बहन का लौड़ा -3

(Bahan Ka Lauda-3)

This story is part of a series:

अभी तक आपने पढ़ा..

नीतू- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई.. मुझे छूने की.. कुत्ते निकल जाओ यहाँ से.. नहीं अभी पुलिस को बुलाकर अन्दर करवा दूँगी..

उसके गुस्से से नीरज डर गया।
नीरज- स..स..सॉरी.. मुझे माफ़ कर दो.. मैं समझा कि अब आप शांत हो गई.. तो मैं भी थ..थ..थोड़ा मज़ा ले लूँ..

नीतू ने उसके गालों पर एक थप्पड़ जड़ दिया और गुस्से से बोली- साले मुझे छूने की तेरी औकात नहीं है तूने ऐसा सोचा भी कैसे? चल अब भाग जा..

नीरज ने अपने पैसे माँगे तो नीतू साफ मुकर गई, उसने कहा- तूने जो हरकत की है.. वो उसके बदले पूरे हो गए.. अब जा, नहीं तो शोर मचा कर सब को बुला लूँगी।

बेचारा मरता क्या ना करता.. मन में गालियां निकलता हुआ.. वहाँ से निकल गया।

अब आगे..

वहाँ से निकल कर नीरज जब जा रहा था तो रास्ते में एक पुरानी सी दुकान की साफ-सफ़ाई हो रही थी.. उसमें से अख़बार का एक बण्डल भी दुकान वाले ने बाहर फेंका.. जो काफ़ी पुराना था.. नीरज ने सोचा खाना खाने के समय अख़बार नीचे रखने के काम आएँगे.. सो उसने वो बण्डल उठा लिया और वहाँ से चला गया।

शाम तक ऐसा कोई खास वाकिया नहीं हुआ.. बस जैसे रोज होता है वही हुआ।

रात को नीरज कमरे में अकेला बैठा बोर हो रहा था.. तो उसने वो पुराने अख़बारों में एक अखबार उठा कर देखना शुरू कर दिया और एक जगह आकर उसकी निगाह रुक गई या यूं कहो.. आँखें फटी की फटी रह गईं।

नीरज ने उस खबर को गौर से पढ़ा और पास की दराज से पेन कागज निकाला और अख़बार से कुछ नोट किया… फिर उस अख़बार को फाड़ कर अपनी जेब में डाल लिया और बाहर निकल गया।

दोस्तो, इसको जाने दो.. हम लोग राधे के पास चलते हैं.. शाम के समय अक्सर वो बाहर पीता है.. और कहीं ना कहीं मुँह काला करता है।

आपको भी कब से ऐसे ही किसी वाकये का इन्तजार होगा.. तो खुद ही देख लीजिएगा।

राधे एक कमरे में बैठा हुआ था.. उसके हाथ में बियर की बोतल थी और सामने एक 25 साल की लड़की.. जो दिखने में ठीक-ठाक सी थी.. एक मैक्सी पहने हुए उसके पास बैठी थी.. उसे देखते ही पता चल रहा था कि यह एक वेश्या है.. इसका नाम शीला है।

राधे- जानेमन… बस 2 घूँट और बाकी है इसको पी लूँ उसके बाद तेरी चुदाई करूँगा।
शीला- अरे मेरे राजा.. मेरी चूत पर डाल कर चाट ले.. ये बाकी की बीयर.. तुझे मज़ा आ जाएगा..

राधे- चल हट साली.. तेरी चूत पर मुँह कौन लगाएगा.. साली दिन में 10 लौड़े खाती है.. हाँ कोई कच्ची कली की चूत मिल जाए तो 2 घूँट क्या पूरी बोतल चूत पर डाल कर पी जाऊँगा..

शीला- हा हा हा.. तुझे कहाँ से मिलेगी ऐसी चूत.. सपने देख मेरे राजा.. अब आ भी जाओ.. धंधे का टैम है.. खोटी मत कर.. जल्दी चोद और निकल यहाँ से.. दूसरा भी आता होगा..

राधे- अबे साली रंडी.. ऐसे ही चुदवाएगी क्या.. कपड़े तो निकाल.. मुझे भी निकालने दे..

शीला ने एक झटके में मैक्सी निकाल फेंकी.. नीचे उसने कुछ नहीं पहना था।
शीला- ले राजा.. रंडी तो नंगी ही होती है.. अब आ जा जल्दी से..

शीला का जिस्म देखने में ठीक-ठाक सा था 38 इन्च के उसके भरे हुए मम्मों को और 36 की बाहर को निकली हुई गाण्ड.. चूत की चमड़ी लटकी हुई थी.. जिसे देख कर पता चल रहा था कि इसको न जाने कितने लौड़ों ने मसला होगा।

राधे ने पैन्ट निकाल दी.. उसका लौड़ा आधा खड़ा हुआ था.. जिसे देख कर शीला ने अपने हाथ से सहलाया।

शीला- अभी खड़ा भी करना होगा साले.. तेरा लौड़ा है तो मज़ेदार.. मगर तू बड़ा बेदर्द है तड़पाता बहुत है मुझे..

राधे- अब ज़्यादा बातें ना बना.. मुँह में लेकर चूस.. तब खड़ा होगा.. यह तू जानती है ना.. यह इसकी आदत है.. बिना मुँह में जाए ये तेरे भोसड़े को चोदने के लिए राज़ी नहीं होता..

शीला ने लौड़े को चूसना शुरू कर दिया.. दो मिनट में वो तनकर फुंफकारने लगा।

अब राधे ने शीला को घोड़ी बनाया और लौड़ा चूत में पेल दिया.. घपा-घप वो शीला को चोदने लगा। वो भी गाण्ड हिला-हिला कर चुदने लगी.. वो अजीब-अजीब सी आवाजें निकालने लगी और निकालेगी भी ना.. आख़िर यही तो उसका पैसा है.. वो तो ऐसे ही लोगों को खुश करती है।

करीब 25 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद दोनों शांत हो गए.. अब वो पत्नी तो थी नहीं.. जो उसकी बाँहों में पड़ी रहती.. पानी निकला नहीं कि उठ कर खड़ी हो गई और वापस अपनी मैक्सी पहन ली।

राधे भी वहाँ क्या करता.. बेचारा वहाँ से अपने घर की ओर निकल गया।

चलो अब आपको मीरा के पास ले चलती हूँ.. देखते हैं वो क्या कर रही है अभी..

मीरा अपने कमरे में बैठी मोबाइल पर गेम खेल रही थी, तभी उसके पापा हाँफते हुए कमरे में आए.. उन्हें ऐसे देख कर मीरा डर गई।

मीरा- पापा क्या हुआ..??? आप ठीक तो हैं ना.. ऐसे हाँफ क्यों रहे हो आप…??

पापा- उम्म में ठीक हूँ.. अभी आह्ह.. एक फ़फ्फ़..फ़ोन आया था.. कोई तुम्हारी बहन के बारे में बात कर रहा था आह अह..

मीरा- क्या पापा.. आप ये क्या बोल रहे हो इतने सालों बाद दीदी के बारे में पता चला.. कहाँ है वो? किसने फ़ोन किया था पापा बताओ?

अपनी बहन की खबर सुनकर मीरा की आँखों में आँसू आ गए थे.. मगर ये ख़ुशी के आँसू थे.. अब क्या हुआ.. क्या नहीं.. ये तो उसके पापा ही उसको बताएँगे.. तभी पता चलेगा ना.. मगर मैं आपको कुछ बता देती हूँ कि आख़िर यह बहन का क्या चक्कर है।

दरअसल बहुत साल पहले एक मेले में मीरा की बड़ी बहन खो गई थी.. तब से लेकर आज तक दिलीप जी गम में थे.. इसी सदमे से उसकी पत्नी बीमार रहने लगी थी और एक दिन उनसे बहुत दूर चली गई थीं।
दिलीप जी ने बहुत कोशिश की.. अपनी बेटी को खोजने की.. मगर वो नाकाम रहे.. पैसे को पानी की तरह बहा दिया.. मगर कोई फायदा नहीं हुआ.. आज बरसों बाद उनकी उम्मीद दोबारा जागी थी। अब ये फ़ोन किसका आया होगा.. चलो आप खुद देख लो।

पापा- अभी किसी का फ़ोन आया था.. वो बोल रहा था कि आपकी बेटी खो गई थी ना.. उसके बारे में कुछ बात करनी है.. मैंने कहा हाँ बताओ प्लीज़ मेरी बेटी कहाँ है? तो बोला कि कल सुबह पूरी बात बताएगा और उसने फ़ोन काट दिया।

मीरा- बस इतना ही बताया.. ओह पापा.. वो कौन था.. कहाँ से फ़ोन किया कुछ नहीं बताया? अब सुबह ही पता चलेगा आज नींद भी नहीं आएगी.. ओह कब सुबह होगी दीदी के बारे में पता लगेगा।

दोनों बाप-बेटी वहीं बैठे बातें करने लगे।

उधर राधे जब कमरे में पहुँचा तो नीरज उसका इन्तजार कर रहा था।

नीरज- अरे मेरे दोस्त आ गया तू.. आजा आजा.. आज तुझे ऐसी खबर सुनाऊँगा कि तू अपने सारे गम भूल जाएगा..

राधे- अबे ऐसी क्या खबर लाया है साले.. कोई लॉटरी लग गई क्या तेरी?

नीरज- अरे ऐसा ही कुछ समझ.. मेरी नहीं हमारी बोल भाई.. अब सारी जिन्दगी मज़े से गुजारने का समय आ गया है.. देख ये अख़बार देख..

राधे अख़बार को गौर से देखने लगा जो काफ़ी पुराना था.. उसमें एक छोटी लड़की की तस्वीर थी और गुम हो जाने की खबर थी.. साथ ही ढूँढने वाले को 5 लाख का इनाम देंगे.. ऐसा कुछ था।

राधे ने सब देखा और गुस्से से नीरज की ओर देखा..

राधे- साले 1999 की खबर है.. जिसमें साफ लिखा है कि यह 6 साल की लड़की है। अब इस लड़की को कहाँ ढूँढ़ता फ़िरेगा तू.. अब तक तो यह जवान हो गई होगी।

नीरज- सही कहा तूने.. अब तक तो ये जवान हो गई होगी.. मगर उसके घर वाले अब भी उसको ढूंढ रहे हैं।

राधे-तुझे कैसे पता बे ये सब?

नीरज- तू चुप रह मेरी पूरी बात सुन पहले.. उसके बाद बोलना ओके..

राधे- चल बता क्या बात है?

नीरज- सुन.. आज ये पुराना पेपर मुझे मिला.. इसमें दिया नम्बर मैंने देखा और एसटीडी से कॉल किया.. मैं बस ये देखना चाहता था.. वो लड़की मिली या नहीं.. जैसे ही मैंने फ़ोन किया.. एक आदमी ने उठाया और मैंने बस इतना कहा कि आपकी बेटी खो गई थी ना.. उसके बारे में बात करनी है.. वो रोने लगा.. कहाँ है मेरी बेटी.. प्लीज़ बताओ.. बरसों बाद आज उसकी कोई खबर आई है.. वो उतावला हो गया.. मैंने कहा कि सुबह बताऊँगा.. बस फ़ोन काट दिया।

राधे- तो लड़की कहाँ है..

नीरज- तूने शायद पूरी खबर को गौर से नहीं देखा.. उस लड़की के हाथ पर निशान देख.. बिल्कुल वैसा ही है.. जैसा तेरे हाथ पर है।

राधे- त..त..तू कहना क्या चाहता है साले.. मुझे लड़की बना कर ले जाएगा क्या साले?

नीरज- हाँ यार.. अब इतने साल बाद वो थोड़े ही पहचान पाएँगे अपनी बेटी को.. तगड़ा माल मिलेगा.. साले ऐश करेंगे हम दोनों।

दोस्तों उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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