इंग्लिश की क्लास में चुदाई की पढ़ाई-1

(Erotic Sex Story: English Ki Class Me Chudai Ki Padhai- Part 1)

दोस्तो, मेरा नाम राहुल है. यह इरोटिक सेक्स स्टोरी तब की है, जब मैं अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कम्प्लीट करके मुम्बई में नौकरी ढूंढ रहा था. उस वक्त मेरी इंग्लिश अच्छी नहीं थी, इसलिए मुझे नौकरी नहीं मिल रही थी. मैं वापस अपने गाँव में आ गया और मास्टर कोर्स करने का सोचने लगा.

मेरा घर दो फ्लोर का है. ग्राउंड फ्लोर में मेरे पापा और मम्मी रहते हैं, मेरे बड़े भैया बैंगलोर में जॉब करते हैं. ऊपर वाले हिस्से में मेरे किराएदार रहते हैं. वे एक आंटी हैं, आंटी का नाम मीना है, मैं उन्हें मीना आंटी कह कर बुलाता हूँ. आंटी की एक बेटी है, उसका नाम रोशनी है. वो लंबी और मासूम सी प्यारी लड़की है. उसने कुछ दिन पहले ही अपनी बीएससी की पढ़ाई कम्पलीट की थी.

एक दिन मीना आंटी ने मुझे उनकी बेटी को अंग्रेजी पढ़ाने को कहा. मीना आंटी पास के सरकारी हॉस्पिटल में नर्स का काम करती थीं, वह हमेशा 10 या 11 बजे घर से जाती थीं और 5 बजे तक वापस आ जाती थीं. रोशनी के पापा की 9 साल पहले एक कार एक्सीडेंट में डेथ हो गई थी, इसलिए रोशनी भी जॉब करके पैसे कमाना चाहती थी ताकि सारा बोझ उसकी मम्मी पे न आए.

अब तक मेरी अंग्रेजी ठीक हो चली थी तो मैंने सोचा कि इसको पढ़ाऊंगा तो मेरी अंग्रेजी और भी सुधर जाएगी.

मैंने रोशनी को रोज 10 बजे से 12 बजे तक उसके घर अंग्रेज़ी पढ़ाना शुरू कर दिया. बीस दिन में उसने मेरे जितनी इंग्लिश बोलना सीख ली. अब हम दोनों साथ में बैठकर इंग्लिश में बातें करने लगे. वह बहुत ही समझदार और शर्मीली सी लड़की थी. उसकी उम्र 21 साल थी, मुझसे केवल 1 साल ही छोटी है.

एक दिन उसने टी-शर्ट पहनी हुई थी, पहली बार मैंने उसके उभारों को सौ वाट के बल्ब जितना रोशन महसूस किया.
मैंने रोशनी से कहा- आज तुम सच में एक रोशनी जैसी चमक रही हो.
वो मेरा इशारा समझ गई, फिर थोड़ा शर्माने लगी. उसने पूछा- ऐसा क्या खास है?
“रोशनी तुम्हें मैंने हमेशा चुन्नी पहने ही देखा है, पर आज तुम्हारा कॉन्फिडेंस नजर आ रहा है. रोशनी इंग्लिश बोलने के साथ साथ बॉडी लैंग्वेज भी बहुत जरूरी होता है.”
“ठीक है भैया मैं कल से टी-शर्ट और जीन्स ही पहना करूंगी, वैसे भी मेरी मम्मी को कोई ऐतराज नहीं है.”

फिर हम दोनों को काफी पड़ोसी नोटिस करने लगे. रोशनी एकदम से एक इंग्लिश गर्ल लगने लगी, सब पड़ोसियों ने मुझसे कहा कि हमारे बेटों को भी इंग्लिश पढ़ा दो.

मेरे दिमाग में ट्यूशन करके पैसे कमाने की तरकीब आ गई. मैंने रोशनी की मम्मी से पूछा- आंटी, क्या रोशनी और मैं मिलकर एक न्यू इंग्लिश ट्यूशन क्लास चलाएं, यहाँ काफी लोग इंग्लिश पढ़ना चाहते हैं, हम पैसे भी कमाने लगेंगे और हमारी भी प्रॅक्टिस होती रहेगी. वैसे भी छत पर हमारा एक बड़ा सा रूम है, जो बंद पड़ा है. हम लोग उसी में अपनी क्लासिस शुरू कर देंगे.

आंटी ने कुछ सोचा, फिर हाँ कर दिया. ये बात मुझे पता नहीं थी कि मेरे भैया साल में दो बार घर आते थे और आंटी को उस रूम में चोद कर उनकी खुजली मिटाते थे.

अगले दिन हमारे यहाँ आर्ट्स के तीन स्टूडेंट एडमिशन किए, वे फर्स्ट इयर में थे. उनका नाम विक्की, गोलू और पिंकी था. उन्हें अंग्रेजी बिल्कुल भी नहीं आती थी. विक्की और पिंकी बहुत शरारती थे. वो सब मुझे राहुल सर और रोशनी को दीदी कहते थे. हमने उन्हें पहले इंग्लिश के शब्द सिखाना स्टार्ट किया. सारे फूलों, फलों, जानवरों के नाम इंग्लिश में सिखाए. मैं उनको विजुअल डिक्शनरी से पढ़ाता था, जिसमें सारे पिक्चर बने होते हैं.

फिर एक महीने बाद हमने तीनों का एक टेस्ट लिया, मेरा किंग साइज़ का पलंग होने के कारण वह लोग काफी दूर दूर बैठ कर टेस्ट दे रहे थे. गोलू ने विक्की की कॉपी से नक़ल करने की कोशिश की, विक्की ने जोर से उसे गाली देकर कहा कि लौड़ा पकड़ ले मेरा.
पिंकी जोर से हँसने लगी और रोशनी जरा सा सर नीचे करके हँसने लगी.

मैंने एकदम से कहा- विक्की यदि तुम लोग गाली भी दो तो सिर्फ इंग्लिश के शब्द उपयोग करो.
विक्की बोला- पर सर आपने तो हमें सिखाया ही नहीं कि लौड़े को अंग्रेजी में क्या बोलें?
मैंने कहा- ओके हम कल इस विजुअल डिक्शनरी से शरीर के अंगों के इंग्लिश शब्द सीखेंगे.

अगले दिन तीनों छात्र बहुत खुश लग रहे थे. वह सब चुपचाप आके पलंग पर पास पास बैठ गए. मैं और रोशनी चेयर को पलंग के पास लेकर उनके पास बैठे. मैंने पहले एक आदमी का पिक्चर दिखाया जो कि पूरा नंगा था, पर उसमें कुछ गन्दा नहीं लग रहा था, क्योंकि वह पढ़ाई की बुक का चित्र था.

हमने उन्हें सारे अंगों के नाम का अंग्रेजी पढ़ाया. फिर मैंने विक्की से कहा कि अब तुम लंड को पेनिस और गांड के छेद को एसहोल कहोगे.
विक्की ने पूछा- लेकिन लड़की की तो चूत होती है, उसे क्या कहते हैं?
मैंने रोशनी से कहा- क्या तुम इसका उत्तर दे सकती हो?
रोशनी ने शरमाते हुए कहा- नहीं… मैंने भी आज ही पेनिस और एसहोल के बारे में सीखा है.
“ठीक है, अब मैं तुम्हें लड़की के शरीर की पिक्चर दिखाता हूँ. इसमें बाकी सब एक जैसा है, पर चूत अलग है.”

रोशनी ने उसका इंग्लिश में नाम पढ़ा, पर वहां चूत की फ़ोटो पर दो नाम थे, पहले तीर के निशान पे क्लिट्स लिखा था और दूसरे तीर पर वेजिना लिखा था. रोशनी ने कहा- ये चूत का पिक्चर सही से नहीं बनाया है, यहाँ दो नाम दिए हैं.

“रोशनी, चूत को पढ़ना बहुत कठिन काम है, पर तुम और पिंकी आसानी से सीख जाओगी. देखो क्लिट्स चूत के ऊपर की तरफ एक छोटे से मटर के दाने जैसा होता है. यहाँ फ़ोटो में एक छोटी सी लुल्ली जैसा दिख रखा है और जरा सा नीचे एक छेद है, जिसे हम वेजिना कहते हैं.
विक्की बोला- ओके सर हम लोग गाली देते वक़्त चूत को वेजिना बोलेंगे.

उसकी बात पर सब हँसने लगे. मैंने रोशनी की तरफ देखा, वह कुछ सोच रही थी. इसलिए मैंने कहा- बाकी की पढ़ाई हम लोग कल करेंगे.

फिर हम सब अपने घर पर आ गए. मेरी मम्मी ने कहा कि आज तेरी मीना आंटी रोशनी का खाना नहीं बना कर गई है, इसलिए जाके रोशनी को ऊपर से बुला के ला.

मैं सीढ़ी से रोशनी के घर गया, पर वो मुझे नजर नहीं आई. उसके रूम में उसकी जीन्स पड़ी थी. मैंने उसे आवाज दी, पर कोई कुछ आवाज नहीं आई. मैं समझ गया कि रोशनी बाथरूम में शायद अपनी चूत के क्लिट्स को देखने गई है.

मैंने उसके बाथरूम के बाहर से आवाज दी- रोशनी तुम्हारी जीन्स दे दूँ क्या? तुमने रूम में ही उतार दी है.
उसने डरी हुई सी आवाज में कहा- सॉरी प्लीज दे दीजिये सर.

वैसे रोशनी मुझे भैया ही कहती थी, पर अचानक सर बोलने का मतलब ये है कि वह मुझसे शरीर के अंग इंग्लिश में सीखना चाहती है. वो अपनी ड्रेस पहन कर बाहर आई, उसकी आँखें झुकी हुई थीं. मैंने उसकी शर्म को तोड़ने के लिए कहा- जल्दी चलो, मेरी मम्मी ने तेरे लिए गरम गरम खाना परोस के रखा है.
वो मेरे साथ सहज भाव से आ गई.

हमने साथ में खाना खाया, पर रोशनी के चेहरे पे कुछ टेंशन सी लग रही थी. मैंने कहा- क्या हुआ है तुम्हें, तुम कुछ कहना चाहती हो, तो मेरे छत वाले रूम पर आ सकती हो?

उस वक्त लगभग दिन के एक बजे थे. फिर वह बिना कुछ बोले अपने घर चली गई. मैं ऊपर रूम में जाके न्यूज़ पेपर पढ़ने लगा. ठीक बीस मिनट बाद रोशनी ऊपर आ गई. मैं रूम से बाहर निकल कर उसके पास गया और पूछा- क्या बात है.. मुझे नहीं बताओगी?

उसने मेरी आँखों में देखा और मैंने उसकी आँखों में झाँका. शायद हमें एक दूसरे से उस समय आँखों ही आँखों में प्यार हो गया, पर हम कुछ नहीं बोले.

उसने धीरे से कहा- मुझे एक बार वो क्लिट्स का चित्र दिखा सकते हो?

“अरे रोशनी तुम तो अपनी खुद की क्लिट्स देख सकती हो, पिक्चर की क्या जरूरत है?”
“सर मैंने कोशिश की, पर मुझे कोई मटर के दाने जैसी लुल्ली नहीं मिली, वो किस जगह होती है.. एक बार पिक्चर में देखकर फिर से अपनी चूत में देखूंगी.”
“ठीक है तुम रूम में आ जाओ.”

मैंने उसे पिक्चर दिखाई, उसमें चूत के ठीक ऊपर वाली जगह पर तीर का निशान था.

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“रोशनी तुम चाहो तो मेरे रूम का अटैच बाथरूम यूज कर सकती हो, अन्दर बड़ा सा मिरर भी है.”

वो हँस कर मेरे बाथरूम में चली गई. दस मिनट के बाद रोशनी बाहर आई. मैंने आंख मार कर पूछा- दिखा क्या क्लिट्स?
इतने में वह रोने लगी. मेरे दिल में रोशनी से प्यार बढ़ने लगा.

मैं फ़ौरन उसके पास गया और उसके आंसू पोंछे और कहा- अरे क्या बात है.. मुझे बताओ?
“राहुल सर मुझे वो मटर का दाना नहीं दिख रहा है.. क्या मेरी चूत में कुछ गड़बड़ है?”
“अरे इतनी सी बात और तुम आंसू बहाने लगी, मुझे दिखाओ, मैं ढूंढ कर बताता हूँ.”

वो चुप हो गई और सोचने लगी.

“रोशनी मैं जानता हूँ कि हम एक दूसरे को दिल में प्यार करते हैं, हां या ना?”
उसने आँखें नीचे करके सर हिला के “हां” कर दिया.
“तो फिर तुम मुझे चूत तो दिखा सकती हो.”

उसने कुछ नहीं कहा. मैंने धीरे से जाकर रूम को अन्दर से लॉक किया. फिर रोशनी को उसकी जीन्स का बटन खोलने को कहा. उसने शरमाते हुए बटन खोल दिया. मैंने उसकी जीन्स को उसके घुटनों तक उतार दिया. उसने ब्लू कलर की पेंटी पहनी थी और उसकी जांघ बहुत पतली सी ट्यूब लाइट जैसे चमक रही थीं.

मैं अपने घुटने के बल फर्श पर बैठ गया था और मेरे सामने वह चुपचाप खड़ी थी. मेरा सिर ठीक उसकी पेंटी के सामने था. उसके बदन से सफ़ेद चमेली के फूलों की खुशबू आ रही थी.

“रोशनी, तुम्हारा नाम सच में बहुत सोच कर रखा गया है.”

वो शर्म से अपने दोनों हाथों से चेहरे को छिपाने लगी. मैंने जैसे ही उसकी पेंटी को नीचे किया, तो मैं दंग रह गया.
“रोशनी क्या तुमने कभी अपनी झांटें साफ़ नहीं की?”
उसने मासूम सा चेहरा बना कर मेरी तरफ देखा और “ना” में सर हिला दिया.

“कोई बात नहीं पहले तुम्हें ये बाल साफ़ करने होंगे, इसलिए तुम्हें अपनी चूत सही से दिख नहीं रही है.”
“पर राहुल मुझे झांट साफ़ करना नहीं आती, आप अपनी झांट साफ़ करते हैं क्या?”
“अरे पगली मेरे पास तो बहुत सारे औजार हैं, मैं तो झांट के नए नए शेप भी बनाता हूँ.. तुम्हें बनाना है क्या?”

वो चुप खड़ी थी.

“ओके तुम पहले मेरी झांटों की डिजायन देखना चाहोगी?”

उसने धीरे से हाँ कहा. मैंने उसे पहले कुर्सी पे बिठाया, उसकी जीन्स और पेंटी घुटनों तक उतरी हुई थी, पर चूत झांटों से छिपी हुई थी. मैंने अपनी पेंट के बटन खोले तो उसने शर्म से अपना सर फिर से नीचे कर लिया. अंडरवियर उतारने से पहले मैं उसके बिल्कुल पास में हो गया. मेरा लंड पूरी तरह से तना हुआ था, बस बाहर आने की देर थी. रोशनी चेयर पे नीचे मुँह करके बैठी रही और उसके चेहरे से पसीना आने लगा. शायद वह शर्म से पानी पानी हो रही थी.

मैं उसके एकदम पास को गया, अब मेरा लंड अंडरवियर के अन्दर तम्बू बना कर खड़ा हो गया और उसके बड़े बड़े उभारों को टच करने की कोशिश करने लगा. उसकी आँखें मेरे उस तम्बू पर पड़ीं और उसकी सौ वाट के बल्ब ऑन होने लगे. मैंने एक झटके से अपना अंडरवियर नीचे कर दिया और मेरा लंड ने झटका मारते हुए उसके एक बल्ब को छूते हुए उसके होंठों के सामने पेशी कर दी.

रोशनी डर के मारे चेयर से उठ खड़ी हुई. मैंने उसे अपनी झांट पर एल बना हुआ दिखाया. पर वह मेरे 8 इंच लंबे और मोटे लंड को ही देख रही थी. मैंने उसका एक हाथ पकड़ा और मेरी एल वाले झांटों पे रखा. मेरे बाल थोड़े कड़क होने के कारण उसे चुभे.

“आऊच राहुल.. ये क्या कर रहे हो?”
“तुम मेरे लंड को ही देख रही थीं ना.. इसलिए मैंने तुम्हारा हाथ मेरी झांट पे रखा.. सॉरी!”
“राहुल सर आपने ये एल क्यों बनाया है?”
“रोशनी एल मतलब लंड.”

“क्या तुम मेरे इधर भी सी बनाओगे? क्योंकि सी मतलब चूत.”
“नहीं रोशनी अब हम इंग्लिश पढ़ रहे हैं. मैं तुम्हारी झांटों को वी शेप में बनाऊंगा, भी मतलब वेजिना. पर पहले तुम्हारी चूत के साइड वाले बाल पूरे ब्लेड से काटने पड़ेंगे. तुम चिंता मत करो मेरे पास सारे ब्रांडेड टूल हैं, मैं मुंबई से लाया हूँ. अभी दिन के 2 बजे हैं, तुम्हारी मम्मी तो 5 बजे आती हैं ना, तुम्हें कोई और काम तो नहीं है? क्योंकि झांट काटने और शेप बनाने में मुझे एक घंटा तो लगेगा.”
रोशनी ने कहा- मैं अभी फ्री हूँ.
“ठीक है तुम एक मिनट रुको, मैं औजार लेके आता हूँ.”

मैं नीचे गया, मेरी मम्मी अब सो रही थीं. मैं सामान लेकर आया और रोशनी से कहा कि तुम अपनी जीन्स और पेंटी पूरी उतार कर चेयर पर रख दो.

फिर मैं एक बड़ा सा न्यूज़ पेपर लाया और पलंग पर बिछा दिया.

“रोशनी तुम यहाँ पलंग पे लेट जाओ.”

मैंने उसे न्यूज़ पेपर के ऊपर लेटा दिया और एक तकिया उसकी कमर के नीचे रख दिया, ताकि रोशनी की चूत थोड़ी ऊपर उठ जाए.

“रोशनी अब तुम अपनी दोनों टांगें जितनी हो सकें, फैला दो.”
“राहुल मुझे डर लग रहा है.. ये मेरा पहली बार शेविंग होने वाली है ना.”
“तुम बिल्कुल मत डरो, तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा, बस तुम अपनी टांगें फैलाये रखना, कुछ लगे तो मुझे बेझिझक बता देना, पर टांगें मत हिलाना.”

मैंने पंखा ऑफ किया, फिर उसकी दोनों गोरी गोरी टांगों के बीच में बैठ कर बालों को साफ करने लगा.
उसने कहा- राहुल मुझे करंट जैसा लग रहा है.
“रोशनी यदि सहन होता है तो कुछ मत कहो, दर्द हो तभी कुछ कहना.
उसने “उम्म्म..” करके हाँ कर दिया.

उसकी झांटों से अब पसीने की इरोटिक महक आने लगी. उसकी चूत के ऊपर के और साइड के सारे बाल साफ़ करने से उसकी चिकनी मासूम सी कली अच्छे से नजर आने लगी, पर उसकी चूत का छेद नजर नहीं आ रहा था.. क्योंकि उसकी चूत का फूल अभी तक खिला नहीं था.

मैंने अब उसके ऊपर के झांटों में वी का शेप देना स्टार्ट कर दिया, उसके लिए मैंने ट्रिमर से बालों को धीरे धीरे छोटे छोटे करके काटना स्टार्ट किया. मैंने अनजाने में अपनी एक उंगली उसकी चूत के द्वार में रख दी. इससे अचानक से रोशनी को एक हल्का सा झटका आया.
“क्या हुआ रोशनी?”
उसने कहा- कुछ नहीं..
इतना कह कर उसने अपनी आँखें बंद कर लीं.

कुछ देर बाद छोटे छोटे बाल यहाँ वहां बिखरने लगे. मैंने अपने हाथों से उन बालों को न्यूज़ पेपर पर गिराया. इतने में रोशनी की चूत का अमृत धीरे धीरे बहने लगा. मुझे ये देख कर जरा सी हँसी आ गई.
“क्या हुआ राहुल.. आप हँसे क्यों? मुझे अब शर्म आ रही है.”

इतना कह कर वो रोने लगी.

“अरे रोशनी तुम जरा जरा सी बात पे आंसू बहा देती हो.”
फिर मैंने उसके आंसू पोंछे और कहा कि कुछ आंसू तुम्हारी चूत से निकल रहे हैं.. उन्हें भी पोंछ दूँ क्या?
उसने हल्के से हँसते हुए कहा- नहीं.. वो मैं कर लूँगी.

मैंने अब रोशनी को धीरे से उठाया और कहा कि अपनी चूत को बाथरूम में पानी से साफ़ करके आओ.
उसने पहले अपने वी शेप को देखा और बोली- लव यू राहुल.

फिर वह जल्दी से बाथरूम में गई और मैंने न्यूज़ पेपर और उसकी झांटों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया. रोशनी ने मुझे बाथरूम से आवाज दी.
मैं अन्दर गया- क्या हुआ रोशनी?
“मुझे बहुत खुजली हो रही है.”
“हाँ शुरू में होगी, ब्लेड लगाया है इसलिए.”
“पर आपने मेरी गांड के छेद में भी ब्लेड फेरा है क्या?
“नहीं तो.. मैंने तो तुम्हारी एसहोल देखी तक नहीं.”
“पर राहुल मुझे वहां बहुत तेज खुजली हो रही है.. और मैं उधर देख नहीं सकती कि वहां क्या हुआ है.”
“ओके तुम नीचे झुक कर घोड़ी बन जाओ, मैं देखता हूँ.”

जैसे ही रोशनी झुकी, उसके गोल गोल पुठ्ठे देख कर मेरे लंड में तूफान आ गया, मन किया कि लंड निकाल कर दोनों पुट्ठों को चीर डालूँ, पर मैंने कण्ट्रोल किया फिर धीरे से उसके पुट्ठों को पकड़ कर फैलाया. उसकी गांड का छेद बहुत छोटा सा था, उसमें थोड़ा चूत का अमृत चला गया था, साथ ही में छोटे छोटे बाल चिपके हुए थे.

मैंने रोशनी को बताया, तो वो बोली- प्लीज क्लीन कर दो ना आप.

मैंने एक रुई का टुकड़ा लिया और गांड के ऊपर का रस और बाल साफ़ किए, फिर एक उंगली पर पेपर लगा कर उसकी गांड की छेद में डाल दिया. रोशनी बहुत तेज चिल्लाई और उचक कर खड़ी ही गई.

मैंने कहा- अन्दर का साफ़ नहीं हुआ.
उसने कहा- नहीं.. मुझे दर्द होता है और मुझे अन्दर कोई खुजली नहीं हो रही है.
“रोशनी तुम्हें खुजली हो तो मुझे बताना, मैं मिटा दूंगा.”
वो जरा सी हंस दी.

अब मेरा मन उसकी चूत के अन्दर के छेद को देखने को तरसने लगा.
“रोशनी चलो अब हम तेरे क्लिट्स को ढूढेंगे.”
उसने हां में सर हिला दिया.

मैंने उसे फिर से पलंग पे लेटा दिया और उसकी चिकनी चूत पे हाथ फेरा. उसकी चूत से डेटोल साबुन की खुशबू आ रही थी. मैंने उसकी चूत की लकीर को दोनों अंगूठों से फैलाया, फिर अपनी उंगली से ऊपर की परत को अलग किया. रोशनी मचलने लगी. मुझे उसका छोटा सा सॉफ्ट छेद नजर आया. इस बार मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैंने एक फिंगर को उस पर रख कर अन्दर घुसा दी.

रोशनी फिर से उछल पड़ी और गुस्से में आ गई- तुम तो क्लिट्स ढूंढ रहे थे, तुमने कहा था कि क्लिट चूत के ऊपर वाले हिस्से में होती है.
मैंने बचने के लिए उससे कहा कि मुझे वो ऊपर नजर नहीं आया इसलिए जरा सा नीचे की तरफ देख रहा था.

रोशनी के चेहरे पे फिर से वही टेंशन होने लगी. इतने में हमें मीना आंटी की आवाज आने लगी, वो आज जल्दी आ गई थीं. रोशनी ने जल्दी से अपनी पेंटी और जीन्स पहनी और चली गई.

मुझे रोशनी को झूठ में क्लिट वाली टेंशन देके बहुत बुरा लग रहा था, पर वैसे मैंने कभी कोई मटर जैसी लुल्ली नहीं देखी थी. रोशनी की चूत की महक एकदम चमेली के फूल जैसी थी, मुझे वो रूम में अभी भी महसूस हो रही थी.

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कहानी जारी है.
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