बहन का लौड़ा -20

(Bahan Ka Lauda -20)

अभी तक आपने पढ़ा..

रोमा को ड्रॉप करने के बाद नीरज बहुत खुश था। करीब 15 मिनट बाद ही उसने रोमा को कॉल कर दिया।

नीरज- हैलो..!
रोमा- हाय.. अरे अभी तो मुझे छोड़ कर गए हो.. क्या हुआ जनाब.. क्या भूल गए?
नीरज- भूला कुछ नहीं हूँ.. तुम्हें थैंक्स बोलना चाहता हूँ और एक जरूरी बात भी करनी है।
रोमा- अरे किस बात का थैंक्स.. मैंने तो बस आपको सच बताया है और जरूरी बात क्या है?

नीरज- क्या शाम को मुझसे मिल सकती हो.. प्लीज़ गलत मत समझना.. तुमसे कोई जरूरी बात करनी है।
रोमा- क्या बात है.. फ़ोन पर बता दो ना.. शाम को मेरा आना जरा मुश्किल है।
नीरज- कोई बात नहीं.. फिर जब तुम मिलोगी.. तब बता दूँगा।
रोमा के मन में हलचल पैदा हो गई आख़िर क्या बात होगी।

रोमा- अच्छा ठीक है.. ऐसा करती हूँ.. कल आप 10 बजे स्कूल से थोड़ा दूर जो पीसीओ है ना.. वहाँ आ जाना.. मैं वहीँ मिलने आ जाऊँगी।
नीरज- लेकिन उस टाइम तो तुम स्कूल में रहोगी ना?
रोमा- नहीं.. कल मैं स्कूल नहीं जाऊँगी.. मेरे मौसाजी के यहाँ उनकी बेटी की सगाई है.. हम सब वहाँ जाएँगे.. तो रास्ते में वहीं आपसे मिल लूँगी।
नीरज- ओके.. तो मैं पक्का वहाँ आ जाऊँगा।

अब आगे..

सुबह नीरज समय पर वहाँ पहुँच गया और रोमा का इन्तजार करने लगा। थोड़ी ही देर में सामने से उसे रोमा आती हुई दिखाई दी।
रोमा ने हरे रंग का शॉर्ट स्कर्ट और सफ़ेद टॉप पहना हुआ था। उसकी चाल के साथ उसके मम्मे भी थिरक कर कत्थक कर रहे थे और उसकी गाण्ड ऐसे मटक रही थी.. जैसे कोई तराजू हो.. कभी ये पलड़ा ऊपर.. कभी वो पलड़ा ऊपर..

रोमा मुस्कुराती हुई नीरज के पास आ गई।
रोमा- हाय.. कैसे हो आप?
नीरज- बिल्कुल भी अच्छा नहीं हूँ।
रोमा- क्यों क्या हुआ.. प्लीज़ बताओ ना..

नीरज- यहीं सुनोगी क्या.. रास्ते में खड़ी होकर?
रोमा- ओके कहीं और चलते हैं चलो..

दोनों गाड़ी में बैठ गए। नीरज बस अपने झूठे प्यार को लेकर इधर-उधर की बातें करने लगा और रोमा चुपचाप उसकी बातों को गौर से सुन रही थी, उसका दिल भर आया था।

गाड़ी बस चली जा रही थी.. कोई 20 मिनट बाद गाड़ी एक बिल्डिंग के पास जाकर रुकी..
रोमा- ये हम कहाँ आ गए..

नीरज- ये मेरे चाचा की बिल्डिंग है.. ऊपर का फ्लैट हमारा है.. चलो वहाँ चलकर आराम से बातें करेंगे।

दोस्तो, दरअसल नीरज ने ये सब झूठ कहा था.. ये तो आप जानते हो.. मगर आपको बता दूँ कि नीरज ने किसी तरह एक दलाल को पैसे देकर ये फ्लैट कुछ दिनों के लिए ले लिया था.. ताकि रोमा को आराम से यहाँ लाकर उसकी चूत का मज़ा ले सके।

रोमा नीरज के पीछे-पीछे चलने लगी.. जब दोनों फ्लैट में गए.. तो रोमा थोड़ी घबरा गई।
उसने सोचा अन्दर कोई होगा.. मगर वहाँ उन दोनों के सिवा कोई नहीं था।
रोमा- नीरज जी आपके सिवा यहाँ कोई नहीं रहता क्या..
नीरज- मैंने बताया था ना.. हम दिल्ली में रहते हैं यहाँ बस काम के सिलसिले में आना होता है।

रोमा- अच्छा वो बात क्या थी.. जो आप बताना चाहते थे?
नीरज- अरे बता दूँगा.. इतनी जल्दी भी क्या है.. आई हो तो घर तो देखो.. क्या लोगी तुम.. ठंडा या गर्म?

रोमा- अरे नहीं.. मुझे कुछ नहीं चाहिए वैसे भी बहुत लेट हो गई हूँ.. अब मुझे चलना चाहिए।

नीरज- इतनी जल्दी क्या है.. लगता है तुम घबरा रही हो.. रोमा डरो मत.. मैं कोई ऐसा-वैसा इंसान नहीं हूँ.. अगर मुझ पर भरोसा ही नहीं है.. तो वो बात बताने का कोई फायदा नहीं.. चलो तुम्हें घर छोड़ आता हूँ।

रोमा- अरे नहीं नहीं.. ऐसी कोई बात नहीं है.. आपसे मैं क्यों डरूँगी.. प्लीज़ सॉरी.. कहो ना ऐसी क्या बात है.. जो आप बताना चाहते हो।

नीरज के चेहरे पर ज़हरीली मुस्कान आ गई.. क्योंकि चिड़िया दाना चुगने लगी थी और अब जल्दी ही जाल में फँस जाएगी।

नीरज ने मौके का फायदा उठाया और फ़ौरन जाल फेंक दिया यानि कि वो अपने घुटनों पर बैठ गया और रोमा का हाथ अपने हाथ में लेकर उसको ‘आई लव यू..’ बोल दिया।

रोमा मन ही मन नीरज को पसंद करने लगी थी और आज उसके सामने नीरज ने अपने प्यार का इज़हार कर दिया.. वो बेचारी ख़ुशी से फूली ना समाई.. उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया और उसने नीरज का हाथ पकड़ कर उसको उठा लिया और ख़ुशी से उसके सीने से लिपट गई।

रोमा- आई लव यू टू नीरज.. मुझे आपसे ज़्यादा प्यार करने वाला इस दुनिया में और कहाँ मिलेगा..
रोमा बस ख़ुशी से नीरज से लिपटी हुई थी.. उसके नुकीले मम्मे नीरज के सीने में धँस गए थे.. जिसके कारण नीरज का लौड़ा ‘धिंक चिका.. धिंक चिका..’ करने लगा था।

नीरज के हाथ रोमा की पीठ पर घूमने लगे थे।

रोमा के बदन में एक अजीब सी बेचैनी होने लगी.. तो वो नीरज से अलग हो गई। अब उसको शर्म आने लगी थी।
नीरज- अरे क्या हुआ रोमा.. अच्छा नहीं लगा क्या?
रोमा- ऐसी बात नहीं है.. मुझे जाना होगा वरना घर पर गड़बड़ हो जाएगी।
नीरज- ठीक है.. चलो मगर दोबारा कब मिलोगी और आज हमारा प्यार का दिन है.. तो कुछ ‘मीठा’ होना चाहिए ना..
रोमा- मैं कुछ समझी नहीं.. क्या ‘मीठा’ होना चाहिए?

नीरज ने रोमा के मुलायम होंठों पर अपनी उंगली घुमाई और बस उसकी आँखों में देखने लगा।

रोमा समझ गई.. नीरज क्या चाहता है और वो थोड़ी घबरा गई.. क्योंकि इतनी जल्दी कोई भी लड़की चुम्बन के लिए तैयार नहीं होती.. कुछ घबरा जाती है.. तो कुछ नाटक करती ही है।

अब रोमा क्या कर रही थी ये भी पता चल जाएगा।

रोमा- न..न..नहीं नहीं.. इतनी जल्दी कुछ नहीं.. आप भी ना बस..
नीरज- अरे इसमें क्या है.. वो कहते हैं ना.. नए रिश्ते की शुरूआत कुछ मीठे से होनी चाहिए.. तो मैंने कहा बस.. कि कुछ मीठा हो जाए.. हम दोनों एक ही ‘डेरी-मिल्क’ आधी-आधी खाएँगे तो प्यार और मजबूत होगा।

रोमा- आप ‘डेरी-मिल्क’ की बात कर रहे हो.. मैं समझी..
इतना बोलकर रोमा चुप हो गई।

नीरज- हाँ और नहीं तो क्या.. तुम क्या समझी?
रोमा- कुछ नहीं.. अब चलो देर हो रही है।
नीरज- अरे बताओ ना यार.. क्या समझी तुम?
रोमा- कुछ नहीं.. अब चलो भी..

नीरज- हा हा हा.. जानता हूँ.. तुम शरमा रही हो.. अरे मेरी भोली रोमा.. तुम जो समझी.. वो तुम्हारी मर्ज़ी के बिना नहीं होगा.. वादा करता हूँ तुम अपने नीरज को जानती नहीं हो.. मैं मर जाऊँगा.. मगर तुम्हारे साथ कुछ ज़बरदस्ती नहीं करूँगा।

रोमा ने नीरज के होंठों पर हाथ रख दिया और गुस्से से देखते हुए बोली- प्लीज़ दोबारा मरने की बात मत करना।
नीरज- अच्छा नहीं करूँगा.. लेकिन तुम भी मेरा साथ किसी हाल में नहीं छोड़ोगी.. वादा करो..

रोमा ने वादा किया और दोनों वहाँ से निकल गए। नीरज ने अपनी पहली चाल में रोमा को फँसा लिया था। उससे दोबारा मिलने का वादा लेकर नीरज उसे घर के पास छोड़ आया।

चलो यहाँ तो कुछ नहीं हुआ.. अपने राधे के पास वापस चलते हैं।
जब राधे बाहर आया.. तो वो सिर्फ़ अंडरवियर में था.. मीरा सोई हुई थी.. उसकी मदमस्त उठी हुई गाण्ड देख कर राधे का लौड़ा तन गया।
राधे चुपचाप बिस्तर के पास गया अपना अंडरवियर निकाला और लौड़े को सहलाते हुए मुस्कुराने लगा..

मीरा अपनी मस्ती में सोई हुई थी और पैरों को हिला रही थी.. तभी राधे ने मीरा के चूतड़ों को पकड़ लिया और ज़ोर से दबा दिया।
मीरा- ऊईइ.. क्या करते हो.. दु:ख़्ता है.. ना..!
बोलने के साथ ही मीरा सीधी लेट गई और राधे को नंगा देख कर चौंक गई।
राधे- मेरी जान अभी कहा दु:ख़ता है.. जब यह तेरी गाण्ड में जाएगा तब बराबर दु:खेगा।

मीरा- तुम पागल हो गए हो क्या… कमरे का दरवाजा खुला है.. कोई आ गया तो?
राधे- अरे घर में कोई नहीं है कौन आएगा?
मीरा- अरे बाहर से कोई आ सकता है.. कम से कम मेन डोर तो बन्द कर आओ।
राधे- अब कौन आएगा इस समय पर.. तुम भी ना बना बनाया मूड खराब कर रही हो।

मीरा- तुमसे कौन जीतेगा.. आ जाओ मेरे आशिक.. जो करना है.. कर लो.. जब तक पापा नहीं आ जाते.. खुलकर मज़ा कर लो.. बाद में तो छुप-छुप कर ही करना होगा।
राधे- मेरी जान.. तेरी गाण्ड बड़ी मस्त है आज इसका भी उद्घाटन करवा लो..
मीरा- नहीं अभी नहीं.. मेरी चूत का दर्द ख़त्म हो जाने दो.. उसके बाद गाण्ड की बात करना.. लाओ पहले मुझे लंड चूसने दो.. कितना मस्त लग रहा है.. खड़ा हुआ..

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राधे बिस्तर के पास जाकर खड़ा हो गया और मीरा पेट के बाल लेटी हुई लौड़े पर जीभ घुमाने लगी।
राधे ने मस्ती में आँखें बन्द कर लीं और मीरा पूरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.. तभी घर का मेन डोर खुला और ममता अन्दर आ गई।

वो सीधी इनके कमरे की तरफ़ आई और जब उसकी नज़र अन्दर पड़ी.. तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं.. उसके पैरों के नीचे से जैसे जमीन निकल गई हो।
ये दोनों तो अपनी मस्ती में खोए हुए थे और ममता ने अपने मुँह पर हाथ रख लिया.. उसकी साँसें तेज़ चलने लगीं दरअसल वो इस तरह खड़ी थी कि राधे का लौड़ा उसे साफ-साफ मीरा के मुँह में अन्दर-बाहर होता हुआ दिखाई दे रहा था।

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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