अनोखे चूत लंड की अनोखी दुनिया-1

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

राहुल खुद जितना अजीब था उसकी कहानी उससे भी कहीं ज्यादा अजीब! सन 1999 में जब वो केवल कुछ महीने का था, उसे राकेश और उसकी बीवी रमा के घर के बाहर रख के चला गया था।

राकेश की चंडीगढ़ के 21 सेक्टर में करियाने की दुकान थी जो खूब चलती थी और 21 में ही 3 मंजिला कोठी थी पर शादी के 3 साल के बाद भी उसे कोई संतान नहीं थी तो दोनों ने राहुल को गोद ले लिया।
राहुल खुद कुछ कम अलग नहीं… जब रमा और राकेश ने उसे अपने दरवाजे पर देखा तो वो कुछ महीने का एक तंदरूस्त बच्चा था, गोरा रंग और गुलगुले से गाल उसे एक आकर्षक बच्चा बनाते थे पर रमा का ध्यान उसके लिंग के असामान्य आकार पर गया जो उस समय ही 3 इंच का था.
रमा ने एक बाबा जी को दिखाया तो उन्होंने कहा- इस बच्चे पर कामदेव की कृपा है, डरने की कोई बात नहीं।

एक साल वो राहुल को किसी राजकुमार की तरह पालते रहे पर जब उनकी पहली संतान गरिमा हुई तो उनका व्यवहार राहुल के प्रति बदल गया और दूसरी बेटी तनु के जन्म के बाद तो राहुल घर का नौकर बन कर रह गया.
सात साल की उम्र से ही उसे सीढ़ियों के नीचे बने तहखाने में सोना पड़ता जहाँ उसका तंदरुस्त बदन ठीक से समाता भी नहीं था।

पर जब राहुल बारहवीं क्लास में पहुंचा तो एक बार फिर उसकी जिंदगी बदल गई, उसकी लंबाई 6 फुट 4 इंच हो चुकी थी, वो कसरत तो करता नहीं था पर बदन किसी बॉडी बिल्डर की तरह था, रंग गोरा और चेहरा बेहद आकर्षक था। उसके कूल्हे बेहद उभरे हुए और सुडौल थे और किसी भी औरत को यह सोचने के लिए मजबूर कर देते कि इस लड़के के धक्के कितने ज़बरदस्त होंगे.

बाबा जी ने शायद सही ही कहा था कि इस बच्चे पर काम देव की कृपा है उसका लिंग 12 इंच लंबा और 3 इंच मोटा व्यास था पर उसके लंड की तरह उसके अंडे की थैली भी बेहद बड़ी थी ऐसे लगता था जैसे किसी ने उसके अंडों की जगह संतरे रख दिए हों।

गरिमा 11वीं में थी उसकी ऊंचाई 5 फुट 6 इंच थी इतनी उम्र में ही उसका बदन पूर्ण विकसित हो चुका था, देखने में वो श्रद्धा कपूर जैसी थी मासूम और कामुक एक साथ पर 34d-25-35 की काया पर नज़र पड़ते ही मर्द बस आहें भर के रह जाते थे.
तनु दसवीं क्लास में थी और भरे-2 बदन की एक खूबसूरत लड़की थी, देखने में आयेशा टाकिया सी लगती थी, बदन भी वैसा ही था बस तनु के स्तनों का आकार कुछ अधिक बड़ा था।

इतनी उम्र में ही तीनों भाई बहन पूरे विकसित जवान लगते थे. अक्सर लोग रमा से पूछते थे कि आखिर वो अपने बच्चों को क्या खिलाती है जो इतने जल्दी बड़े हो गए हैं।

राहुल का बदन चाहे विकसित हो चुका था पर दिमाग से वो 8-9 क्लास के बच्चे जैसा था, इस उम्र के लड़के जहाँ चुदाई तक का मजा ले चुके होते हैं वहीं राहुल ने अभी तक मुठ भी न मारी थी और लंड अभी तक उसके लिए नुन्नू ही था, अपनी बहनों के आकर्षक बदन भी उसके लौड़े में हरकत पैदा न कर पाते, मम्मे अभी भी उसके लिए दद्दू ही थे.. क्योंकि तनु और गरिमा हमेशा उस पर हुक्म चलाती रहती थी इसलिए वो उन्हें अपना दुश्मन समझता और दुआ करता कि उसे उनका सामना न करना पड़े।

दिमाग का विकास धीमा होने के कारण वो बड़ी मुश्किल से ही पास हो पता उसके कम मानसिक विकास को बहाना बना उसे सरकारी स्कूल भेजा जाता जहाँ के बच्चे उसका मजाक उड़ाते।
तनु और गरिमा एक महंगे इंग्लिश स्कूल में जाती, ट्यूशन टीचर घर पढ़ाने आते!

राहुल ट्यूशन के लिए पास की ही एक ठरकी दीदी के पास लगा दिया गया। दीदी का नाम था शेफाली, 21-22 साल की रही होगी, सांवला रंग, गोल चेहरा और सुडौल बदन उसे कोई बहुत सुन्दर न माने पर किसी के भी लंड को आग लगा सकती थी.

वो पहले ही दिन से वो राहुल पर रीझ गई थी। राहुल बेचारा कच्छा नहीं पहनता था, बस निक्कर पहनता था और शेफाली निक्कर में से लटकते मोटे लंबे लंड को घूरती रहती और आये दिन जब भी मौका पाते ही छूती रहती तो राहुल का सारा बदन कांप जाता।

ऐसा कोई महीना भर चलता रहा, फिर उसने राहुल अकेले बुलाना शुरू कर दिया पहले ही दिन वो उससे सट कर बैठ गई और निक्कर के ऊपर से राहुल का लंड पकड़ के सहलाने लगी।
‘दीदी आप ये क्या कर रही हो?’ राहुल ने परेशान होते हुए पूछा.
‘कुछ नहीं, बस तुम्हारे नुन्नु की मालिश कर रही हूँ… जैसे तुम नहाते हुए बाकी बदन की करते हो… जैसे मालिश से हमारा शरीर मजबूत होता है वैसे ही मालिश से तुम्हारा नुन्नु भी ताकतवर बन जायेगा.’
‘सच्ची दीदी? मेरा नुन्नु तो बिकुल ताकतवर नहीं है बस नर्म नर्म है.’
‘हाँ हाँ… तभी तो मैं मालिश कर रही थी… अगर तुम किसी को नहीं बताओगे तो मैं तेल लगा कर तुम्हारे नुन्नु की मालिश कर दूंगी!’
‘मम्मी कसम नहीं बताऊंगा.’

‘ठीक है, तो रुको, मैं तेल ले कर आती हूँ, इतनी देर तुम अपने सारे कपड़े खोल दो, तेल से गंदे हो जायेंगे न!’ यह कह कर शेफाली दूसरे कमरे में चली गई और आँवले के तेल की शीशी लेकर आ गई.
राहुल कमरे में नंगा बैठा था।

‘हे राम… इतना बड़ा लंड!’ उसके 6 इंच लंबे 2 इंच मोटे लंड को देखते ही शेफाली चीख पड़ी.
उसे पता था कि उसकी तो लॉटरी लग गई क्योंकि वो जानती थी कि अगर लंड सोया हुआ 6 इंच का है तो खड़ा होने के बाद तो अजगर बनने वाला है।

‘दीदी यह लंड क्या होता है?’ राहुल ने हैरानी से पूछा.
‘सुसु छोटा हो तो उसे नुन्नु कहते हैं और अगर बड़ा हो तो लंड!’ शेफाली ने दरवाजे को कुण्डी लगाते हुए कहा।
‘और अगर उससे भी बड़ा हो तो?’
‘कितने सवाल करते हो बाबा… उससे भी बड़ा हो तो उसे लौड़ा कहते हैं…’

राहुल ने हाँ में सर हिला दिया वो कुछ उदास हो गया था कि उसका नुन्नु लौड़ा नहीं है।

शेफाली उसकी बगल में आके बैठ गई, उसने अपने हाथ में तेल ले लिया और राहुल के नुन्नु पर लगाने लगी।
‘रोनी सूरत क्यों बना ली? अच्छा नहीं लग रहा है?’
‘नहीं दीदी अच्छा तो लग रहा है पर मैं सोच रहा था कि मेरा नुन्नु लौड़ा नहीं है.’
‘हा हा हा डफ्फर… तेरा तो लौड़े से भी बड़ा हो जायेगा, मेरे भोन्दु तेरा पूरा तम्बूरा है तम्बूरा… देखना तू मालिश के बाद कितना बड़ा हो जायेगा.’ शेफाली राहुल के लौड़े की मालिश करते हुए बोली।
राहुल के बदन पूरे बदन में अजीब सी सिहरन हो रही थी पर उसे मजा भी आ रहा था।
‘आह दीदी… बड़ा मजा आ रहा है… दीदी सच में ये तो बड़ा हो रहा है.’ राहुल ने अपने फूलते हुए लौड़े को घूरते हुए कहा।

4-5 मिनट में ही राहुल का लंड 10 इंच का तम्बूरा बन चुका था और बड़ी मुश्किल से ही शेफाली मुट्ठी में आ पा रहा था.
‘देखा मैंने कहा था न? अब तू ज्यादा आवाज़ें मत करना क्योंकि मैं ज़ोर से मालिश करुँगी… ठीक है?’
‘ठीक है दीदी!’

शेफाली ने दोनों हाथों से राहुल के तम्बूरे को पकड़ लिया और तेज़ी से हस्तमैथुन करने लगी।
‘आह.. दीदी… इतने ज़ोर से नहीं!’
‘मेरे भोंदू अभी और मजा आएगा तुझे!’ उसने पूरी रफ़्तार से राहुल की मुठ मारते हुए कहा.
‘दीदी… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मु..झे कुछ हो…’ पर इससे पहले की वो अपनी बात पूरी करता शेफाली का सारा हाथ एक सफ़ेद चिपचिपी चीज़ से गन्दा हो चुका था।

‘तुझे कुछ नहीं होगा पर तेरा यह तम्बूरा जरूर मेरी चूत का ज़रूर बुरा हाल कर देगा!’ शेफाली ने अपने हाथों से टपकते लेस को देखकर कहा.
‘दीदी ये चूत क्या होता है?’
‘जैसे तेरे पास ये तम्बूरा है न वैसे ही मेरे पास चूत है छोटी सी प्यारी सी!’
‘मैं क्यों बुरा करूँगा? आप तो इतनी अच्छी हो’
‘क्योंकि इससे मेरी चूत ताकतवर हो जायेगी.’

‘अभी करूँ दीदी?’
‘हा हा हा… बड़ी जल्दी है तुझे?’
‘हाँ दीदी, जैसे आपने मेरा तमफुरा ताकतवर बनाया है वैसे ही मैं भी आपकी चूत ताकतवर बनाऊँगा.’
‘तमफुरा… नहीं तम्बूरा कहते हैं… अच्छा अच्छा बना लेना, मैं भी तो यही चाहती हूँ… पर अब तू घर जा पहले ही लेट हो चुका है.’

शेफाली ने उस दिन जब उसे खाने को कैडबरी चॉकलेट दी तो राहुल सोचने लगा कि दीदी कितनी अच्छी है, एक तो उसके नुन्नु की कसरत करती है ऊपर से चॉकलेट देती ‘दीदी के बारे में मैं ज़रूर पिंकी दीदी को बताऊंगा.’ उसने मन में सोचा।
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राहुल को उसके घर वाले किसी से खेलने देते ही नहीं थे, टयूशन से घर जाते ही उसे दिन भर के बर्तन मांजने होते उसे अपनी बहनों से भी मिलने नहीं दिया जाता और बचा खुचा खाना उसे मिलता, न उसका कोई लड़का ही दोस्त बनता, पर पिंकी चाहे उससे 2 साल बड़ी थी और कालेज में पढ़ती थी, गोरी चिट्टी इतनी कि छूने पर मैली होने का डर, खरबूजों जितने बड़े बड़े मम्मे थे उसके पर वो मोटी बिल्कुल नहीं थी, कमर बेहद पतली थी.

वो दिल की बेहद अच्छी थी और इसी वजह से वो राहुल पर रीझ गई थी, जब वो राहुल के जवान बदन को देखती तो उसके पूरे बदन में आग लग जाती लेकिन उसने कभी राहुल का फायदा उठाने की कोशिश नहीं की।

रात में जब सब खाना खाने के बाद टीवी देख रहे होते तो वो अपनी छत पर चला जाता और तीन बार खांसता पिंकी जो उनके किरायेदारों की बेटी थी, चुपके से ऊपर आ जाती और दोनों बैठ के बातें करते, कभी-2 वो उसके लिए कुछ खाने को भी ले आती अपने घर वालों से छुपा कर!

टयूशन से घर जाते हुए सारा रास्ता वो यही सोचता रहा कि कब रात होगी और वो कब पिंकी को दीदी के बारे में बता पायेगा।

‘आ गए लाट साहब… आज इतनी देर कहाँ लगा दी?’ घर घुसते ही रमा उस पर बरस पड़ी.
डर के मारे एक बार तो वो सच बोलने वाला ही था पर फिर उसे लगा कि उसने दीदी के बारे बताया तो उसकी टयूशन बंद करवा दी जायेगी तो वो चुप ही रहा।
‘सांड जैसा शरीर हो गया है पर दिमाग नहीं बढ़ा, पता है घर का सारा काम पड़ा है और जनाब घूम रहे थे… अब बुत बन के खड़ा मत रह और रसोई में जा देख कितना काम पड़ा है और मटरगश्ती कर रहा था,’

राहुल की जान में जान आई, उसे उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि आज बिना पिटाई के ही काम चल गया।

रसोई में बर्तनों का ढेर देख उसे लगा जैसे खिलौने हों, उसने बर्तन धोने के बाद सब्जी काटी, फिर कपड़े प्रेस किये.

आज किस्मत अच्छी थी कि उसे खाना भी पूरा मिल गया.

जब सब टीवी वाले कमरे में गए तो वो चुपचाप घर के बाहर खिसक गया पर सीढ़ियों पर उसे ख्याल आया कि अगर पिंकी ने भी उसके नुन्नु की मालिश करनी चाही तो? उसने तेल लिया ही नहीं! उसे फिर अंदर आना पड़ा, सभी टीवी देखने में मस्त थे, वो चुपचाप रसोई में गया और एक कटोरी में सरसों का तेल डाल लिया, बस इतना सा कि मम्मी को शक न हो।
और फटाफट भाग के छत पर पहुँच गया और तीन बार खांसी की, कुछ देर बाद पिंकी आ गई।

‘आज तो बड़ा खुश लग रहा है?’ पिंकी ने आते ही पूछा.
‘हाँ आज एक बात बतानी है तुमको!’
‘तो चल अपने अड्डे पर चलते हैं!’ पिंकी ने पानी की टंकियों की तरफ इशारा करते हुए कहा।

‘पिंकी तुझे पता है मेरी टयूशन वाली दीदी कितनी अच्छी है? मेरी मदद भी करती है और चॉकलेट भी दी खाने को!’
‘क्या मदद की?’
‘दीदी ने मेरे तम्बूरे को ताकतवर बनाया!’
‘ओ ये तम्बूरा क्या होता है?’ पिंकी ने हैरान होते हुए पूछा.

‘अरे भाई, तुम भी न बिल्कुल डफर हो, जो नुन्नु बड़ा हो, उसे लंड कहते हैं, जो बहुत बड़ा हो, उसे लौड़ा कहते हैं और जो नुन्नु सबसे बड़ा और ताकतवर हो उसे तम्बूरा कहते हैं.’ राहुल ने शेखी मारते हुए कहा।
पिंकी ने अपनी सहेलियों के मुंह से लंड और लौड़ा शब्द तो सुने थे पर राहुल के मुंह से ऐसे लफ्ज सुन कर वो सिहर उठी, उसने एक बार अपनी दो सहेलियों के मुंह से यह शब्द सुने थे एक बोली मेरे बॉयफ्रेंड का लंड तो 5 इंच का है तो दूसरी बोली बस… मेरे वाले का तो 6 इंच का है।
पर अब उसकी उत्सुकता बड़ गई थी वो भी राहुल का लंड देखना चाहती थी।

‘राहुल तू मुझसे मालिश नहीं करवाएगा?’ उसने राहुल जैसी मासूमियत दिखाते हुए कहा.
‘मुझे पता था तुम भी मेरी मदद करोगी, इसीलिए मैं पहले ही तेल ले आया’
‘बड़ा सयाना हो गया है तू… चल जल्दी से दिखा मुझे अपना नन्नु?’

राहुल ने फटाफट अपनी निकर उतार दी और उसका 6इंच का लंड बाहर लटकने लगा।
‘अरे वाह ये तो बहुत बड़ा है…’ पिंकी ने ताली बजाते हुए कहा पर अंदर ही अंदर वो सिहर उठी क्योंकि वो जानती थी कि अगर ये सांप सोया हुआ 6 इंच का है तो जागने पर तो ये पक्का अजगर बन जायेगा।

‘अभी कहाँ बड़ा है, तुम इसकी मालिश करोगी न तो यह और बड़ा हो जायेगा.’
‘अच्छा… चल झूठे!’ पिंकी ने अपनी हंसी रोकते हुए कहा.
‘सच्ची… लगी शर्त? अगर मैं जीता तो कल तुम मुझे चॉकलेट दोगी.’

पिंकी ने एक हाथ में तेल लगा लिया और धीरे धीरे से राहुल के लौड़े पर लगाने लगी। राहुल ने उसे बताया कि ऐसे नहीं मेरे लंड को मुठ्ठी में ले लो मालिश करो, पिंकी शेफाली के जैसे अनुभवी तो नहीं वो बड़े प्यार से और धीरे-2 मालिश कर रही थी जिसके कारण राहुल को और भी मजा आ रहा था।

जल्द ही राहुल का लंड पूरा तन गया और पत्थर के समान सख्त हो गया, अब तो उसका लंड पिंकी की मुठ्ठी में नहीं आ रहा था।
‘अरे राहुल तेरा लंड तो कितना बड़ा है… इतना बड़ा लंड दुनिया में किसी का नहीं होगा! तू तो चैंपियन है यार!’ वो मन ही मन खुश हो गई कि अब वो सहेलियों को बताएगी कि पता है मेरे बॉयफ्रेंड का लौड़ा तो मेरी बाजू जितना बड़ा है।
पर फिर राहुल की दिमागी हालत का ख्याल आते ही वो उदास हो गई.

‘देखा दीदी ने ही इसे इतना स्ट्रांग बनाया है… अह… बड़ा मजा आ रहा है, दोनों हाथों से तेज़ तेज़ करो न!’ राहुल ने कहा, वो अब बस झड़ने ही वाला था पर उसे पता नहीं था कि हो क्या रहा है। पिंकी ने दोनों हाथों से राहुल के तम्बूरे को पकड़ लिया और तेजी से हाथ ऊपर नीचे करने लगी।
पिंकी को एक सेकंड के लिए लगा कि राहुल का लौड़ा कुछ अकड़ रहा है और बड़ा हो रहा है और दूसरे ही सेकंड उसका सारा चेहरा और हाथ एक सफ़ेद तरल पदार्थ लथपथ हो गए।

‘छी… तुमने सुसु कर दिया!’ पिंकी बोली.
‘डफर, ये सुसु तोड़े है ये तो मेरा लंड तुम्हें थैंक यू बोल रहा है देखो ये तो सफ़ेद है..’

तभी नीचे से पिंकी की मम्मी की आवाज़ आई- पिंकी… पिंकी… कहाँ है तू?
‘आई माँ…’ पिंकी ने झट से रुमाल से हाथ और मुंह साफ़ किया.
‘कल भी इसी टाइम आ जाना, कल मैं तुम्हारी चूत को ताकतवर बनाऊंगा… दीदी सिखाने वाली है कि चूत को कैसे स्ट्रांग बनाते हैं.’
‘ये चूत क्या होती है?’ उसने भोले होने का नाटक करते हुए कहा.
‘पता नहीं, पर दीदी बोली कि लंड की दोस्त होती है.’

‘पिंकी कहाँ रह गई तू? नीचे आ रही है या मैं ऊपर आऊँ?’ पिंकी की मम्मी ने चीखते हुए कहा।
डर के मारे पिंकी बिना कुछ बोले ही नीचे चली गई।

राहुल का तम्बूरा अभी भी पूरी तरह सलामी दे रहा था। पर राहुल को तो इसमे कुछ गलत लगा नहीं इसलिए उसने निक्कर पहनी और वो भी नीचे आ गया।
घर में अभी सभी टीवी देख रहे थे, वो चुपचाप सीढ़ियों के नीचे बने अपने तहखाने में घुस गया। दो बच्चों के हो जाने पर रमा और राकेश ने सीढ़ियों के नीचे लकड़ी के फट्टे लगवा के एक केबिन सा बनवा दिया था। राहुल को इसी तह खाने में छोटी सी मंजी पर सोना पड़ता था। वो अपनी मंजी पर लेट गया और लेटते ही सो गया। पर उसका लंड अभी अभी भी तना हुआ था और छत को सलामी दे रहा था।

टीवी प्रोग्राम खत्म होने के बाद रमा को याद आया कि रात के बर्तन तो अभी गंदे ही पड़े हैं और राहुल कहीं नज़र नहीं आ रहा।

‘देखो जी यह राहुल दिन ब दिन बिगड़ता जा रहा है, आज ट्यूशन से पूरा आधा घंटा लेट आया और अब बर्तन न धोने पड़े इसलिए सो गया, क्या ज़रूरत है इस पर इतना खर्चा करने की? मैं तो कहती हूँ कि ट्यूशन और स्कूल से हटवा के दूकान ले जाया करो!’ रमा अपने पति से बोली।

‘रमा, सभी को पता है कि हमने उसे गोद लिया है, अब थोड़ा भी पैसा न खर्च किया तो लोग ताने मारेगें और अक्षर पढ़ जायेगा तो हमारे ही काम आएगा!’ राकेश ने रमा को समझाते हुए कहा।
‘बड़ी दूर की सोचते हो!’
‘सोचना पड़ता है… बनिया हूँ कभी घाटे का सौदा नहीं करूँगा… जाकर उठा लो’
‘हाँ यही करुँगी.. और क्या!’

रमा जब राहुल को उठाने गई तो उसकी पहली ही नजर…

कहानी जारी रहेगी.
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