बहन का लौड़ा -13

(Bahan Ka Lauda- 13)

This story is part of a series:

अभी तक आपने पढ़ा..

राधे- मैं मीरा के साथ ही खा लूँगी.. तू अपना काम कर.. पापा ने खा लिया क्या?
ममता- हाँ उन्होंने खा लिया है.. अब मैं उनको दवा देने जा रही हूँ..
राधे- अच्छा जा.. मुझे भी थोड़ा आराम करने दे.. अब जा तू..

ममता वहाँ से दिलीप जी के पास गई।
ममता- लो साहब जी दवा ले लो..
दिलीप जी- राधा ने खाना खाया क्या?

ममता- नहीं साहब जी.. वो मीरा के साथ खाएँगी.. आपसे एक बात करनी है.. ये राधा बीबी जी कुछ अजीब सी हैं.. किसी से बात नहीं करती हैं.. बस कमरे में ही रहती हैं.. ऐसा क्यों?
दिलीप- अरे ऐसा कुछ नहीं है.. इतने साल दूसरी जगह रही है.. अब अचानक यहाँ आ गई है.. दिल जमते-जमते ही जमेगा..।
ममता दवा देकर अपने काम में लग गई..

अब आगे..

दोपहर को मीरा स्कूल से घर आ गई.. वो अपने पापा के पास गई.. उनसे बात की.. फिर राधा के साथ लंच किया और अपने कमरे में चली गई।

मीरा- दीदी आप बाहर जाओ.. मुझे कपड़े बदलने हैं।
राधे- ओये-होये मेरी सोनी.. क्या बात है.. कल तक तो मेरे हाथों से कपड़े निकलवा रही थी.. आज कैसी शर्म?

मीरा- बस बस.. ज़्यादा स्मार्ट मत बनो.. तब तक मैं तुम्हें अपनी दीदी समझ रही थी.. अब मुझे पता है कि तुम एक लड़के हो.. अब जाओ बाहर..
राधे- मीरा हमारे बीच सेक्स के अलावा सब कुछ हो गया है.. अब बाहर जाने से फायदा क्या.. मैं तुम्हारा ऐसा क्या नया देख लूँगा?

मीरा- धीरे बोलो और प्लीज़ दिन में तो लड़की की आवाज़ में ही बोलो.. पापा ने सुन लिया तो गजब हो जाएगा..
राधे- ओके.. समझ गया.. अब तुम भी समझ लो.. चलो कपड़े बदल लो और आ जाओ बिस्तर पर.. कुछ बात करनी है..

मीरा- ओके.. तुम आँख बन्द कर लो प्लीज़.. तुम्हें मेरी कसम है.. अब कोई बहस नहीं करना..

राधे ने उसकी बात मान ली और आँखें बन्द करके बैठ गया। मीरा ने रेड टॉप और ब्लॅक हाफ पैन्ट पहनी.. वो उस ड्रेस में बड़ी सेक्सी लग रही थी।
मीरा उसके पास आकर बैठ गई और राधे के बालों में हाथ घुमाने लगी..

राधे ने आँखें खोलीं और मीरा को देखता रह गया.. उसकी खूबसूरती के आगे वो अपना संतुलन खो बैठा। उसने मीरा को बाँहों में भर लिया और उसके होंठों को चूसने लगा।

मीरा उसको मारती रही.. मगर वो उसके होंठों को चूसता रहा और उसकी पीठ पर हाथ घुमाता रहा। कोई 5 मिनट बाद दोनों अलग हुए।
मीरा- तुम बहुत गंदे हो.. बस इसी लिए मैं तुम्हारे सामने कपड़े नहीं पहन रही थी।
राधे- अरे यार एक किस ही तो किया है.. अब इतना भी नहीं करूँ क्या.. तुम मेरी होने वाली बीवी हो..

राधे की बात सुनकर मीरा के होंठों पर मुस्कान आ गई।
मीरा- किस कर सकते हो.. मगर मेरी इजाज़त लेकर ओके.. और अपने इस बे लगाम घोड़े को काबू में रखो.. समझे वक़्त आने पर मैं इसको शांत कर दूँगी.. समझे मेरे आशिक..

मीरा ने लौड़े को दबाते हुए ये बात कही थी। मीरा की इस हरकत से राधे की आँखें मज़े में बन्द हो गईं।
राधे- यार तुम्हारा क्या प्लान है.. कब तुम इसे ठंडा करोगी.. तुम कुछ बताती भी तो नहीं हो..
मीरा- बस कुछ दिन रुक जाओ.. सब बता दूँगी..

दोनों बस ऐसे ही सामान्य बातें करते रहे और उनकी आँख लग गई।

शाम को दोनों उठे.. पापा से मिले और बाहर घूमने निकल गए..

राधे ने कुछ लड़कों के कपड़े और नाइट के लिए पजामे भी ले लिए.. मीरा ने भी कुछ ब्रा-पैन्टी और टॉप-स्कर्ट्स ले लिए और कुछ कपड़े उसने राधे की नजरों से बचा कर लिए उसे बिल देने के टाइम पर किसी बहाने बाहर भेज दिया।

ममता तो रोज की तरह अपना काम करके चली गई.. ये जब आई तो दिलीप जी बाहर बैठे इनका इन्तजार कर रहे थे।
दिलीप जी- अरे कहाँ रह गई थीं तुम दोनों.. चलो खाना खा लो और सो जाओ.. मैं भी सो जाता हूँ.. मुझे भी थकान सी हो रही है।

मीरा- ओह.. पापा.. आप क्यों इतना चिंता करते हो.. आप सो गए होते..
दिलीप जी- अरे जिसकी दो जवान बेटियाँ घर से बाहर हों.. उसको कैसे नींद आ सकती है.. चलो जाओ बेटा.. अब खाना खा लो…

राधा ने पापा को समझा कर अन्दर भेज दिया.. उनको दवा दी और सुला दिया। उसके बाद दोनों ने खाना खा लिया और अपने कमरे में चली गईं..

राधे ने कमरे में जाते ही दरवाजे को लॉक किया और अपने कपड़े निकालने शुरू कर दिए।

मीरा बस उसको देख कर मुस्कुरा रही थी.. वो दो मिनट में ही अंडरवियर में आ गया और बिस्तर पर जाकर लेट गया।
मीरा- हैलो मिस्टर.. क्या इरादा है.. ये कौन सा तरीका है सोने का?
राधे- अब तुम्हें पता है.. कि मैं लड़का हूँ तो मुझे कैसा डर.. अब मैं तो खुल कर ही सोऊँगा ना..

मीरा- ठीक है.. ठीक है.. चलो आँखें बन्द करो.. मुझे भी चेंज करना है।
राधे- जानेमन.. अब ये ज़ुल्म ना कर.. दिन की बात तो समझ आ गई.. पर अभी तो रात है.. अब नहीं मानूँगा.. तुमको जाना है तो.. जाओ बाथरूम में चली जाओ.. मैं तो यही रहूँगा..

मीरा समझ गई कि ये मानने वाला नहीं है.. उसने कपड़े निकले और अलमारी से नाईटी हाथ में लेकर.. नंगी ही बिस्तर पर आ गई।
राधे तो बस देखता रह गया।

मीरा- लो यही चाहते हो ना तुम.. कर लो अपनी हवस पूरी.. मेरी तमन्ना जाए भाड़ में.. बस खुश..!

राधे- अरे यार.. तुम पागल हो क्या हवस होती.. तो कल ही पूरी कर लेता.. मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है.. बस मैं तो खुलकर सोना चाहता हूँ.. अब तो जब तक तुम नहीं कहोगी.. मैं हाथ भी टच नहीं करूँगा।

मीरा खुश हो गई और राधे से लिपट गई उसको एक चुम्बन किया.. जब वो अलग हुई तो राधे का लौड़ा चड्डी फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो गया।
मीरा- आई लव यू.. मेरे राधे.. अब देखो इस शैतान को किस करते ही कैसे तन गया है।

राधे- मेरी जान.. अब इसमे इस बेचारे की क्या ग़लती है.. तुम जैसी कच्ची कन्या इसके सामने नंगी खड़ी होगी.. तो ये तो उछलेगा ही ना…

मीरा- बस कुछ दिन रुक जाओ.. इसको इतना मज़ा दूँगी कि ये भी याद रखेगा..
राधे- ठीक है जान.. मैं भी अपने अरमानों को काबू में रखूँगा.. चल अब नाईटी पहन ले.. आ जा सो जाते हैं.. ऐसे जागते रहेंगे तो इसे शांत करने के लिए मुझे मुठ्ठ मारनी पड़ेगी।

मीरा उसके चिपक कर सो गई.. राधे को परेशानी तो बहुत हो रही थी.. मगर वो मीरा से सच्ची मोहब्बत करने लगा था। बस बेचारा लौड़े को काबू में करके उससे लिपट कर सो गया।

दोस्तो, आप सोच रहे होंगे.. ये कैसी कहानी है.. अब तक मजेदार सेक्स आया ही नहीं है.. तो आपको बता दूँ.. अब सेक्स की बारी है.. एक बार चुदाई शुरू हो जाएगी ना.. तो बस लगातार चलती रहेगी.. थोड़ा और बर्दाश्त कर लो..

सुबह का वही आलम था.. जो रोज होता है.. मीरा स्कूल चली गई और राधे कमरे में पड़ा रहा। उधर अपना नीरज भी स्कूल के सामने खड़ा हो गया।
आज भी दोनों लड़कियाँ उसको देख कर उसकी बातें करती हुई निकल गईं।

दोस्तो, एक-दो दिन ये सिलसिला चलता रहा रविवार को छुट्टी का दिन था तो राधे और मीरा ने खूब मस्ती की.. फिल्म देखी.. बाहर खाना खाया.. और जी भर कर चूमा-चाटी की।

अब आपको सीधे सोमवार का हाल बताती हूँ.. जहाँ से कहानी में एक नया मोड़ आएगा।

सोमवार की दोपहर को जब स्कूल की छुट्टी हुई.. नीरज वहीं खड़ा अपने फ़ोन से लगा हुआ था।
सब लड़कियाँ रोज की तरह जा रही थीं.. रोमा आज अकेली ही थी.. नीरज को देख कर वो उसके पास रुक गई।

रोमा- सुनिए.. मैं कितने दिन से आपको देख रही हूँ.. आप रोज यहाँ आते हो.. मेरी बात मानो वो कोई लड़का है.. जो फेक आईडी से आपको उल्लू बना रहा था.. कोई पूजा नहीं है.. आप क्यों अपना वक्त बर्बाद कर रहे हो।
नीरज- अगर तुम्हारी बात गलत हुई तो..! पूजा मुझे देखने यहाँ आ गई तो..! नहीं.. नहीं.. मैं अपनी पूजा को धोखा नहीं दे सकता..

रोमा- आप बहुत अच्छे इंसान हो.. आजकल कौन ऐसा सच्चा प्यार करता है.. आप मानो या ना मानो.. पूजा नाम की कोई लड़की नहीं है।
नीरज- ठीक है तुम्हारी बात मान लेता हूँ.. मैं वापस चला जाऊँगा.. अगर तुम्हें एतराज़ ना हो.. तो मैं तुम्हें घर तक छोड़ दूँ..

रोमा मन ही मन में नीरज को दिल दे बैठी थी। उसने फ़ौरन ‘हाँ’ कर दी।
नीरज ने उसे गाड़ी में बैठाया और मीठी-मीठी बातें करके उससे दोस्ती कर ली। उसने मोना का नम्बर भी ले लिया।

चलो दोस्तो, नीरज ने भी लड़की पटा ही ली.. अब जल्दी इसका ‘काम’ भी शुरू हो ही जाएगा.. अब चलो राधे का हाल जान लेते हैं।

शाम को दिलीप जी के हाथ में बैग था.. वो शायद कहीं जा रहे थे।
मीरा- पापा आप अपना ख्याल रखना.. आप कब तक आ जाओगे?

दिलीप जी- अरे मैं काम के सिलसिले में जा रहा हूँ.. 4-5 दिन में आ जाऊँगा.. बस तुम दोनों अपना ख्याल रखना..
दिलीप जी के जाने के बाद मीरा के चेहरे पर ख़ुशी के भाव साफ नज़र आ रहे थे।
राधे भी उसको देख कर मुस्कुरा दिया।

मीरा- राधे.. चलो जल्दी से खाना खा लो आज एक शादी में जाना है.. जल्दी करो देर हो जाएगी।

राधे- क्या.. किसकी शादी में जाना है? यार ये अचानक से तुमको क्या हो गया.. कहाँ जाना है..? खाना खाकर किस की शादी में जाया जाता है.?
मीरा- तुमको मेरी कसम है.. कोई बहस नहीं जो कहूँ.. बिना कोई सवाल पूछे बस करते जाओ.. ओके..
राधे- ओके मेरी जान.. अब नो सवाल.. बस काम.. चलो खाना खा लेते हैं।

दोनों ने जल्दी से खाना खाया.. उसके बाद मीरा ने राधे को कहा- चलो अब जल्दी से नहा लो.. और हाँ नहाते समय अपने बाल भी साफ कर लेना।

राधे- ओये होये.. मेरी जान क्या इरादा है.. आज तो मज़ा आ जाएगा.. लगता है मेरी मुराद पूरी हो जाएगी।

मीरा- बस ज़्यादा उछलो मत.. उस दिन लौड़ा चूस रही थी.. तो बाल बीच में आ रहे थे.. आज अगर तुमने मेरी सारी बात मानी.. तो लौड़ा चूस कर मज़ा दे दूँगी.. इसके आगे सोचना भी मत..
राधे- अरे मेरी जान.. ये ही बहुत है.. तेरे मुलायम होंठ भी किसी कुँवारी चूत से कम नहीं हैं.. बस अभी गया और अभी आया..

राधे नहाने में मस्त हो गया और मीरा अलमारी से कुछ कपड़े निकालने लगी।
एक बैग देख कर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई।
राधे जब बाहर आया तो मीरा ने उसे देख कर एक कटीली मुस्कान दी।

राधे- क्या हुआ मेरी जान.. बड़ी क़ातिल मुस्कान दे रही हो?
मीरा- कुछ नहीं.. अब जल्दी से ये ड्रेस पहन लो.. मैं तब तक नहा कर आती हूँ..

राधे ने जब बैग में देखा.. तो चौंक गया.. उसमे एक शेरवानी थी।

राधे- अरे ये कहाँ से आई.. और शादी मेरी थोड़े है.. जो मैं ऐसे कपड़े पहनूँ.. तुम ये लाई कहाँ से हो?
मीरा- ये मैंने आज ही लिया है.. तुम जब बाहर चले गए थे तब.. अब बहस मत करो.. बस पहन लो.. मैं नहाकर आती हूँ।

मीरा चली गई और राधे तैयार होने लगा.. आधा घंटा बाद मीरा भी नहाकर बाहर आ गई.. उसने अपने जिस्म पर बस एक तौलिया ही बाँध रखा था।

दोस्तो, उम्मीद है कि आपको मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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