निदा की अन्तर्वासना-2

(Nida Ki Antarvasna-2)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

इमरान ओवैश
मैंने न सिर्फ अपने हाथों को उसकी पीठ पर रखे हुए निदा की ब्रा के हुक खोल दिए बल्कि हाथ नीचे करके उसकी कुर्ती को एकदम से ऐसा ऊपर उठाया के उसकी भरी-भरी चूचियां नितिन की आँखों के आगे एकदम से अनावृत हो गईं और वह दोनों हाथों से उन पर जैसे टूट पड़ा।

उत्तेजना के अतिरेक से निदा की आँखें बंद सी हो गईं।
मैंने उसके होठों को छोड़ कर उसके गालों, गर्दन और कान को चूमते, चुभलाते और रगड़ते नितिन को संकेत किया और उसने साथ लाये सामान से शहद निकाल लिया।

यह शहद उसने निदा की दोनों भूरी-गुलाबी घुंडियों पर मल दिया और फिर एक चूची को उसने अपने मुँह में समेट लिया और ज़ुबान से उसकी घुंडी पर लगा शहद चूसने लगा। एक हाथ से न सिर्फ वह निदा की दूसरी चूची सहला रहा था, बल्कि उसकी घुंडी पर शहद भी मल रहा था।

मैं निदा के चेहरे को चूम रहा था और रगड़ रहा था, उसकी पीठ को सहला रहा था और नितिन एक-एक कर के दोनों चूचियों और घुंडियों पर शहद मल-मल कर उन्हें चूस रहा था।
निदा की सांसें उखड़ने लगी थीं।
उसके सारे शरीर में लहरें सी दौड़ने लगी थीं और साँसें भारी हो कर ‘सी-सी’ में बदल गई थीं।

नितिन ने ही उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे करने की कोशिश की, लेकिन इस हाल में भी निदा ने अपनी सलवार थाम ली और उसे नीचे नहीं होने दिया। मैंने उसके हाथ फिर बांध लिए और इस बार नितिन को सफलता मिल गई। उसने सलवार नीचे कर दी और खाली हाथ से पैंटी के ऊपर से ही उसकी पाव-रोटी जैसी फूली हुई चूत पर हाथ फिराया तो निदा कांप गई। नितिन के साथ ही मैंने भी अपना हाथ वहाँ पहुँचाया, तो उसकी पैंटी गीली मिली।

नितिन तो नहीं, पर मैंने ही उसके चूतड़ों की तरफ हाथ ले जाकर उसकी पैंटी की इलास्टिक में उंगली फँसाई और उसे थोड़ा उचका कर पैंटी को नीचे खिसकाने लगा।

अवरोध डालने के लिए निदा ने ताक़त लगाई, लेकिन नितिन ने भी नीचे हाथ डाल कर उसके चूतड़ों को ऊपर उठा दिया और पैंटी चूतड़ से नीचे हो गई और फिर दोनों जाँघों पर हम दोनों ने दबाव डाल कर उसकी पैंटी को उसके घुटनों तक पहुँचा दिया।
और.. यूँ नितिन को उसकी मखमली बुर के दर्शन हुए और मुझे भी दिन के उजाले में पहली बार निदा की उस चूत के दीदार हुए, जिसे मैं रातों के अँधेरे में कई बार अपनी ज़ुबान से भी चख चुका था।

आज बुर बिल्कुल सफाचट थी। लगता था जैसे सुबह ही शेविंग की हो… यानि मन से बंदी तैयार थी इस नए अनुभव के लिए।
बालों की जगह हल्का हरापन था और चूँकि हम बैठे या यह कहो कि अधलेटी अवस्था में थे तो बुर के पूरे दर्शन तो नहीं हो पा रहे थे, लेकिन ऊपर से जो आधी दिख रही थी उतनी भी कम शानदार नहीं थी।

उत्तेजना में हल्का सा उठा छोटा मांस और नीचे रक्षा कवच जैसी क्लियोटोरिस-वाल गहरे रंग में उत्तेजना के कारण अपने पूरे वजूद में दिख रही थी। मेरे साथ नितिन भी इस नज़ारे से मस्त हो गया।

उसने अपनी उँगलियाँ नीचे ले जाकर उसकी सम्पूर्ण योनि पर फिराई तो निदा काँप कर रह गई और उधर योनि से बहा चिपचिपा पदार्थ उसकी ऊँगलियों से लग गया। उसने अपनी ऊँगलियों को नाक के पास ला कर सूंघा और ऐसा लगा जैसे उस महक से नितिन मस्त हो गया हो। नितिन की आँखें बंद हो गईं, कुछ पल के लिए और उसने अपने होंठों से निदा की घुंडी निकाल कर ज़ुबान से उस लिसलिसे कामरस को चखा और फिर उसे उसी चूची पर लगा कर फिर उस पर अपनी ज़ुबान रगड़ने लगा।
अब निदा के चेहरे गर्दन से होकर मैं भी झुकते हुए उसकी बाईं चूची पर पहुँच गया।
अब निदा पीछे की तरफ इतना झुक गई कि उसे सहारे के लिए अपने हाथ बिस्तर पर टिका देने पड़े।

और हम दोनों शहद मल-मल कर उसकी घुंडियों और चूचियों को ऐसे चूसने लगे जैसे कोई भूखे बच्चे दूध पीने में लगे हों। यूँ तो उसकी चूत अनावृत थी लेकिन अभी हम सिर्फ उसे ऊपर से ही सहला रहे थे और इतने में भी निदा की गहरी-गहरी सिसकारियाँ छूटने लगी थीं।

दोनों घुन्डियाँ उत्तेजना से एकदम कड़ी होकर रह गई थीं। फिर मैं अपने पैर समेट कर बिस्तर पर ऊपर आ गया और निदा की पीठ के पीछे होकर उसे अपने सीने से लगाते हुए ऐसे सम्भाल लिया कि एक हाथ से उसका चेहरा दबाव बना कर अपनी तरफ मोड़ लिया और उँगलियाँ शहद से भीगा कर उसके होंठ और चेहरे को गीला कर दिया और अपनी बेक़रार जीभ से उसे चाटने लगा, तो दूसरे हाथ से उसकी चूत को सहलाते हुए उसके दाने को उँगलियों से गर्म करने लगा।

और इस पोज़ीशन में नितिन अपने दोनों हाथ और मुँह से निदा की गदराई चूचियों का स्तनपान करने लगा। साथ ही उसने अपनी पैंट और चड्डी नीचे खिसका कर अपना लंड बाहर निकाल लिया था, जो उत्तेजना से कड़ा हो कर अपने पूरे आकार में फनफना रहा था।
मुझे कहने में कोई हिचक नहीं कि उसका लंड मेरे मुकाबले न सिर्फ लम्बा था, बल्कि मुझसे मोटा भी था और उसका रंग भी इतना गोरा था कि वह किसी को भी पसंद आ सकता।

जब उसने निदा का हाथ थाम कर उसे अपने लंड पर रखा तो निदा ने चौंक कर आँखें खोलीं और उसे देखा और फ़ौरन अपना हाथ वापस खींच लिया लेकिन इस एक पल में मुझे उसकी आँखों में लहराए जो भाव दिखे, वो यह सन्देश दे गए कि उसे नितिन का लंड भा गया था और फिर शर्म से उसने फिर आँख बंद कर लीं और हम फिर अपने काम में लग गए।

यहाँ भी मुझे ही नितिन की मदद करनी पड़ी। मैंने निदा का हाथ ले जाकर उसके लंड पर रख कर ऐसा दबाया कि उसे संकेत समझ कर लंड हाथ में लेना पड़ा और वो उसे पकड़े ही रहती अगर नितिन उसके हाथ को ऊपर-नीचे न करता।

बहरहाल अब मैं निदा के चेहरे और होंठों को चूसे डाल रहा था, नितिन उसकी चूचियों को मसल-मसल कर घुंडियों का हाल बेहाल किए दे रहा था और निदा खुद धीरे-धीरे नितिन के लंड को सहला और दबा रही थी।

जब ऐसे ही कुछ देर हो गई तो मैंने भी अपना लोअर नीचे खिसका कर अपना सामान बाहर निकाल लिया और निदा की गर्दन पर दबाव डाल कर उसे इतना झुका दिया कि वो अधलेटी सी हो कर बाएं करवट हो कर झुकी और मेरे लंड तक पहुँच गई। पहले तो नए शख्स के सामने शर्म के कारण चेहरा इधर-उधर हटाया, लेकिन मेरे ज़ोर डालने पर उसे मुँह में ले ही लिया और उस पर अपनी जीभ रोल करने लगी।

पर इस अवस्था में उसकी दोनों चूचियाँ नीचे हो कर नितिन के आक्रमण से सुरक्षित हो गईं।

तो नितिन ने उसके नग्न गोरे और चमकते हुए चूतड़ों पर ध्यान दिया। वो पीछे से उसके चूतड़ों के बिलकुल करीब हो कर दोनों हाथों से डबल-रोटी जैसे मुलायम और गद्देदार चूतड़ों को फैला कर पीछे से उसकी गाण्ड का गुलाबी छेद और पीछे ख़त्म होती उसकी बुर को देखने लगा, जो मुझे तो नहीं दिख रही थी लेकिन मुझे पता है कि उसके कामरस से नहायी पड़ी होगी।
उस रस से उसने अपनी उंगली अच्छे से गीली की और फिर निदा की गाण्ड के छेद को कुरेदने लगा। छेद पर उसकी ऊँगली का स्पर्श पाते ही निदा एकदम कसमसाई लेकिन मैंने उसकी पीठ पर दबाव डाल कर उसे रोक लिया।

और उसी जद्दोजहद के बीच नितिन ने अपनी चिकनाई से भरी ऊँगली उसकी गाण्ड के छेद में अन्दर उतार दी।

निदा उंगली अन्दर होते ही मचली और उसके मुँह से एक ‘आह’ निकल गई। अब ये तो तय था कि मेरे जैसे गाण्ड के शौक़ीन से चुदने के बाद किसी लड़की का पिछला छेद बचने वाला तो था नहीं और नितिन की ऊँगली मेरे लंड से मोटी तो थी नहीं। इसलिए निदा को कोई फर्क अगर पड़ना था तो बस यही कि उसकी उत्तेजना एकदम से अपने चरम पर पहुँच गई और वो ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड पर आक्रमण करने लगी और उतने ही ज़ोर से नितिन भी उसके शरीर की ऐंठन को पढ़ कर अपनी ऊँगली उसकी गाण्ड में अन्दर-बाहर करने लगा।

और निदा की नाक से फूटती साँसों का बेतरतीब क्रम बता रहा था कि वो अपने चरम पर पहुँच चुकी थी और फिर देखते-देखते वह लंड मुँह से निकाल कर एकदम से अकड़ गई और अपना चेहरा बिस्तर की चादर में छुपा लिया।

कुछ पल के लिए हम तीनों ही अलग हो कर हांफते हुए अपने आपको सँभालने लगे।
अब मैं निदा के पास ही अधलेटी अवस्था में था और बीच में निदा एकदम औंधी पड़ी थी और उसके चूतड़ों के पास नितिन कुहनी के बल लेता उसकी गाण्ड को निहार रहा था।

निदा की चूचियाँ भले अब भी नग्न थी और बिस्तर की चादर से रगड़ खा रही थीं, लेकिन पीठ पर उसकी कुर्ती नीचे सरक कर कमर तक पहुँच गई थी और उसकी सलवार और पैंटी उसके घुटनों पर थी जिससे उसके चूतड़ वैसे ही नग्न और आमंत्रण देते लग रहे थे।

तीन-चार मिनट में ही नितिन ने इस आमंत्रण को स्वीकार कर लिया और उसके चूतड़ों को सहलाने लगा।
दो मिनट की नितिन की मालिश के बाद निदा के जिस्म में जैसे जान आई। उसने चेहरा उठा के मुझे देखा और फिर जैसे शरमा कर चेहरा नीचे कर लिया। मैंने उसे बगलों में हाथ देकर उठाया और इस तरह चूमने लगा जैसे इसी ज़रिये से मैं उसका आभार प्रकट कर रहा होऊँ।

कुर्ती सरक कर नीचे जाने को हुई तो मैंने उसे थाम कर ऐसा ऊपर किया कि जिस्म से अलग करके ही छोड़ा। साथ ही उसकी ब्रा को भी उसकी बाहों से निकाल फेंका।
मैंने यह पाया कि अब वह अवरोध नहीं उत्पन्न कर रही थी, जिससे पता चलता था कि इस रगड़ा-रगड़ी से वो मानसिक रूप से पूरी तरह डबल डोज़ के लिए तैयार हो चुकी थी।

इस तरह का सहवास हालांकि भारतीय समाज में आम नहीं है और किसी सीधी-सादी घरेलू लड़की या महिला के लिए तो असम्भव हद तक मुश्किल भी लेकिन अगर धीरे-धीरे सब्र और इत्मीनान से कोशिश की जाए, तो किसी ऐसी लड़की को भी मानसिक रूप से तैयार किया जा सकता है।

और निदा के इस समर्पण को देख नितिन ने भी उसकी सलवार पैंटी समेत नीचे की और उसके पंजों से निकाल कर नीचे ही डाल दी।

अब हम दो कमीने मर्दों के बीच वो बेचारी एकदम नग्न अवस्था में अधलेटी शर्मा रही थी और उसकी शर्म देख कर मुझे भी ये अन्याय लगा कि हम उसके सामने कपड़ों में रहें। मैंने नितिन को कपड़े उतारने को बोला और निदा को अलग कर के अपने सारे कपड़े उतार फेंके।

अब ठीक था… हम तीनों ही मादरजात नग्न थे और मेरे इशारे पर नितिन भी ऐसा सट गया था कि हम तीनों ही एक-दूसरे से रगड़ रहे थे। नितिन ने उसका चेहरा थाम कर उसे चूमने की कोशिश की, लेकिन निदा ने शर्म से चेहरा घुमा लिया और वो पीछे से उसकी गर्दन पीठ पर चुम्बन अंकित करने लगा। जबकि मैंने सामने से उसके कान की लौ चुभलाते हुए उसकी ढीली पड़ गई चूचियों को दबाने, सहलाने लगा।

ऐसा नहीं था कि नितिन के हाथ खामोश थे… वह भी उसे सहलाए, दबाए और रगड़े जा रहा था।
आप को मेरी कहानी कैसी लगी, उत्साहवर्धन के लिए बताइएगा ज़रूर।
कहानी जारी रहेगी।
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