ग्रुप सेक्स का ऑनलाइन मजा-3

(Group Sex Ka Online Maja Part-3)

अब तक की इस सेक्स स्टोरी के पिछले भाग
ग्रुप सेक्स का ऑनलाइन मजा-2
में आपने जाना था कि मुनीर तारा और माइक का थ्री सम सम्भोग चल रहा था, जिसे मैं ऑनलाइन देख रही थी. मुनीर लिंग चूस रही थी और माइक मुख मैथुन का मजा ले रहा था.

अब आगे..

उधर तारा भी रुकने का नाम नहीं ले रही थी, उसने तो जैसे मुनीर की योनि से मुँह ही चिपका लिया था और ऐसे चाट रही थी जैसे पूरी योनि को खा ही जाएगी. मुनीर अब व्याकुल हो चली थी उसने तारा को हल्के धक्के से दूर कर दिया. फिर वो माइक का लिंग अपनी ओर खींचते हुए बिस्तर पर चित्त लेट गयी. माइक भी मुनीर की इच्छा को समझते हुए बिस्तर पर चढ़ गया. उसने मुनीर की टांगें फैलाईं और मुनीर के ऊपर चढ़ कर मुनीर को चूमने लगा.

मुनीर भी बराबर तरीके से उसका साथ देने लगी. जैसे जैसे माइक की हरकतें बदलती गईं, वैसे वैसे मुनीर भी अपनी टांगों के जोर से माइक को अपनी बांहों के कैद में जकड़ती गई.

मैं भी अब तक समझ गयी थी कि मुनीर की हालत अब बहुत खराब हो चली है और वो जल्द से जल्द झड़ना चाहती है. आखिर मैं भी एक औरत हूँ, औरत की भावनाएं उसकी हरकतों से पढ़ सकती हूं. उनकी जो हालात थी, वो मेरी भी अब होने चली थी. मेरी योनि में भी नमी आने लगी थी. मैंने सोचा कि दोबारा पैंटी गीली न हो जाए, इसलिए मैंने पैंटी निकाल दी. पर अब पेटीकोट खराब होने का डर था तो मैंने साड़ी के साथ पेटीकोट ऊपर कमर तक उठा दिया, पर जैसे ही ठंडी हवा लगी. मेरा बदन सिहर गया. अब तो मेरे मन में भी माइक की लालसा होने लगी.

तभी मैंने देखा कि माइक ने अपना हाथ नीचे ले जाकर लिंग को पकड़ा और मुनीर की योनि में घुसाने का प्रयास करने लगा. थोड़ा टटोलने के बाद माइक को मुनीर की योनि का द्वार मिल गया. बस माइक ने फिर देर न करते हुए हाथ बाहर हटाया और मुनीर के कंधों को पकड़ एक जोरदार झटका दिया. मुनीर की जैसे सांसें ही रुक गईं. फिर उसने एक लंबी सांस को छोड़ा.

मैं यकीन से कह सकती हूं कि उस जोर के झटके में माइक का लिंग की चोट जरूर मुनीर की बच्चेदानी में लगी होगी, वरना किसी भी औरत की हालत ऐसी नहीं होती.

माइक ने रुक कर मुनीर के होंठों को चूमा, फिर मुँह से मुँह लगा कर चूमते हुए.. फिर से उसने करीब आधा लिंग बाहर खींचा और फिर से दोगुनी ताकत से झटका मार दिया. इस बार तो मुनीर ऐसे चीखी, जैसे उसकी जान ही निकल गयी हो. वो थोड़ा सामान्य होती, इससे पहले ही माइक ने जोर जोर के 10-15 धक्के पूरी ताकत से मार दिए.

मुनीर ने उसे धीरे करने की प्रार्थना की. माइक और मुनीर अंग्रेज़ी में ही बातें करते थे, मैं बस अनुवाद कर रही हूँ, हालांकि दोनों टूटी फूटी हिंदी भी बोलते थे.

मुनीर की बात सुनकर माइक थोड़ी देर रुका, तब मुनीर ने कुछ सांसें लीं. फिर माइक ने सामान्य गति के घोड़े दौड़ाने शुरू किए. मुनीर अब पूरा मजा लेने लगी. माइक उसे धक्के मारते जा रहा था और मुनीर मदमस्त होकर सिसकारियों भरी आवाजें निकालते हुए माइक को कभी चूमती, कभी उसके सीने को कचोटती, कभी हाथों बांहों को दांतों से काटती, कभी टांगों से उसे जकड़ने का प्रयास करती. हालांकि मुनीर अपनी टांगों में माइक को जकड़ने में असमर्थ रहती, फिर भी उसकी योनि की गुदगुदाहट उसे प्रेरित जरूर कर रही थी.

तारा बगल में बैठ उन्हें देख और हाथों से सहलाने का काम कर रही थी.

बीस मिनट तक एक ही अवस्था में संभोग के बाद मुनीर चीखने लगी और फिर उसने पूरी ताकत से माइक को पकड़ लिया. माइक ने धक्के ऐसे मारने शुरू कर दिए कि उसके धक्कों की एक एक ठोकर मुनीर की योनि की गहराई में जाने लगा. मुनीर ने मुँह अब बन्द कर लिया और आवाजें उसकी नाक से निकलने लगीं. माइक जब जब धक्का मारने के लिए लिंग को थोड़ा बाहर करता, मुनीर अपनी कमर खुद उठा देती. ऐसा प्रतीत होता था.. जैसे मुनीर लिंग को अपनी योनि से बाहर ही नहीं जाने देना चाहती थी.

कुछ पलों में मुनीर का बदन थरथराने लगा. उसने ‘ओह ओह आह आह..’ की आवाजें निकालने के साथ माइक को पूरी ताकत से अपने ऊपर लिटा लिया और कमर उठाते उठाते पानी छोड़ते हुए झड़ने लगी. माइक भी पूरा समर्थन देता रहा और तब तक लिंग की चोटें मारता रहा, जब तक कि मुनीर पूरी तरह झड़ कर शांत न हुई. माइक ने तो मुनीर के शांत होने पर बीच बीच में एक एक धक्का मारता ही रहा जब तक मुनीर ने अपनी सांसों पर काबू न पा लिया.

मुनीर का इस तरह से झड़ना मुझे और ज्यादा व्याकुल कर रहा था. मेरी योनि तो खुद इतनी गीली हो चुकी थी कि माइक और मुनीर के संभोग के दौरान ही मुझे लगा कि मैं स्वयं झड़ जाऊंगी.
मैंने अपने नीचे हाथ लगा कर देखा, तो मेरी योनि खिल सी गयी थी, पंखुड़ियां और स्तनों के चूचक सख्त हो गए थे, योनि के ऊपर का दाना भी पत्थर सा हो गया था. योनि द्वार खुद खुल गया था और पानी सा भर गया था. मैंने अपनी योनि को एक तौलिये से साफ किया फिर मोबाइल पकड़ कर लेट गयी.

आगे देखा माइक अब मुनीर से अलग होने को था. उसने मुनीर के होंठों को चूमा और उससे अंग्रेज़ी में पूछा कि क्या वो झड़ गयी? मजा आया?
मुनीर ने उत्तर दिया- हाँ बहुत मजा आया, तुम ही वो इंसान हो, जो समझता है कि मुझे क्या चाहिए. तुम कमाल के होते हो, जब मेरे अन्दर होते हो. मैं तुम्हारी मर्दानगी को अपनी योनि के रास्ते मेरे भीतर आते हुए महसूस कर सकती हूं.. आई लव यू..

ये कह कर दोनों एक दूसरे को चूमते हुए अलग हुए. माइक भी थका हुआ लग रहा था, इतनी उम्र में बहुत कम ऐसे मर्द होते है, जिनकी ताकत इतनी होती है और संभोग क्रिया में तत्पर हों.. वरना कोई एक मर्द दो औरतों को संतुष्ट कर दे, ये छोटी बात नहीं होती.

माइक जैसे ही पीछे हट के उठा और तकिये के सहारे लेटा, मुनीर उठते हुए ही तारा को होंठों को चूमते हुए बोली- मजा गया, माइक कमाल का मर्द है.
तारा ने भी उत्तर दिया- हाँ वो लाजवाब है.. मैंने उसे महसूस किया है, दो बार मैं भी झड़ चुकी हूं.

कुछ देर तक मुनीर, माइक और तारा के बीच अंग्रेजी में संवाद चले, जो मैं आपके साथ साझा करती रहूँगी.

वे तीनों बड़े ही खुश लग रहे थे, मानो उन्होंने कोई युद्ध जीत लिया हो. वो खिलखिला रहे थे, मुस्कुरा रहे थे और उनके बीच संवाद भी चल रहा था. मुनीर और तारा एक दूसरे के चेहरे को निहारते, चूमते सहलाते बातें करने लगे.

मुनीर- मैं खुद झड़ गई, पर ये कमाल का था, तुमने मेरे चरम सुख का आनन्द दोगुना कर दिया.
तारा- मुझे ख़ुशी है कि तुम्हें मेरा साथ पसंद आया, तुम बहुत ही कामुक महिला हो. तुम्हारा हर एक स्पर्श मेरे बदन पर अंगारे बरसा देता था.
मुनीर- मैं इतनी आसानी से कभी नहीं झड़ती.. पर तुम्हारे मुँह में तो जैसे जादू है.. और रही सही बाकी की कसर माइक ने पूरी कर दी, उसने तो मुझे पूरी तरह से निचोड़ ही दिया. मैं अब शान्ति से सो सकती हूं.

माइक- हाँ तारा कमाल की लड़की है, उसकी उत्तेजना मुझे हमेशा जोश दिलाती रही.
तारा- तुम भी कुछ कम नहीं हो माइक.. जरा देखो तो.. अब भी तुम्हारा लिंग तना हुआ है.
माइक- हाँ अभी इसे और चाहिए. इसकी जरूरत पूरी नहीं हुई है.
तारा- तो देर किस बात की है.. माइक तुम्हारे सामने 2-2 योनियां खुली पड़ी हैं.. जो तुम्हें कभी मना नहीं करेंगी, बल्कि स्वागत करेंगी.. ही ही ही ही ही.
मुनीर- मैं फिलहाल थोड़ा आराम करूँगी.
तारा- ओह्ह माइक लगता है.. तुमने तो मुनीर की हालत खराब कर दी.. ही ही ही.
मुनीर- अकेले माइक ने नहीं.. बल्कि तुमने भी तारा.. ही ही ही ही
माइक- हाँ सही कहा, वरना मैं हमेशा मुनीर के साथ उसको झाड़ने के प्रयास में थक के चूर हो जाता हूं.. हा हा हा हा.
तारा- क्या सोच रहे हो माइक आ जाओ.. मुझे आज चबा ही लो.

ये उत्तेजक शब्द सुनते ही माइक तारा के ऊपर किसी भूखे शेर की तरह झपट पड़ा.. और मुनीर जोर जोर से हंसने लगी.

वाकयी उनकी ये कामक्रीड़ा और बातें सुन कर तो अब मुझे ऐसा महसूस होने लगा कि काश कोई मेरे आस पास होता तो मैं भी अपने जिस्म की अग्नि शांत कर लेती.. पर ये संभव न था. इस वक्त तो बस मेरी उंगलियां ही मेरा सहारा थीं.

मैंने अपनी बाएं हाथ को अपनी योनि पर फेरना शुरू कर दिया. आह.. मुझे कितना आनन्द आ रहा था. मैंने खुद अपनी जांघें इस कदर फैला दीं कि पूरी योनि ही खुल गयी. मैंने अपनी बीच की उंगली योनि में घुसाई तो महसूस हुआ कि अन्दर रस से मेरी योनि लबालब भरी है और बहुत ही चिपचिपी हो चुकी थी.

उधर माइक ने तारा को अपनी बांहों में जकड़ा और उठा कर बिस्तर से नीचे ले गया. उसने तारा को बिस्तर के बगल में खड़ा कर दिया और एक टांग उठा कर बिस्तर पे टिका दिया. इस तरह तारा की जांघें खुल गईं. अब माइक ने सामने आते हुए लिंग पे हाथ से ढेर सारा थूक मला और एक हाथ से तारा की कमर पकड़ कर झुक कर लिंग योनि में घुसने का प्रयास किया. जब थोड़ा लिंग अन्दर घुसा, तो उसने दोनों हाथों से तारा की कमर को पकड़ कर धक्के लगाने का प्रयास किया, पर लिंग फिसल कर योनि से अलग हो गया.

तब तारा ने एक हाथ में थूक लगा फिर से अपनी योनि में मला और लिंग को पकड़ कर सुपाड़े तक अपनी योनि में घुसा लिया. फिर उसने अपना हाथ हटा कर माइक को दोनों हाथों से पकड़ा. उसके गले में डाल कर अपनी कमर को माइक की तरफ आगे कर दिया. इससे लिंग थोड़ा और घुस गया. लिंग घुसते ही माइक ने धक्का दिया और लिंग पूरी तरह तारा की योनि की गहराई में समा गया. दोनों ने एक दूसरे को सहज तरीके से पकड़ा और फिर संभोग की क्रिया को आरंभ कर दिया.

माइक थोड़ा लंबा था, सो उसे अपनी कमर झुका के धक्के लगाने पड़ रहे थे, पर मुझे नहीं लगता उनके उमंग में कोई बाधा पड़ रही थी. अब वो दोनों तो मजे लेने लगे थे. दोनों न केवल धक्कों तक सीमित थे, बल्कि एक दूसरे के स्तनों, कूल्हों, होंठों गालों को दबोचते, सहलाते काटते हुए संभोग कर रहे थे. कुछ मिनट में दोनों की कमरें एक साथ चलने लगे लगीं. लिंग और योनि का अनोखा मिलाप फिर से दिखने लगा. थोड़ी और देर संभोग के बाद तारा झड़ने सी होने लगी. माइक ने तारा की हरकतों से भांप लिया कि तारा झड़ने वाली है. उसने दोनों हाथों से तारा के कूल्हों को पूरी ताकत से पकड़ा और ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिए. बस 4 -5 मिनट के धक्कों में ही तारा लड़खड़ाने लगी और झड़ते हुए अपना संतुलन खोने लगी. वो बिस्तर पर गिरने लगी और एकाएक तारा और माइक बिस्तर पर गिर पड़े. पर दोनों अलग नहीं हुए.

तारा बिस्तर पर गिरते गिरते पूरी तरह से झड़ गयी, पर माइक हार मानने वाला नहीं था. उसने उसे उसी अवस्था में खुद को उसके ऊपर चढ़ा लिया और धक्के लगाता ही रहा.

माइक तारा को संभालने का मौका नहीं दे रहा था. पता नहीं माइक के मस्तिष्क पर क्या था, शायद वो थक चुका था और स्खलित होना चाहता था. पर माइक के लिए इतना आसान नहीं था, वो हम औरतों के बिलकिल विपरीत था. ऐसा लगता था कि वो पहले ही एक बार झड़ चुका था, इसलिए उसको दोबारा झड़ने में समय लगेगा.

तारा ने रुकने को विनती की, पर माइक धक्के मारते जा रहा था. थोड़ी देर में उसे समझ आया कि थोड़ा सुस्ता लिया जाए.. वरना और ज्यादा थक सकता है. सो उसने आसन बदलने को कहा.

माइक तारा के ऊपर से उठ कर मुनीर के पास लेट गया और मुनीर उसे सहलाने ओर प्यार करने लगी. तारा ने भी अपने दम में दम भरा और पानी पीने चली गई. माइक ने जोश ठंडा न हो जाए.. इसलिये उसने मुनीर से इशारा किया कि वो उसके लिंग को हिलाती रहे.

मुनीर ने उसके मुँह में अपना स्तन दे दिया और लिंग हिलाती रही. वाकयी माइक का लिंग काफी मजबूत दिख रहा था और ऐसा मोटा लिंग मैंने बस ब्लू फिल्मों में देखा था और आज भी कैमरे पे ही देख रही थी.

तारा जब तक आती, माइक ने मुनीर को पकड़ अपने ऊपर बिठा लिया और हाथ से पकड़ लिंग को उसकी योनि में घुसा दिया. माइक की बेसब्री से पता चल रहा था कि वो कितना उत्तेजित था. सही कहा जाए तो एक उत्तेजित मर्द के भीतर बहुत सारी ताकत एकाएक आ ही जाती है. उसने मुनीर की कमर थोड़ी ऊपर की और नीचे से ही जोर लगानी शुरू कर दी. धक्के इतनी तेज और ताकत से लग रहे थे कि हर धक्के पर थप थप थप की आवाजें निकल रही थीं.. और मुनीर कराह रही थी. माइक को इस बात की जरा भी चिंता नहीं थी, वो बस धक्के मारे जा रहा था.

तारा भी अब वापस आ चुकी थी और अब वो सामान्य दिख रही थी.

पर मैं जानती थी कि वो ज्यादा देर शांत नहीं रुकेगी, जब तक उसके सामने मर्द गिर ना जाए. वो हार मानने वालों में से नहीं थी. उधर माइक तेज़ी के साथ मुनीर की धज्जियां उड़ाये जा रहा था और तारा उन्हें देखकर पूरा मजा ले रही थी.

मुझे माइक की अच्छी बात ये लगी कि वो लगातार धक्के मारता रहता था.. जोश कम होने का समय नहीं देता. अधिकांश मर्द थोड़ा थक जाने पे रुक जाते हैं और सुस्ताने लगते हैं. ऐसा करने से संभोग के दौरान जो सनसनी रहती है, वो कभी कभी धीमी हो जाती है और वैसी सनसनी फिर से पैदा करने के लिए दोबारा मेहनत करनी पड़ती है. इसमें काफी ऊर्जा बर्बाद होती है. इसलिए अगर मर्द और औरत एक अच्छी गति और सनसनी के साथ संभोग कर रहे हों, तो उन्हें रुकना नहीं चाहिए क्योंकि इसी समय दोनों के बदन एक साथ काम करते हैं. फिर जब चरम सुख मिलता है, तो उसकी अनुभूति ज्यादा होती है.

अन्यथा दोनों को साथ झड़ने का बहुत कम संभावना रह जाती है. संभोग का असली मजा भी तो तब ही आता है, जब साथ मिलकर चरम सुख की अनुभूति हो, शिखर पे साथ चढ़ने का मजा ही अलग है.

उन दोनों को सम्भोग करते देख कर तारा के चेहरे फिर से वासना भरी मुस्कान दिखी. मुनीर की तो हालत खराब थी. ऐसे धक्के तो 30 साल की औरत को रुला दें, मुनीर तो काफी उम्रदार थी.. वो और नहीं झेल सकती थी. उसने माइक को रुक जाने की विनती शुरू कर दी. ये देख तारा ने हाथों में बहुत सारा थूक लगाया और अपनी योनि को मलनी शुरू कर दी. उसने दो उंगलियों को योनि में घुसा कर योनि को अच्छे से अन्दर बाहर किया, फिर मुनीर के पास जाकर उसे प्यार से चूमते हुए अलग होने को कहा.

मुनीर के अलग होते ही तारा माइक के ऊपर घोड़े पे बैठने के अंदाज़ में बैठ गयी और लिंग को हाथ से पकड़ योनि की दिशा दिखा बैठ गयी. माइक का लिंग वैसे ही चिपचिपा दिख रहा था और चमक भी रहा था, ऊपर से तारा की योनि थूक से गीली थी. एक हल्के से दबाव से ही लिंग सट से योनि भीतर चला गया.

तारा ने अपने हाथ माइक के सीने पे रखा, टांगों को सही अवस्था में किया. माइक ने भी तारा को पकड़ अपनी ओर खींचा और स्तनों को मुँह से चूसना शुरू किया.

सब सही तरीके से होते ही तारा ने अपनी कमर उचकानी शुरू की. लिंग बड़े प्यार से उसकी योनि में भीतर बाहर होने लगा. मेरे मोबाइल पे तारा के बड़े बड़े कूल्हे नाच रहे थे. जब जब वो उठती, उसके चूतड़ सिकुड़ से जाते, पर बैठती.. तो थलथल करते हुए चूतड़ और बड़े और मोटे दिखते. हर बैठक पे थाप थाप की आवाजें आ रही थीं. वो सच में बहुत जोर जोर से धक्के मार रही थी, वो बहुत ज्यादा कामुक हो चुकी थी और उसे मजा भी बहुत आ रहा था.

माइक का मजा तो दोगुना हो गया होगा. मेरे खयाल से उसे वो सब वापस मिल रहा था, जो उसने कुछ देर पहले तारा को दिया था.

दस मिनट के संभोग के बाद दोनों की सांसें तेज़ हो चली थीं और तारा धक्कों के साथ कराह और सिसकारी भरने लगी थी. तारा ने कुछ देर और मेहनत की और फिर बड़े ही उग्र और मादक शब्दों में पीछे से सम्भोग करने को कहने लगी.

दोनों ने तनिक भी समय नहीं गंवाया और फुर्ती के साथ अलग होकर तारा ने कुतिया की भांति आसन ले लिया. माइक ने भी तुरंत उसके पीछे आकर अपना लिंग योनि में घुसा दिया.

तारा ने दोनों हाथों को बिस्तर पे रख खुद को सहारा दिया और धक्के सहने को तैयार हो गयी. तारा को शायद ये पता था कि माइक अब पूरी ताकत से धक्के मारेगा. उसने भांप लिया था कि माइक स्खलन से दूर नहीं है.

माइक ने लिंग घुसाते ही उसने तारा की कमर पकड़ ली और धक्के मारने शुरू कर दिए. उसने ये भी नहीं देखा कि तारा सहज अवस्था में है या नहीं, वो तो बस अब चरम सुख की ओर अग्रसर था.

माइक के धक्के किसी मोटर के चलने के समान थे, तारा उसके हर धक्के पे हिलती और उसके सुडौल स्तन झूलने लगते. दोनों के माथे से पसीना बहने लगा था और दोनों के चेहरे पे अब शिकन दिखने लगी थी. अब वो चरम सुख के समीप आते जा रहे थे. उन्हें देख कर मेरी हालत भी बुरी होती जा रही थी, मेरे हाथ भी तेज़ चलने लगे थे.

माइक बहुत थक गया था. धक्के मारते मारते वो चेहरे का भाव ऐसे बना रहा था.. जैसे बस अब कुछ देर और लक्ष्य समीप है.. बस और थोड़ी देर. तारा की भी अब धक्कों को बर्दाश्त करने की ताकत खत्म सी हो रही थी, पर उसने भी जैसे ठान रखी थी कि जब तक माइक स्खलित नहीं होगा, वो हार न मानेगी. उसने दोनों हाथों की मुठ्ठियों में चादर को कस के दबोच रखा था. चेहरा दर्द और पसीने से भर गया था. वो ‘ओह्ह आह आह ओह्ह ह्म्म्म ह्म्म्म..’ जैसी मादक और उत्तेजित कर देने वाली आवाजें निकाल रही थी.

थोड़ी देर और धक्के लगे कि तारा ने सिसकारी भरे शब्दों में माइक को उकसाने वाले शब्द बोलने शुरू कर दिए.

‘ओह्ह और जोर से.. हहहह ह्म्म्म रुकना.. मत मारते रहो… और अन्दर.. जोर से.. ओह्ह ओह्ह ओह्ह.. हाँ वही.. यस.. ओह्ह ओह्ह ह्म्म्म हम्म..’

उसकी ऐसी आवाजें सुन कर तो माइक जैसे दानव बन गया. वो बहुत ज्यादा थक गया था, पर उसने धक्कों की रफ्तार में, न जोर में.. कोई कमी आने दी. खुद की हालत को देखते उसने अपना पूरा वजन तारा की पीठ पर दे दिया. माइक का वजन बहुत ज्यादा था, तारा बिस्तर पर पूरी तरह पेट के बल गिर पड़ी. पर माइक को इसकी कोई परवाह नहीं थी. उसने एक हाथ बिस्तर पर रख कर खुद को सहारा दिया. दूसरे हाथ से तारा का एक स्तन नीचे से दबोच लिया, जिससे तारा पर माइक का भार थोड़ा कम हुआ. अब उसने फिर से उसी रफ्तार में धक्के मारने शुरू कर दिए.

तारा भले तकलीफ सह रही थी, मगर उसकी उसकी योनि को जो सुख माइक के लिंग के घर्षण से मिल रहा था, वो उस तकलीफ के आगे कुछ भी नहीं था. उसका चेहरा धक्कों को सहते हुए दर्द से ऐसे भर गया था.. मानो अब रो पड़ेगी, पर उसके मुँह से निकलती सिसकारी, कराह और उत्तेजित बातें बता रही थीं कि वो संभोग सुख में डूब कर गहराई में गोते लगा रही है और अब स्खलित होने को है.

मैं उनका संभोग देख अपनी योनि को अपने हाथों से और भी तेज रगड़ रही थी. मेरे भी मन में जैसे लगने लगा कि अब और नहीं होगा, बस झड़ जाऊँ. अचानक माइक ने अपना हाथ बिस्तर से हटा कर तारा को नीचे से हाथ डाल उसके कंधों को ऐसे पकड़ लिया, जैसे वो कहीं भाग न जाए. तभी माइक ने दो जोरदार धक्के मारे, जो उसकी योनि की बच्चेदानी तक गए होंगे.. तारा एकदम से चिहुंक उठी. तभी माइक फिर से पूरी ताकत से धक्के मारने लगा. उसके धक्कों में इतनी ताकत थी कि तारा खुद को रोक न पाई और उसका पूरा बदन थरथराने लगा.

उसने पानी छोड़ना शुरू कर दिया.. पूरी ताकत से चादर को मुठ्ठी में भर लिया.

तारा चीखने सी आवाजें निकालते हुए झड़ गयी. अभी तारा पूरी शांत होती कि माइक ने भी उसकी योनि में अपना लावा उगलना शुरू कर दिया. माइक का हर धक्का अब रुक रुक कर कम होता चला गया. दोनों के चेहरे पे दर्द, थकान और सुकून था. धीरे धीरे माइक और कमजोर से धक्के मारता गया और तारा की भी पकड़ ढीली पड़ती चली गयी. माइक ने एक और आखरी हल्का धक्का दिया और तारा के ऊपर अपना पूरा वजन गिरा दिया.

दोनों की आंखें बंद थीं, तारा का पूरा शरीर बिस्तर पर.. यहां तक कि सिर भी बिस्तर पे गिर गया था. उसके पीठ पर माइक सवार था, उसके सिर पे माइक का सिर था. दोनों का हांफना कम होने लगा.

उनका ऐसा कमरतोड़ संभोग देख मेरा मुझे भी नहीं रहा गया और मैंने भी दो उंगलियों को अपनी योनि में घुसाया और जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगी. कुछ ही पलों में मेरे हाथ से मोबाइल छूट गया और मैंने तकिये को, जो मेरे सिर के नीचे था दबोच लिया. मैंने भले टांगें फैला रखी थीं.. मगर ऐसा महसूस हुआ जैसे कि मेरा खुद का टांगों पर बस नहीं रहा. मैं चरम सीमा तक पहुंच गयी थी. मेरी नाभि से लेकर नीचे योनि द्वार तक अजीब सी सनसनाहट होने लगी. मेरा पूरा बदन टूटने सा लगा.

मेरी जांघों में अकड़न होने लगी और वो खुद ही आपस में चिपक गईं.

पर मैं अपनी योनि तब तक रगड़ती रही, जब तक कि मैं पूरी तरह स्खलित न हो गयी. मैं पूरी तरह झड़ गयी और धीरे धीरे शांत होते चली गई. मैं एक हाथ जांघों के बीच योनि में ही रखे बदन को सिकोड़े कब सो गई, मुझे पता ही नहीं चला.

सुबह 5 बजे जब उठी तो बड़ा विचित्र सा लग रहा था, क्योंकि कई सालों के बाद मैंने हस्तमैथुन किया था. मैं सोचने लगी कि क्या मेरी काम की अग्नि इतनी तीव्र हो गयी थी कि मुझे एक दिन में दो बार हस्तमैथुन करना पड़ा, क्या मैं भीतर से कमजोर हो गई हूँ. जो भी हो जीवन में आनन्द बहुत है इसका हर पल जीने में मजा आता है.

आपके कमेंट्स क्या होंगे ये आप ही समझिए.
आपकी सारिका कंवल
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