मेरा गुप्त जीवन -49

(Mera Gupt Jeewan-49 Charon Ladkiyon Ke sath Nainital me)

This story is part of a series:

चार लड़कियों के साथ नैनीताल में

जब मैं वहाँ पहुंचा तो तकरीबन सभी नाश्ता करके जा चुके थे, सिर्फ निम्मी और मैरी बैठी थी एक टेबल पर और दूसरे टेबल पर शानू और बानो विराजमान थी, दोनों आपस में बड़ी तन्मयता से बातें कर रही थी.
मुझको देख कर दोनों ग्रुप चुप हो गए। निम्मी और मैरी मुझको अपने टेबल पर बुला रही थी और शानू और बानो अपने टेबल पर बुला रहीं थी।

मैं समझ गया कि दोनों ग्रुप आपस में मिले हुए थे.
मैं सीधे ही निम्मी और मैरी के टेबल पर बैठ गया और उनको आहिस्ता से कहा- मुझको यह उम्मीद नहीं थी कि तुम और शानू मिले हुए हो एक दूसरे से! रात को मुझको उन दोनों ने भी पकड़ लिया और मुझको चोदा।
मैं बहुत रुआंसा मुंह बना कर बैठा था।
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मैरी बोली- सो सॉरी सोमू, हमसे गलती हो गई थी. हमको तुमको बता देना चाहिए था लेकिन इस शानू की बच्ची ने हमको मना किया था इसलिए हम कुछ नहीं बोली। रियली वेरी सॉरी।
शानू और बानो भी माफ़ी मांगने लगी।

वैसे मैं दिल ही दिल मैं बहुत खुश था कि कल रात दो की जगह चार लड़कियों की चुदाई कर दी थी मैंने।
लेकिन मैंने अपना रुख कठोर बनाए रखा, मैं बोला- मेरे साथ जबरदस्ती करके आप सॉरी बोल रही हैं, उफ्फ यह क्या देख रहा हूँ मैं! खैर जाने दो।

और मैं चुपचाप 4 अण्डों का ऑमलेट और माखन मार के टोस्ट खा रहा था। रात बड़ी एनर्जी खर्च हो गई थी इसलिए।
निम्मी बोली- और क्या लाऊँ सोमू, बोलो तो सही?

मैं बोला- लाना ही चाहती हो तो एक गिलास ऑरेंज जूस ले आओ।
चारों लड़कियाँ मेरी खातिर में लग गई थी।
मैं नाश्ता खत्म करके बोला- सच बताना यह मेरी बात और किस लड़की को मालूम है?
चारों ने एक साथ कहा- और किसी से कोई बात नहीं हुई है! कसम से!

मैं बोला- क्यों निम्मी और मैरी, तुमको पहले से पता था मेरे बारे में?
निम्मी बोली- हाँ पता था।
मैं बोला- कैसे पता था तुमको? किस ने बताया?
निम्मी बोली- वो तुम्हारे घर में विनी और उसकी बहन रहती हैं, न वो हमारी भी सहेली। उसी ने हिंट दिया था कि तुम्हारे हथियार में कमाल की शक्ति है।
मैं बोला- लेकिन मैंने कभी उसके साथ कुछ नहीं किया था, खैर छोड़ो, अब क्या इरादा है?

शानू जो उनमें सबसे बड़ी थी, बोली- जो तुम कहो वही हमको मंज़ूर है।
मैं बहुत धीमे स्वर में बोला- देखो जो हुआ वो बहुत डेंजरस था। हम सब पकड़े जा सकते थे और हमारे घर वाले हमें कहीं का नहीं छोड़ते। अब के बाद हम एक दूसरे के नज़दीक नहीं आएंगे इस सारे ट्रिप में!
शानू बोली- नहीं सोमू, प्लीज ऐसा ना कहो, हमारा क्या होगा? हम तो कल पूरी तरह से आनन्द नहीं ले सकी थी।

मैं बोला- अच्छा ऐसा करो, सारा दिन हम चारों एक दूसरे के निकट नहीं आएंगे ताकि किसी को शक न हो और रात के डिनर के बाद फैसला करेंगे कि रात कैसे और किस के साथ गुज़ारनी है, ओके?
सब बोली- ओके, ठीक है!
मैं बोला- अब आप निकलो हाल से, मैं बाद में आता हूँ।

मैं भी थोड़ी देर बाद नाश्ता ख़त्म करके निकला और होटल के गार्डन में टहलने लगा। टहलते हुए मैंने सोचा अब क्या करें। यहाँ मुझ को कम्मो की कमी बहुत खल रही थी।
तो मैंने फैसला किया कि मैं कम्मो की सलाह लेता हूँ फ़ोन पर!
होटल की लॉबी में पूछा तो उन्होंने फ़ोन बूथ की तरफ इशारा किया।
मैंने वहाँ से कोठी में फ़ोन लगाया और किस्मत से कम्मो ने ही उठाया। मैंने पहले अपना हाल बताया कि हम ठीक पहुँच गए हैं और अच्छी जगह रहने के लिए मिल गई है।
उसने भी बताया कि वहाँ सब कुशल से हैं।

फिर मैंने उसको नैनीताल की समस्या बताई, वो बोली- वाह छोटे मालिक, आपको वहाँ भी मनचाही चीज़ें मिल गई, मामला मुश्किल तो है कैसे इन 4 से निपटा जाए? मेरे ख्याल में आपको चारों को कसम दिलानी पड़ेगी कि वो और किसी से नहीं कहेंगे। दूसरे मैं सोचती हूँ आज रात को चारों को एक ही कमरे में बुला लीजिए हो सके तो अपने ही कमरे में, इससे आप बचे रहेंगे।
मैं बोला- हाँ यह ठीक है।

कम्मो बोली- चारों को एक एक बार चोद डालो रात में… फिर उन चारों को आपस में भिड़ा दो यानि लड़की लड़की संग संग करवा दो, इस तरह उनकी कामवासना ठंडी हो जायेगी।
मैं एकदम खुश होकर बोला- वाह कम्मो, क्या बात है! और अगर वो एक दूसरी के संग नहीं करना चाहें तो?
कम्मो बोली- तो उनको अपनी पहली चुदाई की स्टोरी सुनाने के लिए उकसाना। वो ज़रूर अपने पहली चुदाई की कहानी सुनाने लगेंगी और आप काफी बच जाएंगे।
मैं बोला- यह भी प्लान अच्छा है कम्मो, शुक्रिया आई लव यू।

थोड़ी देर बाद हम सब अपनी बस मैं बैठ कर नैनी लेक घूमने चले गए। नैनी लेक बड़ी सुंदर जगह है, दूर दूर तक साफ़ पानी और उस पर चलती हुई किश्तियाँ एक अजब सा नज़ारा पेश करते हैं।

सब छात्र अपने खर्चे पर किश्ती किराये पर लेने लगे। निम्मी, मैरी, शानू और बानो ने एक ही किश्ती को किराये पर ले लिया।
तभी सर बोले- इनके साथ एक लड़का भी जाना चाहिए।
उन्होंने मुझको उस किश्ती में बैठा दिया। क्यूंकि दो किश्ती चलने वाले होते थे तो उस किश्ती में जगह फुल हो गई थी, मैंने कहा- चल भाई!
अभी मैं बानो और निम्मी के बीच बैठा था और शानू और मैरी दूसरी तरफ बैठी थी।
बानो अपने गोल उरोजों को मेरे बाँहों के साथ छूने की कोशशि करने लगी और निम्मी अपने घुटने मेरे घुटनों के साथ जोड़ रही थी, बड़ा ही आनन्द आ रहा था, वही बस वाला सीन चालू हो रहा था।

उधर मैरी और शानू आँखें तरेर रहीं थी लेकिन निम्मी और बानो बिना परवाह किये अपने काम में मस्त रहीं। किश्ती जब दूसरी तरफ पहुँच गई तो किश्ती वाले बोले अगर आप चाहें तो उतर कर उस तरफ के किनारे का आनन्द ले सकते हैं।

हम सब उतर गए और उस किनारे की दुकानों की सैर करने लगे, मुझको प्यास लग रही थी, मैं बोला – चलो एक एक कोका कोला पीते हैं।
मैंने 5 कोकाकोला खरीदी और हम सब पीने लगे।

तब हम चलते हुए किश्ती से थोड़ी दूर हो गए और तब मैंने शानू को एक साइड ले जाकर कहा- मैंने फैसला लिया है कि आज रात की पार्टी मेरे कमरे में होगी। आप चारों वहीं आ जाना। क्यों ठीक है न?
शानू ने बाकी लड़कियों को भी बुला लिया और उनको मेरी बात बताई। वो तैयार हो गई और कहा कि खाना खाने के एक घंटे बाद वो मेरे कमरे में आने की कोशिश करेंगी।
वो सब बहुत खुश थी।

मैं बोला- तुम चारों सब लड़के लड़कियों पर नज़र रखो, अगर किसी को भी शक हो गया तो हम सब मारे जाएंगे। कोई हमारे बारे में कोई बात करे तो तुम फ़ौरन हम सबको बता देना ताकि हम सब चौकस हो जाएंगे। वैसे लोगों की बातों से मुझ पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन आप लड़कियाँ हैं, सोचिये आपके जीवन पर क्या असर पड़ेगा?
शानू बोली- सोमू ठीक कह रहा है, अगर हम किसी को बताएंगी तो पकड़े जाने पर हम पर ही ज्यादा असर होगा। प्लीज किसी से भी रात की बात का कोई ज़िक्र नहीं करना, ओके?
सबने सर हिला दिया।
कहानी जारी रहेगी।
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