कम्प्यूटर सीखने के बहाने सेक्स का खेल-2

(Computer Seekhne ke Bahane Sex Ka Khel- Part 2)

अब तक इस सेक्स स्टोरी के पहले भाग
कम्प्यूटर सीखने के बहाने सेक्स का खेल-1
में आपने जाना कि सोनल ने मुझे अपने हुस्न के हर तरह के जलवे दिखा कर फंसाने की कोशिश की … लेकिन मैंने उसके साथ कोई भी गलत हरकत नहीं की.
अब आगे:

वो बोली- मैं आपकी दोस्त हूँ तो दोस्ती की खातिर आपका मुझ पर और मेरा आपकर थोड़ा हक तो बनता है. प्रकाश मैंने बहुत कुछ खोया है और सहन किया है. आप मेरे अच्छे दोस्त हैं, मैं आपको खोना नहीं चाहती. मुझे आपसे प्यार चाहिए बाकी मुझे कुछ नहीं चाहिए.
फिर सोफे पे बैठी बैठी मेरी बांहों में आ गयी.

थोड़ी देर बाद मैंने उससे बोला- मुझे बाथरूम जाना है.
मैं उठकर बाथरूम गया, मैंने देखा वहां पे एकदम सूखा पड़ा था, कुछ पानी वगैरह नहीं पड़ा था. मतलब ये सब इसकी सोनल की चाल थी.

मैं फ्रेश होकर बाहर आया और उससे पूछा- तुम तो नहा रही थी ना?
तो उसने हंसकर अपने कान पकड़े और बोली- प्रकाश सॉरी यार, तेरा जैसा इंन्सान मैंने जिंदगी में पहली बार देखा, मैं तुम पे मरती हूँ, मैंने कितनी बार लाईन दी, लेकिन तुम हो कि आगे नहीं बढ़ रहे हो … तो बोलो मैं इससे ज्यादा क्या करती. मुझे आज का ये सब नाटक करना पड़ा. मेरे यहां पेपर 11 बजे आता और अभी तो सुबह के 7.30 हुए हैं … मैं तुमको पाना चाहती हूँ, इसलिए ये सब किया.

वो मुझे किस देने लगी … तकरीबन 10 मिनट तक हम दोनों किस करते रहे.
फिर सोनल ने मेरी शर्ट निकाल दी और मुझसे पूछा- चाय लोगे या दूध?
मैं बोला- यहां पे 2 लीटर के दो दूध ले थैली लगी हैं … और तुम कहां चाय पिलाने के चक्कर में पड़ रही हो.
तो अश्लीलता से दूध पकड़ कर बोली- तो देर किस बात की है … आओ … पी जाओ मेरा पूरा दूध.

मैं उसके चुचे जोर जोर से चूसने लगा. सोनल को चूचे चुसवाने में बहुत अच्छा लग रहा था. वो मेरा सर अपने चुचों पे दबा रही थी और बोल रही थी- प्रकाश खा जाओ मेरी चूचियों को … आह … और दबाओ, काटो जोर से आहह आहह काटो ना … ना … और जोर से … और जोर से!
मैं उसके दोनों चुचे बारी बारी चूसता और काटता रहा. उसके दोनों मम्मे एकदम लाल हो गए थे.

उसने मुझे रोका और बोला- प्रकाश सर आपने तो कंप्यूटर पर देख ही लिया था ना कि किस टाईप का सेक्स मुझे पसंद है?
मैंने पूछा- मैंने कब देखा?
फिर बोली- सर आप कंप्यूटर टीचर हो, एक दिन मैं चाय लेने किचन में गयी थी तो आप इंटरनेट जहां से चलाते हैं, वो चैक कर रहे थे … मैंने देख लिया था. आप बहुत ही चालू हो, लेकिन दिखाते नहीं. मुझे सब प्रकार का सेक्स अच्छा लगता है, आप वाईल्ड सेक्स, डर्टी सेक्स करो या कुछ भी करो, लेकिन करो … आज मैं आप में समा जाने के लिए मरी जा रही हूँ.

मैंने उसे थामते हुए पूछा- कौन से बेडरूम में तुझे लेकर जाऊं?
उसने उंगली से इशारा किया तो मैंने उसको अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में लेके गया. उसे बेड पे लिटा दिया.

मैं झट से किचन में जाकर शहद या चॉकलेट सॉस ढूंढने लगा. मुझे शहद मिल गया. मैं वापस कमरे में आया और शहद की बोतल खोल कर उसके चुचे पे थोड़ा शहद डाल कर उसकी चूची चूसने लगा.
सोनल तो जैसे सातवें आसमान पे थी. वो जोर जोर से कराह रही थी- आहह … आ … और जोर से आह … यार तुम सेक्स में बहुत ही माहिर हो!

मैंने उसकी चुत पे थोड़ा सा शहद डाला और उसकी चूत चाटने लगा. फिर मैं अपनी जीभ से उसकी चुत चोदने लगा. सोनल बहुत ही उत्तेजित हो चुकी थी, वो मेरे सर को उसकी चुत पर दबाने लगी. वो नीचे से अपनी गांड उठाकर मेरी जीभ से चुद रही थी और बोले जा रही थी- आआ … आहहह … ओह … प्रकाश ये क्या कर दिया तूने … ये जिंदगी में मैं पहली बार अनुभव कर रही हूँ … आह … आहहह … कुछ तो हो रहा है … आह मेरी चुत से कुछ बाहर आने वाला है शायद!

वो अपने हाथ से मेरा मुँह हटाने की कोशिश करने लगी. मगर मैंने अपना मुँह वहां से नहीं हटाया. दो पल बाद ही वो जोर से चीखी और मेरे मुँह में पानी छोड़ कर शांत हो गयी.

कुछ पल के हम दोनों यूं ही मस्त पड़े रहे. फिर सोनल उठी और उसने मेरे सब कपड़े निकाल कर मुझे नंगा कर दिया. वो मेरा लंड चूसने लगी. उसने शहद की बोतल लेकर मेरे लंड पर शहद डाला और मेरा लंड लॉलीपॉप जैसे चूसने लगी.

मुझे लंड चूसते हुए बोली- मैं पहली बार किसी आदमी का लंड चूस रही हूँ. मैंने इंटरनेट पे देखा था कि औरतें कैसे मर्दों के लंड चूसते हैं. मुझे बड़ा अजीब लगता था, लेकिन वाकयी बहुत मजा आ रहा है लंड चूसने में.

लगातार दस मिनट तक लंड चूसने के बाद मेरा वीर्य निकलने वाला था तो मैंने सोनल को बोला कि हट जाओ … मेरा निकलने वाला है … लेकिन उसने मुँह नहीं हटाया.

अगले ही पल मेरी पिचकारी इतनी जोर की निकली, शायद सीधे उसके पेट में गयी चली होगी. मेरा पूरा पानी निकल गया. पानी का फव्वारा एकदम से मुँह में जाने से उसको थोड़ा खांसी सी आयी. लेकिन फिर भी वो मेरे लंड को अपने मुँह में भरे हुए आखिरी बूंद तक उसका पानी निचोड़ती रही.

फिर सोनल बोली- मैंने पढ़ा है कि इस पानी में बहुत ही विटामिन प्रोटीन रहता है.

मुझे उस पर प्यार आ रहा था. मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया. हम दोनों यूं ही थोड़ी देर तक चिपके हुए लेटे रहे और बातें करते रहे.

कुछ देर बाद वो वापिस मेरा लंड चूसने लगी. मेरा लंड खड़ा हो गया. सोनल मुझसे बोली- प्रकाश, अब मेरी प्यास बुझा दो.

फिर मैंने उसकी चुत चाटना शुरू किया. थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चुत पे लंड लगाया और धीरे धीरे अन्दर डालने लगा. शायद बहुत सालों से वो चुदी नहीं होगी इसलिए उसकी चुत बहुत टाईट थी.

लंड लेने में सोनल को तकलीफ हो रही थी. लेकिन वो सहन कर रही थी. उसके चेहरे से ही पता चल रहा था कि उसको दर्द हो रहा था.

धीरे धीरे करके मेरा दो इंच लंड अन्दर घुस गया. वो दर्द से कराहने लगी. मैं थोड़ा रुक गया और उसकी चुचे चुसने लगा. उसके चेहरे पर राहत सी देख कर मैंने फिर से जोर का एक झटका लगा दिया. सोनल को इसका अंदाजा नहीं था कि मैं फिर से अटैक कर दूँगा.

वो जोर से चिल्ला दी लेकिन मेरी किस्मत अच्छी थी, उसका बेडरूम पूरी तरह से साऊंड प्रूफ था.

सोनल की आंखों से आंसू बहने लगे. उसके मुँह से मेरे लिए गालियां निकलने लगीं. वो बोले जा रही थी- आह … मादरचोद … भोसड़ी के … क्या कर रहा है तू … मैं क्या तेरी रखैल हूँ … या रांड हूँ साले जो इतनी जोर से चुत मार रहा है. बहन के लौड़े साले … धीरे से नहीं डाल सकता क्या?

उसकी भाषा सुनी तो मैं भी शुरू हो गया- साली रांड सुबह से मुझे उकसा रही है … माँ की लौड़ी चूत उठा कर घर में नंगी घूम रही है. साली ले अब सहन कर … आज तू देख साली … आज तेरी चुत को भोसड़ा न बना दिया तो कहना … आह ले … साली लंड खा … हरामिन चुपचाप सहन कर … कुतिया आज से तू मेरी रांड है. समझी?

पता नहीं मेरे मुँह से कैसे गालियां निकल रही थीं. सोनल चुदाई का आनन्द ले रही थी. वो जोर जोर से गांड उठाकर मेरा साथ दे रही थी. वो गाली भी दे रही थी- आह साले, अब आया न पटरी पर … कुत्ते और जोर जोर से चोद … आह … आहह … उफ … चोद साले जोर से!

दस मिनट बाद सोनल का बदन एकदम अकड़ने लगा और उसने मुझे कसके पकड़ लिया. उसकी चुत ने पानी छोड़ दिया.
वो तो झड़ गई लेकिन मेरा तो अभी तक बाकी था. मैं थोड़ी देर रुका और वापिस शुरू हो गया. अब उसकी चुत गीली होने के कारण लंड बड़ी आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था

अब चुदाई में ‘धप … धप …’ आवाज आ रही थी. मैंने जोर जोर से लंड पेलना शुरू कर दिया. मैं भी आखरी चरण पे था. मैंने सोनल को बोला- मैं आ रहा हूँ … जल्दी से बोल … कहां निकालूँ?
तो बोली- आह … अन्दर ही डाल दे … मैं तेरा पानी लेना चाहती हूँ … तू मेरी बुर में ही डाल दे.
मेरा पानी उसकी चूत में निकल गया. हम दोनों वैसे ही लिपट कर पड़े रहे. जब वो उठी, तो उसकी बुर से उसका और मेरा मिक्स वीर्य नीचे टपक रहा था.

वो उठकर किचन में दूध लेने गयी. वो हम दोनों के लिए बादाम मिक्स करके दूध लेकर आयी. दूध पीकर हम बात करने लगे.
मैंने सोनल से पूछा- तुम्हारे घर में कॅडबरी है क्या?
सोनल ने पूछा- क्यों?
मैं बोला- यार दो ना … मुझे जरूरत है.

वो फ्रीज से एक बड़ी वाली सिल्क कॅडबरी लेके आयी. मैंने उसे निकाला और उसके चुचों पर लगा दिया. फिर उसकी चुत पे लगाई … उसके होंठों पे लगाई … नाभि पे लगाई … अंडरआर्म पे लगाई … गांड के छेद पर लगा दी.
इसके बाद मैंने उसके दोनों हाथ ऊपर करके एक रुमाल से बांध दिए. इसके बाद मैंने सोनल को दीवार के सहारे खड़े रहने को बोला. मैंने उससे बोला कि आज कुछ भी हो जाए … तेरे को नीचे बैठने का नहीं है.
सोनल- प्रकाश वहां वाल पे एक हुक है … तुम एक काम करो, ये रस्सी से मेरे हाथ बांध दो और वो हुक में रस्सी बाँध दो.
मैं बोला- हां यार, अभी तो बहुत मजा आएगा.

फिर मैंने उसके होंठों से शुरूआत की. मैं उसके होंठों को चूसने लगा. उसके बाद उसके चुचों को संतरे के जैसे चूसने लगा और काटने लगा.

सोनल उत्तेजित हो गयी. सोनल बोले जा रही थी- आह … खाले ले प्रकाश … निकाल साले दोनों आमों में से रस …पी ले रस पूरा का पूरा … आ.हहह. आहह … आ …ह …
उसकी सांसों की गति बढ़ने लगी. इधर मैं नीचे सरकते हुए उसकी गहरी नाभि पर जीभ से चाटने लगा.
वो बोले जा रही थी- ये क्या कर रहा है प्रकाश … साले मेरे हाथ खोल दे सहन नहीं होता … मेरी चुत से पानी आ रहा है.
वो जोर जोर से दोनों पैर हिलाने लगी.

तभी मैंने बोला- देख तू यही चाहती थी ना … एक यादगार सेक्स करना था ना तुझे … तो सहन कर ना मेरी जान!
मैं चाटते हुए और नीचे आ गया … उसकी चुत को चाटने लगा. चॉकलेट और उसकी बुर के पानी का नमकीन मीठा मिक्स टेस्ट बहुत अच्छा लग रहा था. फिर नीचे से उसकी गांड के छेद को चाट रहा था.

अब शायद सोनल की सहनशक्ति का अंत हो रहा था. उसको मजा आ रहा था … लेकिन वो खुद के आपे में नहीं थी. वो जोर जोर से गालियां बकने लगी- मादरचोद … मेरे हाथ खोल दे … आहहहह आहहह … क्या कर रहा है … प्रकाश … आहहह!
मैंने उसके हाथ खोल दिए. वो दीवार के सहारे खड़े रहके अब मेरा सर अपनी चुत पे दबा रही थी. मैं अपनी एक उंगली उसकी गांड में अन्दर बाहर कर रहा था.
तभी उसकी चुत से दुबारा जो फव्वारा निकला … बाप रे!

मैं उसकी चुत का पानी पी रहा था लेकिन बहुत ज्यादा पानी बाहर आ रहा था. और उसके हाथ पैर ढीले पड़ गए थे. वो मुझे पकड़ कर नीचे लेट गयी … और तकरीबन दो मिनट तक झटके देते हुए कांप रही थी. उसकी हालत देख कर एक बार को तो मैं भी डर गया कि इसको कुछ हो तो नहीं गया.

वो शांत होने के बाद बोली- क्या प्रकाश ये क्या था? ये तो जिंदगी में पहली बार हुआ?
नीचे जमीन पर उसकी चुत का पानी पानी था … वो उसपे ही लेटी थी.

उसने मुझे बाजू में लिटाकर गले से लगा लिया और जोर जोर से रोने लगी.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- तेरा लाख लाख धन्यवाद … जो तुमने मुझे ये सुख दिया … मैंने सपने भी इस सुख की अपेक्षा नहीं की थी … थैंक्स यार … आज से मैं तेरी हो गयी.

फिर उसने मेरे लंड पे कॅडबरी लगाई … और थोड़ी गांड पे भी लगाई और जोर जोर चूसने लगी. वो मेरी गांड चाटने लगी. जब वो मेरी गांड का फूल चाटती, तो मेरे शरीर में करंट सा दौड़ जाता.
दो मिनट में मैं भी छूट गया. सोनल मेरा पूरा पानी पी गयी. फिर थोड़ी के लिए हम दोनों यूं ही नंगे फर्श पर ही सो गए.

मैं नींद में था, तभी मेरे लंड में तनाव सा लग रहा था. कुछ सुरसुरी सी हुई तो देखा कि सोनल लंड चूस रही थी. मैंने उसको अपने नीचे लिया और लंड को चूत के छेद पर लगा कर जोर से उसकी चुत में पेल दिया.
वो जोर से चीख उठी और गाली देने लगी- साले धीरे नहीं डाल सकता क्या?

कुछ दस मिनट बाद मुझे लगा कि वो आने वाली है तो मैं रुक गया.
सोनल- क्या हुआ … रुक क्यों गए?
मैं दो मिनट बाद वापस शुरू हो गया. मैंने ऐसे तीन बार किया. फिर वो गिड़गिड़ाने लगी- प्लीज़ ऐसा मत करो … जब मेरा होने वाला रहता है … तो तू क्यों रुक जाता है.

लेकिन इस बार मैं रुका नहीं … जोर जोर से उसकी चुदाई करने लगा. मेरा लंड एकदम गीला हो चुका था और चुदाई में पचक पचक की आवाज भी हो रही थी. शायद उससे सहा नहीं गया और जोर से उसकी चुत से पानी का फव्वारा मेरे लंड को लगा. वो झड़ रही थी.

वो एकदम से टूट सी गई थी, उसका जिस्म एकदम से बेजान सा हो गया था … वो थोड़ी बहोश हो गयी. मैंने देखा कि पूरे फर्श पर पानी फ़ैल गया था. शायद झड़ते समय उसकी पेशाब भी निकल चुकी थी.
तभी मैं भी उसकी चुत में झड़ गया. वो एकदम शांत हो चुकी थी. मैं उसके ऊपर पड़ा था.

थोड़ी देर बाद उसको होश आया और वो मेरे ऊपर जोर से चिल्लाई- ये क्या किया था … ऐसा भी कोई करता है?
बस ये कह कर वो मुझसे लिपट गयी.

जब तक मैं उसको कम्प्यूटर सिखाता रहा … उतने दिन तक रोज ही ये सब चलता रहा. शायद उसकी बहन को हमारे सम्बन्ध के बारे में पता लग गया था, तो वो कभी सिखाने के टाईम वहां पे नहीं आती. उस दिन के बाद टीचिंग के वक्त उसने कभी भी कपड़े नहीं पहने. वो पूरी नंगी ही रहती थी. वो मेरी गोद में आकर लंड पे बैठ कर कम्प्यूटर चलाना सीखती थी. इस दौरान मैंने उसकी गांड भी मारी.

डेढ़ साल बाद मैंने उसको बोला- अभी मैंने तुमको सब सिखा दिया है.
उसने मुझे 40 हजार लाकर दिए और बोली- सर ये आपकी फीस.
मैंने बोला- ये ज्यादा है … दस हजार ठीक है.
वो बोली- सर आपने जो मुझे खुशी दी, वो बहुत ज्यादा कीमती है.

उससे फोन पे बातें होती रहीं. बीच बीच में वो मुझे घर पर बुला लेती थी. उसके घर जाता तो सेक्स के एक दो राऊंड हो जाते थे.

एक दिन उसका फोन आया कि मैं यूएस जा रही हूँ … शायद वापिस नहीं आऊँगी. तुम एक बार मुझे मिलने आ जाना.
मैं उससे मिलने गया. उस दिन भी मैंने दो घंटे तक उसके साथ सेक्स किया. जाते वक्त उसने बोला- मैं आपकी सदा आभारी रहूंगी … जो मुझे आपने खुशी दी है.
मैं उसकी इस बात का मतलब आज तक नहीं समझा.

आपको ये कहानी कैसे लगी कृपया अपनी प्रतिक्रिया मेरी मेल आईडी पे भेजें.
आपका प्रकाश
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