टीचर जी की बरसों की प्यास और चूत चुदाई-3

(Teacher Ji Ki Barson Ki Pyas Aur Choot Chuadai- Part 3)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अब तक आपने पढ़ा..
सुहाना मैम की चुदाई का ये राउंड अपने अंतिम दौर में था।
अब आगे..

करीब बीस-पच्चीस धक्कों के बाद मैं झड़ने लगा.. पर मैंने धक्के लगाने चालू रखा.. क्योंकि सुहाना भी बस चन्द ठाप की मेहमान थी, सुहाना भी अगले पांच-दस ठाप में झड़ने लगी ‘हाअय्य.. अम्म्मी.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मैं.. गई.. इस्स्स.. ओह्ह..’
सुहाना बिना किसी शर्म के जोर से चिल्लाते हुए झड़ने लगी, अगर सुहाना के घर पर कोई होता.. तो ये चीख साफ़ सुन लेता।

मैंने लंड को बाहर नहीं निकाला और सुहाना के ऊपर ही लेट गया। सुहाना ने मुझे बड़े सुकून भरी नजर से देखा और मेरे लब चूम लिए।
मैंने कहा- कैसा लगा सोहा.. अब तो खुश हो?
सुहाना ने मुँह बनाते हुए कहा- इतनी बेदर्दी से भी कोई प्यार करता है क्या.. मेरी तो साँसें ही अटक गई थीं।
फ़िर वो खिलखिला कर हँस पड़ी, सुहाना के चेहरे पे एक सुकून था।

लगभग दस मिनट हम आपस में जीभ-लड़ाई यानि ‘फ़्रेन्च-किस’ करते रहे।
‘अब उठो भी.. मुझे जोर की सूसू आई है..’ सुहाना ने मुझे हल्का धकेलते हुए कहा।
उठ कर सुहाना बाथरूम में गई और मैं भी पीछे-पीछे चल पड़ा।

मेरे अनुभवी दोस्त जानते होंगे कि औरत जब पूरी खुल जाती है.. तो फ़िर वो पूरी आपकी होती है।

मैडम को खड़ी खड़ी मुतवाया

सुहाना बोली- क्या हुआ.. तुम्हें भी सूसू आई है?
मैंने कहा- नहीं, मुझे तुम्हें देखना है।

वो अब मेरे वश में थी.. सो बस मुसकुराई और मूतने बैठ गई।

‘नहीं.. खड़े हो कर करो..’ मैंने थोड़ा रौब दिखाते हुए कहा।
सुहाना बोली- नहीं यार.. सब पैरों पर छिटक जाएगा.. प्लीज ऐसे ही करने दो।

मैंने तो सुहाना को पूरा खोलने की ठान ली थी.. सो मैंने उसे पकड़ कर खड़ा कर दिया।
वो बेचारी वैसे ही छरछरा के मूतने लगी, वो मेरी ओर शर्म से देख भी नहीं रही थी।

मैंने उससे कहा- तुम तो मेरी सोहा बन गई हो.. पर मुझे शौहर कब मानोगी?
वो कुछ ना बोली।

मैंने शावर चालू किया और सुहाना को लिए शावर के नीचे आ गया।
हमारे उबलते जिस्मों पर ठन्डा पानी पड़ रहा था और हम दोनों को फ़िर से गर्म कर रहा था।

मैडम की गांड चुदाई

सुहाना फ़िर से मुझसे लिपट कर मेरे होंठ चूसने लगी थी। मैं सुहाना के गद्देदार चूतड़ों मसल रहा था और उसकी गांड को उंगली से कुरेद रहा था। सुहाना जान गई कि अब उसकी गांड की बारी है।

सुहाना ने कहा- आज जो चाहो कर लो आकाश.. मैं अब तुम्हारी हूँ।

एक बार माल गिरने के बाद मैं किसी जल्दबाजी में नहीं था, मैंने सुहाना को पलट कर उसको दीवार पर लगा हैंडल पकड़ा कर झुका दिया।

पानी की फ़ुहार सुहाना की गोरी कमर से फ़िसलते हुए चूतड़ों से जांघों पर बह रही थी। बड़ा ही सेक्सी सीन था। मैं नीचे बैठ गया और दोनों हाथ से सुहाना के चूतड़ों मसलने लगा।

फ़िर मैंने चूतड़ों को चीर कर अपनी जीभ सुहाना की गांड पर रख दी, सुहाना फ़िर से मादक आवाजें निकालने लगी ‘आअह्ह.. इस्स्स.. आआअ..’

मैं सुहाना की गांड को उंगलियों से फ़ैला कर जीभ को गांड में घुसेड़ कर चूस रहा था। जैसे ही मैं जीभ को अन्दर ठेलता.. तो सुहाना गांड को और उभार लेती और मैं जीभ अन्दर तक डाल देता।
सुहाना जोर-जोर से सीत्कारते हुए मेरी जीभ के मज़े ले रही थी।

अब मैंने एक उंगली को थूक से गीला करके अन्दर डालने की कोशिश की.. पर पानी की फ़ुहार चिकनाई ठहरने नहीं दे रही थी। मैंने पास रखी ऑलिव ऑयल की शीशी उठाई और खूब सारा तेल सुहाना के चूतड़ों में मलने लगा। सुहाना के चूतड़ अब और ज्यादा चमक रहे थे। मैंने एक उंगली को सुहाना की गांड में डाल दिया।
‘ओह्ह्हा.. आह.. उफ़्फ़..’ सुहाना चीख उठी।

मैं जीभ से गांड के आस-पास चाटने लगा और उंगली को अन्दर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद सुहाना भी गांड हिला-हिला कर मेरी उंगली और जीभ के मजे लूटने लगी।

फ़िर मैंने दो उंगली सुहाना की गांड में डाल दीं, इस बार सुहाना चीखी नहीं.. बस एक ‘आअह्ह्ह..’ करके फ़िर से गांड हिलाने लगी।
मैंने अपनी उंगली तेजी से चलानी शुरू कर दी और सुहाना की गांड को खोलने लगा।

‘स्स्स्स.. ओह्ह्ह.. उफ़्फ़्फ़..’ सुहाना पूरा खुल के मजे ले रही थी.. जैसे किसी ब्लू-फ़िल्म की अदाकारा लेती है।

करीब तीन-चार मिनट तक मैं सुहाना की गांड को उंगली से चोदता रहा। फ़िर मैं खड़ा हो गया और ढेर सारा तेल अपने लंड पर लगाया.. जो कि लोहे जैसा सख्त और गर्म हो चुका था।

मैंने अपना लंड सुहाना की गांड पर लगाया और हल्का सा दबाव डाला। चिकनाई के कारण मेरे लंड का सुपारा सुहाना की गांड में ‘फ़क्क’ से घुस गया।

गांड फ़ट गई

‘आआ.. आआआह.. अम्म्म्म्मीई..’ सुहाना चीखती हुई आगे को होकर लंड से बचना चाह रही थी.. पर मैंने जोर से सुहाना की कमर को पकड़ रखा था।

Comments

सबसे ऊपर जाएँ