गे सेक्स स्टोरी: गांड की खुजली

(Gay Sex Story: Gand Ki Khujli)

मेरा नाम अभि है. मैं पुणे में नौकरी करता हूँ. मेरी उम्र 27 साल होने पर भी मेरा शरीर एकदम दुबला पतला सा है. साथ ही मेरा रंग काला सांवला सा है. शायद इसलिए मुझे कोई भी पसंद नहीं करता है. मुझे औरतों की पसंद नापसंद से कोई लेना देना नहीं है. लेकिन मुझे तो सिर्फ एक पसंदी का ख्याल है और वो है मर्द की चाह. मुझे लड़कों में कोई दिलचस्पी नहीं है. अगर दिलचस्पी है तो वो मर्द में है.. ऐसे मर्द, जिनकी उम्र अधिकतर ज्यादा हो, वैसे वाले मर्द मुझे बहुत भाते हैं. मुझे जब से सेक्स के बारे में मालूम हुआ, तभी से ऐसा अच्छा लगने लगा था. पता नहीं क्यों मुझे पहले से ही गे सेक्स में अधिक रूचि थी. मैं हमेशा इंटरनेट पे गे वीडियो, गे स्टोरीज देखता और पढ़ा करता था.

यह सब गे वीडियो और गे स्टोरीज देख पढ़कर मेरा रोम रोम कांप उठता था. खास कर मेरे मुँह में पानी आ जाता और गांड में खुजली होकर गुदगुदी सी होने लगती थी. एक सिहरन सी पूरे शरीर में दौड़ने लगती, मानो उस वीडियो से या फिर उस कहानी से बाहर आकर वो मर्द मुझे भी अपना लंड चूसने दे और जी भर मेरी गांड की खुजली मिटाए. अपने लंड का पानी मेरे मुँह में छोड़े और मेरी प्यास मिटा दे. मेरी प्यास मिटा कर, मेरी गांड मारकर मेरे गांड में पानी छोड़े ताकि गांड में चल रही आग उस पानी से बुझ सके.

यह सब देख और पढ़ कर मुझे कुछ भी नहीं सूझता था. मेरा काबू मुझ पर नहीं रह पाता था. इसलिए मैं अक्सर अपनी गांड की खुजली मिटाने के लिए पेन्सिल का इस्तेमाल करता था. मैं खुद डॉगी स्टायल में होकर एक हाथ से पेन्सिल अपनी गांड में डाल के उस पेन्सिल को आगे पीछे करता था. इससे मेरी गांड की खुजली और बढ़ जाती, तो मैं उस पेन्सिल को गांड में से निकाल कर चाटता और चूसता. फिर उस गीली पेन्सिल को फिर से गांड में घुसा के अपनी गांड खुद मारता. लेकिन इतने से मुझे कभी भी शांति नहीं मिलती थी. इसलिए मैं हमेशा से ही एक मर्द की तलाश करता रहता था.

लेकिन मेरे रूप और रंग के कारण मुझे कोई भी आदमी पसंद ही नहीं करता था. मैंने कई बार इंटरनेट पे खोजा. मैंने अलग अलग गे साईट पे खाता खोल कर रिक्वेस्ट भेजी, उनके लिए मैसेज भी भेजे, लेकिन फिर भी किसी का रिप्लाई नहीं आया.

यह घटना 2 साल पहले घटी थी. मेरा रूम मेट रूम छोड़ कर जा चुका था. उसकी जगह सुरेश नामक एक व्यक्ति आ गया था. उनकी उम्र तकरीबन 40 से 45 के आसपास लगती थी. अब सुरेश और मैं एक ही रूम में होने के कारण हर रोज सोने से पहले हम दोनों देर रात तक बातें करते थे. सुरेश की बातों से पता चला कि उनकी फैमिली नासिक में है और उनका यहां पर ट्रान्सफर हो चुका था, इसलिए वो सिर्फ 2 साल के लिए पुणे आये थे. उसके बाद सुरेश वापस नासिक जाने वाले थे.

खैर.. अब हम दोनों अच्छे दोस्त बन चुके थे.

मैं अब सुरेश के बारे में सोचता था कि सुरेश अपनी फैमिली से दूर हैं तो उन्हें भी रात को उनके पत्नी की याद आती होगी. आखिर उनका भी लंड तन जाता होगा तो वो भी हाथ से पानी निकालते होंगे या फिर उन्होंने बाहर किसी जगह पर इंतजाम किया होगा. सो मुझे लगा कि मुझे एक ट्राई जरूर करना चाहिये.. फिर जो होगा देखा जाएगा. वैसे भी क्या पता, अगर उनके लंड की प्यास मेरे चूसने से और मेरी गांड मारने से उनकी प्यास बुझ जाए और साथ ही मेरी आग भी बुझ जाएगी.

उस समय गर्मी का मौसम था.. तो मैंने सुरेश जी से कहा कि रात को रूम में बहुत ही गर्म होता है. इसकी वजह से ठीक से नींद भी नहीं आती है. क्यों ना हम दोनों सोने के लिए छत पर चलें? छत पे ठंडी हवा चलती है.. और वैसे भी वहां कोई आता जाता नहीं है.

मेरी यह बात सुन कर सुरेश जी ने झट से हामी भर दी. हम दोनों अपनी अपनी चादर और रजाई लेकर छत पर पहुंच गए. हमने एक ही बड़ा बिस्तर बना लिया. उस बिस्तर पर हम दोनों अपनी अपनी रजाई में सो गए. लेकिन मुझसे तो नींद कोसों दूर थी. मेरे दिमाग में प्लान चल रहा था कि कैसे भी करके इनका लंड चूस के अपनी गांड मरवानी है.. चाहे जो हो जाए.

करीब आधी रात हो गई थी. सुरेश जी शान्ति से सोए हुए थे. मैंने अपनी रजाई अपने ऊपर से हटा दी और धीरे धीरे से सरकते हुए सुरेश जी के पास पहुंच गया. सुरेश जी का मुँह मेरी तरफ था. इसलिए मैं उनको पहली बार इतने नजदीक से देख रहा था. सुरेश जी का कद शायद 5.7 के जितना होगा. उनका रंग काला था. उनका शरीर काफी मोटा और बड़ा था. अब मैंने धीरे से उनकी रजाई उठाई और उनकी रजाई में घुस गया.

तभी सुरेश जी जाग गए और मुझे देख कर कहने लगे- क्या हुआ?
मैंने कहा- मुझे डर लग रहा है.
सुरेश जी बोले- ठीक है तुम मेरे पास ही सो जाओ.

सुरेश जी का मुँह मेरे तरफ और मेरा मुँह उनकी तरफ होने से मैं उनसे सटकर चिपक गया. हमारा मुँह आमने सामने होने से हमारी सांसें एक दूसरे को महसूस होने लगी. मैंने अपना हाथ उनकी बगल में से ले जाके उनकी पीठ पर रख दिया और अपना एक पैर उनके पैरों पे रख दिया. इससे उनका लंड और मेरा लंड एक दूसरे से चिपक गए.

सुरेश जी जगे ही हुए थे और मेरी सारी हरकतें देख रहे थे. तभी उन्होंने मुझे कहा- और भी डर लग रहा है क्या?

तो मैंने हां कह दिया. मेरे हां कहते ही उन्होंने अपना हाथ मेरे पीठ पर रख कर मुझे सहलाने लगे. उनकी और मेरी हरकतों से उनका लंड खड़ा होने लगा था. मुझे उनके लंड की गर्मी महसूस हो रही थी. इस कारण मेरी गांड में सिहरन सी दौड़ने लगी थी. अब मुझसे रहा नहीं गया मैंने उनके पीठ पर का अपना हाथ हटाकर उनके तने हुए लंड पर रख दिया. मैंने उनके लंड को उनके लुंगी के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया था. उन्होंने अन्दर कुछ भी नहीं पहना था. उनका हाथ जो मेरे पीठ पर था.. वो अब मेरी गांड पर आ गया और उन्होंने मेरे अंडरवियर के ऊपर से ही गांड को सहलाना शुरू कर दिया था.

अब मैंने अगला कदम उठाने के बारे में सोचा. मैंने उनकी लुंगी के अन्दर हाथ डाल के उनका तना हुआ मोटे से लंड को पकड़ कर उसे अपने हाथ से आगे पीछे करना शुरू कर दिया ताकि लंड अपने असली रूप में आकर सलामी देने लगे. उनका हाथ भी मेरे गांड पर चल रहा था.

मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था. जब से मैंने उनके लंड का स्पर्श महसूस किया था, तब से मेरे मुँह में लंड चूसने की प्यास लग गई थी. इसलिए मैं उठ के बैठ गया और रजाई को पूरी तरह से हम दोनों के शरीर से हटा दी. मैंने सुरेश जी को सीधे हो के लेटने को कहा. सुरेश जी के सीधे लेटते ही मैं उनके पैरों के पास जाकर बैठ गया और जल्दी से उनकी लुंगी उतार दी.

सुरेश जी की लुंगी उतरते ही उनका 7 इंच काला और भयानक सा लंड किसी काले सांप की तरह बाहर आ गया. यह सब देख मेरी प्यास और बढ़ गई. मैंने देर ना करते हुए अपने मुँह में उनका लंड ले लिया और चूसने लगा. लंड मुँह में लेते ही मैं अपनी बरसों कि प्यास बुझाने में जुट गया. उनके हाथ मेरे बालों के सहला रहे थे. बहुत देर तक उनका लंड चूसने के बाद मैंने उनके लंड के सुपारे को अपने मुँह में रखा और एक हाथ से मुठ मारने लगा. कुछ ही देर में उनके गाढ़े वीर्य की पिचकारियां मेरे मुँह में गिरने लगीं. मैं लंड रस को प्रिय खीर सी समझ कर गटागट पी गया.

उनका लंड अब मुरझा चुका था लेकिन फिर भी मैं उस लंड मुँह में लेकर चूसता रहा. कुछ ही देर में उनका लंड मेरे चूसते रहने से फिर से तन गया.

लंड कड़क हुआ तो मेरी गांड कुलबुलाने लगी. इस बार मैं नीचे लेट गया और सुरेश जी को मेरे मुँह पर आकर बैठने को कहा. वो मेरे मुँह पर आकर घुटनों के बल आकर बैठ गए. उन्होंने अपना तना हुआ लंड मेरे मुँह में दे दिया.

इस बार मैंने अपना मुँह किसी छोटे होल के जैसा बना दिया ताकि उन्हें एक किसी कुंवारी चूत के जैसा महसूस हो. सुरेश जी को काफी मजा आ रहा था. वो अपनी कमर को तेजी से आगे पीछे कर रहे थे. अब उन्होंने मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़ा और तेजी से कमर को हिलाते हिलाते मेरा मुँह चुत समझ कर चोदने लगे. तभी उनका बांध टूट गया और उनके लंड ने गाढ़े वीर्य के फव्वारे फिर से मेरे मुँह में छोड़ना शुरू कर दिये. मैं उसे बड़े मजे से स्वाद लेकर पी गया.

अब सुरेश जी उठकर मेरे बगल में बैठ गए. उन्होंने मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दिया. मैं उनकी तरफ रेंगते रेंगते ही पहुंच गया और अपना मुँह खोल के उनका मुरझाया सा लंड फिर से मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया.

इस बार वो कभी मेरी पीठ को सहला रहे थे तो कभी मेरे बालों में हाथ फेरके सहला देते थे.

कुछ समय बाद उनका लंड तन कर फिर से अपने असली रूप में आ गया. तब मैंने ज्यादा वक्त न लेते हुए खड़े होके मैंने अपनी बनियान और अंडरवियर उतार दी और सुरेश जी के सामने नंगा हो कर पेट के बल लेट गया. सुरेश जी झट से समझ गए कि मैं क्या चाहता हूँ.

सुरेश जी मेरी जाँघों पे आके बैठ गए और मेरी गांड के छेद पर देर सारा थूकने लगे.. और तो और अपने उंगलियों पे थूक कर अपनी दो उंगलियां मेरी गांड के छेद में घुसा दीं और आगे पीछे करने लगे.

मेरी गांड में उनके थूक के कारण चिपचिपा सा हो गया था. अब सुरेश जी ने अपना लंड मेरी गांड के छेद पे रख दिया और दबाव देकर अन्दर डालने लगे. जैसे जैसे उनका लंड मेरी गांड में जा रहा था, वैसे वैसे मुझे दर्द होने लगा. मैं छटपटाने लगा तो सुरेश जी मेरी पीठ पर वजन रख कर मुझ पर लेट गए. सुरेश जी का वजन ज्यादा होने की वजह से अब मैं हिल भी नहीं पा रहा था. उन्होंने मुझे जकड़कर रखा था.

अब सुरेश जी ने एक जोर का धक्का मारा तो उनका लंड मेरी गांड को फाड़ता हुआ सीधा अन्दर चला गया. मेरे गले से चीख निकल गई और मेरी आंखों से आंसू निकल आये. सुरेश जी ने अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. इस बार सुरेश जी पहले से ज्यादा देर तक टिके रहे. सुरेश जी कि कमर तेजी से चलने लगी.

अचानक से सुरेश जी एकदम से अकड़ गए और मेरी सूखी गांड पर जो बरसों से लंडरस की प्यासी थी. मेरी उसी विरहा सी गांड में सुरेश जी ने अपने गाढ़े वीर्य के पानी से पिचकारी छोड़कर, मेरी गांड को पूरा भर दिया.

सुरेश जी अपने लंड के पानी की एक एक बूंद मेरे अन्दर छोड़ते रहे और तब तक मुझे पर लेटे रहे. आखिरकार उनका लंड मुरझा गया तो सुरेश जी ने मेरी गांड से अपना लंड निकाल कर बगल में लेट गए. मैं भी वैसा ही लेटा रहा.

थोड़ी ही देर बाद सुरेश जी का लंड फिर से तन कर खड़ा हो चुका था. इस सुरेश जी उठकर अपने घुटनों पे खड़े हो गए और मेरी कमर को पकड़ के मुझे डॉगी स्टायल में घोड़ी बना दिया. सुरेश जी ने अपने लंड को थूक से गीला कर रखा था. इस बार सुरेश जी ने मेरी कमर को कस के पकड़ रखा और एक जोरदार धक्का मारा तो उनका लंड फिर से मेरी गांड के जड़ तक पहुंच गया. मुझे इस बार बिल्कुल भी दर्द नहीं हुआ. अब सुरेश जी मेरी गांड हचक हचक कर पूरे जोश के साथ चोदने लगे थे.

सुरेश जी ने अब अपनी स्पीड बढ़ा दी थी. सुरेश जी का लंड मेरे गांड में किसी पिस्टन की तरह चल रहा था. पूरे बीस मिनट तक मुझे कुतिया सा समझ कर चोदा और अचानक सुरेश जी की गति बढ़ गई. तभी उन्होंने एक जोर का धक्का मारा और मेरी गांड में अपने लंड की पिचकारियों की बारिश करनी शुरू कर दी थी.

मुझसे कुछ देर तक सुरेश जी वैसे ही चिपके रहे, जैसे कोई कुत्ता किसी कुतिया से चिपका हुआ होता है. उनके लंड के पानी का एक एक कतरा मेरी गांड में निचुड़ जाने के बाद सुरेश जी ने अपना मुरझाया लंड बाहर निकाला और हम दोनों नंगे ही सो गए.

अब सुबह हो चुकी थी. सुरेश जी रात भर कामक्रीड़ा करने के वजह से गहरी निद्रा में सोये हुए थे. मेरी नींद खुली.. मैंने उठना चाहा, तो मेरी गांड थोड़ी दुख रही थी. फिर भी मुझे उसकी परवाह नहीं थी. मैं उठ के बैठ गया तो मेरे सामने सुरेश जी का सोया हुआ काला लंड दिखाई दिया. मैं झट से उनके पैरों के पास जाकर बैठ गया और उनके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.

मैं सुरेश जी का लंड चूसने में इतना खो गया कि कब उनका लंड मेरे मुँह में खड़ा हुआ और कब सुरेश जी जग कर मेरे बालों पे हाथ फेरने लगे, कुछ भी पता ही नहीं चला.
इतने मैं सुरेश जी उठ कर बैठ गए और बोले- सुबह हो गई है, अब यहां नहीं.. नीचे रूम में चलते है क्योंकि बाजू की छत पर कोई भी आ सकता है.
मैंने उनकी बात मान ली और न चाहते हुए भी मुझे उनके लंड की चुसाई बंद करके अपना मुँह उनके लंड से निकालना पड़ा.

अब हम दोनों नीचे रूम में आ गए. रूम में आते ही मैंने दरवाजे को अन्दर से लॉक कर दिया. सुरेश जी और मैं हम दोनों फिर से नंगे होके बाथरूम में चले गए. बाथरूम में जाते ही मैंने सुरेश जी का तना हुआ लंड अपने मुँह में भर लिया और अपने सिर आगे पीछे करके उनके लंड को जोरों से चूसना शुरू कर दिया. सुरेश जी भी अपनी कमर को आगे पीछे करने लगे. मेरे सिर को पकड़ के मेरे मुँह में धक्के देने लगे और उसी धक्कों के साथ मेरे मुँह में झड़ गए.

अब सुरेश जी ने मुझे खड़ा करके मेरे शरीर पर शावर का पानी डालने लगे. उन्होंने मुझे पूरी तरह से गीला किया और मुझे उलटा करके मेरी गांड को अपने सामने कर दिया. सुरेश जी ने अपने हाथ में साबुन लेकर मेरी गांड में लगाने लगे और साबुन का फैन अपनी उंगलियों से मेरी गांड में डालने लगे. ताकि गांड में चिकनाई हो जाए और उनका लंड आसानी से अन्दर चला जाए.

यह सब चल ही रहा था, तब तक उनका लंड खड़ा हो गया. अब सुरेश जी ने मुझे बाथरूम के फर्श पर पेट के बल लेटा दिया और मेरे ऊपर आकर मेरी गांड में लंड डाल के मेरी गांड मारने लगे. साबुन की चिकनाई कि वजह से मेरी गांड में उनका लंड फचक फचक की आवाज से तेजी से अन्दर बाहर हो रहा था. सुरेश जी के तेजी के कारण उनके लंड ने पानी जल्द ही छोड़ दिया और वो निढाल हो कर मेरे ऊपर ही लेट गए. कुछ देर बाद सुरेश जी मेरे ऊपर से उठ गए और खड़े होके नहाने लगे.

सुरेश जी पूरी तरह से नहा चुके थे. उनके नहाते ही मैं उठकर बैठ गया और उनके मुरझाये हुए काले लंड मुँह में भर लिया और चुसाई शुरू कर दी. सुरेश जी ने मेरी तरफ देखा लेकिन मैंने उनकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया.

मेरे चूसते रहने के कारण उनका लंड तन कर खड़ा हो गया तो सुरेश जी ने मुझे झट से डॉगी स्टायल में कर दिया और अपना लंड मेरी गांड में डालके पेलने लगे. मेरी गांड में इसी तरह लंड पेलने के बाद सुरेश जी झड़ने लगे तो उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल लिया, उससे उनके लंड का पानी मेरी गांड पर भी आकर गिर गया.

इसके बाद सुरेश जी ने अपना लंड नल के पानी से धोया और बाथरूम से बाहर आ गए. मैं तो वैसे ही बाहर आ गया तो देखा कि सुरेश जी ऑफिस के लिए तैयार हो रहे थे.

मैं उन्हें फिर से दबोचने के मूड में था.

तभी सुरेश जी मुझसे बोले- ऑफिस जाने का इरादा है या नहीं.
मैंने उनसे कहा- इरादे तो बहुत हैं.. आपके साथ सब कुछ करने के.
सुरेश जी हंस कर बोले- हां वो तो ठीक है.. लेकिन अभी तुम जरा घड़ी देखो.. पूरे 12 बज चुके है. ऑफिस के लिए बहुत ही देर हो चुकी है. आज तो हाफ डे ही समझो. आज सुबह का नाश्ता और खाना भी हमने नहीं खाया.

यह बात सुनकर मैं हंसने लगा और सुरेश जी से कहा- कल रात से सुबह तक जो काम हम कर रहे थे, वही जिंदगी में असली काम है. यह काम तो कभी कभार ही मिल जाता है. वरना ऑफिस का काम तो हर वक्त है ही.. और आप खाने की बात कर रहे हैं, तो मैं आपको बता दूँ कि कल रात से सुबह तक आपके लंड का पानी पीकर मेरी प्यास तो अपने बुझा दी और आपने मेरी गांड में पानी छोड़कर मेरी भूख भी मिटा दी है.
यह मेरी बात सुनकर सुरेश जी जोर जोर से हंसते हंसते ऑफिस चले गए.

उस दिन सुरेश जी के ऑफिस जाते ही बाहर जाकर थोड़ा खाना खा लिया और पूरे दिन सोता रहा. मैंने उस दिन ऑफिस से छुट्टी ले ली. आज पहली बार मुझे मेरी गांड को राहत मिल रही थी. इसके वजह से मैं चैन की नींद सो पाया.

शाम के 5 बजे मेरी आँख खुली. तब मैं नहाकर और तैयार होके नंगा ही सुरेश जी का इंतजार करने लगा. सुरेश जी को याद कर करके उनके मोटे काले लंड के बारे में सोचके मेरी मुँह में पानी आने लगा.

शाम के करीब 7 बजे सुरेश जी आये. उनके बेल बजाते ही मैंने दरवाजा खोला तो मुझे ऐसी अवस्था में देख हंसने लगे और बोले- तुम तो पहले से ही तैयार हो.

पहले तो सुरेश जी फ्रेश हुए और फिर मैंने उनका 2 बार लंड चूस कर पानी पी गया. फिर रात को खाना खाने के बाद उन्होंने मेरी 3 बार अलग अलग आसन में मेरी गांड मारी और हर बार अपना पानी मेरी गांड में छोड़ते रहे.

फिर क्या था.. हर सुबह बाथरूम में मेरी गांड मारते और ऑफिस जाते वक्त लंड का पानी मुझे पिलाते. और हर रात को मैं उनका लंड चूसके पानी पी जाता और अपनी गांड मरवाता था.

यह सब डेढ़ साल के आसपास चलता रहा था कि उनके 2 साल पूरे हो गए और सुरेश जी हमेशा के लिए नासिक चले गए. जाते वक्त उन्होंने मुझे कभी भी उनसे न मिलने और फोन भी नहीं करने को कहा. हमारे बीच सब कुछ खतम कर के सुरेश जी चले गए. मैंने भी उन्हें जाने दिया क्योंकि कम से कम इन डेढ़ सालों में तो मुझे उनकी वजह से खुशी तो मिल पाई. मैं भी उनसे सारे नाते तोड़ कर अपनी जिन्दगी जीने लगा हूँ.

आज भी मुझे एक ऐसे आदमी की तलाश है.. जिन्हें मैं अपना शरीर सौंप कर उनके लंड की और मेरी गांड की शान्ति पा सकूँ.

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मैं आपके मेल का इंतजार करूँगा.