डॉक्टर साहिबा का अतृप्त यौवन-3

(Doctor Sahiba Ka Atript Yauvan- Part 3)

दोस्तो, आपने मेरी पिछली कहानियों
डॉक्टर साहिबा का अतृप्त यौवन-1
डॉक्टर साहिबा का अतृप्त यौवन-2
को बहुत सराहा. आप सबका यही साथ मुझे अपनी कहानियाँ लिखने में मदद करता है.

उस दिन नेहा के घर से आकर में सो गया क्योंकि सर बहुत दुःख रहा था और चुदाई की वजह से काफी थकान भी थी. मुझे लगा कि दवाई ले लेनी चाहिए. मैंने घर पर बहुत ढूँढी, पर दवाई नहीं मिली.

इसी दौरान मैंने पॉकेट में देखा तो माया और निशा के कार्ड पड़े थे. माया का पेशा देखा तो वो भी डॉक्टर ही थी और उसका क्लीनिक भी था. मैंने सोचा कि इससे ही दवाई लेता हूँ.

मैं माया के क्लीनिक गया और नाम दर्ज करवाया. तभी थोड़ी देर में मेरा नंबर आया.. मैं अन्दर गया तो माया थोड़ी चौंक गई- तुम यहाँ?
मैं- तबीयत ठीक नहीं है माया.. कल पार्टी की वजह से थोड़ी थकान है.
वो- ओह.. वो तो मुझे भी थोड़ी थी. पर बाद में तुम दिखे ही नहीं.
मैं- मैं बोर हो रहा था इसलिए निकल गया.
वो- हाँ हाँ पता है, नेहा के साथ गए थे ना?

मैं- जल्दी करो माया, दूसरे पेशेंट भी राह देख रहे हैं.
वो- ओके.. आज पार्टी में आ रहे हो कि..?
मैं- किस पार्टी में?
वो- नेहा की बर्थ-डे पार्टी में.. उसने बताया नहीं?
मैं- ओह वो.. देखता हूं यार, टाइम होगा तो जरूर आऊंगा.

मैं वहां से निकल गया. तभी नेहा का पार्टी में आने का कॉल आया. रात को रेडी होकर मैं पार्टी में चला गया.
मैं पार्टी में पहुँचा, तब तक निशा और माया भी आ चुकी थीं. दोनों कमाल की लग रही थीं. दोनों अपने हसबैंड के साथ आई थीं. स्लीवलेस ब्लाउज और रेड कलर की साड़ी में माया तो एक माया ही लग रही थी. निशा ने वाइट शर्ट और ब्लू जीन्स पहनी थी जिसमें उसका पूरा फिगर नजर आ रहा था.

हम सब बातें ही कर रहे थे, तभी बर्थ-डे गर्ल नेहा अपने पति के साथ आई, वो बड़ी ही क़यामत लग रही थी. उसने पिंक साड़ी पहनी थी और अपने पति के हाथ में हाथ डाल कर सभी से मिल रही थी.
मुझे ये देख के बहुत हँसी आ रही थी. वो क्यों? ये सब आप जानते हैं. मेरी सेक्स स्टोरी पढ़ कर जान लीजिएगा.

थोड़ी देर में केक काटा गया, नेहा ने केक अपने पति को खिलाया और फिर उसने नेहा को खिलाया. फिर हम सबने मुबारकवाद दी.
मैं- हैप्पी बर्थ-डे नेहा.
वो- थैंक्स जय.. तुमने तो कल ही गिफ्ट दे दी थी.
मैं- आज तो बहुत खूबसूरत लग रही हो. किस को मारने का इरादा है?
वो- अपने पति को और किस को?

डांस पार्टी शुरू होने वाली थी. तभी माया के पति को कॉल आया और वो जल्दी से चला गया और माया वहीं रह गई. थोड़ी देर में डांस पार्टी शुरू हुई. माया मेरे पास आई और बोली- आपको पार्टी डांस आता है क्या?
मैंने झूठ बोलते हुए कहा- पूरा नहीं आता.. तुम्हें आता है?
वो- हां, बहुत सरल है.. जब डांस पार्टी होती है तो मुझसे रहा नहीं जाता. पर आज मेरे पति का फ़ोन आया और वह चले गए.
मैं- तो आप मुझे सिखा सकती हो क्या?
वो- यस.. ऑफ कोर्स, पर मैं कहूँगी वैसा ही करना.. ओके!
मैं- ओके.
वो- पहले मेरा ये हाथ पकड़ो और उसे दूर ले जाओ, फिर मेरे इस हाथ को नजदीक से ही पकड़े रखो.

मैंने वैसा ही करने की एक्टिंग की और डांस शुरू हो गया.

मैं- ये तो कितना सरल है माया.
वो- तुम तो पहली बार में ही सीख गए.

हम डांस कर रहे थे और नेहा हमें देख रही थी और थोड़ा मूडलैस हो गई. मैं समझ रहा था.

मैं- तुम तो आज बहुत कातिल लग रही हो माया.. बहुत खूबसूरत भी.
वो- ओह थैंक्स.

तभी मैंने पीछे से उसकी कमर पकड़ ली और उसने मेरी, ऐसे ही हम डांस करते रहे. वो बहुत शर्मा रही थी. आधे घंटे में पार्टी खत्म हुई. सब जाने लगे तभी नेहा ने मुझे रुकने का इशारा किया.

वो- तुम माया के साथ डांस क्यों कर रहे थे?
मैं- ओहो.. जलन हो रही है.. तो फिर तुमने क्यों नहीं डांस नहीं किया. वो और मैं अकेले डांस देखकर क्या करते.. इसी लिए किया.
वो- आइंदा उसके साथ दिखना भी मत..!
मैं- तुम्हारा दिमाग ठीक नहीं है.. शकी होता जा रहा है.
वो- यहीं खड़े रहना.. मैं थोड़ी देर में आती हूँ.

ये कह कर गई और काफी देर के बाद भी वो नहीं आई. तब मैं फोन करने लगा. तभी पीछे से आवाज आई- कोई फायदा नहीं है.. वो नहीं आएगी.
मैंने देखा तो दो बड़े पहलवान जैसे लोग खड़े थे.. और हंस रहे थे.

मैं- आप लोग कौन हैं?
वो- इतनी भी क्या जल्दी है.. बताते हैं भाई.. नेहा का वेट कर रहा है तो आज तो तेरा कुछ नहीं होगा, तू चला जा.
मैं- क्यों क्या होगा?
वो- पता है मैडम का क्लिनिक कहाँ पे है?
मैं- हां, पता है.. अकबर नगर में है.
वो- तो बेटा, हमारा जो उस एरिया का डॉन है.. उसका दिल नेहा पर आ गया है और वो जब भी मन करता है.. तब वो आता है और बर्थ-डे पर तो पक्का आता है.
मैं- ये क्या कह रहे हो आप? आपका डॉन कहाँ है? नेहा तो अपने पति के साथ घर में ही है.
वो- अब तक तो उसने उस बेचारे को सुला दिया होगा.
मैं- मुझे देखना है, मुझे तुम पर विश्वास नहीं है.
वो- हां, चलो दिखाता हूँ. इसके मुँह पर पट्टी बांध रज्जाक.. ये साला कुछ बोले नहीं.. वर्ना बॉस का मूड बिगाड़ देगा.
मैं- अरे रुको, मैं पागल नहीं हूं कि कुछ बोलूंगा. मुझे शक तो था ही नेहा पर. किसी से भी चुदवाए, मुझे क्या?
वो- अच्छा ठीक है, पर मुँह खोला तो जुबान काट दूंगा.

फिर हम तीनों ने वहीं अलमारी के पास पोजीशन ले ली. नेहा और वो डॉन मुश्ताक दोनों कमरे में आए. मुश्ताक तो पहाड़ी बॉडी वाला लगता था.. दिखने में नार्मल था.

नेहा- मुश्ताक जानू.. अगले हफ्ते तो आए थे तुम.. और आज भी? मेरे पति के घर पर होते हुए?
वो- डार्लिंग आज तो तेरा बर्थ-डे है.. तो आज तो आऊंगा ही ना.
नेहा- बड़ी मेहनत से सुलाया है.. इनको जड़ी दी है.. अगर तुम्हें देख लेता तो?
वो- देख लेता तो क्या होता? शेर का क्या बिगाड़ लेता चूहा? तुम्हारे लिए तो उसे भी खत्म कर दूँ जानेमन.
नेहा- बस करो जान, तुम्हारी इसी बात पर तो मैं मरती हूँ मुश्ताक. तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकते हो.

मुश्ताक ने अपने होंठ नेहा के होंठ पर रख दिए और किस करने लगा. नेहा भी बहुत जोरों से उसे रिस्पांस दे रही थी. मुश्ताक ने नेहा को किस करते हुऐ उसकी साड़ी, पेटीकोट और ब्लाउज निकाल दिए और नेहा ने उसके कपड़े उतार दिए. अब नेहा सिर्फ ब्रा-पैंटी में थी और मुश्ताक सिर्फ निक्कर में था.

फिर दोनों स्मूच करने लगे. मुश्ताक नेहा के मम्मों को ब्रा के ऊपर से दबा रहा था.. और नेहा मुश्ताक का निक्कर नीचे करके उसके लंड को बाहर निकाल कर हिलाने लगी. मुश्ताक का लंड 8 इंच का होगा. उसका लंड लोहे जैसा बनकर खड़ा हो गया.

फिर नेहा की ब्रा भी उतर गई. मुश्ताक उसके मम्मों को बेरहमी से चूस रहा था और नेहा सीत्कार निकालने लगी थी- आह.. आह.. मुश्ताक चूसो इन्हें.. दबाओ इन्हें.. रगड़ डालो.
वो- हां जानेमन, आज तो मैं तुझे ऐसा गिफ्ट दूंगा कि तू पूरी जिंदगी याद रखेगी.
नेहा- वो क्या है मुश्ताक? आह बताओ ना..
वो- मेरे दो दोस्त भी तुम्हें चोदना चाहते है जानू.. मैं जब भी तुमसे मिलने आता हूं.. तो वो दोनों मुठ मारके ही काम चला लेते हैं.
नेहा- नहीं मुश्ताक, मेरे लिए तुम ही काफी हो.
वो- अबे रंडी.. मान जा साली प्यार से कह रहा हूँ तो मान जा.. वरना.. अब्दुल और रज़्ज़ाक दोनों अन्दर आ जाओ.

ये कहकर उसने अलमारी की ओर देखा. वो मुझे देखे, उसके पहले मैं नीचे झुक गया.

मैं- मेरे बारे में किसी को बताना मत.
अब्दुल- हां हां, मालूम है.

फिर वो दोनों अन्दर गए और दोनों अन्दर आ गए और अपने कपड़े उतार दिए.

अब्दुल नेहा के मम्मों को चूसने लगा और रज्जाक उसे किस करने लगा. मुझे तो लगा कि नेहा नखरे करेगी, पर वो तो इसमें भी अनुभवी निकली. वो बड़े मजे से तीनों से टक्कर लेने लगी.

फिर मुश्ताक नेहा की गांड के नीचे सर रख कर उसकी गांड चाटने लगा.

नेहा- तुम तीनों पागल कर रहे हो. कितना मज़ा आ रहा है.. अह.. बता नहीं सकती.. आह आह आउच..
रज्जाक- बहन की लौड़ी.. आज तो तेरे भोसड़े का भर्ता बना देंगे.. रंडी साली.
अब्दुल- क्या मम्मे हैं साली के.. छोड़ने का मन ही नहीं करता बहनचोद.
नेहा- तो फिर बना दो ना चुत का भर्ता और चूसते रहो मेरे मम्मों को.. किसने रोका है भड़वों.. आह..
मुश्ताक- चलो साली का बेंड बजा देते हैं. ऐसी पावर पैक चुदाई करते हैं.. जैसी इसने सोची ही नहीं होगी.

फिर तीनों नेहा के बदन से अलग हो गए और सभी ने अपनी जगह ले ली. मुश्ताक ने अपना लंड चुत में डाल दिया, रज्जाक ने गांड में लंड पेला और अब्दुल ने तो मुँह में लंड घुसेड़ दिया.

जब रज्जाक ने गांड में लंड डाला तो वो चीख पड़ी. फिर तीनों धीरे-धीरे अपने लंड का कमाल दिखाते गए.. और अपनी चुदाई की स्पीड भी बढ़ा दी.

नेहा बहुत गर्म हो गई.. पर कुछ बोल नहीं सकती थी. ऐसा लग रहा था मुश्ताक और रज्जाक के लंड एक-दूसरे से टकरा जाएंगे. नेहा चुदते हुए कराहती रही और वो तीनों भड़वे चोदते रहे.

फिर 15 मिनट के बाद…
रज्जाक और अब्दुल- हम दोनों झड़ने वाले हैं.
नेहा- ओहो, मेरे मुँह में माल निकाल दो.

फिर उन दोनों ने नेहा के मुँह को नहला दिया. नेहा का पूरा मुँह सफ़ेद हो गया जैसे क्रीम लगा दी हो. फिर बाद में मुश्ताक उसकी चूत में ही झड़ गया और चारों नीचे गिर गए.
नेहा- मुश्ताक, इन दोनों को बाहर भेज दो.. हम साथ में नहा लेते हैं.
वो दोनों बाहर चले गए. नेहा और मुश्ताक दस मिनट तक साथ नहाकर नंगे ही पलंग पर लेट गए. अब्दुल और रज्जाक वापस मेरे पास आ गए.

अब्दुल- कमाल की हसीना है ये बहनचोद, जितना भी चोदो, भूखी ही रहती है और हमें भी खुश रखती है.
रज्जाक- सही बोला तूने, एक दिन साली के घर में आकर पलंगतोड़ चुदाई करनी है.. रंडी की.
मैं- क्या बकते हो, अभी रिजल्ट निकलेगा तुम्हारा.

नेहा और मुश्ताक बातें करने लगे
मुश्ताक- मजा आया जान?
नेहा- तुम में जो दम है, वो तुम्हारे साथियों में नहीं है मुश्ताक, सच कहती हूं, तुम तो पागल बना देते हो.
मुश्ताक- हाँ मेरी जान.

मैं हंसते हुए बोला- तुम दोनों नापास हो गए हाहाहा..
अब्दुल- साला, हंस रहा है.. चल इसका गेम कर देते हैं.
मैं- मेरा गेम क्या करोगे करके, औरत का तो नहीं कर पाए. कुछ ऐसा करो कि ये दाग़ मिट जाए चूतियो!
रज्जाक- सही कह रहा है यार, दाग़ तो मिटाना होगा.

उधर..

नेहा- पता है मुश्ताक जब तुम मुझसे पहली बार मिले थे?
मुश्ताक- हां नेहा, तब मैं तुम्हारे क्लिनिक पर दवाई लेने आता था. तुम बड़े प्यार से मेरा इलाज करती थीं.
नेहा मुश्ताक के सीने पे हाथ फेरते हुए बोली- तब मुझे नहीं पता था कि ये बदमाश गुंडा है.. वर्ना दवाई नहीं देती.
मुश्ताक- मैंने जब तुमको देखा तुम पर मेरा दिल आ गया. मैंने सोच लिया था कि एक बार तो तुम्हें जरूर चोदूँगा. मैं रोज दवाई लेकर बाहर आकर फेंक देता था.
नेहा- साले भड़वे, बदमाश.

दोस्तो, मेरी इस ग्रुप सेक्स स्टोरी में मजा आया?
मुझे मेल कीजिएगा.
[email protected]

इस कहानी को पीडीएफ PDF फ़ाइल में डाउनलोड कीजिए! डॉक्टर साहिबा का अतृप्त यौवन-3