मेरे गांडू जीवन की कहानी-22

(Mere Gandu Jiwan Ki Kahani- Part 22)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अभी तक आपने पढ़ा कि मैं रवि के घर रात में रुका हुआ था। उसके साथ दूसरी सुहागरात होने के बाद सुबह जब हम अखाड़े में पहुंचे तो संदीप भी वहाँ पहलवानी करने आया हुआ था। वहाँ पर संदीप और रवि के बीच कुछ बातें हुईं लेकिन मुझे इस बात का पता नहीं लग पाया कि संदीप ने रवि से मेरे बारे में क्या बात की।
जब हम घर लौटे तो रवि ने मुझे अपनी बहन की शादी की एल्बम दिखाई जिसमें उसकी गर्लफ्रेंड की फोटो थी। ये वही लड़की थी जिसको मैंने संदीप के साथ बस में देखा था। रवि ने बताया कि वो उस लड़की से कैसे मिला और कैसे उसने उसके साथ पार्क में पहली बार सेक्स किया। रवि की ज़िंदगी की ये सच्चाई मेरे सामने आई तो मेरा वहाँ पर सांस लेना भारी हो गया और मैं मां के फोन का बहाना बनाकर उससे अलग हो कर अपने घर वापस आ गया।

घर आकर 2-3 दिन तो मुझे होश ही नहीं था कि मैं क्या कर रहा हूँ, क्या खा रहा हूँ, क्या देख रहा हूँ, बस ऐसे ही खोया-खोया सा रहने लगा।
मेरी मां को मुझ पर शक हो गया, उसने पूछा- अंश, क्या बात है… जब से तू हिसार से आया है कुछ उदास सा रहता है।
वैसे तो मैं मां से झूठ नहीं बोलना चाहता था लेकिन अगर सच्चाई बताता तो कौन सी? अपने गे होने की… रवि से प्यार करने की… संदीप से चुदने की या रवि की बेवफा गर्लफ्रेंड की?
इसलिए मैंने बहाना बनाकर कह दिया कि मेरा दोस्त काफी मुसीबत में फंस गया था बस उसी के लिए परेशान हूँ।
मां बोली- ऐसी क्या मुसीबत आ गई जो तू उसके लिए इतना परेशान हो रहा है?
मैंने कहा- मां, ये आपके मतलब की बात नहीं है। हम दोस्तों के बीच की बात है।
तो वो बोली- ठीक है, मत बता, लेकिन चिंता करने से क्या मुसीबत कम हो जाएगी? अगर कोई परेशानी है तो उसका समाधान ढूँढने की कोशिश करनी चाहिए… ना कि मुंह लटका कर बैठ जाना चाहिए.

मां की यह बात सुनकर मेरी उदासी टूटी, मैंने सोचा कि बात तो मां ठीक ही कह रही है। अगर परेशानी है तो उसका हल भी ढूँढने की कोशिश करनी होगी मुझे।
मैं मां की तरफ देखकर मुस्कुरा दिया, मुझे मुस्कुराता देख कर मां को भी थोड़ी तसल्ली हो गई और वो मेरे सिर पर हाथ फेर कर अपने काम में लग गई।

अब मैं यह सोचने लगा कि अगर रवि को सीधे ये बात बता दूं कि उसके साथ धोखा हुआ है तो शायद मैं उसके दिल पर चोट लगने का कारण बन जाऊंगा। मुझे कोई और तरीका निकालना होगा। मैं रोज़ इन्हीं विचारों में रहता कि रवि के सामने सच्चाई कैसे लाई जाए।

लगभग 15 दिन बाद रवि का फोन आया, उसने मुझे हिसार आने के लिए कहा लेकिन मैंने काम का बहाना बनाकर उसे मना कर दिया। मैं अभी उसका सामना करने के लिए तैयार नहीं था। एक हफ्ते बाद फिर उसका फोन आया, उसने फिर मुझे अपने घर आने के लिए कहा लेकिन मैंने इस बार भी मना कर दिया।

वो बोला- क्या बात है भाई… यही प्यार था क्या तेरा? इतने दिन से बुला रहा हूँ और तुझे आने की फुरसत नहीं लग रही? पिछले महीने आया था तो बड़ी प्यार-प्यार की बातें कर रहा था। मन भर गया तेरा मुझ से?
मैंने कहा- नहीं यार… ऐसी बात नहीं है, बस घर से निकलने का टाइम नहीं मिल रहा।
वो बोला- कोई बात नहीं, मैं ही पागल था जो तेरी बातों को सच मान बैठा। गांडू आखिर गांडू ही होता है।

उसकी यह बात सुन कर ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे दिल में लोहे की कील ठोक दी हो। अपनी मजबूरी से झल्ला कर मैंने फोन काट दिया। अब उसको कैसे समझाऊं कि मैं उससे क्यों नहीं मिलना चाहता। उसे क्या पता था कि वो मेरे लिए क्या मायने रखता है… लेकिन हर बार ज़हर का घूंट तो पीने की तो जैसे आदत सी हो जाती है गांडुओं को। यह कोई नई बात थोड़े ही थी मेरे लिए।
लेकिन मुझे इस बात की चिंता थी कि कल को अगर सारी सच्चाई का पता लगता है तो वो उसको सहन कर पाएगा या नहीं। मेरे दिमाग पर हर दिन प्रेशर बढ़ता जा रहा था।

एक दिन मैं यूं ही शाम के समय खेतों में टहलने गया हुआ था, वहाँ पर चल रहे ट्यूबवेल को देख कर उसके साथ हुए सेक्स की यादें ताज़ा हो गईं। वैसे तो वो हर वक्त मेरे ख्यालों में रहता था लेकिन आज दिल कुछ ज्यादा ही भारी हो रहा था।

रात का खाना खा कर मैं बिस्तर पर लेटा हुआ फोन में ग़मगीन गाने सुन रहा था। उसकी फोटो मेरे वॉलपेपर पर लगी रहती थी हमेशा। मैं उसके चेहरे को देखता रहता था। देखते देखते अचानक मेरा ध्यान डेट की तरफ गया।
15 मई! हे भगवान… 18 को तो उसका जन्मदिन है। ये बात मैं कैसे भूल गया… मेरे दिल की धड़कन धक धक हो उठी। मैंने सोचा, उसका जन्मदिन है और मैं यहाँ घर बैठा हुआ हूँ। लेकिन जाऊं तो जाऊं किस मुंह से उसके पास।

फिर अचानक मेरे दिमाग में तरकीब आई कि क्यों इस दिन उसे सारी सच्चाई बता दूं। मुझे यकीन है कि अपने जन्मदिन वाले दिन वो मेरी बात का बुरा नहीं मानेगा। मैं चुपचाप बिना बुलाए उसे सरप्राइज़ देने पहुंच जाऊंगा… उसे मना भी लूंगा और संदीप के बारे में भी सारी सच्चाई बता दूंगा।
मैंने सोचा, अच्छा आइडिया है अंश… इससे अच्छा मौका तो हो ही नहीं सकता इस समस्या को हल करने का।

मैंने 18 मई के लिए प्लानिंग करना शुरु कर दिया। अगले ही दिन मैंने मार्केट जाकर उसके लिए एक फिटिंग वाली शर्ट खरीदी। एक शहद की शीशी और एक महंगे वाला पर्फ्यूम… ये सब सामान लेकर मैंने रख लिया और दो दिन पहले ही मां को बोल दिया कि मैं 18 को अपने दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ।
मां ने मेरा मूड ठीक होते देख कर कोई आनाकानी नहीं की।

अब मुझसे एक एक घंटा काटना भारी हो रहा था। बड़ी मुश्किल से 17 का दिन और वो रात गुज़री… 18 की दोपहर के बाद मैं हिसार के लिए निकल पड़ा, मुझे 9-10 बजे तक हिसार पहुंचना था। इसके लिए मैंने पहले से ही प्लानिंग कर रखी थी। मैं बस, ट्रेन, ऑटो का इस्तेमाल करते हुए 9 बजे तक हिसार पहुंच गया। मैं रवि को सरप्राइज़ देने के बारे में सोच कर अंदर ही अंदर खुश हो रहा था।

मैंने बस स्टैंड पर पहुंच कर रवि को फोन किया तो उसने कहा- हाँ, आ गई याद तुझे मेरी?
मैंने उससे पूछा- कहाँ हो तुम?
वो बोला- मैं तो हिसार में अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा हूँ। तू कहाँ है..
मैंने कहा- मैं भी हिसार में ही हूँ…
वो बोला, क्यूं, यहाँ क्या गांड मरवा रहा है?

मुझे उसकी बात का ज़रा भी बुरा नहीं लगा… मुझे पता था कि वो मुझसे नाराज़ होकर गुस्सा कर रहा है।
मैंने कहा- मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ.
वो बोला- ठीक है, तुझे एड्रेस भेज रहा हूँ इस पर आ जा!

कुछ देर बाद मेरे फोन में एक मैसेज रिसीव हुआ जिसमें हिसार के सेक्टर 14 का एक एड्रेस लिखा हुआ था। मैंने वहाँ से ऑटो की और उस पते पर पहुंच गया। मैंने पहुंच कर रवि को फोन किया तो उसने फोन नहीं उठाया, बेल जाती रही, कुछ सेकेण्ड्स बाद फोन कट गया।

मैंने दोबारा फोन किया तो उसने फोन काट दिया।
जब मैंने तीसरी बार फोन किया तो उसने फोन उठाया और बोला- क्यों भड़क कर रहा है?
मैंने कहा- एक बार मिल ले यार… फिर वापस चला जाइयो..
वो बोला- क्यों… मेरा लंड लिए बिना तेरी गांड का कीड़ा शांत नहीं होता क्या..

वो नशे में बोल रहा था… और उसके पीछे से और भी कई लड़कों की हंसी सुनाई दे रही थी।
एक तो मैं इतनी दूर उससे मिलने के लिए आया था और वो ऐसा बिहेव कर रहा था… अपने दोस्तों के सामने ही मुझे गांडू गांडू कह कर बुला रहा था… मेरा गला रूंधने लग गया, मैंने भारी होती आवाज़ में कहा- रवि… बस एक बार मिल ले यार… मैं तुझे देख कर वापस चला जाऊंगा.
मेरी रूंधती हुई आवाज़ सुनकर शायद उसके दिमाग ने कुछ काम किया होगा, वो बोला- रुक मैं आता हूँ।

मैंने भगवान का शुक्र मनाया… नहीं तो इतनी रात को वापस कहाँ जाता!
फोन काटने के 2-3 मिनट बाद मैंने देखा कि वो लड़खड़ाता हुआ गेट से बाहर निकल कर आया, मैं हाथ में उसके लिए खरीदे गए गिफ्ट लेकर खड़ा था।
उसे देखते ही मैंने अपने पसीजे दिल को संभाला और उसको हैप्पी बर्थडे बोला।
उसने कहा- हाय मेरी जान… तुझे मेरा बर्थ डे याद था। लेकिन तू ये कैसे भूल गया कि रवि तेरे जैसी रंडियों को अपने लंड के नीचे ही रखता है।

उसके मुंह से दारू की स्मैल आ रही थी, मैं समझ नहीं पा रहा था कि उसे हो क्या गया है, वो ऐसी बातें क्यों कर रहा है, वो मेरा रवि हो ही नहीं सकता।
वो बोला- अब आ ही गया है तो अंदर भी आजा… तू भी थोड़े मजे कर ले न जान…
वो मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर ले गया।

अंदर जाकर मैंने देखा कि काफी तेज़ आवाज़ में म्यूजिक बज रहा था और तीन चार लड़के जो हट्टे कट्टे थे और लगभग 24 से 28 साल की उम्र के थे, अपनी शर्ट उतारे हुए दारू की बोतल हाथ में लेकर नाच रहे थे और एक दूसरे को पिलाए जा रहे थे।
उनमें से एक लड़का संदीप भी था।

उसको देखते ही सारी बात मेरी समझ में आ गई, ये सब उसी का किया धरा है।
संदीप ने मेरी तरफ देखा और हंसते हुए बोला- क्यों बे गांडू… आ गया तू फिर से हम पांचों से गांड मरवाने?
वो सारे मुझे देख कर हंसने लगे।

रवि भी मुझे अकेला छोड़कर उनके साथ नाचने लगा, वो दारू पीते जा रहे थे और नाचते जा रहे थे। सामने कंप्यूटर स्क्रीन पर वीडियो गाने चल रहे थे। वो कुछ देर ऐसे ही नाचते रहे और मैं ऐसे ही वहाँ पर बेइज्जत सा खड़ा रहा।
एकाएक वो पंजाबी गाना बंद हो गया और दूसरा वीडियो चल पड़ा जिसे देख कर मेरी आंखें हैरानी से फटी रह गईं। ये वीडियो देखकर मेरे दिल को इतना गहरा धक्का लगा कि पीछे की दीवार के सहारे जा लगा।

ये उसी कोठरी की वीडियो थी जिसमें संदीप ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर मेरी गांड मारी थी। वीडियो शुरु होते ही रवि को छोड़ चारों लड़कों ने अपने लंड अपनी जींस की पैंट की जिप से निकाले और मेरी तरफ देख कर हिलाने लगे. वो सारे नशे में धुत्त थे, उनके हाथ में उनके सोए हुए लंड थे, मुंह से इस्स्स.. आहहह.. इस्स्स.. कर रहे थे।

जहाँ से वीडियो शुरु हुआ वहाँ पर जग्गी मेरे मुंह में लंड डाल कर चुसवा रहा था, राजबीर मेरी गांड में उंगलियां डाल कर अंदर बाहर कर रहा था और मैं जग्गी का लंड चूसने में मस्त था।
उसके बाद राजबीर यानि कि राजू मेरी गांड में लंड डालकर उसे चोदने लगता है… उसके बाद संदीप आता है और राजू से लंड बाहर निकालने को कहता है… राजू मेरी गांड से लंड बाहर निकाल रहा होता है। संदीप उसके पास जाकर खड़ा हो जाता है और दोनों ही अपने लंड मेरी गांड के छेद पर लगाकर मेरे दोनों हाथ पीछे की तरफ खींचने लगते हैं।
दर्द के मारे मैं होश खो देता हूँ और बेसुध होकर गिर जाता हूँ, ये लोग डर जाते हैं कि मुझे क्या हो गया। और राजू अपना लंड वापस निकाल लेता है लेकिन संदीप कहता है कि डर मत… ये बहुत बड़ी रंडी है, कुछ नहीं होगा इसे।
इतना कह कर वो मेरी गांड मारना चालू रखता है लेकिन मैं तो बेहोश हो चुका था। तो संदीप को कुछ खास मज़ा नहीं आया.. उसके बाद जगबीर आता है और मेरी गांड में अपना लंड देकर अंदर बाहर करने लगता है, 5 मिनट बाद वो झड़ कर उठ जाता है और उसके बाद राजू फिर से मेरी गांड को चोदने लगता है और कुछ ही देर में वो भी झड़ जाता है.
संदीप अभी सामने ही ये सब देख रहा होता है, वो मेरे मुंह के पास आकर लेट जाता है और मुंह को अपने हाथों से खोलते हुए उसमें अपना लंड दे देता है और मेरे मुंह को चोदने लगता है। लेकिन उसे यहाँ भी मज़ा नहीं आया। इसके बाद राजू कहता है कि संदीप तुझे ऐसे मज़ा नहीं आएगा, रुक मैं बताता हूँ कैसे कर।
राजू जग्गी को अपने साथ बुलाता है और मुझे सीधा पीठ के बल लेटा देता है। अब दोनों मेरी एक एक टांग को अपने हाथ में इस तरह से पकड़ कर उठा लेते हैं कि मेरी गांड का छेद सीधा हवा में आ जाता है जहाँ पर संदीप घुटनों के बल खड़ा हुआ था। राजू ने कहता है कि अब डाल, संदीप अपना लंड मेरी गांड में डाल कर चोदने लगता है… राजू और जग्गी मेरी टांगों को पकड़े हुए हैं और संदीप पूरा ज़ोर लगा कर मेरी गांड को चोद रहा होता है. 5 मिनट बाद संदीप की मेरी थाईज़ को पकड़ कर अपने धक्कों की स्पीड बढा देता है… उसके धक्के इतने तेज़ थे कि उसके आंड मेरी थाइज़ से लगकर फट्ट फट्ट की आवाज़ कर रहे थे जो वीडियो में भी साफ सुनाई दे रही थी। राजू और जग्गी मेरी टांगों को पकड़े हुए कामुक सिसकारियां ले रहे थे और कह रहे थे- चोद साले को… फाड़ दे इसकी गांड।
संदीप अगले 2 मिनट तक पूरी ताकत के साथ मेरी गांड को चोदता है और एकाएक झटके देता हुए मेरी गांड में झड़ जाता है. मेरी गांड से लंड निकालकर वो खड़ा हो जाता है और माथे का पसीना पोंछते हुए बगल में झटक देता है. उसके उठते ही राजू और जग्गी मेरी टांगों को छोड़ देते हैं और संदीप कैमरे की तरफ हाथ बढ़ाता है और कैमरा कोठरी की छत की तरफ हिलता हुआ बंद हो जाता है।

वीडियो रुकते ही मैंने देखा कि वो पांचों भी वीडियो देख रहे थे और ठहाका मारकर हंसने लगे। अब मेरी समझ में आया कि रवि मेरे साथ ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा था। यह आग संदीप ने लगाई थी लेकिन मेरे अंदर अब बदले की आग धधक उठी थी।
लेकिन फिर रवि के बारे में सोचा… अगर मैं संदीप की असलियत रवि को बता भी दूं तो भी चोट तो रवि को लगेगी और दर्द मुझे ही होना है… इसलिए बेइज्जती का वो कड़वा ज़हर मैंने वहीं पर पी लिया। मैंने सोचा, रवि और मेरा साथ इतना ही था।
इतना सब होने के बाद अब वो मुझ पर थूकेगा भी नहीं।

मैं दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगा और दरवाज़ा खोलने ही वाला था कि रवि ने मेरा हाथ पकड़ लिया, बोला- कहाँ जा रहा है गांडू?
मैंने गुस्से और ग्लानि से भरी आवाज़ में कहा- आत्महत्या करने।
वो बोला- आज लंड नहीं लेगा क्या मेरा?
सुनकर वो सारे के सारे हंसने लगे।

मैं अंश बजाज जल्द ही लौटूंगा कहानी के अंतिम पड़ाव के साथ.
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