मेरे दोस्त की पत्नी और हम तीन-4

(Mere Dost ki Patni Aur Hum tean- Part 4)

This story is part of a series:

दोस्तो, मैं सरस एक बार फिर हाजिर हूं अपनी कहानी के अगले भाग के साथ। उम्मीद करता हूं कि मेरे सभी पाठकों के लंड और पाठिकाओं की चूत नए घमासान के लिए तैयार होंगे.

दोस्तो, कहानी के पिछले भागों में आपने पढ़ा कि मैं और नीलम अपने जिस्म को एक दूसरे के हवाले कर चुके थे और मेरा लंड एक नई चूत का स्वाद चख चुका था। साथ ही नीलम ने मेरे सामने अपनी एक अजीब इच्छा रखी कि वो ग्रुप सेक्स करना चाहती है। इस सम्बन्ध में मैंने आपसे सुझाव भी मांगे थे कि मुझे क्या करना चाहिए लेकिन मेरी उम्मीद के विपरीत बहुत ही कम पाठकों ने मुझे मेल किया जिसमे पाठिकाओं की संख्या बहुत ही कम थी जिसे देखकर मुझे लगा कि शायद मेरी ये कहानी आप सभी को ज्यादा पसंद नहीं आई।
ख़ैर कहानी आगे शुरू करते हैं:

कई दिनों तक मैं इसी सोच में डूबा रहा, पता लगाने की कोशिश करता रहा कि आखिर क्या वजह हो सकती है कि नीलम ने मेरे सामने इसी अजीब इच्छा रखी। कई दिनों तक सोचने के बाद मैं सिर्फ एक ही निष्कर्ष पर पहुंच पाया कि शायद नीलम सेक्स करने की आदी होगी और मोहित उसके साथ उसके तरीके से सेक्स नहीं कर पाता होगा। इसी वजह से नीलम अपनी इच्छा पूरी करने के लिए पहले तो मेरे पास आई, फिर मुझे जरिया बनाकर अपनी इच्छा मेरे सामने रख दी।
खैर यह मेरी सोच थी। कुछ पाठक हो सकता है इसके विपरीत कुछ अलग सोचते हों!

सब कुछ सोचने के बाद मैंने तय किया कि इसमें शायद कहीं कुछ ग़लत नहीं है क्योंकि यदि नीलम की इच्छा आज पूरी नहीं हुई तो वो घर से बाहर निकलेगी और फिर जो भी होगा ठीक नहीं होगा। इसलिए मैंने इस काम के लिए रमन और सोहित को अपने साथ लेना उचित समझा। रमन और सोहित भी नीलम को पसंद भी करते थे और फिर वो मेरे भरोसे के दोस्त थे लेकिन कुछ करने से पहले मैंने खुद की संतुष्टि के लिए दोनों से बात करना उचित समझा क्योंकि चूत पाते ही इंसान सबसे पहले अपनी मर्दानगी दिखाने के लिए दूसरों को सब आपबीती बताता है, वो यह नहीं समझता कि जिस औरत ने इतना भरोसा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं वो खुद की खुशी और इज्जत के साथ तुम्हारे ऊपर बेइंतहा मुहब्बत और भरोसा लुटाकर बनाए हैं. इसलिए मैंने दोनों को अपने घर बुलाया।

रमन और सोहित मेरे घर आ चुके थे। हम तीनों बैठकर बात करने लगे।
“यार रमन … मुझे तुम दोनों से बहुत जरूरी बात करनी है!” मैंने कहा।
“हाँ बोलो यार सरस?” रमन ने कहा।
“रमन, सोहित… यार बात कुछ ऐसी है कि मैं सिर्फ तुम्हारे ऊपर ही भरोसा कर सकता हूं। यदि ये बात हम तीनों के बीच से निकली तो समझो बहुत बड़ा नुकसान होगा।”
मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए सोहित बोला- यार रमन, हम तीनों एक दूसरे के राजदार हैं और आज तक हर राज हम तीनों के बीच रहा है। तुम चिंता मत करो, बोलो क्या बात है?
“मैं तुम दोनों पर दुनिया में सबसे ज्यादा भरोसा करके बता रहा हूं रमन!” मैंने कहा।
“बोलो ना यार?” रमन बोला।

“नीलम भाभी हम तीनों के साथ सेक्स करना चाहती है.” मैंने अचानक से दिया।
“क्या? रमन और सोहित ने चौंकते हुए कहा और दोनों एक दूसरे का मुंह देखने लगे और मेरी तरफ प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगे।
“हां …” मैंने कहा।
“लेकिन क्यों? मोहित बहुत अच्छा लड़का है और वो भाभी को बहुत खुश रखता है फिर क्यों भाभी ऐसा चाहती है?” रमन ने हैरानी से कहा।

“हर औरत की अपनी कुछ भावनायें, इच्छाएं होती है रमन, यदि पुरुष उन भावनाओं को नहीं समझ पाए और उन्हें पूरा नहीं कर पाये तो मजबूरन एक औरत को बाहर का रास्ता देखना पड़ता है। मोहित बेशक एक अच्छा पति है लेकिन शायद वो एक अच्छा मर्द नहीं है और यदि वो अच्छा मर्द है भी तो इसका अहसास नीलम को नहीं करवा पाता है और यही कोई वजह होगी कि नीलम हमारे साथ हमबिस्तर होना चाहती है.” मैंने रमन और सोहित को समझाते हुए कहा।

काफी देर बातचीत के बाद दोनों तैयार हुए और मैंने अगले दिन रात का समय दोनों को दे दिया। रमन और सोहित चले गए।

मैं फिर से सोच में डूब गया कि आखिर जो मैं सोच रहा हूं, क्या वही वजह है या फिर कोई और वजह है।
खैर, मैंने अपने आप को संभाला और नीलम को फोन लगा कर अगले दिन रात को सारे इंतजाम करने के लिए कह दिया। कुछ गड़बड़ नहीं हो इसलिए मैंने मोहित को भी फोन कर दिया कि अगले दिन हम तीनों उसके घर खाना खाने आ रहे हैं। जिससे कि मोहित कोई शक नहीं करे।

अगले दिन हम तीनों दोस्त मोहित के घर पहुंच गए। नीलम आज रात के लिए पहले ही तैयार थी। पूरी नंगी पीठ और बाहर निकलते हुए बूब्स की कटिंग वाला ब्लाउज, हल्की नीली साड़ी नीलम के सफेद खूबसरत बदन पर बहुत जम रही थी। नीलम को इस रूप में देखकर मेरे साथ साथ सोहित और रमन के भी लंड खड़े हो गए थे क्योंकि आज हमारी नजर में नीलम चुदने के लिए तैयार हुई थी ना कि खाने के लिए।

मैंने चुपके से नींद की दो गोलियां नीलम को थमा दी जो उसे मोहित के खाने में मिलानी थी।
नीलम ने प्लान के मुताबिक खाना बनाने में काफी देर लगा दी फिर उसके बाद हमने खाना खाने में काफी देर लगा दी। हमारे प्लान के मुताबिक सब कुछ अभी तक सही था और खाना खत्म करते करते हम रात के ग्यारह बज गए थे।

खाना खत्म करने के बाद मैंने मोहित से कहा- अच्छा मोहित, अब हम लोग चलते हैं.
इतने में ही नीलम बोली- अब कहाँ जाओगे सरस, सुबह जाना … अब रात बहुत हो गई है।
“हाँ सरस, सुबह चले जाना, तीनों आज रात यहीं आराम कर लो!” मोहित ने नीलम की बात का समर्थन करते हुए कहा। मोहित को क्या पता था कि यह भी हमारे प्लान का एक हिस्सा था।

हम तीनों रुक गए और सभी बैठकर बातें करने लगे। कुछ देर बाद नींद की गोलियों ने अपना काम शुरू कर दिया और मोहित सोने चला गया। नीलम मोहित के साथ चली गई और हम तीनों अलग कमरे में आ गए।
मैंने कमरे में पहुंचकर नीलम को फोन किया और पूछा कि वो कितनी देर में आ रही है।
“बस अभी दस मिनट में आ रही हूं मेरी जान! सब्र करो!” नीलम बोली।

हम लोग इंतजार करने लगे. अब मैं अपने कपड़े खोल चुका था क्योंकि मेरा लन्ड पहले बिताई रात के बारे में सोचकर और आज देखे नीलम के रूप की वजह से अकड़कर तना हुआ था और उसे कैद करके रख पाना अब मेरे बस में नहीं था। मैं बिल्कुल नंगा बैठा हुआ था. इतने में नीलम हमारे कमरे में आ गई। दरवाजे पर आकर मुझे नंगी हालत में देखकर एक बार नीलम के कदम रुके लेकिन अगले ही पल सीधा आकर मेरे लन्ड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी।

ये सब देखकर रमन और सोहित चकित थे साथ ही मैं भी चौंक गया क्योंकि मैंने सोचा ही नहीं था कि नीलम मेरा लन्ड भी चूस सकती है।
“तुम लोगों ने क्यों कपड़े पहने हैं यार? आओ मस्ती करो।” नीलम की आवाज सुनकर मैं नींद से जागा और रमन और सोहित को बोला- आ जाओ यार!

रमन और सोहित दोनों नीलम के पास आकर खड़े हो गए। नीलम मेरा लंड चूसे जा रही थी. ‘उम्मम उम्मएम म्म …’ नीलम के मुंह से आवाज आ रही थी। साथ ही नीलम अपने दोनों हाथों से रमन और सोहित का लन्ड सहला रही थी। रमन ने नीलम के बूब्स पर और सोहित ने उसकी पीठ पर अपना हक जमा लिया था। रमन नीलम के बूब्स दबा रहा था। नीलम मस्त होकर कभी कभी रमन और सोहित का लन्ड पैंट के ऊपर से ही चाट लेती।

मैंने दुबारा नीलम के मुंह में अपना लन्ड दिया और उसके मुंह को चोदने लगा। नीलम अब घुटनों के सहारे फर्श पर थी, मेरा लन्ड नीलम का मुंह चोद रहा था, रमन उसके पीछे खड़ा होकर उसके बूब्स दबा रहा था और सोहित उसके दोनों पैरों के बीच में फर्श पर लेटकर उसकी चूत चाट रहा था। हम चारों ही अपने अपने काम में लगे हुए थे। सभी की उत्तेजना अपने चरम पर थी। नीलम का मुखचोदन करने के कारण मेरी उत्तेजना सबसे ज्यादा चरम पर थी, मेरे मुंह से अह्ह्हह अःह्ह की आवाजें और नीलम के मुंह से उम्म गुं गूं गुं की आवाज आ रही थी.

और अचानक ही एक झटके के साथ मेरा पूरा काम रस नीलम के मुंह में भर गया। नीलम के मुंह में मेरा लन्ड फंसा होने की वजह से चाहकर भी नीलम मेरे वीर्य को बाहर नहीं निकाल पाई और फिर हारकर मेरा पूरा वीर्य गटक गई।

मैं शांत हो चुका था लेकिन रमन और सोहित के काले लंड पूरे जोश में थे। मैंने रमन को इशारा किया और रमन ने नीलम को बिस्तर पर लिटा दिया।

दोस्तो, कहते हैं कि औरत जब देने पर आती है तो सब कुछ दे जाती है बिना कोई कीमत वसूल किए … और जब लेने पर आती है तो सब कुछ लूटकर भी अपना हिसाब पूरा नहीं होने देती।

मेरे पास ढेर सारे पाठक और पाठिकाओं के मेल आते हैं कि वो अपने साथी के साथ खुश नहीं हैं या संतुष्ट नहीं है। इस संदर्भ में सभी पति पत्नियों एवम् प्रेमी प्रेमिकाओं को मेरी सलाह है कि सभी एक दूसरे का सम्मान करते रहें, एक दूसरे की भावनाओं को समझते रहें और जिंदगी को प्यार के सागर में गोते लगाने दें।
जब आप एक दूसरे को समझते हैं, एक दूसरे के दुख दर्द में भागीदार बनते हैं तो बाकी सारी शिकायतें अपने आप दूर हो जाती हैं।

आप सभी के सुझाव आमंत्रित हैं. मेरा मेल आईडी है [email protected]

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