मेरे इम्तिहान की तैयारी-3

हेलो, मैं हूँ गोपी ! जी हाँ, मैं ही हूँ आपकी जानी पहचानी नाजुक सी, सदा खिलखिलाती सी गोलू मोलू सी गोपी भाभी !

आपने मेरी कहानी ‘मेरे इम्तिहान की तैयारी’ के दो भाग पढ़े, अब आगे:

फिर मैंने शर्ट जब बंद कर के उसकी तरफ देखा तो उसका चेहरा अब मुझे नर्म लग रहा था, मैंने कहा- सर ये 3 चिट्स हैं, और 2 और हैं।

सर नर्म सी आवाज़ में- वो भी दे दो बेटा…

मैं तब घूमी और आराम से अपनी स्कर्ट को ऊपर उठाया और मेरे मोटे-मोटे चूतड़ जो काली पैंटी में जकड़े हुए थे वो उसे दिखाए। और मैंने धीरे से अपनी पैंटी नीचे की और अपने पूरी गांड नंगी कर दी… मैंने मन में सोचा कि पक्का अब उसका लंड तन गया होगा…

फिर मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी नर्म गांड को खोला, मैंने अपने चूतड़ अपने दोनों हाथों से जितने हो सकते थे, चौड़े किए और उसमें फंसाई हुई 2 चिट निकाली..

हइई ! मेरी गांड के टाइट छेद को देखकर उसके मुँह में तो पानी आ गया होगा ना… .यह सब करते हुए मेरा डर गायब हो चुका था और मुझे यकीन था कि अब सुपरिंटेंडेंट शायद पट जाएगा…

फिर मैंने पैंटी ऊपर कर ली और सर को पर्चियाँ उनके हाथ में रखने लगी…

मुझे यकीन था कि वो मुझे अब छोड़ देगा…लेकिन !

सर- तुम यहाँ रूको, मैं यह चिट्स लेकर ऑफ़िस जा रहा हूँ, तुम्हारे ऊपर चीटिंग केस बनाएँगे…

मैं- नहीं सर, प्लीज.. सर ऐसा मत कीजिए सर…

लेकिन वो साला बुड्ढा मेरी अन्सर शीट और चिट्स लेकर कमरे से बाहर निकल गया और मैं वहीं खड़ी उदासी में डूबी हुई रोने लगी… अब क्या होगा यार…

मैं चुपचाप कुर्सी पर बैठ गई और सोचने लगी कि अब तो मेरा भविष्य तो गया ! मेरी कितनी बदनामी होगी ! मॉम-डैड को क्या मुँह दिखाऊँगी ! हाए, सब मेरी बेइज्जती करेंगे !

तभी सुपरिंटेंडेंट सर आए और मुझे कहा- बेटा देखो, मैं तुम्हारी चिट्स लेकर ऑफ़िस में जाने वाला था लेकिन मुझे ख्याल आया कि शायद तुम्हें एक मौका दिया जाना चाहिए, क्यूंकि इससे तुमहरा करियर ख़त्म हो सकता है।

मुझे एकदम काफ़ी सुकून मिला, मैंने कहा- शुक्रिया सर… सर प्लीज ! आगे से मैं कभी नकल नहीं करूंगी.. मैं वादा करती हूँ सर !

सर- ठीक है, मैं तुम्हें मौका देता हूँ, लेकिन यह मौका तुम्हें ऐसे ही नहीं मिलेगा !

मैं- सर प्लीज़ बताओ… कैसे मिलेगा मौका…? सर, मैं सब कुछ करने को तैयार हूँ।

सर- सोच लो, फिर मुकरना मत ! नहीं तो मैं चिट्स लेकर चला जाऊँगा ऑफ़िस में !

मैं- सर, मैंने सोच लिया है… आप बस मुझे बोलिए तो…

सर- तो फिर मुझे खुश कर दो… बस इतना सा काम है !

सर ने ऐसा कहा और मुझे आँख मार दी। मुझे तो थोड़ा धक्का लगा कि सर ने मुझे ऐसा कहा और वो भी इतने सख्त सर ने… ऐसा कैसे हो गया…

मैं- सर ठीक है… लेकिन सर पक्का ना…? अगर मैं आपको खुश कर दो तो आप मुझे पेपर देंगे ना?

सर- बेटा पेपर भी दूँगा और इम्तिहान में पास भी करवा दूँगा।

मैं- ओह सर थैंक्स अ लॉट… .सर आई एम रेडी !

सर- तो ठीक है बेटा, अभी मैं ऊपर हॉल में जा रहा हूँ, वहाँ तुम मेरे पीछे आ जाना 5-10 मिनट के बाद ! ताकि किसी को शक ना हो।

मैं- जी सर… सर, आप बहुत अच्छे हो…

सर- आई नो… तो चलो मिलते है कमरे में !

सर ऊपर चले गये और मैं बहुत खुश हुई, मेरे मन से बहुत बड़ा बोझ उतर गया था, मैं चाहती थी कि सर को इतना खुश कर दूँ कि वो बस देखते रह जाएँ।

मैं 7-8 मिनट के बाद ऊपर आ गई और मैंने हॉल का दरवाजा खोला तो वहाँ सिर्फ़ सर थे, और कोई नहीं था। मैंने दरवाजा लॉक कर दिया अंदर से। उस हॉल में दो खिड़कियाँ थी जो प्लेग्राउंड की तरफ़ थी इसलिए हमें कोई देख नहीं सकता था।

मैं सर के करीब आई और एकदम से सर को कस के अपनी बाहों में जकड़ लिया।

सर ने मेरे कान में कहा- बेटा, यू आर सो स्वीट ऐण्ड हॉट !

मैं- सर आपने चिट्स क्यूँ नहीं दी ऑफ़िस में?

सर- बेटी, उससे क्या फ़ायदा होता… तुम रोती और तुम्हारा भविष्य खराब होता, मुझे क्या मिलता ! और मैं चाहता था कि हम दोनों को फ़ायदा हो…

मैं- बिल्कुल सही सर, अपने बिल्कुल सही सोचा !

फिर मैं कुछ बोलती उससे पहले ही सर ने मुझे कमर से कस के आगे को खीचा और मेरे दोनों होंठ अपने होठों के बीच खींच लिए।

हाय ! वो बुड्ढा साला मेरी जवान जवानी के होठों के रस को अपनी ढलती हुई उमर की जीभ के साथ मस्त तरीके से पी रहा था। उसने मेरी जीभ को अपने मुँह के अंदर तक खींचा और मज़े से 5-10 मिनट तक चूसता रहा।

हाय, मुझे बड़ा मज़ा आने लगा था, मैं यह भूल गई थी कि मेरे साथ 10 मिनट पहले क्या हो रहा था, मैं तो बस एक नए आगोश में समाती जा रही थी।

फिर मैं भी अपनी तपती जवानी को ठंडा करने के लिए उसके मुँह में अपनी जीभ को ज़ोर ज़ोर से घुमाने लगी, मैं पूरा ज़ोर लगा कर उसके मुँह के अंदर तक अपनी रसभरी जीह को पहुँचा रही थी। पता नहीं कितने पल ऐसे ही वो मेरा रस पीता गया और मैं उसे पिलाती गई।

फिर उसने मेरे मुँह में अपनी जीभ डालकर अपना रस चुसवाया, मैं कमसिन अदा से उसकी जीभ को चूसती गई, चूसती गई और बस चूसती गई।

जब अच्छे से मुँह का स्वाद चख लिया तो फिर मैंने सर को एक हल्के से धक्के के साथ बेंच पर गिरा दिया और सर की पेंट की ज़िप वाली जगह को देखने लग गई। मैंने पाया कि मेरी जवानी की रोशनी से उनके ढलते शरीर में नई सुबह आ गई है और उनका लंड एक टावर की तरह तन गया है। मैंने जब उसके ऊपर हाथ रखा तो एहसास हुआ कि यह तो काफ़ी मोटा और लंबा है। हाथ लगते ही मेरे शरीर में एक आग सी जाग उठी, मैं धीरे से सर की पेंट की ज़िप खोल रही थी और सर को बार बार देख रही थी। सर तो बस आँखें बंद करके आहें भर रहे थे।

मैंने जब ज़िप खोली तो काले रंग की अंडरवीयर में उनका लंड इस तरह से कस कर चिपका हुआ था मानो कभी भी फाड़ कर बाहर निकल आएगा। मैंने धीरे से उस लंड के ऊपर पड़े काले आवरण को उतारना शुरू कर दिया और सर का मोटा और लंबा लंड धीरे धीरे मेरे सामने नंगा होता चला गया।

जब मैंने घुटनो तक अंडरवेर उतार दी तो सर का लंड सीधा तना हुआ मेरी आँखों के सामने था। वाह ! इस उमर में भी इतना मोटा और सख़्त लंबा लंड और हवस का इतना जुनून, जिसे देखकर मेरी चढ़ती जवानी की मस्त चूत भी गीली होने लगी थी। मैंने अपने हाथों से उसको जैसे ही स्पर्श किया तो सर के मुँह से हहशह की आवाज़ निकली और सर का वो मज़ा उनके शरीर में कंपन से मैं महसूस कर सकती थी। मैंने अपने दोनों हाथों से उनके मोटे लंड को सहलाना शुरू किया जो काले और सफ़ेद बालों से नीचे से ढका हुआ था। फिर मैंने धीरे धीरे सर के लंड को अपने मुख के अंदर ले जाना शुरु किया।

जैसे ही मेरे कोमल होठों ने सर के लंड के ऊपर वाले नरम हिस्से को छुआ तो “हइईई मेरी बेटी !” की आवाज़ सर के मुख से निकली… मैंने फिर 4-5 सेकेंड में ही सर का पूरा का पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया था और ऊपर से नीचे तक गीला कर दिया था।

फिर मैंने सर के लंड को लॉलीपोप की तरह चूसना शुरु कर दिया और अपने एक हाथ से सर के टट्टों को सहलाती गई… 10 मिनट तक चुप्पे मारने के बाद सर ने कुछ इशारा किया और मैं रुक गई…

सर उठे और मेरी तरफ आए और मुझे मेरी मोटी गाण्ड से पकड़ कर उठा लिया और दीवार के साथ लगा दिया। एक दम से मेरी शर्ट और ब्रा को मेरे शरीर से अलग कर दी और ना जाने कब मेरे एक मोटे दूध के निप्पल को सर ने अपने मुँह में ले लिया…

हाई ! कैसे यह मेरी दादा की उमर का बुड्ढा एक चढ़ती जवानी वाली लड़की का दूध पी रहा है ! मेरे होश गुम हो रहे थे, सर मेरे दोनों दूध को एक एक करके मस्त मस्त चूस रहे थे और मैं बॅस… उफ… हइई… ऑश गॉड… ही कर सकती थी। मेरे मोटे-मोटे गोरे रंग के उरोजों को वो अपनी मर्ज़ी से मसल रहा था और चुचूकों को खींचे भी जा रहा था।

हइईई बहुत ज़्यादा मज़ा आ रहा था मुझे ! अब मुझे इतनी ठरक चढ़ चुकी थी कि मैंने अपने हाथों से अपने दूध को पकड़ा और सर के मुँह में ठूंसने लगी… अहह… कितना मज़ा आ रहा था…

साला बुड्ढा आधे घण्टे पहले मेरे ऊपर रौब जमा रहा था और अब मैं इसको अपने इसको अपने इशारों पर नचा सकती हूँ.. मेरे दोनों निपल्स को चूस चूस कर लाल कर दिया उसने… मेरा पूरा मुम्मा मुँह में लेने की कोशिश करता रहा और अपने दाँतों से निप्पलों पर हल्का सा दर्द भी दे रहा था वो…

फिर मैंने कहा- सर हमें टाइम का भी ध्यान रखना चाहिए ना… 3 घण्टे का पेपर है और एक घण्टे से कम रह गया है।

सर- हाँ बेटा… चल अभ इस आग को पूरी तरह से बुझा दे…

मैं फिर सर के साथ लिपट गई और…

सर ने मेरे सारे कपड़े अलग कर दिए और मैं कमरे के बीच में बिल्कुल नंगी हो गई !

हइ ईए ! मेरी कमसिन चूत जिसके ऊपर बिल्कुल छोटे से बाल थे, सर की आँखों को मज़ा दे रहे थे। शर्म तो जैसे मुझसे कोसों दूर चली गई थी। सर ने अपनी शर्ट रहने दी और नीचे से बिल्कुल नंगे हो गये। फिर सर ने मुझे बेंच पर लिटा दिया और मेरी टाँगों को खोल दिया।

हाए ! अब मैं अपने सुपरिंटेंडेंट सर से चुदने वाली थी यार !

सर ने अपना मोटा लंड मेरी फ़ुद्दी के ऊपर रखा तो…!

मैं- सर प्लीज़… ऐसे मत कीजिए… कण्डोम डाल लीजिए !

सर- लेकिन बेटा उससे मज़ा नहीं आएगा… मुझे तेरी ऐसे ही मारनी है !

मैं- सर नहीं… मैं प्रेग्नेंट नहीं होना चाहती… सर प्लीज़ !

सर- बेटा आई नो, तुम बहुत एक्सपीरियेन्स्ड हो… तुम्हें अच्छी तरह पता है कि बाद में क्या करना है जिससे तुम प्रेग्नेंट नहीं होओगी…

मैं- सर प्लीज… सर कण्डोम के साथ ठीक रहेगा।

सर- बेटा तुम्हें पास होना है ना…?

मैं- हाँ जी सर !

सर- तो मुझे ऐसे करने दो… बहुत अच्छे नबरों से पास होगी तू बेटी !

मैं- ओके सर… जैसी आपकी मर्ज़ी !

सर ने फिर मेरी गीली चूत के ऊपर अपना लंड रखा और एक ही झटके में पूरा का पूरा अंदर घुसा दिया…

अहह… एक करेंट सा लगा और मुझे सर का मोटा लंड अपनी फुद्दी के अंदर महसूस हुआ…

मैं- हय ईए… अहह

सर- उफ्फ़… क्या चूत है… वाह…

मैं- हाँ सर… आराम से चोदो सर… आराम से !

सर- ओह मेरी बेटी… तू मस्त है यार… क्या गर्म है तू !

सर मेरी योनि में अपना लंड अंदर-बाहर कर रहे थे… और हम एक दूसरे से बिल्कुल लिपटे हुए थे… मैं भूल चुकी थी कि मैं कहाँ हूँ और बस लंड का स्वाद चख रही थी। सर अब पागलों की तरह से मेरी चूत ठोक रहे थे, बहुत ज़्यादा तेजी से मेरी जवानी का मजा लूट रहे थे मेरे सर…

मैंने सर की आँखों में देखा तो वो बस हवस के मारे लाल हो चुकी थी और उनका पसीना यह बता रहा था कि मेरी चूत की गर्मी उनको अंदर से ठंडा कर रही है और बाहर से तपा रही है।

हइईईई… लण्ड बहुत मज़ा दे रहा था मुझे…

पच…पच की आवाज़ से कमरे की खामोशी टूट रही थी और हमारी सेक्सी आवाज़ें इसे और मज़ेदार बना रही थी।

जब मेरा पानी निकलने लगा तो मैंने सर को कस के पकड़ लिया और उन्हें चूमने लगगी… अहह… अहह… .की आवाज़ के साथ मैंने अपना पानी निकाल दिया था पर सर मुझे चोदे जा रहे थे… चोदे जा रहे थे और कस कस के मेरी चूत का फ़ालूदा कर रहे थे।

फिर सर ने कहा- मेरी बेटी अब तैयार हो जा… मेरा निकलने वाला है…

मैंने सर के होठों को चूमा और सर को इशारा किया और क़स के पकड़ लिया…

सर ने फिर और तेज़ी से झटके मारे और चोदने लगे… बेंच की चर्र्र्ररर चर्र्र्र्र्ररर की आवाज़ के साथ मेरी चूत को अपने लंड की मार मार रहे थे सर !

फिर मुझे सर के लंड में एक हरकत महसूस हुई और तभी सर ने अपना माल पिचकारी की तरह मेरी गुफ़ा में निकलना शुरू कर दिया…

मैं- हए… सर… गरम है…

सर- अहह मेरी बेटी… ओह.. ले मेरा माल…

सर जब तक पूरे खाली नहीं हुए, तब तक मुझे कस के पकड़े रखा… और फिर जब थोड़ी देर के बाद इस हवस की आग को शांति मिली तो हम उठे और दोनों ने बातें करते हुए कपड़े पहने।

मैंने कहा- सर, प्लीज़ मुझे पास करवा दो ना सर…

सर- बेटा, मैं तुम्हें अन्सर शीट देता हूँ… तुम यहाँ बैठो, मैं तुम्हें बताता हूँ सारे उत्तर, तुम मज़े से लिखना जितना टाइम चाहिए ले लो बेटा…

मैं- थैंक्स सर… थैंक यू वेरी मच…

मैंने ऐसा ही किया और सर ने सारे अन्सर बता दिए और मैंने मज़े से पूरा इम्तिहान कर लिया… मुझे यकीन हो गया कि मैं इस इम्तिहान में पास हूँ…

मैं फिर सर को थैंक्स किया और जब घर जा रही थी तो मुझे ख्याल आया कि अब अगले पेपर की बारी है…

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