पेंटर बाबू: आई लव यू-2

(Painter Babu: I love You- Part 2)

इस सेक्स कहानी के पहले भाग
पेंटर बाबू: आई लव यू-1
में आपने पढ़ा कि मैं अपने बिस्तर में नंगा उल्टा पड़ा अन्तर्वासना पर गर्मागर्म कहानी पढ़ते हुए बिस्तर को ही चोद रहा था. तभी मेरे कमरे में दो जवान मर्द आये और मेरी नंगी विडियो बना ली. मेरी गांड मारने की मांग करने लगे. मैंने भी मजबूरी में उनकी बात मान लेने की सोची.
अब आगे:

मैंने उसके लम्बे लौड़े को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मेरा प्लान था कि मैं उसको चूस चूस कर ही झाड़ दूंगा और मेरी गांड उसके मूसल से बच जायेगी!
पर नहीं, आज मेरा दिन था ही नहीं!
मुझे झुका हुआ देख कर, दूसरे वाले ने मुझे पीछे से दबोच लिया और मेरी गांड तक पहुँचने की कोशिश करने लग गया.

हाँ, वो मास्टर बाथरूम था पर इतना भी बड़ा नहीं था कि उसमे 3 मर्दों का ग्रुप सेक्स आसानी से हो जाए!

दूसरे वाले ने भरपूर कोशिश की पर वो बड़ी मुश्किल से मेरे चूतड़ों पर अपना मुँह ले जा पाया! जिसे जो मिला वो उसी में खुश हो रहा था! मेरे चिकने चूतड़ उसको इतने पसंद आये कि वो उनको की किसी लड़की के गाल समझ कर चूमने चाटने लगा और जल्दी ही उसका ये चूमना चाटना, काटने में बदल गया. अब मुझे दर्द हो रहा था पर मैं कराहने के लिए मुँह खोलता तो पहले वाले के मेरे मुख चोदन के सुख को ब्रेक लग जाता.

और हल यह निकला कि पहले वाले ने मेरा सर पकड़ा और मेरा मुँह अपने कण्ट्रोल में लेकर, किसी लड़की की चूत की तरह उसे चोदने लग गया! मुझे सच में बहुत दर्द हो रहा था, पर मुँह से आवाज़ नहीं निकल पा रही थी!
धीरे धीरे पीछे वाला मेरे चूतड़ों को काटना छोड़ कर अपनी जुबान से मेरे बिना बालों वाले गांड छेद को कुरेदने लग गया था.

मेरा छेद साबुन के लुब्रिकेशन की वजह से पहले ही थोड़ा सा खुल गया था. उस पर इसके थूक और इसकी पैनी जुबान के चलते मेरे छेद ने मेरे विरोध में मेरा साथ देना बंद दिया! अब मेरा छेद बिंदास खुल चुका था और उसकी जुबान पैनी हो कर मेरी गांड में आधा इंच तक अंदर जा रही थी! सच में पोर्न ने इन जैसे ठेठ देसी मर्दों को भी गांड चूसना, जीभ से गांड चोदना सिखा दिया था!

शायद गांड की अंदर की दीवारें, अगर ठीक से सहलाई जाएँ तो अच्छा सुख देती हैं… मेरे मुँह से निकल रही हल्की हल्की आहें उसका सबूत थी और उन आहों के चलते मेरा मुँह बहुत खुल गया था और सामने वाले को अपना लंड मेरे मुँह में अंदर तक ठूँसने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ रही थी.

अब तक सबके बदनों से साबुन, पसीना, पेंट सब धुल चुका था! और उन दोनों के साथ साथ मैं भी कब सेक्स के मूड में आ गया, पता ही नहीं चला! अब मैं अपने दोनों हाथों से चूतड़ों की दोनों फांकों के अलग अलग करके, पीछे वाले की जुबान को अपने छेद तक पहुँचने की सुविधा दे रहा था!
इस सब के चलते, पहले वाले को मजा आना कम हो गया था, अचानक उसने मुझे खड़ा किया, गोद में उठाया और बाथरूम से निकाल कर, बिस्तर पर पटक दिया. दूसरा वाला भी उसके पीछे पीछे, बदन सुखा कर बैडरूम में आ गया.

मैं अब सेक्स के फुल मूड में था, फिर भी चाहता था कि वो दोनों जो भी करें, आराम से करें, मेरी सहूलियत देख कर करें! उसी के चलते मैंने उनको ड्रावर से लुब्रिकेशन की ट्यूब और कंडोम का पैकेट निकाल कर दिया.
“मेरा काम तो तू ही करेगा!” कह कर उसने कंडोम का पैकेट मेरे हाथ में वापिस दे दिया और टाँगें मोड़ कर अपना खम्बा मेरे सामने खड़ा करके वही बैठ गया.

मैं डॉगी स्टाइल में झुका हुआ, कंडोम का सैशे फाड़ कर, उसके गन्ने को कंडोम से कवर करने लगा! पर उसका गन्ना भी मामूली गन्ना नहीं था! कंडोम उसके लौड़े पर, लौड़े की मोटाई की वजह से चढ़ ही नहीं रहा था! मैंने कंडोम हटाया, और उसके लौड़े को अपने हल्क तक ले अंदर लिया, जिसकी वजह से मेरे गाढ़े थूक से उसका लौड़ा फिर से चिपचिपा हो गया और कंडोम एक ही बार में उसके लौड़े पर खुलता चला गया!

जर्मनी के एक्स्ट्रा लार्ज साइज का ये कंडोम उसके लौड़े को आधे से थोड़ा ज्यादा ही कवर कर पाया था! मुझे समझ आ रहा था कि आज शाम तक मेरा क्या हाल हो जाएगा!

शायद अब तक वो मुझ से थोड़ा दोस्ताना हो गया था (मैं भी तो सहयोग कर रहा था), वो मेरी आँखों के उभर रहे डर को समझ रहा था! वो अपने साथी को बोला- छोटे, अच्छे से गीला कर इसके छेद को… और जितना अंदर तक चाट सके चाट… थूक से बढ़िया चिकनाई कुछ नहीं… और हाँ, तू चिंता मत कर… इंच इंच नहीं, सूत सूत अंदर करूंगा, जितना धीरे कहेगा उतनी ही धीमी स्पीड से अंदर करूँगा, तू बोलेगा तो धक्के दूंगा, तू बोलेगा तो रोक दूंगा.

पता नहीं उसकी बातों का मुझ पर क्या असर हुआ… इतनी प्यार से चोदने वाला तो कहीं नहीं देखा सुना था! खैर… मैं पलटा और पीठ के बल लेट कर, टांगें ऊंची करके, अपने गांड के छेद को उसके लौड़े की सीध में ला कर आँखें बंद करके उस पल का इंतजार करने लगा जब उसका मूसल मेरी नयी नवेली ओखली में घुसता!

मेरे होंठ सूख रहे थे! शायद उन दोनों में आँखों आँखों में कुछ बात हुई और ‘छोटा’ मेरी छाती पर आकर ऐसे बैठ गया कि उसका लौड़ा मेरे मुँह के पास था और उसके घुटने मेरी बाइसेप्स पर थे! पीछे से हवा में उठी मेरी टांगों को, जाँघों से ‘बड़े’ ने जकड़ रखा था.

ठरक में तैरते इंसान के मुँह के आगे एक गर्मागर्म लौड़ा हो तो क्यों ना वो आगे होकर उस गर्म लौड़े को मुँह में चूसने लगेगा! मेरा भी वही हाल था, मैंने छोटे के बड़े से लौड़े को मेरे मुँह के सीमित गतिविधि करते हुए चूसना शुरू कर दिया. मैं ज्यादा हिलडुल नहीं पा रहा था तो मुश्किल से छोटे के लौड़े का, 2 इंच हिस्सा ही चूस पा रहा था, जबकि उस पल मेरा मन हो रहा था कि उसका पूरा लंड मैं मुँह में भर लूँ!
मैंने आँखों से उसे इशारा किया और वो थोड़ा उठा और अपना लौड़ा मेरे मुँह के एकदम करीब ले आया! अब छोटे का पूरा लौड़ा मेरे मुँह में था और उसके लौड़े का टोपा, आराम से मेरे हल्क की दीवारों की मालिश कर रहा था.

फिर मेरे साथ सबसे बड़ी चीटिंग हुई! उन दोनों ने सोची समझी चाल के चलते, एक रिदम में, दोनों लौड़े मेरे दोनों छेदों में एक साथ अंदर तक घुसेड़ दिए! हालांकि मेरे दोनों छेद पूरी तरह खुल चुके थे, पर उस अचानक हुए वार के लिए मेरे छेद तैयार नहीं थे!

पर शायद, अपना किया हुआ ही वैसा का वैसा मुझे झेलना था!
कितनी ही बार मैंने वर्जिन बॉटम्स की गांड को फुल रेडी करके (थूक से, ल्यूब से, तेल से), उसकी गांड के मुहाने पर लौड़ा टिकाये रख कर, बॉटम के होंठों पर किस करते हुए, उसके निप्पल्स को चूसते हुए, उसके कानों के सॉफ्ट स्किन को हौले हौले चबाते हुए, अचानक से पूरा का पूरा लौड़ा उन बेचारे वर्जिन लौंडों की कुरकुरी गांड में एक झटके में ठूंसा हुआ है!

आज वही मेरे साथ हो रहा था! बड़े ने एक झटके में अपने 9 इंची हथौड़े के एक एक इंच, मेरी गांड में उतार दिए थे और पूरी तरह सोची समझी चाल के चलते, छोटा मेरे ऊपरी बॉडी को अपने वजन से दबाये हुए था और मेरे मुँह से निकलने वाली चीखों को अपने 7 इंची से दबाये हुए था!
अगर मुझे मेरी जवानी के समय में मिले उस अफ्रीकन ने अपने 11 इंची कोबरा से मेरे गले को लौड़े की प्रैक्टिस ना करवाई हुई होती, तो मैं कब तक छोटे के 7 इंची के हल्क पर टकराने के वजह से उलटी कर दिया होता!

मेरे पूरे बदन में दर्द की वजह से आग लगी पड़ी थी! पर मेरे बस में कुछ नहीं था! जब तक उन दोनों को यकीन नहीं हो गया कि मेरी बॉडी उन दोनों के लौड़ों को अपने अंदर आराम से ले चुकी है, तब तक दोनों कमीने मेरे शरीर को पूरी तरह जकड़े रहे!
करीब 10 सेकंड के बाद, बड़े ने छोटे की पीठ पर थपकी दी और छोटे को हटने को कहा.

छोटा मेरी छाती से हट तो गया लेकिन मेरे मुँह से उसका लौड़ा हटा तो बड़े के होंठ आ गए! अब बड़ा पूरी तरह से मेरे ऊपर था! पहले झटके में जो उसने अपने पूरे 9 इंच मेरी मर्दानी चूत में ठूंसे थे, वो 9 इंच अभी भी वैसे के वैसे मेरी गांड की गहराइयों में दफ़न थे!
बड़ा अब मेरे होंठों को हल्के हल्के चूस रहा था! उसे समझ आ गया था कि मेरी गांड ने उसके 9 इंची को अपने अंदर एडजस्ट कर लिया है! मेरी गांड पूरी तरह से फ़ैल चुकी थी! दर्द था पर इतना नहीं था कि मैं फिर से चिल्लाता या उसे हटाने की कोशिश करता! और करता तो कैसे, मेरे शरीर में कोई हिम्मत ही नहीं बची थी.

मेरे शरीर के हथियार डालते ही बड़े ने बहुत हौले से अपने पोल को मेरे होल से थोड़ा सा बाहर निकाला और छोटे को इशारे से कुछ कहा.
छोटा मेरे पीछे गया और बोला- नहीं, नहीं फटी…
मतलब वो तैयार थे कि मेरी गांड फटती हो तो फट जाए! बस कोई करिश्मा ही था कि मेरी गांड में वो कोक कैन जितना मोटा लौड़ा एक झटके में गया फिर भी मेरी गांड के चीथड़े नहीं उड़े!

“अब बोल, करूँ या रुक जाऊं?” बड़े ने बड़े प्यार से अपने होंठों से मेरे होंठों को सहलाते हुए, मेरी आँखों में आँखें डाल कर कहा!
मैं फिर पिघल गया! मैंने कुछ जवाब नहीं दिया पर मैंने अपनी आँखे बंद कर ली जिसे बड़े ने मेरी हाँ समझ ली और वो गलत भी नहीं था! पर अब वो अपने वायदे का पूरा ध्यान रख रहा था! इतने प्यार से मेरी भोसड़ा बन चुकी गांड में वो अपना लौड़ा अंदर बाहर कर रहा था कि उसके लौड़े के नींबू जैसे सुपारे की रिम से मेरी गांड की अंदर की दीवारों पर हल्की हल्की मालिश सी हो रही थी.

मेरी गांड की अंदरूनी दीवारों की वो मसाज मुझे गे सेक्स के सुख के चरम पर ले जा रही थी. मैंने मेरी दोनों टाँगें उसकी जांघों पर कस दी और मेरी बांहें उसकी पीठ को सहलाने लगी. उसके धक्कों में थोड़ी तेजी आयी पर फिर भी जैसे ही मेरी हथेलियों का दबाव उसकी पीठ पर बढ़ता, वो तुरंत धीमे हो जाता!
मिनट मिनट पर मुझे उससे प्यार सा होने लगा था; जी कर रहा था कि वो ऐसे ही रुक रुक कर, कण्ट्रोल वे में अपने लौड़ा मेरी गांड गुफा में अंदर बाहर करता रहे! किसी चोदने वाले को और क्या चाहिए! मेरी ओर से कोई जल्दी नहीं थी! मैं अब पूरे मजे लेने लग गया था!

अब छोटा थोड़ा अलग थलग सा पड़ गया था! वो अचानक मेरे और बड़े के मुँह के पास अपना लौड़ा ले आया! वो शायद मुझसे अपना लौड़ा चुसवाना चाह रहा था! जबकि मैं बड़े के बड़े गन्ने में इंटरेस्ट दिखा रहा था! बड़ा समझ गया! छोटे को बुरा ना लगे, इसलिए बड़े ने अपना मुँह खोला और छोटे का लौड़ा चूसने लग गया!

मेरी समझ नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है? कौन क्या पसंद करता है, क्या करता है! पर जो भी था, बहुत इरोटिक सीन था! बड़े का लौड़ा मेरी गांड में, छोटे का लौड़ा बड़े में मुँह में, और मेरा लौड़ा बड़े के पेट और मेरे पेट के बीच में रगड़ता हुआ!

मुश्किल से ये नजारा आधा मिनट चला होगा कि मेरे लौड़े से वीर्य के फव्वारे छूटने लगे जो मेरे और बड़े के पेट को पूरी तरह चिपचिपा कर चुके थे! मेरे लौड़े के छूटते ही बड़े के लौड़े को ट्रिगर मिला! उसके लौड़े ने मेरे गांड में अकड़ना शुरू कर दिया और अगले मिनट ही बड़े ने मेरी टांगों को अधिकतम फैला दिया और अपने लौड़े को मेरी गांड में सबसे अंदर तक घुसेड़ दिया.
लग रहा था कि कहीं वो अपने अमरुद जैसे आंड भी मेरी गांड में ना बाड़ दे!

उसका लौड़ा मेरी गांड में फूलता ही जा रहा था! मैं उसके लौड़े में उठती गिरती लहरों को अपनी गांड में महसूस कर रहा था! वो किसी भी सेकंड अपना लावा उगलने वाला था! वो मेरे ऊपर ही धराशायी हो गया और जैसे ही उसने अपना शरीर मेरे ऊपर छोड़ा, उसके जिस्म में रोम रोम में करंट लगा और मुझे मेरी गांड में, कंडोम होने के बावजूद, उसके लावा की गर्माहट महसूस होने लगी! पहली, फिर दूसरी, फिर तीसरी… मैं गिनती भूल गया और वो करीब एक मिनट तक रुक रुक कर कंडोम में पिचकारी पर पिचकारी मारता रहा!

इस बीच छोटे का लौड़ा कब का बड़े के मुँह से बाहर आ चुका था पर इतने गर्म सीन के चलते, छोटे ने अपना लौड़ा हिला हिला कर ही चरम पर पहुंचा दिया और जैसे ही उसका माल छूटने को हुआ, वो मेरे ऊपर आ गया और अपने माल की 7-8 धार दनादन मेरे चेहरे पर मार दी!

उस समय मैं ना तो कण्ट्रोल में था और ना कुछ मेरे कण्ट्रोल में था! तो ना तो वो रुका और ना मैंने उसे रोकने की कोशिश की! छोटे के हटते हटते मेरा पूरा फेस छोटे के माल से सराबोर था! कण्ट्रोल में आते ही, छोटे ने मेरा अंडरवियर लिया और उससे मेरा फेस साफ़ किया!

उसके बाद बड़े ने एक बार फिर मेरे होंठों को अपने होंठों से सहलाया, मेरे बालों में प्यार से उँगलियाँ फिराई और बिस्तर से उठ कर टॉवल से अपने शरीर पर लगे मेरे वीर्य को साफ़ करने लगा!
मेरी गांड में अभी भी, उसके जूस से भरा कंडोम फँसा हुआ था! मैंने ही गांड भींच कर कंडोम को लॉक कर रखा था वरना कंडोम में भरे जूस ने बाहर बह कर मेरे बिस्तर की चद्दर को खराब कर देना था!

बाद में कपड़े पहनते हुए, बड़े ने फिर चौंकाया- तो क्या तुझे अभी भी लगता है, कि जो हुआ वो अचानक से हुआ?

उसके इस सवाब का जवाब उसने क्या दिया, वो किसी और दिन बताऊंगा.
तब तक के लिए सोचते रहिये, कि क्या हुआ होगा! अपने इमेजिनेशन के घोड़े दौड़ाइए और मुझे [email protected] पर मेरी इस कहानी के बारे में अपनी राय भेजिए और मुझे बताइये कि आपके हिसाब से बड़े ने क्या कहा होगा!
[email protected]