अब मैं भी गाण्डू बन गया

(Main bhi Gaandu Ban Gaya)

हाय दोस्तो, कैसे हैं आप? आप सभी को मेरा नमस्कार।

मैं आशू.. बुरहानपुर मध्यप्रदेश का रहने वाला हूँ।

मेरी पहली कहानी आप सभी ने पढ़ी और मुझे आप सभी के बहुत ईमेल आए इसके लिए शुक्रिया।

अभी कुछ ही दिन पहले मैंने पहली बार विक्रम सर से अपनी गाण्ड का उद्घाटन करवाया था और बदस्तूर उनसे गाण्ड मरवाना चालू था।

जिस दिन विक्रम ने मेरी पहली बार गाण्ड मारी थी उसी दिन यह सब अजहर ने चुपके से देख लिया था।

जब मैं कम्पयूटर क्लास से जाने लगा.. तो मैं बाहर अजहर को देखकर चौँक गया था।

जैसे ही अजहर ने मुझे देखा तो उसने मेरे बाजुओं को जोर से पकड़ा और एक कोने में ले गया।

उसने मुझे गाल पर चुम्मा लिया और कहने लगा- अकेले-अकेले मजे कर लिए.. मुझे कब दे रहा है?

मैं सुनकर हैरान रह गया और अपनी आँखें नीचे झुका लीं।

उसने कहा- मैंने तुम्हें और विक्रम को वो सब करते हुए देख लिया है.. अब तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम मुझे भी एक बार मौका दो।

मैंने कहा- अगर नहीं दिया तो??

उसने कहा- अगर मैं ये बात तुम्हारे दोस्तों को बता दूँ तो क्या होगा.. सोचो..?

यह कहकर उसने अपनी जेब में से अपना पता निकाल कर मुझे दिया और कहा- अगर तुम यह नहीं चाहते कि तुम्हारी बदनामी हो तो इस पते पर कल शाम सात बजे आ जाना। मैं घर पर अकेला ही रहता हूँ।

फिर वो चला गया तो मैं भी अपने घर चला गया।
मैं पूरी रात अजहर के बारे में सोचता रहा..
पता नहीं क्यूँ मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे।
अजहर भी विक्रम की तरह हट्टा-कट्टा था और आकर्षक जवान भी था।

अगले दिन जब शाम 5 बजे स्कूल से घर आया तो मुझे याद आया कि मुझे अजहर के घर जाना है।

मैंने खाना खाया और नहा-धोकर फ्रेश हो गया।
लगभग 6:30 बजे मैं घर से निकला।
उसका घर बहुत दूर था तो लगभग सात बजे मैं उसके घर के दरवाजे पर था।

मैंने घण्टी बजाई तो कुछ देर बाद अजहर मेरे सामने था।

उसने बस बनियान और कैपरी पहनी थी। उसका मस्त शरीर बड़ा सेक्सी लग रहा था।

फिर उसने कहा- मुझे पता था कि तू जरूर आएगा.. चल अन्दर आ जा।

मैं अन्दर गया तो उसने बियर के दो गिलास बनाए, उसने एक मेरी तरफ बढ़ाया।

मैंने मना कर दिया.. तो वह दोनों गिलास पी गया।

अब उसे थोड़ा नशा चढ़ने लगा और उसने मुझे अपने पास खींच कर चुम्बन करने लगा।

मुझे उसकी गरम-गरम साँसें बहुत प्यारी लग रही थीं।

अब उसने मेरे कपड़े उतारना चालू कर दिए और कुछ ही पलों में मैं सिर्फ बनियान और चड्डी में था।

अब उसने मुझे एकदम से अपनी गोदी में उठा कर अपने कमरे में ले गया।

उसने मुझे बैड पर पटक दिया और अपनी बनियान और कैपरी उतार दी।

अब वो सिर्फ अण्डरवियर में था।
उसका लण्ड फुल टाईट था और बहुत बड़ा भी लग रहा था।

उसने अपनी अंडरवियर भी उतार दी।
उसका लण्ड एक झटके से बाहर निकल आया.. क्या लण्ड था यार उसका.. लगभग 8 इंच का होगा।
मोटा और वो भी आगे से कटा हुआ.. जो मुझे बहुत पसंद है।

उसने बिना देर किए मुझे पूरा नँगा कर दिया और अपना लण्ड मेरे मुँह में दे दिया- ले चूस इसे।

मैंने उसका लण्ड आगे-पीछे करके थोड़ा-थोड़ा चूसना चालू किया.. पर उसने अब मेरे सर को पकड़ कर पूरा का पूरा लण्ड मेरे मुँह में पेल दिया।
मुझे उलटी आने जैसा लग रहा था.. पर इसकी परवाह किए बिना वो लण्ड अन्दर-बाहर करता रहा।

‘ले चूस अच्छे से चूस.. कमीने..’

दस मिनट बाद उसका लण्ड मेरी गाण्ड चुदाई करने के लिए तैयार था।

उसने अपने जेब में से कन्डोम का पैकेट निकाल कर एक कन्डोम अपने मोटे और लम्बे लण्ड पर लगा लिया और मुझको तेजी से धक्का देकर लिटा दिया, मेरे पैर अपने कन्धों पर रख लिए.. जिससे मेरी गाण्ड उसके सामने थी।

अब उसने बिना देर किए अपना लण्ड मेरी गाण्ड पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा।

चिकने कन्डोम के कारण उसका आधा लण्ड मेरी गाण्ड में घुस चुका था।

मेरे मुँह से बहुत तेज आवाज निकल गई।
मुझे बहुत दर्द हो रहा था।

उसने मेरा मुँह दबा दिया और कहा- चुप साले गाँडू.. बाजू में फौजियों के क्वार्टर हैं.. अगर तुझे इस हालत में देख लिया तो तेरी गाण्ड का भोसड़ा बना देंगे.. समझा।

मैंने ‘हाँ’ में सर हिला दिया।

अब उसने एक और धक्का मारा, अब पूरा का पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में था।
थोड़ी देर रूकने के बाद उसने जोरदार चुदाई चालू कर दी।

थोड़ी देर बाद उसने मेरे पैर नीचे किए और ऐसे किए कि मुझे अपनी गोदी में उठा लिया और लण्ड अन्दर-बाहर करने लगा।

अब उसने अपनी रफ्तार तेज कर दी.. शायद वो झड़ने वाला था।

फिर उसने मुझे बिस्तर पर पटक दिया और अपने लण्ड पर से कन्डोम निकाल कर लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया और हाथ से मुठ मारने लगा।

थोड़ी ही देर में उसने पूरा का पूरा गाढ़ा माल मेरे मुँह में डाल दिया और कहा- चल चुपचाप पी जा इसे.. मेरी मेहनत का फल है ये.. वरना…

उसके इतना कहते ही मैंने पूरा का पूरा माल निगल लिया।

मुझे स्वाद में तो अच्छा नहीं लगा.. पर मैंने डर के मार पी लिया।

उसने मेरी रात के दस बजे तक तीन बार गाण्ड मारी। फिर मैं अपने घर चला आया।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी जरूर बताइएगा।

वैसे अब मुझे गाण्ड मरवाने की आदत हो गई है।

यदि कोई मेरी गाण्ड मारने के लिए मिलता है तो मैं तुरन्त अपनी गाण्ड खोल देता हूँ.. बस मुझे मोटा लौड़ा चाहिए होता है।

मुझसे अपने विचार व्यक्त करने के लिए मेल पर सम्पर्क करें।

आपका अपना आशू।
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