गा डाला और मैं अब अपने बेटे के दोस्त के साथ अफेयर में हूँ।

अभी कुछ दिन पहले मंजू मेरे पास आई थी, तो वो मेरे पास करीब 4-5 दिन रह कर गई। उसी दौरान ये बात हुई जो मैं आपको बताने जा रही हूँ।

20 अगस्त की बात है। बच्चों ने प्रोग्राम बनाया कि वो कहीं बाहर घूमने जाना चाहते हैं तो मंजू का बेटा और मेरे दोनों बच्चे तैयार हुये और घूमने निकल गए। घर में हम दोनों बहनें अकेली रह गई।
अब काम कोई था नहीं करने को तो हम दोनों बहनें भी तैयार होकर पहले बाज़ार गई, यूं ही इधर उधर हजरतगंज और आसपास घूमती रही। फिर दोपहर का खाना खाया, रास्ते में मैंने अपने पुराने यार की दुकान में लेजा कर मंजू को अपने पुराने यार से भी मिलवाया- ये मेरी बहन है मंजू … दिल्ली से।
उसने हमारा अभिवादन किया, हमें ठंडा पिलाया और बोला- अरे कभी हमरे गरीबखाने में भी तशरीफ लाइये।

बेशक ये एक औपचारिकता थी मगर उसकी आँखें कह रही थी- मंजू जी, कभी हमसे चुदवा लो।
फिर मैंने फोन करके अपने बेटे के दोस्त कनिष्क को बुला लिया, जिसके साथ आजकल मैं अफेयर में हूँ। उसको साथ लेकर हम तीनों ने प्रकाश की कुल्फी खाई। मैंने देखा कि मंजू की आँखों में जैसे मेरे दोस्त को लेकर वासना सी उभरी हो कि ‘हाय यार … क्या चिकना लौंडा है, इससे तो मैं भी चुदवा लूँ!’
मगर मंजू बोली कुछ नहीं।

खा पी कर घूम फिर कर हम दोनों बहनें अपने घर लौट आई। गर्मी बहुत थी तो घर आते ही बेडरूम में गई और मैंने ए सी ऑन किया, हम दोनों धड़ाम से बेड पर गिर गई। हाय गर्मी हाय गर्मी।
अब घर में कोई भी नहीं था तो मैंने जाकर मेन दरवाजा लॉक कर दिया क्योंकि बच्चों को शाम को आना था, तो जब सब कुछ सेक्योर हो तो इंसान ज़्यादा फ्री महसूस करता है। दरवाजा बंद करके बेडरूम में आते ही मैंने अपनी कमीज़ और सलवार खोल दी और वो सिर्फ ब्रा और पेंटी में ए सी की तरफ अपनी टाँगें करके लेट गई। मेरी चूत पर ठण्डी ठण्डी हवा लगी तो बहुत सुकून मिला.

मुझको को देखकर मंजू ने भी अपनी कमीज़ और सलवार उतार दी। मैं भी ब्रा पहने लेटी थी, पर मंजू ने पेंटी पहनी नहीं थी, तो नीचे से तो वो नंगी ही थी।

बेड पर लेटकर जब मैंने अपनी टाँगें ए सी की तरफ की और जब ठंडी हवा मेरी जिस्म को लगी तो ऐसा आराम आया, जैसे स्वर्ग में हूँ। मैंने मंजू से कहा- अरे तूने चड्डी नहीं पहनी क्या?
वो बोली- क्या ज़रूरत है यार, कौन सा महीना आ रहा है, खुली रखो साली को हवा लगवाओ।
मैं भी हंस दी- तो फिर अच्छे से हवा लगवाती हैं!
कहकर मैंने अपनी ब्रा और पेंटी दोनों उतार दी और मैं बिल्कुल नंगी होकर लेट गई।

मंजू बोली- अरे तू तो साली ज़्यादा ही खुल गई?
हम दोनों हंस दी, मगर मंजू ने भी अगले ही पल अपनी ब्रा खोली और वो भी मेरे पास बिल्कुल नंगी हो कर लेट गई। दोनों बहनें अपने अपने यार की बातें करने लगी कि कैसे कैसे मज़े करती हैं। फिर मंजू ने पूछा- अरे सुन, तू ये बता कि ये लौंडा कनिष्क तूने कैसे सेट किया?
मैंने कहा- अरे यार, चीकू का दोस्त है, अक्सर हमारे घर आता रहता है, तो मैंने एक दिन यूं ही नोटिस किया के साला मुझे बहुत घूरता है, और खास तौर पर बदन को। साले की निगाह हर वक्त मेरे मम्मों पर और मेरी गांड पर रहती थी। एक दिन मेरे दिल में ख्याल आया, क्यों न साले के साथ थोड़ा खेला जाए। तो जब भी वो मेरे घर आता, मैं जानबूझकर उसके सामने बिना दुपट्टे के जाती, ताकि वो कमीज़ में से मेरे मम्में अच्छी तरह से देख सके। जब कभी चीकू आस पास न होता तो मैं जान बूझ कर कोई चीज़ उठाने के बहाने झुक कर उसको अपने गोरे गोरे चिकने मम्मों के दर्शन भी करवा देती।

मंजू बोली- साली बड़ी कमीनी है तू?

मैं भी हंस दी, आगे बताने लगी- और फिर एक दिन साले ने हिम्मत करके बोल दिया ‘आंटी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हैं, मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ, आपसे बहुत प्यार करता हूँ।’ पहले तो मैंने सोचा, यार क्या इस बेटे की उम्र वाले से खेलना, ये तो मज़ाक मज़ाक में सिरियस हो गया। मगर फिर एक दिन जब किचन में चीकू और उसके लिए चाय बना रही थी, तो वो आया और पीछे से मुझे पकड़ लिया, मैंने भी कोई शोर नहीं मचाया, और उसने मुझे पीछे से अपनी बांहों में लेकर मेरी पीठ पर कई सारे चुम्बन लिए, मेरे मम्में दबाये और अपना लंड मेरी गांड पे घिसाया। मैंने पूछा कि ये क्या कर रहे हो। तो उसने झट से अपनी पैन्ट खोल कर अपना लंड निकाल कर मुझे दिखाया और बोला ‘सीमा जी, ये सिर्फ आपके लिए है, जब आपका दिल करे बता देना, आपकी खूब सेवा करूंगा, आपको बहुत प्यार करूंगा।’ और वो ये कह कर वापिस चला गया। मैं सोचने लगी, क्या करूँ, या न करूँ। फिर मैंने सोचा, साले का लंड तो अच्छा है, क्यों न ट्राई करके देखूँ, इसको भी मज़ा मिल जाएगा, और मुझे भी। फिर मैंने उसे एक दिन अपने घर बुलाया, जब बच्चे घर पे नहीं थे, तब मैंने उससे कहा कि आज मैं तुम्हें सेवा का मौका देना चाहती हूँ। बस शर्त इतनी सी है कि सेवा में कोई कमी न हो, मुझे पूरी संतुष्टि मिले। और बस वो तो टूट पड़ा मुझ पर। देखने में पतला दुबला सा है, मगर है ज़बरदस्त, साले ने खूब पेला। इतना मज़ा आया कि मैंने उसे कह दिया ‘आज से तू मेरा पक्का बॉयफ्रेंड है। जब भी दिल करे आ जाना, मैं हमेशा तेरे लिए तैयार हूँ।’

मंजू हंसकर बोली- साली, तू तो एक नंबर की कुतिया है, अपने बेटे के दोस्त को ही खा गई।
मैंने कहा- अरे यार, पूछ मत … कच्चा केला है पर है बड़ा दमदार।

मंजू बोली- अरे सुन … तेरे पास वीट है यार? बहुत जंगल सा उग रखा है, आज तो हम दोनों फ्री हैं। तेरे भी देख बाल निकल आए हैं। क्यों न पुराने दिनों की याद ताज़ा करें, एक दूसरी की झांट साफ करके।
मैंने कहा- है न … अभी लाई।
और मैं बाथरूम से वीट की ट्यूब और कपड़ा ले आई।

बेड पर कपड़ा बिछा कर पहले मंजू ने मेरी झांट पर अच्छे से वीट लगाई। फिर वो लेट गई और मैं उसके वीट लगाने लगी। जब मैं उसकी चूत के आस पास वीट लगा रही थी, तो मैंने देखा सफ़ेद पानी की एक बूंद बह कर उसकी चूत से बाहर आई।
मैंने कहा- क्या हुआ? गर्म हो रही हो?
वो बोली- नहीं तो!
मैंने कहा- झूठ मत बोल, चूत तो तेरी पानी छोड़ रही है.
और मैंने उसकी चूत से बहने वाली सफ़ेद पानी की वो बूंद अपनी उंगली पर उठा कर उसे दिखाई।

वो बोली- यार, जब से तूने अपने बॉयफ्रेंड का किस्सा सुनाया है न, मन बड़ा बेचैन है।
मैंने पूछा- मेरे यार पे दिल आ गया तेरा?
वो बोली- हाँ यार … पूछ न उससे अगर वो आ जाए तो … दोनों बहनें मिलकर मज़े करेंगी।

कहानी जारी रहेगी.
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कहानी का अगला भाग: चिकने बदन-2

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