गांडू दोस्त की गांड चुदाई और बेवफाई

(Gandu Dost Ki Gand Chudai Aur Bewafai)

हाय दोस्तो, यह कहानी मेरी और मेरे एक फ्रेंड सन्नी की है. हम दोनों पिछले कई साल से रिलेशन में हैं. इन सालों में मैंने हजारों बार उसे चोदा होगा और लंड तो पता नहीं, कितनी बार चुसाया होगा.

एक दिन सन्नी ओर मैं साउथ दिल्ली के एक गे स्पा में गए. वहां सन्नी को अभिषेक नाम का मसाजर पसंद आ गया.
सन्नी बोला- मुझे इससे मसाज लेनी है.
मैं बोला- पहले हम एंजाय कर लें, फिर तुम मसाज ले लेना.

हम दोनों ने जल्दी से कपड़े उतारे और तौलिया में आ गए. आप सबको बता दूँ कि सन्नी एक बहुत ही खूबसूरत जिस्म का मालिक है. उसकी स्लिम, चिकनी और एकदम फेयर बॉडी देख कर बुड्डों का भी लंड खड़ा हो जाए.

हम दोनों स्पा में बेसमेंट में आ गए. नीचे आते ही सन्नी मुझसे लिपट गया और बड़ी व्याकुलता से मुझे चूमने लगा. मेरे मुँह से सिसकारियां निकालने लगीं. सनी मेरी बॉडी को चूसते चूसते नीचे की तरफ आ गया और एकदम से उसने मेरे लंड को मुँह में भर लिया. उसके मुँह की गर्मी से मुझे ऐसा मज़ा आया कि मैं बहुत ज़ोर ज़ोर से मोनिंग करने लगा. करीब 5 मिनट लंड चूसने के बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, तो मैंने सन्नी को रोक दिया.

वो लंड चूसना रोक कर मेरी आंखों में वासना से देखने लगा.
मैंने उसे उल्टा होने को कहा, तो वो झट से गांड हिलाते हुए घूम गया.

मैंने पॉंड्स क्रीम निकाली और सन्नी की गांड के गुलाबी छेद पर धीरे धीरे मलने लगा. सन्नी मेरे सामने गांड खोले खड़ा था और मैं उसके सामने से पीछे हाथ करके उसकी गांड में उंगली कर रहा था. उंगली करते करते सन्नी का खड़ा हुआ लंड मेरे मुँह के सामने आ गया, उसने मौका देख कर अपने लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया.

अब सन्नी का लंड मेरे मुँह में था और सन्नी की गांड में मेरा अंगूठा था. मैंने बहुत सारी क्रीम लगा कर अपने अंगूठे को सन्नी की मस्त गांड के छेद में बड़े ही प्यार से घुसेड़ रखा था. मैं बड़े ही प्यार से उसके गुलाबी छेद को ढीला कर रहा था. इस सारे प्रोसेस में सन्नी को बड़ा मज़ा आ रहा था. वो बहुत ही सेक्सी अंदाज़ में मोनिंग कर रहा था, वहां दूसरी तरफ मेरा लौड़ा बहुत तेज़ी से उछाल मार रहा था.

मैंने सन्नी को घुमा कर पूरा लौड़ा उसकी मस्त गांड में पेल दिया और झटके मारने लगा. सन्नी भी बहुत उछल उछल कर गांड में लौड़ा ले रहा था.

तभी उधर एक और बंदा आ गया, वो सन्नी का लंड चूसने लगा. अब सन्नी सातवें आसमान पर आ गया था. इस वक्त मेरा लौड़ा उसकी गांड में था, जबकि सन्नी का लंड किसी और के मुँह में था. उसको दोनों तरफ से मज़ा आ रहा था.

लेकिन उसके मन में तो अभी भी उस मसाजर अभिषेक से मसाज करने का मन चल रहा था. मैं नहीं चाहता था कि वो किसी और के साथ ‘एज अ बॉटम’ सेक्स करे.. पर मैं कुछ भी बोल कर उसे रोक नहीं सका.

वो सब कुछ जानते हुए भी अभिषेक से मसाज करवाने को तैयार था. फिर गांड चुदाई कम्प्लीट होने के बाद हम दोनों रिसेप्शन पर आ गए. सन्नी ने अभिषेक को वहीं बुला लिया. जब तक अभिषेक आता, सन्नी ने एक कोक ले ली.

इतने में अभिषेक आ गया, उसे देखते ही सन्नी उसमें इतना खो गया कि मुझसे कोक पूछना ही भूल गया. मेरे साथ के इतने साल के रिश्ते को वो एकदम से भूल कर अभिषेक से ऐसे चिपका हुआ था. जैसे उसको पता नहीं कितने सालों से जानता हो.

मैं अकेला खड़ा होकर, बड़ा अजीब सा महसूस कर रहा था, लेकिन कर भी क्या सकता था. मुझे सन्नी से इतना ज़्यादा प्यार हो गया था कि मैं उसके लिए अपनी जान भी दे सकता था. फिर ये तो सिर्फ़ एक मसाजर था.

मेरे दिल की क्या हालत रही होगी, आप सोच ही सकते हो. आपके वर्षों पुराने बॉटम फ्रेंड को कोई और आपके सामने एक बंद रूम में लेकर जा रहा हो, तो सोचो मन की क्या हालत होगी.

वो दोनों नीचे रूम में चले गए और मैं ऊपर अकेला रह गया. मैं थोड़ी देर तक तो कैंटीन में बैठा रहा, जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो अभिषेक का रूम नंबर पता करके नीचे गया और रूम नंबर 2 के पास जा कर उसके गेट के पास खड़ा हो गया. मैं दरवाजे से चिपक कर अन्दर की आवाज़ें सुनने की कोशिश करने लगा. वे दोनों धीरे धीरे बातें कर रहे थे, कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

थोड़ी देर में सन्नी के मोनिंग की आवाज़ें आने लगी, शायद अभिषेक सन्नी के साथ बहुत अच्छा बॉडी प्ले कर रहा था. सन्नी की मोनिंग की आवाज़ें बढ़ती ही जा रही थीं. अचानक सब बंद हो गया, फिर अन्दर से ऐसी आवाज़ आई, जैसे किसी का गला चोक हो गया हो.

ये आवाज़ सन्नी की थी, शायद अभिषेक ने अपना लौड़ा सन्नी के गले तक अन्दर घुसेड़ दिया था. सन्नी की ऐसी घुटी हुई आवाज़ें सुन कर मेरा दिल बाहर को आ गया. लेकिन मैं कुछ भी नहीं कर सकता था, मैं बस बेबस सा खड़ा उसकी वो बातें याद कर रहा था कि उसे सिर्फ़ मसाज करनी है और कुछ नहीं करना है.

कमरे के अन्दर से बहुत देर तक रुक रुक कर ‘गुड उप.. गुड उप..’ की आवाज़ें आती रहीं. अभिषेक अपना मस्त लौड़ा सन्नी के बड़े मुँह में पेले जा रहा था. अब सन्नी भी बड़े मज़े से उसके लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसे जा रहा था.
जब बीच बीच में अभिषेक अपने पूरा लौड़ा उसके मुँह में घुसेड़ देता था, तो सन्नी की घुटी आवाजें आने लगती थीं. क्योंकि सन्नी के गला चोक होने की बार बार आवाज़ें आने लगती थीं.

एक बार फिर से थोड़ी शांति हो गयी और धीरे धीरे बातें करने की आवाज़ें आने लगीं. शायद सन्नी उसे कुछ बता रहा था. उसके बाद दोनों की मोनिंग की आवाज़ें आने लगीं. इस बार पता चल रहा था कि सन्नी की गांड मारी जाने लगी थी. सन्नी बोल रहा था- आह अभिषेक बस और नहीं.. बस और नहीं.. रुक जाओ प्लीज़!

अबकी बार उसकी इस आवाज़ में थोड़ा दर्द था. शायद अभिषेक ने अपना मस्त लौड़ा सन्नी की सेक्सी गांड में घुसेड़ दिया था.
सन्नी बोल रहा था- अभिषेक प्लीज़ और नहीं.. प्लीज़ और नहीं.

लेकिन अभिषेक ने शायद अपने कान बंद किए हुए थे. वो उसे अपनी मस्ती में चोदे जा रहा था. हालांकि कुछ पल बाद सन्नी की आवाजों से लगने लगा था कि उसे भी पूरा मज़ा आने लगा था. क्योंकि बीच बीच में उसकी सेक्सी कराहें निकल रही थीं.

करीब एक घंटे बाद वे दोनों रूम से बाहर आ गए. लेकिन इनके निकलने से पहले मैं वहां से जा चुका था. अब मेरा मन और मेरा सो कहने को बड़ा लौड़ा, बिल्कुल बुझ चुका था. मेरा दिल जैसे बैठ सा गया था और लौड़ा मुठ मारने पर भी खड़ा नहीं हो रहा था. मैं मायूसी में सीढ़ियों में जा कर बैठ गया.

कुछ ही देर में मुझे ढूँढते ढूँढते सन्नी वहां आ गया और मेरे खुले हुआ पैरों के बीच बैठ गया. उसकी बॉडी की गर्मी से.. और टच से मेरे लंड में जान आने लगी.

उसने अपनी गर्दन मेरी जांघ पर रख दी और निढाल सा हो गया. मैंने भी अपना सिर उसके सिर के ऊपर रखा और पीछे से उससे लिपट गया. पर उसके जिस्म से एक अजीब सी बदबू आ रही थी. वो शायद अभिषेक के पसीने की थी.

मैंने 2 मिनट तक उस बदबू को बर्दाश्त किया, लेकिन जब सहन नहीं हुआ तो मैं सन्नी से बोला- तू नहा कर आ.
वो चला गया, मैं फिर से सीढ़ियों में अकेला रह गया. आज पहली बार इस स्पा में आकर मुझे इतना खाली फील हो रहा था.

थोड़ी देर में सन्नी वापस आ गया और हम दोनों सोना बाथरूम में चले गए. वहां हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर बैठ गए. पर अभी भी मुझे सन्नी की बॉडी से कुछ बदबू आ रही थी, शायद बहुत बुरी तरह से उन दोनों को पसीना आया था.

ज़्यादा गर्मी होने की वजह से हम लोग डार्क रूम में आ गए. वहां सन्नी ने बेड पर अपना तौलिया बिछाया और हम दोनों उस पर लेट गए. लेकिन अब मुझे सन्नी से वो फीलिंग नहीं आ रही थी. उसकी बॉडी की फील खत्म हो चुकी थी. शायद मेरे मन में ऐसा चल रहा था कि सन्नी ने मुझसे बहुत बड़ी बेवफ़ाई की है. मेरा दिल अन्दर से रो रहा था, पर शरीर बाहर से सन्नी के साथ चिपका था. मुझसे दिल का दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था.

मैंने सन्नी से बोला- तू आज मुझे चोद दे.
वो फटाफट तैयार हो गया. उसने मेरी गांड में क्रीम लगा कर मालिश की, फिर अपनी एक फिंगर अन्दर डाल दी. उसने दो तीन बार अन्दर बाहर करके इस बार दो उंगलियां अन्दर घुसा दीं. इसके कुछ देर बाद मैंने 3 उंगलियों को पेल दिया. अब मुझे दर्द हो रहा था.. मैंने मना किया, पर वो नहीं माना. शायद मुझे भी ऐसा ही दर्द चाहिए था.

थोड़ी देर तक तीन उंगलियों से मेरी गांड में लगातार फिंगरिंग होते होते मेरा दर्द कम हो गया. इसके बाद सन्नी ने मेरी दोनों टांगें उठा कर अपना लंड मेरी गांड में पेल दिया.
उसका लंड घुसते ही मुझे ऐसा लगा, मानो किसी ने गर्म सरिया डाल दिया हो. मैं दिल का दर्द भूल कर गांड के मीठे दर्द में खो गया.

सन्नी ने धीरे धीरे झटके मारने शुरू किए और उन्हें तेज़ करता गया. अब उसका पूरे अखरोट मेरे चूतड़ों में लग रहे थे. मैंने गांड टाइट करके उसके लंड को बाहर निकाल दिया, पर उसने एक ही झटके में वापस मेरी गांड में अपना लंड पेल दिया.

अब मुझे दर्द के साथ मज़ा आने लगा था. सन्नी के झटके तेज होते जा रहे थे. तभी वो रुक गया और मेरे दोनों घुटनों को उसने दबा कर मेरे कंधों से लगा दिया और अपना लंड मेरी गांड की जड़ तक मेरे अन्दर ठोक दिया.

अब वो मुझे बहुत बुरी तरह से चोदने लगा. ऐसा लग रहा था कि उसका लंड पेट में जाकर लग रहा हो. लेकिन मैं चीखने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा था. वो मेरी चीखों को अनसुनी करते हुए मेरी गांड को चोदे जा रहा था

थोड़ी देर तक मेरी गांड चोदते चोदते उसकी स्पीड अचानक बढ़ गयी और उसने अपने सारा माल मेरी गांड में छोड़ दिया. उसने कंडोम लगाया हुआ था, तो सारा वीर्य कंडोम में रह गया.

दो पल बाद जैसे ही उसने अपना लंड बाहर निकाला, तो ऐसा लगा कि उसके लंड ने मेरी गांड का कोई पार्ट निकाल लिया हो. कमाल की बात ये थी कि पहली बार इस पूरी गांड चुदाई में मेरा लंड न जाने क्यों नहीं खड़ा हुआ.

थोड़ी देर मेरे साथ लिपटे रहने के बाद सन्नी बोला कि अब चल शावर लेते हैं.
लेकिन मेरी अभी हिम्मत नहीं थी, मैं बोला- तू शावर ले ले, मैं थोड़ी देर में आता हूँ.
वो ऊपर चला गया और उसके जाते ही मेरे आंसू आ गए, जो रुक ही नहीं रहे थे.

थोड़ी देर में एक और बंदा इस रूम में आया और मेरी गांड के छेद को सहलाने लगा. अब मेरा भी मन किया कि क्यों ना इसका लंड भी ले कर देखा जाए. पर अगले ही पल मुझे लगा कि फिर मुझमें और सन्नी में फर्क ही क्या रह जाएगा. वो भी बेवफा और मैं भी उसके जैसा.

मैं वहां से उठा और ऊपर आ कर शावर लिया. तभी शावर में एक मस्त मसाजर आ गया और बोला- कैन आई ज्वाइन यू?
मैं बोला- आ जाओ.
वो बोला- मैं आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ.
मैंने बोला- मेरा मन नहीं है.
इस पर वो बोला- सिर्फ़ अपना लौड़ा चुसवा दो. मैंने हर बार तुम्हारे लंड को देखा है, जब भी तुम यहां आते हो, पर तुम मुझ पर ध्यान ही नहीं देते हो.
मैं बोला- मैंने अभी माल निकाला है. मैं थका हूँ.
तो वो बोला- कोई बात नहीं, मैं खड़ा कर दूँगा.

ऐसा बोल कर वो घुटनों पर आ गया और उसने मेरे सोते हुए लंड को अपने मुँह में भर लिया. थोड़ी ही देर में उसके मुँह की गर्मी से मेरे लंड में जान आ गयी और वो 3 इंच से बढ़ कर 7 इंच का हो गया. मैंने अपना पूरा लंड उसके गले में अन्दर तक डाल कर उसका मुँह चोदा. उसे चोदते हुए भी मुझे अभिषेक ध्यान में आ रहा था. जैसे अभिषेक ने मेरे सन्नी का गला चोक किया था, वैसे ही मैं उसे अभिषेक समझ कर उसका मुँह चोद रहा था.

वो भी ‘गू गूओ..’ की आवाज़ निकालते हुए मेरा लौड़ा चूस रहा था. अब मेरी लंड की नसें फूलने लगी थीं. मैं झड़ने ही वाला था. मैंने उसके गले में पूरा लौड़ा ठोका और झड़ गया. उसने एकदम से लौड़ा बाहर निकाला, तो मैंने बचा हुआ माल उसके चेहरे पर गिरा दिया.

फिर उसने मुझे नहलाया और तौलिया से मेरी बॉडी को पौंछ कर साफ किया. फिर ऊपर आकर मैंने कपड़े पहने और सन्नी को ले कर वापस घर आ गया.

यह थी सन्नी की और मेरी कहानी. लेकिन ऐसे रिलेशन्स में लोगों को दूसरे की फीलिंग्स से कोई फर्क नहीं पड़ता.

इसलिए भाइयो, किसी से दिल मत लगाओ, जो मिले उसे चोद लो या उससे चुद लो.

मुझे भी लगता था कि इस बार सन्नी से गांड मरवा कर मुझे मज़ा आ गया. शायद मैं भी अब पूरा मजा लेने में भरोसा करने वाला हो गया था.
फ्रेंड्स.. मैं जल्द ही नेक्स्ट गे स्टोरी लिखूंगा. इस कहानी पर कमेंट्स के लिए मेल कीजिएगा.
[email protected]

What did you think of this story??

Comments

Scroll To Top