बहन का लौड़ा -7

(Bahan Ka Lauda-7)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अभी तक आपने पढ़ा..

नीरज के जाने के बाद राधे वापस घर आ गया। उस समय ममता दोपहर का खाना बना रही थी।
ममता- अरे आ गई बीबी जी.. आप कहाँ चली गई थीं?
राधा- कहीं नहीं बस ऐसे ही थोड़ा घूम कर आई हूँ।

ममता की आदत थी ज़्यादा बात करने की मगर राधे ने ज़्यादा बात करना ठीक नहीं समझा और अपने कमरे में जाकर कमरा बन्द करके सारे कपड़े निकाल कर बिस्तर पर लेट गया।

राधे- साला कहा फँस गया.. नाटक के समय लड़की बनना आसान था.. यहाँ तो दिन-रात लड़की की ड्रेस में रहना पड़ेगा.. ऐसे-कैसे काम चलेगा.. कुछ करना पड़ेगा यार.. अब करूँ तो क्या करूँ?

बस राधे इसी सोच में पड़ा रहा कि इस मुसीबत से कैसे पीछा छूटेगा.. तभी ममता ने दस्तक दी।

ममता- बीबी जी सो गईं क्या.. जल्दी बाहर आओ.. हॉस्पिटल से फ़ोन आया था.. साहब की तबियत खराब हो गई है उनको हॉस्पिटल लेकर गए हैं.. जल्दी बाहर आओ।
राधा- बस 5 मिनट में आई.. रूको..
राधे ने फटाफ़ट अपना रूप बदला और बाहर आ गया।

अब आगे..

जब राधे बाहर आया.. तब तक ममता ने स्कूल में फ़ोन करके मीरा को भी बता दिया था।
राधा- क्या हुआ पापा को.. किसका फ़ोन था बताओ?

ममता- बीबी जी आप जानती नहीं.. साहब को दिल की बीमारी है.. कभी-कभी उनको सीने में तकलीफ़ हो जाती है तो हॉस्पिटल में भरती करना पड़ता है।
राधा ने ज़्यादा बात करना ठीक नहीं समझा और उसको लेकर हॉस्पिटल के लिए निकल गई।
उधर मीरा भी स्कूल से वहाँ पहुँच गई।

सॉरी दोस्तो, कहानी के बीच में आने के लिए.. आप सोच रहे होंगे.. यह कैसी कहानी है जिसमें सेक्स ही नहीं.. तो दोस्तों कहानी बन रही है.. सेक्स भी आएगा.. थोड़ा सब्र रखो..

मीरा- डॉक्टर क्या हुआ पापा को..? वो ठीक तो है ना? प्लीज़ बताओ मुझे?
डॉक्टर- घबराने की कोई बात नहीं है.. मैंने कहा था ना ज़्यादा टेंशन और कभी-कभी ज़्यादा ख़ुशी भी इंसान के दिल पर असर करती है।
मीरा- अब तो दीदी भी आ गईं.. अब हम दोनों मिलकर इनको एकदम ठीक कर देंगे।

डॉक्टर- हाँ बेटी.. अब इनको घर ले जाओ.. ये ठीक हैं.. मगर ध्यान रखना बड़े सालों के बाद इनके चेहरे पर मुस्कुराहट आई है.. अगर अब कोई बड़ी टेंशन इनके सामने आई तो इनके लिए खतरा भी हो सकता है।
राधा- आप चिंता मत करो.. डॉक्टर हम पापा को हमेशा खुश रखेंगे।

एक घंटा वहीं रहने के बाद सब घर आ गए। दिलीप जी को उनके कमरे में लेटाकर मीरा और राधा उनके पास ही बैठ गई।
ममता ने खाने के लिए पूछा.. मगर दोनों का मन नहीं था.. वो बस वहीं बैठी रहीं। फिर ममता अपने काम में लग गई।

देर शाम तक वो पापा के साथ रहीं.. ममता ने ज़ोर देकर दोनों को खाना खिलाया.. थोड़ा हल्का सा दिलीप जी को भी दिया।

दिलीप जी- बेटी मैं अब ठीक हूँ.. जाओ तुम दोनों सो जाओ.. मुझे कुछ नहीं होगा.. अब मेरी राधा बिटिया आ गई है.. देखना बहुत जल्दी मैं ठीक हो जाऊँगा।
वो दोनों अपने कमरे में चली गईं।

मीरा- दीदी मैं अकेले ही पापा को सम्भालती आई हूँ.. अब आप आ गई हो.. तो हम दोनों मिलकर पापा को खुश रखेंगे।
मीरा की आँखों में आँसू आ गए.. वो राधे के सीने से चिपक गई।

राधे के हाथ मीरा की पीठ पर थे.. वो उसको तसल्ली दे रहा था और उसका लौड़ा मीरा के जिस्म की गर्मी से अकड़ने लगा था।
राधे- अरे रो मत.. कुछ नहीं होगा.. तू कपड़े बदल ले पहले.. बाद में आराम से बैठ कर बातें करेंगे।
मीरा- नहीं बदलने मुझे.. मैं बस आपसे ऐसे ही चिपक कर सोऊँगी.. चलो बिस्तर पर चलते हैं।

राधे- हाँ मीरा.. जैसा तुमको अच्छा लगे.. आ जाओ बिस्तर पर ही चलते हैं। वहाँ आज मैं तुमसे ढेर सारी बातें करूँगी.. मगर यह स्कूल ड्रेस तो निकाल दे.. सुबह से पहनी हुई है।
मीरा- एक शर्त पर कपड़े बदलूँगी..

राधा- कैसी शर्त है बोलो?
मीरा- आप मेरी बड़ी दीदी हैं.. इतने साल मुझे आपका प्यार नहीं मिला.. आज आप मुझे कपड़े बदली करवाओ..
राधा- अरे तू बच्ची है क्या.. जो मैं कपड़े पहनाऊँ?
मीरा- मैं कुछ नहीं जानती.. बस आपको आज मेरे कपड़े बदलने ही होंगे.. प्लीज़ दीदी प्लीज़..

राधे का लौड़ा तो पहले ही बगावत कर रहा था.. अब उसकी बातों से वो फुंफकारने लगा था- ठीक है.. अब तू ऐसे मानेगी तो है नहीं.. जा ले आ अपने कपड़े..

मीरा अलमारी से कपड़े निकालने लगी और राधे धीरे-धीरे बड़बड़ाने लगा।

राधे- साला मैं जितना इससे बच रहा हूँ.. ये मुझे उतना ज़्यादा बहका रही है.. आज साली का महूरत कर ही देता हूँ.. जो होगा देखा जाएगा।

मीरा एक पतली सी पिंक नाईटी हाथ में लेकर आई- लो दीदी आज ये पहनूँगी मैं.. अब चलो निकालो मेरे कपड़े..

राधे कुछ नहीं बोला और मीरा की शर्ट के बटन खोलने लगा।

एक-एक बटन के साथ राधे की धड़कनें बढ़ती जा रही थीं.. जब सारे बटन खोल दिए तो नीली ब्रा में जकड़े हुए मीरा के सख्त चूचे.. राधे की आँखों के सामने आ गए।

राधे- मीरा तेरे चूचे तो बड़े कड़क हैं आकार भी बहुत प्यारा है इनका..
मीरा- ओह थैंक्स दीदी कल तो आप मुझे बेशर्म बोल रही थीं.. आज खुद ऐसी बातें कर रही हो।
राधे- अरे नहीं.. ऐसी बात नहीं है.. तुम बहुत अच्छी हो.. मैंने तो ऐसे ही कहा था।

मीरा- अरे दीदी इसमें ‘सॉरी’ की क्या बात है आजकल 3जी का जमाना है.. ये सब आम बात है। मैंने बताया था ना.. स्कूल में कई बार हम लड़कियां एक-दूसरे के सामने नंगी हो जाती हैं।

राधे- हाँ बताया तो था.. चलो अब स्कर्ट भी निकाल देती हूँ।

राधे ने मीरा की स्कर्ट भी निकाल दी.. नीली पैन्टी में उसकी फूली हुई चूत देख कर राधे का मन हुआ कि उसको छू ले.. मगर उसने अपने आप पर काबू रखा।

मीरा- दीदी अब ब्रा और पैन्टी भी निकाल दो.. अपनी छोटी बहन का जिस्म पूरा देखो.. मेरी सहेलियाँ बहुत तारीफ करती हैं।
राधे- अच्छा ऐसी बात है.. चलो कल तो मैंने नहीं देखा था.. आज देख कर बताऊँगी कि तुम्हारा जिस्म कैसा है?

राधे ने ब्रा का हुक खोल कर मीरा के संतरे आज़ाद कर दिए और एक ही झटके में उसकी पैन्टी भी निकाल दी।

जैसा मैंने पहले बताया था मीरा की चूत डबल रोटी जैसी फूली हुई थी, राधे की जीभ लपलपा गई।

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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