भाई बहन ननदोई सलहज का याराना-10

(Bhai Behan Nandoi Salhaj Ka Yarana- Part 10)

This story is part of a series:

मैं- तो कब रखा जाए सामूहिक चुदाई का कार्यक्रम?
सीमा- सेक्स कार्य में देरी कैसी? अगर रीना दीदी की चूत कल की चढ़ाई से सूजी नहीं है तो मैं तो आज ही तैयार हूँ।
रीना- अरे आने दो, दो दो लन्ड का वार … एक है भाई और एक है यार!

रीना और सीमा बेशर्मों की तरह हंसने लगी. आज उनकी बातें कुछ ज्यादा ही वासना भरी हुई थी और कल की चुदाई से वो दोनों कुछ ज्यादा ही खुल गयी थीं।
यह खुलापन, ये बिगड़ी बातें … यही तो याराना था और यही तो हमें चाहिए था।

सायंकाल को सामूहिक चुदाई का आयोजन होना था।

तो दिन भर की छोटी मोटी घटनाओं का बखान करने से बेहतर में आपको उसी समय ले चलता हूं जहाँ सामूहिक घमासान शुरू होने वाला था।

रात के खाने के बाद करीब 10 बजे:
हमें कमरे से बाहर रखा गया था क्योंकि हमें हमारी बीवियाँ सरप्राइज देना चाहती थी। शायद वे सामूहिक चुदाई के मंच को सजाना संवारना चाहती थी। वे दोनों मेरे कमरे में थी.

करीब 10:30 बजे दोनों की बीवियों ने हमें अंदर कमरे से आवाज दी और आने की अनुमति दी।

जब हम कमरे में प्रविष्ट हुए तो देखा

मेरे कमरे को दोनों बीवियों ने गुलाबों और मोमबत्तियों से सजा दिया था। पूरा कमरा मन्द मन्द सुगंध से महक रहा था। होम थिएटर के स्पीकरों में बहुत ही मधुर आवाज में रोमांटिक संगीत चल रहा था। फ्लैट की छत की लाइटिंग के रंग बिरंगे प्रकाश में बिछा हुआ पलंग ऐसा लग रहा था कि मानो किसी भव्य प्रोग्राम के लिए सजाया गया मंच। ये महिलाएं ही हैं जो किसी भी कार्य को अच्छी तरह पूर्ण करने की व्यवस्था में इस प्रकार के कार्य कर लेती है। जहां तक हम मर्दों की बात है, हमें तो ऐसे कार्यक्रम आयोजन से पहले केवल चूत ही चूत दिखाई देती है। हमारा मन बस यह सोचता रहता है कि आज किसकी चुदाई कैसे करनी है। अर्थात् जहाँ दिखा चीरा, वहीं डाल देंगे खीरा।

दिन भर में की गई बातों से सब एक दूसरे से बेहद खुल चुके थे। अतः शर्माने मनाने की औपचारिकता में कोई भी अपना मजा खराब नहीं करना चाहता था.

यह एक भव्य रात थी जो दोबारा आयोजित करने पर भी ऐसा मजा नहीं देने वाली थी क्योंकि यह पहली बार था। दोनों बीवियों ने इसकी तैयारी इतनी ही भव्यता के साथ की थी।

कमरे के माहौल से जब नजर हटी और दीवार के पास सटे हुए सोफे पर पड़ी तो देखा कि रीना और सीमा केवल अंतर्वस्त्रों ब्रा और पैंटी में अपनी एक एक टांग सोफे पर तथा एक टांग नीचे रखकर अपने स्तनों को आगे कर कर बहुत ही कामुक तरीके से खड़े होकर हमें रोमांचित करने के लिए खड़ी हुई हैं। यहां कोई स्विमिंग पूल नहीं था किंतु दोनों ने अपनी महंगी महंगी बिकिनियाँ पहनी हुई थी।

बीती रात में श्लोक और मैंने सीमा और रीना की चुदाई की थी, उन्हें नग्न भी देखा था किंतु आज जिस प्रकार अपने रूप से यह काम की देवियां कयामत ढा रही थी, ऐसा लग रहा था कि हम दोनों को पहली बार ही देख रहे हैं।
काले रंग के अंतवस्त्र पहने हुए रीना के स्तन और कूल्हे इतने उत्तेजित कर रहे थे जैसे मानो साक्षात् अदा खान अपना अंग प्रदर्शन कर रही हो। उसकी सफेद रंग की गोरी टांगें कमरे के छत की गुलाबी लाइट की रोशनी में गुलाबी नजर आ रही थी।

यह नजारा देखकर श्लोक का हाथ अकस्मात उसके लिंग पर चला गया और वह पजामे के ऊपर से ही अपना लिंग सहलाने लगा।

सोफे के दूसरी बगल में सीमा अपने उत्तेजित करने वाले स्तनों तथा पिछवाड़े को बाहर निकाले हुए खड़ी थी। सीमा भी बालों से लेकर टांगों तक गुलाबी प्रकाश में पूरे गुलाबी नजर आ रही थी।

सीमा- कैसा लगा कमरे का नजारा?
श्लोक- बेहद शानदार … कोई जवाब नहीं … ना तो सजाए हुए कमरे के रोमांटिक माहौल का … और ना ही दोनों रूप की परियों का!
मैं- समझ नहीं आ रहा कि यह सुगंधित अविस्मरणीय मंच आज हमारी युद्धभूमि बनने वाला है। जहाँ दो चूत और दो लंड एक दूसरे की प्यास बुझाने के लिए मिलकर प्रतिस्पर्धा करेंगे।
श्लोक- मुझसे अब बातें नहीं हो रही है जीजा जी। समय आ गया है कि मैं अब बाहुबली बन जाऊं।

इतना कहकर श्लोक रीना के पास गया और उसकी गोरी कमर को पकड़ कर उसको अपनी बांहों में भींच लिया और दोनों एक दूसरे को चूसने लगे चाटने लगे और एक दूसरे में मग्न होकर एक दूसरे के लबों को आंखें बंद करके चूसने लगे।

यह देखकर सीमा अपनी गोरी जांघ सोफे से हटाकर मेरे पास आई और उसके लबों को मेरे लबों से लगा दिया। सीमा के होठों के नशे में हम दोनों की आंखें कब बंद हो गई और एक दूसरे में हम कब खो गए, पता ही नहीं चला।

जब सीमा ने अपने लबों को अलग किया तो दिखा कि श्लोक ने अपनी सगी बहन रीना को सोफे पर गिरा दिया है और खुद पूर्ण रूप से नग्न होकर रीना की पीठ पर हाथ फिरा रहा है और उसके काले रंग की ब्रा को खोलने की कोशिश कर रहा है।
लेकिन इसी समय रीना ने उसके होंठों को अपने होठों के अंदर दबा रखा है जिसके कारण वह रीना की ब्रा खोलने में कामयाब नहीं हो पाया.

तब रीना ने श्लोक के मनोभाव को समझकर अपने दोनों हाथ पीछे करके अपनी ब्रा का हुक खोला। दोनों हाथ पीछे करने के कारण रीना के स्तनों का आकार आगे की तरफ हुआ और बड़ा बड़ा नजर आया जिसे देखकर श्लोक अपने आप को रोक नहीं पाया और रीना की ब्रा का हुक खोलने से पहले ही उसने ब्रा को ऊपर किया और उसके बड़े-बड़े गोरे स्तनों में अपने मुंह को दबा दिया और उनके बीच में अपनी जीभ फिर आने लगा।

इधर मैंने भी सीमा को बेड पर धक्का दिया और उसे पेट के बल उल्टा लेटा कर उसकी ब्रा का हुक खोला तथा उसकी गोरी सेक्सी पीठ पर अपनी जीभ घुमाने लगा। सीमा की पूरी पीठ चाट कर जब मैंने उसकी वासना भड़का दी. उसके बाद मैं उसकी कमर के नीचे के उभारों पर अपनी जीभ फिर आने लगा। सीमा अपने कूल्हों को उठाकर उन्हें मेरे मुंह के तरफ दबाने लगी. मैंने उसकी भावनाओं को समझते हुए उसकी पैंटी उतार कर फेंक दी.

इस तरह सीमा पूर्ण रूप से नंगी अपने पेट के बल अपनी गोरी सेक्सी पीठ तथा कूल्हों का प्रदर्शन करते हुए लेटी हुई थी. मैंने सीमा के कूल्हों पर पर अपनी जीभ फिराई। सीमा के शरीर के गुदगुदी जब चरम पर पहुंच गई तब उसने अपने आप को सीधा किया और मेरे मुंह को पकड़ कर अपने स्तनों पर लगा दिया. मैंने सीमा के स्तनों को चूसना चाटना शुरू किया, जीरो फिगर वाले सांचे में ढले हुए छोटे आकार के स्तन एक अलग ही उत्तेजना का भाव पैदा कर रहे थे।

जब मेरी नजर रीना और श्लोक पर पड़ी तो देखा कि मेरी बीवी रीना सोफे पर उल्टी लेटी हुई है और मेरे साले श्लोक ने अपना मुंह अपनी बहन के कूल्हों के बीच में डाल रखा है, उसके दोनों हाथ रीना के गोरे कूल्हों को लाल करते हुए उसके कूल्हों को चौड़ा कर रहे थे जिससे कि श्लोक रीना के कूल्हे के बीच में छेद पर अपनी जीभ से मुखचोदन आराम से कर सके. रीना भी अपने कूल्हों को श्लोक के मुंह के ऊपर दबा रही थी और सिसकारियां भर रही थी।

वास्तव में बड़ा उत्तेजक दृश्य था! इससे ज्यादा उत्तेजक दृश्य मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा था; किसी पोर्न फिल्म को देखकर मुझे इतनी उत्तेजना नहीं हुई थी जितना इन बहन भाई को इस अवस्था में देख कर आई।

इधर मैंने सीमा की टांगों को चौड़ा करके उसकी चूत में अपनी जीभ घुसा दी और उसकी चूत के दाने को अपनी जीभ से गुदगुदाने लगा।

शायद श्लोक और रीना सोफे पर सहज महसूस नहीं कर रहे थे इसलिए श्लोक ने रीना को सोफे से उठाकर हमारे बेड पर ही पटक दिया, उसने रीना को सीधी लेटा कर उसकी टांगें चौड़ी करके उसकी चूत में अपना मुंह डाल दिया.

अब एक ही बिस्तर पर हम चारों बदले हुए साथियों के साथ मुख चोदन कर और करवा रहे थे।

कमरे में ननद रीना और भाभी सीमा की सिसकारियां धीमी गति के संगीत को दबाने लगी थी जो कि होम थिएटर में बज रहा था।

फिर हम चारों 69 की पोजीशन में आ गए। अब एक ही समय पर हम एक दूसरे की चूत और लिंग को चाट कर एक दूसरे को आनंद प्रदान कर रहे थे। मैं सीमा की तथा सीमा मेरा गुप्तांग जीभ से गुदगुदा रही थी ऐसा ही रीना और श्लोक दोनों बहन भाई कर रहे थे।

जब पर्याप्त मात्रा में मुख चोदन और फोर प्ले हो गया तब हम चारों एक साथ एक दूसरे के लिपट गये।
तब मैंने कहा- चलो बताओ पहले एक एक साथी से चुदाई पसंद करोगी या एक ही साथ दोनों के साथ?
इस पर सीमा ने कहा- आज तो सामूहिक चुदाई का दिन है, अकेले चुदाई करके ही अगर थक गए तो सामूहिक चुदाई का मजा नहीं ले पाएंगे. मेरे तो मन की कामना यही है कि जितना जल्दी हो सके एक साथ दो दो लिंग मुझे चोदें।
रीना ने कहा- जी, सीमा सही कह रही है!

श्लोक- जीजाजी, आज का दिन तो सामूहिक चुदाई का दिन ही रखा जाएगा। सब इसी के लिए लालायित हैं।
तब मैंने कहा- तुम में से एक औरत को थोड़ी देर के लिए हमारे लिंग से वंचित रहना पड़ेगा. अब बताओ श्लोक और हम दोनों पहले किस की पटरी पर पर अपनी रेल दौड़ायें?

इस पर सीमा ने कहा- आप अपना खेल उसी पिच पर खेलो जो पिच मजबूत है। मेरा मतलब है कि रीना दीदी! क्योंकि आप दोनों की हवस भरे हाथों को संतुष्ट करने के लिए उनके बड़े स्तन, लिंग को संतुष्ट करने के लिए उनकी सुंदर और आकर्षक गुलाबी चूत, तथा अपने लिंगों को निचोड़ने के लिए उनके गोरे कूल्हे हैं।
तब श्लोक ने कहा- तुम भी कम हसीन नहीं प्रिय सीमा!

इस पर सीमा ने कहा- हां, माना मैं हसीन हूं … लेकिन रीना दीदी जितने सेक्सी नहीं! मैं आप लोगों को नहीं झेल पाऊंगी।
रीना- यह तो गलत बात है सीमा … कि मेरी ही रेल बनाई जाए। यह सही नहीं है! मजा तो हम चारों को लेना है, मैं तुम्हें बिना चुदवाये नहीं मानूंगी।
इस पर सीमा ने कहा- दीदी, आप सही बोल रही हो लेकिन आपकी घनघोर चुदाई के बाद शायद इन दोनों की उत्तेजना कम हो और मैं थोड़ा सहन करने योग्य सेक्स कर पाऊं और फिर मज़ा उठाएं।

श्लोक और मैंने सीमा की इस बात पर सहमति दी और रीना को बेड के बीचोंबीच खींच लिया।
उत्तेजना और रोमांच से रीना के रोंगटे खड़े हो रहे थे, उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी यह देखने की कि एक साथ दो लिंग से चोदने पर कैसा महसूस होता है।

सीमा पलंग के एक किनारे पर आ गई। इस पर मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या वह दर्शक बनने वाली है या फिर पोर्न फिल्मों की दूसरी नायिका की तरह पोर्न नायकों के गुप्तांगों को हाथ से उत्तेजित करके अपनी सहभागिता देना चाहती है।
किंतु अब मेरा और श्लोक का पूरा ध्यान रीना पर आ गया था।

श्लोक ने कहा- मेरे जीवन की सबसे सेक्सी महिला, अपने जीवन का सबसे धमाकेदार सेक्स करने के लिए तैयार हो जाओ!
मैं- आज बहन चोद भाई तथा पति से साथ में चोदने के लिए तैयार हो जाओ।
रीना ने अपनी मादक मुस्कुराहट के साथ दोनों को अनुमति दी।

मैं अपनी पीठ के बल अपने खड़े लिंग को ऊपर करके बेड पर लेट गया. मेरे मुंह की तरफ रीना ने अपनी गांड की तथा अपने गोरे कूल्हों को मेरी कमर पर टिकाए तथा अपने गीली चूत में मेरा लिंग डाल लिया।
श्लोक मेरी टांगों की तरफ रीना की तरफ मुंह करके बैठा हुआ था तथा अपने लिंग को हाथ से सहला रहा था।

मैंने श्लोक को रुकने के लिए कहा क्योंकि रीना के हल्के झटकों से मैं अपने लिंग को उसकी चूत के पानी में भिगोना चाहता था ताकि पर्याप्त चिकनाई के बाद मेरा लिंग उसके गांड के छेद में प्रवेश कर सके।

रीना ने अपनी गांड उठाकर मेरे लंड पर झटके देना शुरू किया उसके ग्रुप सेक्स की उत्तेजना में निकले हुए चूत के पानी से मेरा लिंग पर्याप्त मात्रा में चिकना हो चुका था। रीना ने अपने चूतड़ उठाकर मेरा लिंग उसकी चूत में से निकाला और मेरे लिंग को उसने अपनी गांड के छेद पर समायोजित कर लिया. थोड़े उसके तथा मेरे प्रयास से मेरा लिंग मुंड धीरे धीरे उसके गांड में प्रवेश कर गया तथा मैंने उसकी गांड में धीरे-धीरे धक्का देना शुरू कर दिया।

अब श्लोक के आने का समय हो गया था। श्लोक ने रीना के सामने आकर रीना की टांगें थोड़ी सी और चौड़ी करके उसकी गुलाबी चिकनी चूत में अपना लिंग ठेल दिया।

शुरुआत में हम तीनों को सहज महसूस नहीं हुआ तथा दोनों को झटके मारने में परेशानी हुई. किंतु धीरे धीरे हाथ और पांव लिंग और चूत और गांड का छेद इस प्रकार व्यवस्थित हुए कि धीरे धीरे धक्के लगाने में हमें सहजता महसूस होने लग गई और अब एक ही समय पर श्लोक और मैं रीना की गांड और चूत में धक्के मारने लगे।

रीना की सिसकारियां जोरदार तेज आवाज आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह यस यस यस में बदल गई। उसने अपने होठों को उत्तेजना में अपने दांतों के नीचे दबा दिया और जोरदार सिसकारियों की आवाज से पूरा कमरा गुंजा दिया।

धीरे-धीरे श्लोक के धक्कों की गति इतनी बढ़ गई कि रीना का पूरा शरीर जोर जोर से ऊपर नीचे हिलने लगा जिसके कारण मुझे अब धक्के लगाने की जरूरत नहीं थी, मेरा लिंग अपने आप ही रीना की गांड से अंदर बाहर होने लगा था। हमारे द्वारा दिए गए झटकों से उसके स्तन ऊपर नीचे हिल हिल कर किसी पोर्न फिल्म से नजारा बना रहे थे।

कहानी जारी रहेगी.
आपका राजवीर
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