मेरे गांडू जीवन की कहानी-18

(Gand Chudai Ki Desi Kahani: Mere Gandu Jiwan Ki Kahani- Part 18)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अभी तक आपने गांड चुदाई की देसी कहानी में पढ़ा कि रवि के घर में उसके साथ मेरी दूसरी सुहागरात शुरु हो चुकी थी और उसकी लोअर में तने लंड को चूमने चाटने के बाद मैंने उसकी छाती को नंगा करवा कर छाती के बालों को चूमा, उसकी गर्दन पर प्यार से किस किया और फिर उसने टी-शर्ट निकाल दिया और मैंने उसके दोनों हाथों को पीछे फैलवा कर उसके अंडरआर्म के बालों को जी भर के चाटा और उस मर्द की जवानी का रस पीया।
उसकी जवानी की खुशबू में डूबा हुआ सा मैं दोबारा उसकी छाती पर किस करने लगा। उसकी छाती के बाल जो छाती को ढक कर बीच वाले हिस्से में इकट्ठे होकर धारा की तरह नीचे पेट की तरफ आकर उसकी नाभि से होकर उसके झाँटों में मिल रहे थे। उसके सेक्सी बालों की लकीर में नाक फिराता हुआ मैं उसकी लोअर के इलास्टिक तक पहुंच गया जहां उसकी फ्रेंची की सफेद पट्टी शुरु हो रही थी।

रवि की लोअर में तना लौड़ा और लोअर से ऊपर का उसका नंगा बदन और साथ ही उसके चेहरे पर तैरती अंतर्वासना की लहरें मुझे उसके लिए पागल किए जा रही थीं. मैंने अपने दांतों से उसकी लोअर की इलास्टिक को नीचे खींचने की कोशिश की। लेकिन उसकी गांड इतनी मोटी थी मुझे कामयाबी नहीं मिली और दो पल बाद उसने थोड़ा उठते हुए अपने हाथों से ही लोअर को अपनी जांघों तक नीचे सरका दिया।

उसकी लोअर का परदा नीचे गिरते ही मेरे सपनों का लौड़ा मेरे मर्द की फ्रेंची में तना हुआ मेरे मुंह में जाने के लिए तड़पता हुआ दिखाई दिया। उसके मोटे लंड ने जॉकी की फ्रेंची को ऊपर उठा रखा था और फ्रेंची का राइट साइड वाला लगभग आधा हिस्सा उसके प्रीकम से गीला होकर लौड़े की नोक पर झाग बना चुका था। मैंने तने हुए लौड़े के मुंह पर उसके झाग को अपनी जीभ की नोक से टच किया तो लंड ने झटका दे दिया। उस झटके के जवाब में मैंने उसकी टोपी को अपने होठों से चूस लिया और रवि की गहरी ‘आह…’ निकल गई। उसके चेहरे को देख कर मैं आसानी से अंदाज़ा लगा सकता था कि वो अपना प्रीकम से तर हो चुका लौड़ा मेरे गर्म मुंह में देने के लिए तड़प रहा है।

उसने कहा- बस कर अब फ्रेंची में ही निकलवाएगा क्या…
मैंने हल्के से मुस्काते हुए उसके सेक्सी चेहरे की तरफ देखते हुए फ्रेंची में बनी लंड की शेप पर होंठ फिराते हुए बड़े ही प्यार से उसकी फ्रेंची की इलास्टिक को धीरे से नीचे खींचना शुरु कर किया। उसके घने काले झाटों से पर्दा हटाती हुई धीरे-धीरे नीचे सरकती हुई फ्रेंची फिसल रही थी और उसके बांस जैसे मोटे लंड की जड़ दिखना शुरु होकर धीरे-धीरे लंड की गोलाई को नंगा करके फ्रेंची ने लंड के टोपे पर आकर उसका साथ छोड़ दिया और लगाम से छूटे घोड़े की तरह उसका लौड़ा एकदम से उछलकर उसके बालों भरे आण्डों को पूरा दर्शाता हुआ उसके झाटों के ऊपर जाकर लेट गया।
उसकी फ्रेंची को जांघों से नीचे फंसा कर मैं भी अपने मर्द की उबल रही जवानी को निहारने लगा। मैंने धीरे से उसकी मोटी जांघों के बीच बनी अंधेरी खाई पर टिक कर फैले हुए आण्डों पर गर्म जीभ लगाई तो वो सिकुड़ते हुए हरकत में आ गए। और लंड ने एक जोर का उछाला देते हुए बता दिया कि आँडों के मालिक को मजा आया।

मैंने उसके गोल सांवले भारी आँडों को मुंह में भर लिया और उसके पेट पर कोमलता से हाथ फिराते हुए उसके आँडों को अंदर ही अंदर जीभ से गुदगुदाने लगा। उसके लंड ने झटके पर झटके मारना शुरु कर दिए और रवि के हाथ मेरे बालों में प्यार से उंगलियां फिराने लगे। उसकी आँखें आनन्द में बंद थीं और वो आँड चुसाई के गहरे सागर में गोते लगा रहा था।
5 मिनट तक मैंने उसके भारी भरकम आँडों को चूस चूस कर उसे पागल कर दिया।

वो बोला- एक मिनट रुक।
मैंने आँडों से मुंह हटा लिया और उठकर बैठ गया, मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोला- तू एक बार आँखें बंद कर!
मैंने हैरानी से उसकी तरफ देखा।
वो बोला- कर ना आँख बंद।

मैंने मुस्कुराते हुए आँखें बंद कर ली, वो चारपाई से उठ गया और एक मिनट के अंतराल के बाद वापस आकर लेट गया। मेरी आँखें बंद ही थीं। मुझसे बिना कुछ कहे उसने मेरी गर्दन पकड़ी और नीचे झुकाते हुए मेरे होठों को लंड के टोपे पर रख दिया। मैं भी उसके लंड को मुंह में लेने के लिए मरा जा रहा था पर जैसे ही मैंने होंठ खोल कर लंड को अंदर लेना शुरु किया और जीभ पर लगता हुआ लंड अंदर तक गया तो मुझे कुछ मीठा मीठा स्वाद आने लगा।
मैंने आँख खोलकर देखा तो उसके झाटों पर शहद की कुछ बूंदें गिरी हुई थीं।

लंड की जड़ तक तक बह कर शहद झाटों में जा रहा था। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने आँख मार दी और वही कातिल मुस्कान से पुच्च करके एक सेक्सी पप्पी भी दे दी। मैं पागलों की तरफ उसके शहद में डूबे लंड को चूसने लगा। दांतों को टच किए बिना प्योर होठों वाली चुसाई और साथ में शहद की मिठाई।
आह… इससे ज्यादा आनन्द मुझे लौड़ा चूसने में कभी नहीं आया। मैंने अपने पूरे प्यार को उसके लौड़े की चुसाई में लगा दिया और वो 2-3 मिनट में ही मेरे सिर को दबाता हुआ मेरे मुंह में वीर्य की पिचकारी मारने लगा।
आनन्द से भरे 5-6 झटकों में उसने अपने आँडों की टंकी का रस मेरे मुंह में खाली कर दिया। मैं उसकी एक एक बूंद को निचोड़ता हुआ उसका स्वाद चखता हुआ अपने मर्द के लंड से निकले अंश को अपने अंदर ले गया और उसके लंड को यूं ही मुंह में रखे हुए ही उसके पेट पर सिर रखकर लेट गया।

वो भी शांत हो गया और उसके दोनों हाथ मेरी कमर पर आकर बंध गए। उसकी झाटों से मर्दानगी की खुशबू आ रही थी।
हम दोनों दस बारह मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे। उसके बाद मैंने मुंह में रखे उसके सोए हुए गिलगिले लंड को जीभ की मदद से अंदर ही अंदर चाटते हुए मुंह में एक गाल से दूसरे गाल की तरफ यहां वहां हिलाना डुलाना और उस पर जीभ फिराना शुरु कर दिया। वो ऐसे ही बिना हरकत किए हुए लेटा रहा।

5 मिनट तक लंड के साथ खेलने के बाद जीभ की मेहनत ने रंग दिखाना शुरु किया और लंड ने धीरे-धीरे मेरे गर्म मुंह के अंदर ही अपना आकार बढ़ाना शुरु कर दिया और अगले 5 मिनट में उसके लौड़े ने फिर से मेरे मुंह को भर दिया।
मैंने दोबारा चुसाई शुरु कर दी। अबकी बार तनाव में हल्की सी कमी थी क्योंकि आज मैं रवि के लंड को तीसरी बार निचोड़ने की तरफ आगे बढ़ रहा था। लेकिन पता नहीं क्या बात थी उसमें, अगर उसके पास लंड ना भी होता तो भी मैं उसे ऐसे ही प्यार करता।

मैंने पूरे जोश के साथ उसके लंड को चूसना जारी रखा। उसका एक हाथ अब मेरी लोअर के अंदर घुसकर मेरी गांड को मसल रहा था, उसे बार-बार दबाकर चुदाई के लिए तैयार कर रहा था और दूसरा हाथ मेरे सिर पर दबाव बनाकर लंड को गले तक पहुंचाने में मदद कर रहा था। मैं भी पूरी कोशिश के साथ उसके लंड को गले के अंदर तक ले जाता और होंठ उसके झाँटों को चूम कर वापस आ जाते।
उसकी स्पीड बढ़ रही थी, 5 मिनट तक इसी स्पीड के साथ चुसाई चली और उसने मुझे उठने का इशारा किया। मैं उठ बैठा और रवि ने अपनी लोअर और फ्रेंची दोनों अपनी टांगों से बाहर निकाल कर साथ वाली खाट पर एक तरफ फेंक दी और मेरे टीशर्ट को उठाते हुए मेरे हाथों को ऊपर उठवा कर मुझे ऊपर से नंगा करवा दिया। मेरी छोटी छोटी चूचियों को दबाते हुए उसने बैठे बैठे ही अपने होठों में भर लिया और मेरे निप्पलों को चूसने लगा दांतों से हल्के से काटते हुए!

मुझे मीठा-मीठा दर्द देने लगा, मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया और अपने निप्पल चुसवाने लगा। अब मेरी सिसकारियां निकल रही थीं, मैं उसके होठों और दांतों की हरकत से अपने निप्पलों पर होने वाली सेंसेशन और गुदगुदी से पागल सा हुआ जा रहा था। मैंने रवि के सिर को अपने निप्पलों पर दबा लिया। उसने मुझे लोअर निकालने का इशारा किया और मैंने निप्पल चुसवाते हुए ही लोअर निकाल दी।

अब उसने मुझे पीठ के बल खाट पर पटका और मुझ पर चढ़ गया। कभी निप्पलों को काट लेता तो कभी गर्दन पर किस कर देता।

मैं तो बदहवास सा होकर उसकी हरकतों का मज़ा लेने लगा। पांच सात मिनट तक वो मेरे जिस्म से खेलता रहा और अचानक उसने मेरे हाथ नीचे दबा लिए और मेरी छाती पर बैठ कर लंड को मेरी ठुड्डी पर ला कर पटकने लगा। वैसे तो मैं उस के वज़न के नीचे दबा जा रहा था फिर भी मैंने उस के आनन्द में कोई खलल पैदा नहीं होने दिया और वो लंड को मेरे होठों पर रगड़ने लगा।
और अगले ही पल मेरे सिर के दोनों ओर अपने हाथों का सहारा बनाकर लंड को दोबारा मेरे मुंह में दे दिया और मेरे मुंह को चोदने लगा। उसके आँड मेरी छाती पर झूलते हुए मेरी ठुड़्ड़ी पर आकर लग जाते। और मैं लेटा हुआ उसका लंड को पूरा अंदर ले जाता। उसका लंड मेरे थूक से बिल्कुल चिकना हो चुका था।

रवि ने 5 मिनट तक ऐसे ही मेरे मुंह को चोदा और फिर तेजी से लंड को निकालते हुए जोश के साथ मेरी टांगें ऊपर उठा दीं। उसने मेरी गांड के छेद पर थूक दिया और लंड के टोपे को गांड पर फिराने लगा। मैं तो आनन्द के सातवें आसमान पर पहुंच गया। वैसे तो दिन की चुदाई के बाद मुझे गांड सूजी हुई महसूस हो रही थी फिर भी उसके लंड का गांड के छेद पर फिरना मुझे पागल किए जा रहा था। मैं दोबारा उसका लंड लेने के लिए तैयार हो चुका था।

रवि ने मेरी दोनों टांगों को एक साथ एक हाथ में पकड़ा और दूसरे हाथ से लंड को गांड के छेद पर लगा कर टांगों को छोड़ दिया। धीरे धीरे उसका आठ इंच का लौड़ा मेरी गांड में सांप की तरह अंदर घुसने लगा।
मुझे दर्द हो रहा था पर रवि का लंड लेने के बारे में सोच कर साथ ही मजा भी आ रहा था।
वो मेरा प्यार था.
धीरे धीरे उसने पूरा लंड गांड में उतार दिया और मेरी टांगें अपने दोनों तरफ फैलवा कर मुझ पर लेट गया। उसका लंड पूरी मेरी गांड में समा गया और मुझे अपने मर्द का वो जुड़ाव जैसे स्वर्ग की ओर ले गया। मेरी आँखें बंद हो गईं और मैंने अपने दोनों हाथों से कस कर उसकी कमर को पकड़ लिया और उसे अपनी बांहों में जकड़ते हुए उसके लंड को आँडों तक अपनी गांड में समा लिया।

मैं उसे प्यार से चूमने लगा। उसकी गर्दन पर किस करने लगा और वो आराम से लंड मेरी गांड में डालकर ऐसे ही लेटा रहा। मेरे हाथ उसकी कमर को सहला रहे थे।
मेरी यह सुहागरात पहली सुहागरात से कहीं ज्यादा हसीन और आनन्द देने वाली साबित हो रही थी।

मेरी आंखें बंद हो गईं और मैंने अपने दोनों हाथों से कस कर उसकी कमर को पकड़ लिया और उसे अपनी बाहों में जकड़ते हुए उसके लंड को आंडों तक अपनी गांड में समा लिया। मैं उसे प्यार से चूमने लगा। उसकी गर्दन पर किस करने लगा और वो आराम से लंड मेरी गांड में डाल कर ऐसे ही लेटा रहा।
मेरे हाथ उसकी कमर को सहला रहे थे, मैं चाह रहा था कि वो यूं ही अपना लंड मेरी गांड में डाल कर लेटा रहे और यह रात कभी खत्म ना हो.

2 मिनट बाद उसने लेटे लेटे ही धीरे धीरे हरकत में आना शुरु किया और लंड को गांड में हल्के रिदम के साथ अंदर बाहर करने लगा। वो भी पूरा मजा ले रहा था।
तीन चार मिनट तक ऐसे ही हल्की स्पीड में उसने इजाफा करना शुरु किया और उसके इंजन के पिस्टन ने मेरी गांड में अंदर बाहर होना शुरु कर दिया। रवि अब मेरे ऊपर से उठ गया और उसने एक एक हाथ में मेरी एक एक टांग पकड़ ली और मेरी गांड ऊपर उठाते हुए तेजी से उसमें लंड को अंदर बाहर करने लगा।

मुझे दर्द होने लगा लेकिन उसकी स्पीड हर पल के साथ बढ़ती जा रही थी। खाट से चूं-चूं की आवाजें आने लगीं। पर वो अपनी स्पीड बढा़ता ही जा रहा था। उसकी स्पीड के साथ-साथ मेरा दर्द भी बढ़ रहा था…
मेरे चेहरे का आनन्द गायब हो गया और उसकी जगह गांड के दर्द के अहसास ने ले ली।

रवि ने और ज़ोर से चुदाई करते हुए मेरी गांड को मसलना शुरु कर दिया। मेरी गांड में जैसे मिर्ची का छिड़काव होने लगा। चुदाई की स्पीड के चलते खाट का बिस्तर भी मेरी कमर के नीचे इकट्ठा हो रहा था। लेकिन रवि पूरे जोश में गांड चुदाई का मजा ले रहा था। उसने और जोश के साथ मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरी गांड को उठा कर खुद भी मेरे ऊपर झुक कर मेरी टांगों को एक हाथ में पकड़े हुए और तेज़ स्पीड से गांड को चोदने लगा।

मैं दर्द के मारे तड़पने लगा, क्योंकि रवि के साथ ट्यूबवेल में चुदाई के कारण गांड सूजी हुई थी इसलिए दर्द हर पल बढ़ता ही जा रहा था, मेरा चेहरा लाल हो गया और सांस लेना भारी होने लगा, रवि मेरे चेहरे की तरफ देखे जा रहा था और मेरा दर्द उसे और तेज़ गांड मारने के लिए उकसा रहा था।

मेरी आंखों की साइड से पानी गिरने लगा लेकिन मैंने मुंह से चूं तक नहीं की। लग रहा था कोई जले पर नमक छिड़क कर हथौड़ा अंदर बाहर कर रहा है।

दस मिनट तक चली इस जबरदस्त चुदाई के बाद रवि को मुझ पर रहम आया और उसने स्पीड बढ़ाकर चार पांच तेज़ झटके गांड में लगाए और उसके माथे का पसीना मेरी छाती पर गिरने लगा। वो झड़ कर धीरे धीरे शांत होने लगा और थक कर मेरे ऊपर गिर गया। उसका लंड मेरी गांड में ही सिकुड़ने लगा और मैं उसकी कमर को सहला रहा था।
उसने लंड निकाला और एक तरफ लेट गया।

मैं उठ कर उसके माथे के पसीने को पौंछने लगा और घायल गांड के सहारे उसके पेट के पास बैठ गया। उसकी आंखें बंद थीं। जब आंखें खोलीं तो मैं उसके चेहरे को देखकर मुस्कुरा रहा था…

आगे की गांड चुदाई की देसी कहानी जल्द ही लेकर लौटूंगा मैं अंश बजाज…
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