काला हीरा -3

(Kala Heera Black Diamond-3)

This story is part of a series:

अर्जुन ने उसे गले लगा लिया- अगर तुम लड़की होते तो तुम्हें उठा कर ले जाता… तुम्हारा चोदन कर देता… तुम्हें इतना चोदता कि तुम मुझसे प्रेग्नेंट हो जाते… फिर तुम हमेशा के लिए मेरे हो जाते।

विनीत अर्जुन से कस कर लिपट गया- इसकी ज़रूरत ही नहीं पड़ती… मैं खुद ही तुम्हारे साथ भाग चलता। तुम्हारे जैसा बाँका लड़का पाकर तो मेरी किस्मत ही खुल गई।

दोनों ने अब सेक्स करना फिर से शुरू कर दिया, अर्जुन विनीत के निप्पल चूसने लगा, विनीत को इतना मज़ा आ रहा था जैसे किसी लड़की को आता है निप्पल चुसवाने में।
वो अर्जुन के बाल सहलाता, उसे निहारता, अपनी चूचियाँ चुसवा रहा था।

थोड़ी देर बाद अर्जुन बोला- जानू… आओ तुम्हें चोद दूँ…

अर्जुन घुटनों के बल खड़ा हो गया, और पीठ के बल लेटे विनीत की टाँगें अपने कंधों पर रख ली। उसका चोदने का यह मनपसंद पोज़ था, इस पोज़ में वो अपने पार्टनर को चिल्लाता-छटपटाता देख सकता था। उसका भयंकर अफ़्रीकी छाप लण्ड जब लड़कों की गाण्ड रौंदता था, तो उनकी प्रतिक्रिया देखने लायक होती थी और अर्जुन का मज़ा दोगुना हो जाता था।

अर्जुन ने विनीत की चिकनी गाण्ड के मुहाने पर अपने लण्ड का सुपारा टिका कर तैयार हो गया। उसने विनीत को कन्धों से मज़बूती से पकड़ लिया। उसे मालूम था कि वो दर्द के मारे अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करेगा।

दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे- अर्जुन विनीत को ऐसे देख रहा था कसाई बकरे को देखता है और विनीत अर्जुन को ऐसे देख रहा था जैसे कोई नयी नवेली दुल्हन अपने पति को देखती है।

अर्जुन ने ज़ोर लगाया। विनीत चुदा-चुदाया, अनुभवी लड़का था, लेकिन इतने बड़े लण्ड को लेने की किसी की औकात नहीं होती। अर्जुन के लौड़े का सुपारा उसकी गाण्ड में घुस गया।

‘आय ह्ह्ह…!!!’ यह चीख विनीत की थी।

अर्जुन ने थोड़ा और घुसेड़ा हल्के से, वैसे तो वो चाहता था कि पूरा का पूरा एक ही झटके में घुसेड़ दे, लेकिन पहले वो अपना लण्ड उसकी गाण्ड में जमा लेना चाहता था।

विनीत और चीखा- ऊ ह्ह्ह्ह…!

अब अर्जुन ने शॉट मारा, और उसका साढ़े दस इन्च खीरे जितना मोटा, कला, भूखा, हरामी लण्ड विनीत की कोमल गाण्ड में अंदर तक घुस गया।

‘आआ आ…आआ… ह्ह्ह्ह्ह…!! बेचारे विनीत को दिन में तारे दिख गए, उसकी चीख से कमरा गूंज गया, चिल्लाया और उछल कर रह गया। उसे अपनी पहली बार की चुदाई याद आ गई, ठीक ऐसा ही दर्द हुआ था तब उसे… वो दसवीं में था… उसे बारहवीं के लड़के ने चोदा था लेकिन इस बार दर्द और भी भयंकर था।

अर्जुन को डर था कि ऐसी चीख सुनकर अड़ोसी पड़ोसी न आ जाएँ। लेकिन दरवाज़े-खिड़कियाँ बंद थीं। उसने उसी तरह लौड़ा घुसेड़े-घुसेड़े नज़रे घुमा कर जायज़ा लिया और फिर चोदने लगा- गपा-गप, गपा-गप।

चुदाई शुरु करने से पहले उसके चेहरे पर शैतानी मुस्कान थी, जैसी अक्सर हरामी लड़कों के चेहरे पर हरामीपना करने पर होती है। विनीत बेचारे की हालत ऐसे चूहे की थी जैसे प्रयोगशाला में चीरफाड़ करने पर ज़िंदा चूहों की होती है, बेचारा छटपटाये चला जा रहा था, और चिल्लाये चला जा रहा था, अपना दर्द ज़ाहिर करने के लिए उसे शब्द ही नहीं मिल रहे थे- आह… ह्ह्ह…! ऊऊह्ह्ह्ह!!! इह्ह… इह्ह्ह… !! ‘ऊह्ह ह्ह्ह्ह…!! ईह्ह्ह्ह… !!

अर्जुन विनीत का छटपटाना एन्जॉय करता उसे पेले चला जा रहा था, उसका काला-काला, भयंकर लण्ड-मुसण्ड विनीत चिकनी-चिकनी, गोरी-गोरी गाण्ड में सटा-सट अंदर-बाहर हो रहा था, अर्जुन का सपना पूरा हो रहा था, उसने चोदते हुए विनीत के होटों पर अपने होंठ रख दिए, विनीत की सिसकारियाँ उसके होंठों तले दब गयीं, उसके होंठ चूसते-चूसते अर्जुन अपनी जीभ भी उसके मुँह में डाल देता था।

अर्जुन उसके कन्धे पकड़े चोदे चला जा रहा था : लपर-लपर, लपर-लपर… आज उसका लौड़ा मज़े कर रहा था। यह तो विनीत था कि झेल रहा था, चुदा-चुदाया लड़का था (और तब अर्जुन का लण्ड लेने पर उसका यह हाल था) अगर कोई कुँवारा लड़का होता तो उसकी गाण्ड फट जाती।

विनीत बेचारे की आँखों में आँसू आ गए, वो अर्जुन को ऐसे देख रहा था जैसे स्कूल में मार खाता बच्चा अपने टीचर को देखता है और अर्जुन साला हरामी कमीना विनीत को रोता देख कर मुस्कुरा रहा था जैसे कोई कुकर्मी एक घमण्डी लड़की का सफलतापूर्वक चोदन करके अपनी ख़ुशी पर मुस्कुराता है।
उसके चेहरे पर ऐसे भाव थे जैसे मानो कह रहा हो ‘तेरे को चुदना था ना…? ले, और ले… तेरे को चोद चोद कर मार डालूँगा…!
‘आज मैं तुम्हे खूब चोदूँगा… मेरी जान… मेरे रसगुल्ले…’ उसने अपने दिल की बात विनीत को चोदते हुए बताई।

अर्जुन ने विनीत के आँसू पोंछे, शायद उसे तरस आ गया, वो विनीत से प्यार भी तो करता था, उसके चेहरे को उसने अपने दोनों हाथों से थाम लिया जैसे कोई दोनों हाथों से कमल का फूल पकड़ता है। लेकिन फिर भी चोदे जा रहा था, उसके लौड़े को बहुत मज़ा आ रहा था उसकी मुलायम मुलायम, गुलगुली गाण्ड मार कर।

करीब पन्द्रह मिनट तक उन दोनों की चुदाई उसी पोज़ में चलती रही। फिर अर्जुन ने पोज़ बदला, अपना लण्ड निकालते हुए बोला- उठो !

‘बस करो अर्जुन, प्लीज़!’ विनीत गिड़गिड़ाया।

‘अरे अभी कहाँ बस… अभी तो मेरा काम शुरू हुआ है। अभी तो सारी रात बाकी है।’
विनीत का कैसे राक्षस से पाला पड़ा था !

‘चलो घोड़ा बनो…’ अर्जुन ने आदेश दिया।
विनीत बिचारा घोड़ा बन गया।
अर्जुन उसी तरह घुटनों के बल खड़ा, विनीत को कमर से दबोच कर चोदने लगा, उसी तरह, फुल स्पीड में।
विनीत फिर से छटपटाने लगा, मीठे मीठे दर्द में- अहह…!! ऊह्ह्ह…! अहह… ह्ह्ह… ऊह्ह…!! अहह…!
और अर्जुन आनन्द के सागर में गोते लगा रहा था।

‘विनीत… मेरी जान… आई लव यू…’ उसने मदमाते स्वर में बोला। उसकी शक्ल ऐसी हो गई थी जैसे उसे हल्का हल्का नशा चढ़ रहा हो।
विनीत के मम्मी पापा का डबल बेड ऐसे झटके खा रहा था जैसे उस पर साण्ड उछल कूद कर रहा हो। वैसे अर्जुन और साण्ड में ज़्यादा फर्क नहीं था।

अर्जुन ने विनीत को उस पोज़ में लगभग पंद्रह-बीस मिनट चोदा- गपर, गपर।
विनीत की गोरी-गोरी टाँगे अर्जुन की काली, बालों से भरी मांसल टाँगो के थपेड़ों से झुक जाती थी। अर्जुन के काली-काली गुलाबजामुन जितनी बड़ी गोलियाँ उछल उछल कर विनीत के गोरे-गोरे चूतड़ों से टकरा रहीं थी।

उसने फिर से पोज़ बदला, अब वो पलंग से उतर कर फर्श पर खड़ा हो गया, इससे पहले विनीत कुछ कहता या करता, अर्जुन ने उसे बाँह से पकड़ कर घसीट लिया कि कहीं विनीत भाग न जाये।

‘अर्जुन… प्लीज़ बस कर करो।’
लेकिन अर्जुन ने उसे अनसुना कर दिया- उतरो पलंग से।

उसने विनीत को पलंग से सटा कर फर्श पर खड़ा कर दिया और उसकी एक टाँग पलंग पर रख दी, इससे उसकी गाण्ड फैल गई।
अर्जुन विनीत के पीछे जाकर खड़ा हो गया। उसका लण्ड एन्टीना की तरह टाइट खड़ा लहरा रहा था।
अर्जुन विनीत के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपना लण्ड घुसेड़ कर पीछे से दबोच कर चोदने लगा।

‘आह्ह्ह…!!’ विनीत उसके लण्ड का थपेड़ा अपने अंदरूनी अंग तक महसूस कर रहा था- ऊऊ ह्ह्ह… उह्ह्ह… आह्ह्ह…!!

अर्जुन विनीत के कन्धे दबोचे, उसके गाल से गाल सटाये चुदाई का आनन्द ले रहा था, बीच बीच में वो अपनी जीभ बढ़ा कर विनीत के खुले मुँह में, जिससे सिसकारियाँ निकल रहीं थी, डालने की कोशिश करता।

‘मेरी जान… मज़ा आ रहा है?’ उसने चोदते हुए अपने प्रेमी से पूछा, लेकिन बेचारा विनीत कुछ बोल ही नहीं पा रहा था। विनीत के हाँ-ना की परवाह किये बिना अर्जुन उसे चोदने में लगा पड़ा था।
बेचारा विनीत उसी अवस्था में खड़ा खड़ा थक गया था सो अपनी टाँग नीचे रख ली और पलंग पर हाथ टिका कर झुक गया।
अर्जुन उसके ऊपर लद गया, उसी तरह चेहरा सटाये और उसको पीछे से कन्धों से दबोचे गपर-गपर चोदे चला जा रहा था, उसका काला-काला लण्ड विनीत की गोरी-गोरी गाण्ड में ऐसी स्पीड से अन्दर-बाहर हो रहा था जैसे इन्जन का पिस्टन।

और उसी लय में विनीत चिल्ला भी रहा था- ओह्ह्ह्ह… ऊह्ह… ओह्ह्ह… उह्ह्ह… ओह्ह्ह… !!!

लड़कियाँ भी ऐसी आवाज़ नहीं निकलतीं होंगी जैसे वो निकाल रहा था।
अर्जुन ने विनीत को बीस मिनट तक वैसे ही चोदा फिर वो चरम सीमा पर पहुँच गया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा।
विनीत को ऐसा लगा जैसा अर्जुन का लण्ड उसके पेट में घुस जायेगा। अब बेचारे को ज़ोर का दर्द होने लगा- अर्जुन… प्लीज़ बस… करो… आआह्ह्ह…

अर्जुन ने उसके गिड़गिड़ाने के बीच एक ज़ोर का शॉट मारा- नहीं… ईइह्ह्ह… अर्जुन… दर्द… हो… आह्ह… रहा है…!
‘बस मेरी जान… मेरा झड़ने वाला है।’ अर्जुन चोदते हुए नशीले अंदाज़ में बोला और बस फिर विनीत की गाण्ड में झड़ गया।

झड़ते हुए उसके लण्ड ने विनीत की गाण्ड में फिर फुंफकार मारी, जैसा की झड़ने पर वीर्य की पिचकारी मारते हुए लण्ड फुदकते हैं, और विनीत फिर चिल्लाया- आह हहा… आअह्ह !!

लेकिन उसकी यह आखरी यातना थी, अर्जुन झड़ चुका था।
कहानी जारी रहेगी।

Download a PDF Copy of this Story काला हीरा -3

Leave a Reply