मेरी कामुकता, मेरे तन की प्यास-1

(Meri Kamukta, Mere Tan Ki Pyas- Part 1)

दोस्तो, मेरा नाम प्रीति शर्मा है, मैं दिल्ली में रहती हूँ। अभी मैं सिर्फ 27 साल की इंडियन भाभी हूँ, देखने में बहुत सुंदर हूँ, और जितना मेरा चेहरा सुंदर हैं उस से ज़्यादा मेरा जिस्म सुंदर है। मैं खुद कहती हूँ कि मुझे अपनी सुंदरता का गुमान है कि भगवान ने सचमुच मुझे बड़ी फुर्सत से तराश कर बनाया है। बचपन से ही मैं सब की प्यारी रही हूँ, घर में, रिश्तेदारी में, स्कूल में। सब मुझे बहुत ही पसंद और प्यार करते थे।

मैं अपने स्कूल की होशियार स्टूडेंट थी; स्कूल टाइम में ही मेरे बहुत से दीवाने थे, मगर मैंने किसी अपने पास नहीं फटकने दिया, क्योंकि मुझे कोई भी लड़का अपने बराबर का हैंडसम और अट्रक्टिव नहीं लगा। मोहल्ले में, रिश्तेदारी में भी मेरी बहुत से दीवाने थे।

एक मेरे मौसा थे, वो भी मेरे पर खूब लट्टू थे। जब भी मिलते, उन की कोशिश होती कि वो मुझे या तो गले से लगाएँ, या चूम लें, और कुछ नहीं तो छू कर तो ज़रूर देखें। ज़ाहिर ये करते थे कि वो मुझे बच्चों की तरह प्यार करते हैं, मगर मैं जानती थी कि वो एक नंबर के ठर्की आदमी थे।
ये मुझे तब पता चला जब एक रात उन के घर मैं सो रही थी, तो उन्होंने मेरी सोती हुई के बूब्स दबाये थे। मैं जाग गई और देखने लगी कि वो करते क्या हैं।

रात को सोते वक़्त मैंने सिर्फ टी शर्ट ही पहनी थी, कोई अंडरशर्ट या ब्रा नहीं पहना था, इसी लिए मेरे दोनों बूब्स की नरमी को उन्होंने खूब सहलाया। मगर तब मुझे सेक्स के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं पता था, मुझे तो सेक्स एक बहुत ही दर्दनाक काम लगता था। इसलिए मैं डर गई और एक दम से पलटी। उन्हें लगा कि मैं उन की हरकत से जाग गई हूँ, तो वो जा कर सो गए।

बाद में काफी समय बाद जब मुझे सेक्स का ज्ञान हुआ, तब मुझे पता चला के मम्मे दबाने से औरत और मर्द दोनों को मजा आता है। आज मैं चाहती हूँ कि मेरे मम्मे दबाएँ जाएँ, चाहे कोई भी दबाये, मगर अब वो वक़्त नहीं रहा।

खैर, अपनी आज की बात पर आते हैं।

मेरी शादी को 4 साल हो चुके हैं, और मेरे एक डेढ़ साल का बेटा भी है। लो कर लो बात। जितने भी मर्द हैं, सबके मुँह में पानी आ गया, ये पढ़ कर कि मेरा डेढ़ साल का बेटा है। सब यही सोच रहे होंगे, साली के मम्मे दूध से भरे होंगे। तो इस में क्या झूठ है, सच में मेरे मम्मे दूध से भरे हुये हैं। अपने बेटे को पिलाने के बाद भी मेरा बहुत सारा दूध मेरी चूची से टपक जाता है।
लेकिन कमीनो, मैं तुम सालों को नहीं पिलाऊँगी, मेरा पति है, उसको चुसवाऊँगी।

पर अगर किसी को मेरा दूध पीने की इच्छा है, तो उसके लिए एक शर्त है, जो लड़का या आदमी, बिना रुके लगातार 1 घंटा चुदाई कर सकता हो, वो मेरी ई मेल आई डी पर मेल करे। अपने लंड की फोटो भेजे, अगर मैंने उसे पसंद किया, तो हो सकता है उसकी लॉटरी लग जाए। अगर मुझे पसंद आ गया, तो मैं अपना सब कुछ उसे दूँगी।
ये बात कहने की ज़रूरत नहीं है, सब कुछ पूरी राज़दारी से होगा, कोई किसी को कुछ भी नहीं बताएगा। तगड़ा, दमदार, मर्द, जिसका लंड उस से भी ज़्यादा, तगड़ा हो, दमदार हो, मेरा प्रिय होगा। लंड काला हो, गोरा हो, भूरा हो, कैसा भी हो, बस बड़ा हो और दमदार हो।
चूतिये बहुत उछलेंगे मेरी ऑफर पढ़ कर, पर साफ बात पहले ही कह देती हूँ। एक घंटा चुदाई करने वाला ही मेल करे, बाकी थोथे चने दूर रहें।

अब आप को बताती हूँ कि मुझे इस तरह का चस्का क्यों लगा, क्यों शादीशुदा होते हुये भी मेरी लंड की प्यास नहीं बुझी। तो उस की कहानी सुनिए।

शादी के बाद सब ठीक ठाक चलता रहा। अपनी सुहागरात पर मैंने सबसे पहली बार किसी मर्द का तना हुआ लंड देखा। मोटा, काला, लंबा; करीब 6 इंच का होगा। अब सुहागरात थी, इतना तो मुझे पता ही था कि आज मेरी चुदाई होगी। सो मैंने बिना किसी हील हुज्जत के अपने पति का पूरा साथ दिया। उसके कहने पर मैंने उसका लंड चूसा भी, थोड़ा सा, क्योंकि तब मुझे लंड चूसने की कोई आदत नहीं थी।
फिर उसने मुझे नंगी करके मेरी चूत में अपना लंड डाला भी। पहली बार था, तो मुझे दर्द भी हुआ, और अगले दिन मेरी चूत सूज भी गई।

ये तो हुई वो बात जब मैंने पहली बार चूत में लंड घुसवाया.
मगर उसके बाद तो ये रोज़ की कहानी बन गई। कुछ दिनों बाद तो हालत ये हो गई कि अगर मुझे लंड न मिलता तो मुझे नींद न आती। ऐसा भी हुआ कि पति का मूड नहीं, या थके हैं, तो मैंने अपनी मर्ज़ी से उनका लंड खूब चूसा और उन्हें तैयार करके अपनी चुदाई करवाई। फिर एक बेटा भी हो गया, तब तक भी सब ठीक था। पूरे 9 महीने हमने डॉक्टर की सलाह लेकर सेक्स किया। डेढ़ महीने बाद फिर से शुरू हो गए।

मगर अब एक और बात नज़र आ रही थी, मुझे इस रोज़ रोज़ की चुदाई से मन सा भरता जा रहा था। मैं कुछ नया, चाहती थी; पर नया क्या करें।
कुछ दिनों बाद एक दिन पतिदेव ने तेल लगा कर मेरी गांड मार ली; मैंने वो भी सहन कर लिया।

फिर पतिदेव दो डिल्डो ले आए; पहले एक मेरी चूत में और दूसरा मेरी गांड में चलता था। फिर गांड से निकाला मुँह में, चूत से निकाला गांड में हर जगह चलने लगा, और एक मैंने भी तेल लगा कर एक डिल्डो अपने पति की गांड में डाल दिया। ये काम भी खूब किया, हम एक दूसरे के साथ ओरल सेक्स करते, वो मेरी चूत चाटते, इतनी चाटते कि मैंने उनके मुँह में ही झड़ जाती।
वो मुझे अपना लंड चुसवाते चुसवाते मेरे मुँह में ही अपना सारा माल गिराते, और मैं पी जाती।

ये सब करने के बाद भी मेरी कामुक प्यास नहीं बुझ रही थी; मैं और सेक्स चाहती थी; मैं चाहती थी, मेरा पति मुझे रोज़ चोदे, दिन में 3-4 बार चोदे। तब तक चोदे जब तक मेरी चूत दुखने न लगे।
मगर ऐसा संभव नहीं था, और बाहर जाने से मैं इस लिए डरती थी, क्योंकि इसमें बदनामी थी। अगर बाहर किसी से चुदवाती और कभी मेरे घर तक बात पहुँच जाती तो मेरे लिए तो बहुत मुश्किल हो जाती। मगर इतना ज़रूर था कि मैंने सोच लिया था कि मैं अपनी इस कामुक प्यास को मिटाऊँगी ज़रूर।
पति से तो नहीं मिटने वाली, मिटेगी तो बाहर ही; मगर कोई ऐसा मौका, ऐसा समय आए जब मैं खूब खुल कर चुदवा लूँ, और किसी को पता भी नहीं चले।

फिर एक दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन वक़्त आया, जब मेरी ख़्वाहिश पूरी हुई। हुआ यूं कि मेरी पति जिस कंपनी के साथ बिजनेस करते हैं, उस कंपनी के मालिक की बेटी की शादी थी। दिल्ली के एक शानदार फाइव स्टार होटल में शादी थी। लड़की की शादी थी, रात के तीन बजे के बाद फेरे होने थे।

हम तो सब खैर 9 बजे ही तैयार हो कर पहुँच गए थे। मैं अपने साथ 2-3 ड्रेस और ले कर आई थी। मैंने सोचा था कि एक ड्रेस पहन कर जाऊँगी, और बाद में अपनी ड्रेस चेंज कर लूँगी। जो ड्रेस मैं एक्सट्रा लाई थी, वो हमने अपनी कार में ही रख दी थी।

10 बजे खाना भी लग गया। मैंने अपने पति के साथ खूब एंजॉय किया, बेटे के लिए मैं अपनी बाई साथ लाई थी कि वो बच्चे को संभाले ताकि मेरे कपड़े खराब न हों।
बहुत बड़े लेवल की शादी थी। शादी में बहुत से बड़े बड़े मंत्री, अफसर और मशहूर लोग आए थे। वहाँ जा कर पता चला कि बॉलीवुड के मशहूर स्टार भी आने वाले हैं।
हीरोइन तो 12 बजे के करीब आ गई, मगर हीरो नहीं आया था अभी। थोड़ी देर में अनाउंसमेंट हुई कि बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता आ गए हैं, और थोड़ी ही देर में स्टेज पर आएंगे।

मैंने अपने पति से गाड़ी की चाबी मांगी, ताकि मैं अपनी दूसरी ड्रेस गाड़ी से ला कर पहन सकूँ।

ड्रिंक्स के दौर चल रहे थे, तो 2 टकीला शॉट और एक वाइन का ग्लास मैं पी चुकी थी। मौसम पूरा बना हुआ था, मैं पूरी मस्ती में थी। झूमते झूलते मैंने पार्किंग में पहुंची। अपनी गाड़ी ढूंढ कर मैं उसके अंदर जा बैठी।

आपको एक राज़ की बात बताती हूँ, मैं कभी कभी सिगरेट भी पी लेती हूँ। मैंने अपने पर्स से सिगरेट का पैकेट निकाला और एक सिगरेट सुलगा ली, और कार में बैठ कर ही कश लगाने लगी। तभी मेरे सामने से एक बहुत बड़ी कोई इंपोर्टेड कार गुज़री, उसके पीछे दो तीन और बड़ी बड़ी गाड़ियाँ निकली।
कुछ आगे जा कर सब गाड़ियाँ पार्क हो गई, ये शायद उसी फिल्म स्टार का काफिला था।

कुछ लोग तो उसके साथ ही चले गए, मगर एक गाड़ी में से 5 हट्टे कट्टे नौजवान बाहर निकले। क्या कद्दावर नौजवान थे, कोई भी 6 फीट से का नहीं था, और उसी हिसाब से उन के कसरती बदन। मैं तो उनको देखती ही रह गई।
उन्होंने गाड़ी से अपनी दारू की बोतल निकाली और गाड़ी के बोनेट पर ही रख कर उन्होंने अपनी महफिल जमा ली।

उस दिन मेरी चूत में जैसे बिना छूये पानी निकल आया हो। मेरे मन में ये विचार बिजली की तरह कौंधा, अगर ये 5 लोग किसी, निरीह, अबला, अकेली लड़की को पकड़ ले तो, ये तो चोद चोद कर उसकी चूत का बाजा बजा दें।
फिर मैंने सोचा, किसी लड़की का क्यों, मेरा क्यों नहीं। पर अब ये नहीं पता के ये लोग ऐसा कुछ करेंगे भी या नहीं। बॉडी बिल्डर लोग अक्सर सेक्स से परहेज करते हैं, ताकि उन की बॉडी को नुकसान न हो।

मगर अब मैं चुदासी हो चुकी थी, और मैंने सोचा कि एक चांस तो लेकर देखना चाहिए, अगर ये मान गए तो मेरी तो बल्ले बल्ले हो जाएगी।

मैं अपनी कार में ही बैठी उनको देखती रही। एक सिगरेट खत्म हुई तो मैंने दूसरी लगा ली, मैं वेट कर रही थी, उनको दो दो पेग हो जाने का। सबके सब आधी बाजू की ब्लैक टी शर्ट और ब्लैक ही जीन्स पहन रखी थी। एक दूसरे से हँसते मजाक करते, वो बड़ी खुशी से एंजॉय कर रहे थे।

जब सब लोग अपना तीसरा पेग पी रहे थे, तब मैं कार से निकली। थोड़ी तो मुझे चढ़ी हुई थी, थोड़ी सी मैंने एक्टिंग की. मैं अपनी ब्लैक साड़ी संभालते हुये उनके पास पहुंची, तो वो सब मुझे देख कर थोड़ा संभल गए।
पहले सब ने एक दूसरे को देखा, फिर एक ने मुझसे पूछा- क्या हम आपकी कोई मदद कर सकते हैं मैडम?
मैंने उनकी और देख कर कहा- कौन सी पी रहे हो?
एक ने बोतल उठा कर दिखाई और बोला- ब्लैक डॉग, आप को चाहिए?
मैंने कहा- ब्लैक डॉग तो तुम सारे हो, अगर मैं हाँ कह दूँ , तो क्या सब मुझे मिल जाओगे?

उनके तो चेहरे के रंग बदल गए। एक बोला- अगर आप हमारे साथ पेग लगाएँ, तो मिल भी सकते हैं।
मैंने कहा- तो डालो एक फिर!
उन सब ने अपने अपने गिलास खत्म किए और फिर नए सिरे से गिलासों में शराब डाली गई, इस बार मेरा भी एक गिलास बनाया गया। सबने चीयर्ज कह कर गिलास उठाए, और एक एक घूंट भरी।

एक बोला- मैडम, आप ऊपर पार्टी में नहीं गई, वहाँ भी तो दारू मिल रही है।
मैंने कहा- मुझे वो नहीं, ये पार्टी ज़्यादा अच्छी लगी, ब्लैक डोग्स के साथ!
तो एक बोला- हाँ, हमारी पार्टी भी बेरंग थी, अच्छा हुआ एक ब्लैक बिच भी आ गई।

सब तो हंस पड़े पर मैं गंभीर रही और उस से बोली- तूने मुझे बिच कहा, कुतिया कहा; हाँ, मैं कुतिया हूँ, और मुझे कुत्ते पसंद हैं; तुम जैसे तगड़े, दमदार कुत्ते।
हालांकि मैंने संयमित भाषा का प्रयोग किया था, मगर मेरी बात वो समझ गए।

एक बोला- तो फिर क्यों न कुत्ते कुतिया वाला खेल खेला जाए?
मैं तो खैर आई ही इसी लिए थी।

एक लड़का आगे बढ़ा और उसने मुझे अपने कंधे पर उठाया और पार्किंग के एक अंधेरे कोने की ओर ले गया। मैंने जान बूझ कर ऐसे एक्टिंग की जैसे मैं उसके इस तरह उठा कर ले जाने से खुश नहीं हूँ, मैंने उसके कंधे और पीठ पर बहुत बार मारा- छोड़ दे हरामी मुझे जाने दे, तेरे घर में माँ बहन नहीं है क्या?
वो बोला- माँ है, बहन भी है, पर तेरे जैसे छिनाल नहीं है, जिसको मैं चोद सकूँ।

उस की बात सुन कर तो मेरे मन में लड्डू फूट पड़े; मैंने फिर भी उसको मना किया, अपने पाँव पटके, मेरे सैंडल उतर कर पता नहीं कहाँ गिर गए।

इंडियन भाभी की चूत चुदाई की यह इंडियन सेक्स स्टोरी जारी रहेगी.
आपको मेरी कहानी पसंद आ रही है या नहीं, मुझे मेल करके अपने विचार बताना न भूलना।
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कहानी का अगला भाग : मेरी कामुकता, मेरे तन की प्यास-2